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जमानत चरण पर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन अस्वीकार्य: सुप्रीम कोर्ट
जमानत चरण पर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन अस्वीकार्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि जमानत आवेदन पर विचार करते समय साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण या मूल्यांकन करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने हत्या और एससी/एसटी अधिनियम से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ द्वारा आरोपियों को दी गई जमानत को रद्द कर दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने मुकदमे से पहले ही मेडिकल साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर टिप्पणी कर गलती की।मेडिकल साक्ष्य पर टिप्पणी अनुचितसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घटना की तारीख और मृतक की मृत्यु के बीच...

3-Year Practice Rule का महिलाओं की न्यायिक सेवा में प्रवेश पर असर देखा जाना चाहिए: जस्टिस भुइयां
3-Year Practice Rule का महिलाओं की न्यायिक सेवा में प्रवेश पर असर देखा जाना चाहिए: जस्टिस भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा है कि न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए तीन वर्ष की वकालत का अनुभव अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने लंबे समय से व्यक्त की जा रही चिंताओं को दूर किया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इसका दूसरा पहलू भी है — विशेषकर महिला अभ्यर्थियों के लिए, जिन्हें सामाजिक दबावों के कारण करियर में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।जस्टिस भुइयां तेलंगाना जजेस एसोसिएशन और तेलंगाना स्टेट ज्यूडिशियल अकादमी द्वारा आयोजित 'संवैधानिक नैतिकता और जिला न्यायपालिका की...

कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार, जबकि पहले बनाए शारीरिक संबंध और दिए बार-बार आश्वासन BNS की धारा 69 लागू: दिल्ली हाइकोर्ट
कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार, जबकि पहले बनाए शारीरिक संबंध और दिए बार-बार आश्वासन BNS की धारा 69 लागू: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति शादी का बार-बार आश्वासन देकर शारीरिक संबंध स्थापित करता है और बाद में कुंडली न मिलने का हवाला देकर विवाह से इनकार कर देता है तो यह भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) की धारा 69 के तहत अपराध के दायरे में आ सकता है। यह धारा छल या झूठे आश्वासन के माध्यम से स्थापित यौन संबंध को दंडनीय ठहराती है।जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने ऐसे ही एक मामले में आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज की। आरोपी के विरुद्ध दुष्कर्म से संबंधित प्रावधानों के साथ-साथ BNS की धारा 69 के तहत...

केरल सौहार्दपूर्ण राज्य, फिल्म छवि खराब करती है : हाइकोर्ट ने केरल स्टोरी 2 पर केंद्र से मांगा जवाब
केरल सौहार्दपूर्ण राज्य, फिल्म छवि खराब करती है : हाइकोर्ट ने 'केरल स्टोरी 2' पर केंद्र से मांगा जवाब

केरल हाइकोर्ट ने फिल्म केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड को दी गई प्रमाणन प्रमाणपत्र को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से आज ही अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।अदालत ने यह भी पूछा कि क्या निर्णय से पहले फिल्म का विशेष प्रदर्शन न्यायालय के समक्ष कराया जा सकता है।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने फिल्म के कुछ संवादों का लिप्यंतरण देखने के बाद मौखिक रूप से टिप्पणी की,“केरल पूरी तरह सौहार्द में रहता है। लेकिन आपने यह दिखाया कि ऐसी घटनाएं पूरे केरल में हो रही हैं। यह एक गलत संकेत देता है और...

साथी चुनने का अधिकार संवैधानिक, अंतरधार्मिक संबंधों पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
साथी चुनने का अधिकार संवैधानिक, अंतरधार्मिक संबंधों पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद ने अंतरधार्मिक जोड़ों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 अंतरधार्मिक विवाह या सहजीवन संबंधों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता।अदालत ने स्पष्ट किया कि जीवनसाथी चुनने का अधिकार और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत संरक्षित है।जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा,“किसी व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ चाहे वह किसी भी धर्म का हो, रहने का अधिकार जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है।...

सुप्रीम कोर्ट ने “नव केरल नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम” पर हाईकोर्ट की रोक पर लगाया अंतरिम स्थगन
सुप्रीम कोर्ट ने “नव केरल नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम” पर हाईकोर्ट की रोक पर लगाया अंतरिम स्थगन

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को “नव केरल नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम” (Nava Kerala Citizens Response Program) लागू करने से रोक दिया गया था। यह कार्यक्रम सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने और नागरिकों से प्रतिक्रिया (फीडबैक) लेने के उद्देश्य से बनाया गया था।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।...

