ईशा फाउंडेशन के गैसीफायर श्मशान घाट के खिलाफ याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- यह सिर्फ़ समुदाय के फ़ायदे के लिए
Shahadat
28 Jan 2026 11:20 AM IST

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में ईशा फ़ाउंडेशन द्वारा कलाभैरवर धगना मंडपम के निर्माण को चुनौती देने वाली एक याचिका खारिज की।
चीफ़ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की बेंच ने कहा कि तमिलनाडु ग्राम पंचायत (दफ़नाने और जलाने की जगहों का प्रावधान) नियम, 1999 में रहने की जगह या पीने के पानी के स्रोत से 90 मीटर के दायरे में श्मशान घाट के लिए लाइसेंस देने पर रोक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुसार, एकमात्र शर्त ग्राम पंचायत से लाइसेंस लेना था।
बेंच ने यह भी कहा कि गैसीफायर श्मशान घाट का निर्माण समुदाय के फ़ायदे के लिए होगा और इसे जनहित के ख़िलाफ़ नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
"अन्य सभी दलीलें स्थानीय निकायों की उपयुक्तता और प्रशासनिक विचारों से संबंधित हैं, जिसमें हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे, क्योंकि श्मशान घाट, वह भी गैसीफायर श्मशान घाट का निर्माण सिर्फ़ समुदाय के फ़ायदे के लिए है। इसे उनके हित के ख़िलाफ़ नहीं कहा जा सकता।"
कोर्ट ईशा फ़ाउंडेशन द्वारा श्मशान घाट की स्थापना को चुनौती देने वाली तीन रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इकराई बोलुवमपट्टी ग्राम पंचायत के अध्यक्ष, पंचायतों के सहायक निदेशक (ग्रामीण), और ज़िला पर्यावरण इंजीनियर कोयंबटूर दक्षिण (तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) द्वारा श्मशान घाट के लिए दी गई मंज़ूरी के आदेश को चुनौती दी गई।
मुख्य चुनौती यह थी कि श्मशान घाट की स्थापना तमिलनाडु ग्राम पंचायत (दफ़नाने और जलाने की जगहों का प्रावधान) नियम, 1999 के नियम 7 का उल्लंघन करती है, क्योंकि 90 मीटर की प्रतिबंधित दूरी के भीतर कोई भी श्मशान घाट स्थापित नहीं किया जा सकता है।
दूसरी ओर, अधिकारियों और निजी प्रतिवादियों ने कहा कि हाई कोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने जगदीश्वरी बनाम बी. बाबू नायडू मामले में इस मुद्दे पर विचार किया।
कोर्ट ने कहा कि पूर्ण पीठ के फ़ैसले के अनुसार, उस जगह को छोड़कर जो पहले से ही दफ़नाने/जलाने की जगह के रूप में रजिस्टर्ड थी, या एक नई जगह जिसके लिए नियमों के नियम 5 के अनुसार लाइसेंस प्राप्त किया गया, किसी भी शव को ऐसी जगह पर दफ़नाया या जलाया नहीं जा सकता था जो न तो रजिस्टर्ड थी और न ही जिसके लिए लाइसेंस दिया गया। इस तरह कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को खारिज कर दिया कि दफनाने/जलाने की जगह के लिए कोई अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस तरह कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
Case Title: Murugammal and Others v. State of Tamil Nadu

