भर्ती विज्ञापन में शर्त न होने पर पीजी अतिरिक्त पंजीयन के आधार पर डॉक्टरों को नहीं कर सकता खारिज: मध्यप्रदेश हाइकोर्ट
Amir Ahmad
28 Jan 2026 1:00 PM IST

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने मेडिकल ऑफिसर (ग्रेड-I) और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज किए जाने को असंवैधानिक करार देते हुए स्पष्ट किया कि भर्ती विज्ञापन में उल्लेख न की गई किसी अतिरिक्त योग्यता के आधार पर उम्मीदवारों को बाहर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकल पीठ ने मंगलवार को डॉक्टरों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह को स्वीकार करते हुए कहा कि दस्तावेज़ सत्यापन या अस्थायी परिणाम घोषित होने के बाद किसी नई योग्यता की शर्त लागू करना “खेल शुरू होने के बाद नियम बदलने” के समान है, जो निष्पक्षता, पारदर्शिता और वैध अपेक्षा के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य से संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन होता है। कुछ मामलों में यह अनुच्छेद 19(1)(ग) के अधिकार को भी प्रभावित करता है।
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ताओं को यह वैध अपेक्षा थी कि उनकी उम्मीदवारी का मूल्यांकन केवल उन्हीं पात्रता शर्तों के आधार पर किया जाएगा, जो भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेखित थीं। ऐसी अपेक्षा को किसी अप्रकाशित या बाद में जोड़ी गई शर्त के आधार पर बिना किसी बड़े सार्वजनिक हित के विफल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कट-ऑफ तिथि तक पीजी अतिरिक्त पंजीयन न होने या प्रस्तुत न करने मात्र से भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने से रोका नहीं जा सकता।
मामले में यह तथ्य सामने आया कि भर्ती विज्ञापन के अनुसार आवश्यक पात्रता में संबंधित विषय में मान्यता प्राप्त पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री और राज्य मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीयन शामिल था। विज्ञापन या किसी शुद्धिपत्र में यह शर्त नहीं थी कि अभ्यर्थी के पास कट-ऑफ तिथि तक अलग से पीजी अतिरिक्त पंजीयन प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि कई मामलों में ऑनलाइन पोर्टल पीजी परिणाम घोषित होने से पहले ही बंद हो गया, जबकि कुछ उम्मीदवारों ने पीजी डिग्री और मेडिकल काउंसिल से अनुमोदन प्राप्त कर लिया, लेकिन प्रशासनिक कारणों से अतिरिक्त पंजीयन में देरी हुई, जो उनके नियंत्रण से बाहर थी।
हाइकोर्ट ने यह भी दोहराया कि सेवा कानून में आवश्यक और वांछनीय योग्यता के बीच स्पष्ट अंतर होता है और जब तक किसी योग्यता को स्पष्ट रूप से अनिवार्य न घोषित किया जाए। उसे बाध्यकारी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल अनिवार्य शब्द का प्रयोग, बिना उसे आवश्यक योग्यता के रूप में वर्गीकृत किए अस्पष्टता पैदा करता है।
कोर्ट ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा राजपत्र अधिसूचना पर भरोसा किए जाने को भी खारिज करते हुए कहा कि पात्रता की सभी शर्तें भर्ती विज्ञापन में ही स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। उम्मीदवारों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे बाहरी स्रोतों से पात्रता की शर्तें खोजें।
हाइकोर्ट ने कहा कि दस्तावेज़ सत्यापन या अस्थायी परिणाम के बाद विज्ञापन में निहित न होने वाली शर्त के आधार पर उम्मीदवारी खारिज करना कानूनन अस्वीकार्य है। इसी आधार पर सभी याचिकाएं स्वीकार की गईं।
कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह यह सत्यापित करे कि याचिकाकर्ताओं के पास मेडिकल काउंसिल से मान्यता प्राप्त पीजी योग्यता थी या नहीं और क्या उसका परिणाम कट-ऑफ तिथि 21 अप्रैल 2025 तक घोषित हो चुका था।