लंबित आपराधिक मामला मात्र से अयोग्यता नहीं, विज्ञापन की शर्तों का कड़ाई से पालन अनिवार्य: पटना हाईकोर्ट
लंबित आपराधिक मामला मात्र से अयोग्यता नहीं, विज्ञापन की शर्तों का कड़ाई से पालन अनिवार्य: पटना हाईकोर्ट

पटना हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी के विरुद्ध आपराधिक मामला लंबित है लेकिन आवेदन की तिथि तक उसमें आरोप तय नहीं हुए हैं तो मात्र इस आधार पर उसे पेट्रोलियम डीलरशिप के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि विज्ञापन में स्पष्ट रूप से ऐसी अयोग्यता का प्रावधान न हो।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया का संचालन विज्ञापन से होता है। आवेदन प्रपत्र के आधार पर उसमें विस्तार या संशोधन नहीं किया जा सकता।यह निर्णय जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की...

अदालतों को अप्रबंधनीय सामान्य निर्देश जारी नहीं करने चाहिए: मॉब लिंचिंग पर 2018 के फैसले के खिलाफ अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
अदालतों को अप्रबंधनीय सामान्य निर्देश जारी नहीं करने चाहिए: मॉब लिंचिंग पर 2018 के फैसले के खिलाफ अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने उस अवमानना याचिका पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें राज्यों द्वारा 2018 के 'तहसीन पूनावाला बनाम भारत संघ' फैसले में जारी निर्देशों का पालन न करने का आरोप लगाया गया था।उस फैसले में भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा और नफरती अपराधों को रोकने के लिए व्यापक निर्देश दिए गए।चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच समस्त केरल जमीयत-उल-उलेमा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।चीफ जस्टिस ने याचिका पर विचार करने के प्रति अनिच्छा जताते हुए टिप्पणी की कि पहले जारी किए गए...

रिश्वत की मांग और स्वीकारोक्ति के बिना भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता: कर्नाटक हाइकोर्ट ने दोहराया सिद्धांत
रिश्वत की मांग और स्वीकारोक्ति के बिना भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता: कर्नाटक हाइकोर्ट ने दोहराया सिद्धांत

कर्नाटक हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी लोक सेवक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला तभी बनता है, जब रिश्वत की मांग और स्वीकारोक्ति दोनों के ठोस प्रमाण हों। केवल मांग या केवल स्वीकारोक्ति के आधार पर अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा कि धारा 7 का मूल तत्व ही मांग और स्वीकार है।उन्होंने कहा," सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के समेकित अध्ययन से स्पष्ट है कि धारा 7 की आत्मा मांग और स्वीकारोक्ति है। यदि मांग है पर स्वीकार नहीं तो अपराध...

केवल बंगाल के जजों से 80 दिन लगेंगे : सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा व झारखंड के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती को दी अनुमति
केवल बंगाल के जजों से 80 दिन लगेंगे : सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा व झारखंड के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती को दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनर्विचार प्रक्रिया (SIR) के तहत दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि केवल पश्चिम बंगाल के उपलब्ध जजों के भरोसे समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश पारित किया।सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने 22 फरवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पत्र पढ़कर सुनाया, जिसमें बताया गया कि...

गुरुओं को ईश्वर मानने वालों को मूर्ख कहने वाले ही असली मूर्ख और बर्बर : जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन
गुरुओं को ईश्वर मानने वालों को मूर्ख कहने वाले ही असली मूर्ख और बर्बर : जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन

मद्रास हाइकोर्ट जज जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि जो लोग गुरुओं को ईश्वर के समान मानने वालों को मूर्ख, अयोग्य और बर्बर कहते हैं, वही वास्तव में अयोग्य, मूर्ख और बर्बर हैं।जस्टिस स्वामीनाथन ने यह टिप्पणी होसुर सत्संग द्वारा आयोजित गुरु वंदनम् उत्सव में तमिल भाषा में दिए गए संबोधन के दौरान की।उन्होंने कहा,“तमिलनाडु में कुछ तर्कवादी हमें अयोग्य, मूर्ख और बर्बर कहते हैं, क्योंकि हम गुरु को भगवान के समान मानते हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि ऐसा कहने वाले ही असली अयोग्य,...

