समान साक्ष्य पर सह-आरोपियों के बरी होने पर NDPS Act की धारा 37 की बाधा हटेगी: गुवाहाटी हाइकोर्ट

Amir Ahmad

28 Jan 2026 1:03 PM IST

  • समान साक्ष्य पर सह-आरोपियों के बरी होने पर NDPS Act की धारा 37 की बाधा हटेगी: गुवाहाटी हाइकोर्ट

    गुवाहाटी हाइकोर्ट ने NDPS Act के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि उसी मामले में समान साक्ष्य के आधार पर सह-आरोपी बरी हो चुके हों और उन बरी होने के निष्कर्षों को अपील में चुनौती नहीं दी गई हो तो जमानत पर विचार करते समय अदालत को उन निष्कर्षों को वैध मानकर चलना होगा। ऐसे में NDPS Act की धारा 37 के तहत लगाई गई सख्त शर्तें भी संतुष्ट मानी जाएंगी।

    जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि जब तक सह-आरोपियों के बरी होने के निष्कर्ष अपील में पलटे नहीं जाते तब तक जमानत याचिका पर विचार कर रही अदालत उन निष्कर्षों की सही या गलत होने की समीक्षा नहीं कर सकती। ऐसे हालात में यह मानना तर्कसंगत होगा कि आरोपी के दोषी न होने के बारे में विश्वास करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जिससे धारा 37 की पहली शर्त पूरी हो जाती है।

    हाइकोर्ट ने दूसरी शर्त यानी जमानत पर रिहा होने के बाद समान अपराध में संलिप्त होने की आशंका पर भी विचार किया। कोर्ट ने पाया कि आरोपी के खिलाफ बिहार में एक अन्य मामला था, जिसमें वह मुकदमे का सामना करने के बाद बरी हो चुका है। ऐसे में उसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाला नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य तथ्य नहीं है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि जमानत मिलने पर आरोपी दोबारा ऐसे अपराध करेगा।

    मामले के अनुसार याचिकाकर्ता को वर्ष 2020 में NDPS Act की धारा 8(सी), 20(बी)(सी)(ii) और 29 के तहत गिरफ्तार किया गया। आरोप था कि बाईहाटा चारियाली में एक ट्रक को रोककर तलाशी लेने पर उसमें से मादक पदार्थ बरामद हुआ। शिकायत दाखिल होने के बाद याचिकाकर्ता का मामला अलग कर दिया गया। इस दौरान अन्य आरोपियों का मुकदमा चला और वे सभी बरी हो गए। वहीं याचिकाकर्ता बिहार में एक अन्य NDPS मामले में अलग से विचाराधीन था जिसमें वह बाद में बरी हो गया।

    हाइकोर्ट में जमानत याचिका दायर करते हुए याचिकाकर्ता ने सह-आरोपियों के बरी होने और लंबे समय से जेल में रहने का आधार उठाया। नारकोटिक्स विभाग ने इसका विरोध करते हुए कहा कि समानता का दावा नहीं किया जा सकता और याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ।

    दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद हाइकोर्ट ने कहा कि सह-आरोपियों के बरी होने के मद्देनज़र अन्य तर्कों के गुण-दोष पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और दो स्थानीय जमानतदारों पर रिहा करने का निर्देश दिया।

    हाइकोर्ट ने यह भी शर्त लगाई कि आरोपी मुकदमा शुरू होने पर नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहेगा और किसी भी गवाह को प्रभावित या डराने का प्रयास नहीं करेगा।

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