UP SIR : सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ DEO से अकबर नगर के शिफ्ट किए गए लोगों की शिकायतों की जांच करने को कहा
UP SIR : सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ DEO से अकबर नगर के शिफ्ट किए गए लोगों की शिकायतों की जांच करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर से अकबर नगर के पुराने लोगों की शिकायतों की जांच करने को कहा, जिन्हें उनके घर गिराए जाने के बाद शिफ्ट किया गया था। कोर्ट ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस में गिनती के फॉर्म नहीं दिए गए और बूथ लेवल ऑफिसर्स ने उनसे फॉर्म 6 भरकर नए वोटर के तौर पर रजिस्टर करने को कहा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने अकबर नगर के 91 पुराने लोगों की रिट पिटीशन पर सुनवाई करने से मना किया और...

Anil Deshmukh
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख केस में वकील के खिलाफ ED की शिकायत खारिज की, क्राइम से कोई कमाई नहीं मिली

बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोर देवानी के खिलाफ एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) का केस खारिज किया। किशोर देवानी पेशे से वकील हैं और राज्य के पूर्व होम मिनिस्टर अनिल देशमुख के करीबी बताए जाते हैं। उन पर करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में केस दर्ज है।सिंगल जज जस्टिस अश्विन भोबे ने इस प्रोसेस और देवानी के खिलाफ ED केस को भी खारिज किया। देवानी पर आरोप है कि उन्होंने मुंबई के अलग-अलग बार मालिकों से हर महीने 100 करोड़ रुपये गैर-कानूनी तरीके से कमाए गए पैसे को लॉन्ड्रिंग करने में देशमुख और उनके परिवार की...

एम्प्लॉईज़ कम्पनसेशन एक्ट के तहत क्लेम के लिए ड्राइवर के तौर पर शॉर्ट-टर्म एंप्लॉयमेंट भी काफी: बॉम्बे हाईकोर्ट
एम्प्लॉईज़ कम्पनसेशन एक्ट के तहत क्लेम के लिए ड्राइवर के तौर पर शॉर्ट-टर्म एंप्लॉयमेंट भी काफी: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी व्यक्ति को शॉर्ट-टर्म के लिए भी हायर करने से एम्प्लॉईज़ कम्पनसेशन एक्ट के तहत 'एम्प्लॉई-एम्प्लॉयर' का रिश्ता बन जाएगा।इसलिए सिंगल-जज जस्टिस जितेंद्र जैन ने एक लेबर कमिश्नर को तिलकधारी गुप्ता नाम के एक व्यक्ति के परिवार को कम्पनसेशन देने का आदेश दिया, जिसे जवाहर गुप्ता ने दो महीने के लिए 'हायर' किया ताकि वह ठाणे से राजस्थान तक अपनी कार चला सके, जहां जवाहर के भाई का अंतिम संस्कार होना था। राजस्थान जाते समय, यानी 29 मार्च, 2009 को कार का एक्सीडेंट हो गया और...

लंबे समय से पेंडिंग होने के असर से बचने के लिए 40 साल पुराने एमसी मेहता केस बंद करेगा सुप्रीम कोर्ट
लंबे समय से पेंडिंग होने के असर से बचने के लिए 40 साल पुराने एमसी मेहता केस बंद करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एमसी मेहता केस बंद करने का प्रस्ताव दिया, जो 1984-85 से पेंडिंग हैं। हालांकि इन केस में उठाई गई शिकायतों को बहुत पहले ही सुलझा लिया गया। हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली में एयर पॉल्यूशन और लैंड सीलिंग के साथ-साथ ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन के एनवायरनमेंट से जुड़े मामलों पर नज़र रखने के लिए इन मामलों को पेंडिंग रखा।कोर्ट समय-समय पर इन मामलों में फाइल की गई अलग-अलग एप्लीकेशन पर सुनवाई करता रहा है, जो आज की शिकायतों से जुड़ी हैं, जो एमसी मेहता द्वारा चालीस साल पहले फाइल की गई ओरिजिनल...