ताज़ा खबरे
निजी संपत्ति को गिराना स्पष्ट कानूनी आधार और सभी कारकों पर विचार पर आधारित होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
यह मानते हुए कि संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करने वाला विध्वंस आदेश अवैधता के स्पष्ट, ठोस और साइट-विशिष्ट सबूतों पर आधारित होना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 जनवरी) को शांतिनिकेतन में एक पूरी तरह से बनी आवासीय इमारत को गिराने के कलकत्ता हाईकोर्ट का निर्देश यह पाते हुए रद्द कर दिया कि यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सामग्री नहीं रखी गई कि निर्माण "खोई" भूमि पर किया गया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा,"निजी स्वामित्व वाली...
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने की याचिका पर विचार करने का आग्रह किया
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों से घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने के मुद्दे पर विचार करने का आग्रह किया। कोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें घरेलू कामगारों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत शामिल करने की मांग की गई, जिसे अब वेतन संहिता, 2019 से बदल दिया गया।कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देने के लिए कोई निर्देश देने से इनकार किया। हालांकि, कार्यपालिका और विधायिका के मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का हवाला दिया। कोर्ट ने इस उम्मीद के साथ जनहित याचिका...
कॉन्ट्रैक्ट लेबर से जुड़े विवादों के निपटारे का सही मंच इंडस्ट्रियल कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर के रोजगार और सेवा समाप्ति से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत गठित इंडस्ट्रियल कोर्ट/लेबर कोर्ट ही उपयुक्त मंच है।जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी Steel Authority of India Limited Vs. National Union Waterfront Workers (2001) के संविधान पीठ के फैसले पर भरोसा करते हुए की।खंडपीठ ने कहा—“कॉन्ट्रैक्ट लेबर के रोजगार और सेवा समाप्ति से जुड़े मुद्दों के निर्णय के लिए इंडस्ट्रियल कोर्ट...
बार एसोसिएशन 'नियोक्ता' नहीं, POSH Act के अनुसार इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी का गठन नहीं कर सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोल्लम बार एसोसिएशन द्वारा इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) का गठन कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 [POSH Act] के उद्देश्य और आवश्यकता के खिलाफ है।जस्टिस पी.एम. मनोज ने तर्क दिया कि एक बार एसोसिएशन एक्ट के अर्थ में 'नियोक्ता' नहीं है। इसलिए गठित ICC एक्ट के अनुसार नहीं है।उन्होंने कहा:“बार एसोसिएशन के संबंध में एकमात्र उल्लेख केरल एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट, 1980 में मिलता है। वह पूरी तरह से उन व्यक्तियों का रोल बनाए...
पुलिस थानों में सिर्फ CCTV लगाना काफी नहीं, उनका ठीक से काम करना भी ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
राजस्थान के पुलिस थानों में कार्यशील CCTV कैमरों की कमी को लेकर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) से दर्ज मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल CCTV कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका पूरी तरह कार्यशील होना भी उतना ही ज़रूरी है। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि “महज़ इंस्टॉलेशन से काम नहीं चलेगा, कैमरे सही ढंग से काम भी करने चाहिए।”जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ के समक्ष राजस्थान सरकार ने बताया कि राज्य में CCTV व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए ₹75 करोड़ का...
एजेंसी को ₹40,000, कामगारों को मिले सिर्फ ₹19,000; सेवा प्रदाता एजेंसियां सबसे बड़ी शोषक: सीजेआई सूर्यकांत
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने गुरुवार को घरेलू कामगारों के शोषण को लेकर सेवा प्रदाता एजेंसियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में ये एजेंसियां “वास्तविक शोषक” बन चुकी हैं। उन्होंने खुलासा किया कि स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने एक एजेंसी को प्रति घरेलू कामगार ₹40,000 का भुगतान किया, लेकिन संबंधित कामगारों को वास्तव में केवल ₹19,000 ही मिले।“मैंने इसे व्यक्तिगत और आधिकारिक तौर पर देखा है। सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी को ₹40,000 दिए, लेकिन वे गरीब लड़कियां केवल ₹19,000 पा रही थीं,” चीफ़ जस्टिस ने...
UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 समाज को बांट सकते हैं, भारत की एकता शिक्षण संस्थानों में दिखनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) रेगुलेशन, 2026 (UGC) को रोकते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये रेगुलेशन बहुत खतरनाक असर डाल सकते हैं और समाज को बांट सकते हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। उन्होंने केंद्र सरकार से यह देखते हुए जवाब मांगा कि रेगुलेशन की संवैधानिकता और वैधता के संबंध में 4-5 सवाल शामिल हैं।सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह (जो 2019 की PIL में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुईं, जिसके...
सुप्रीम कोर्ट का सवाल- क्या सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग सेना की मदद नहीं करेंगे?, कपिल सिब्बल ने किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने आज (29 जनवरी) लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सरकारी अस्पताल के किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से चिकित्सकीय जांच कराने की अनुमति दे दी। वांगचुक ने बार-बार पेट दर्द की शिकायत की थी। अदालत ने निर्देश दिया है कि उनकी मेडिकल जांच की रिपोर्ट सोमवार तक दाखिल की जाए।यह आदेश जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ ने पारित किया। मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका से जुड़ा है, जो डॉ. गीताांजलि आंगमो ने अपने पति सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980...
SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग (ECI) द्वारा विभिन्न राज्यों में कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया।अदालत यह जांच कर रही है कि क्या चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत, वर्तमान स्वरूप में SIR कराने की शक्ति प्राप्त है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने नवंबर 2025 से चली आ रही विस्तृत सुनवाई...
'अगर भारतीय जानकारी मांगते हैं तो क्या अमेरिकी अधिकारी सहयोग करेंगे?' : सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कंपनी के दस्तावेज़ों तक पहुंचने की याचिका पर फाइजर से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी फार्मास्युटिकल दिग्गज फाइजर की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि जब आपसी सहयोग के सिद्धांत का पालन करने की बात आती है तो क्या विदेशी अदालतें और पश्चिमी अधिकारी भारत को जानकारी देने में सहयोग करेंगे।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने फाइजर को चेन्नई स्थित सॉफ्टजेल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड से दस्तावेज़ और गवाही हासिल करने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स की अदालत...
वकीलों के व्हाट्सएप अकाउंट हैक होने के बाद SCBA ने जारी किया अलर्ट, सदस्यों से मनी ट्रांसफर न करने की अपील
वकीलों के व्हाट्सएप अकाउंट हैक किए जाने की घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने अपने सदस्यों के लिए एक तत्काल चेतावनी जारी की।एसोसिएशन ने कहा कि कुछ अज्ञात साइबर अपराधी वकीलों के मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर उनके नाम से अन्य सदस्यों से पैसे मांग रहे हैं।28 जनवरी, 2026 को जारी एक सर्कुलर में SCBA ने बताया कि अब तक कम से कम चार सदस्यों के व्हाट्सएप अकाउंट से छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है। इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह एक संगठित साइबर...
Tamil Nadu SIR | सुप्रीम कोर्ट ने 'लॉजिकल विसंगति' का हवाला देते हुए नोटिस दिए गए 1.16 करोड़ नामों को पब्लिश करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु में चुनावी लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान पब्लिश की गई 'लॉजिकल विसंगति' लिस्ट के वेरिफिकेशन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि लगभग 1.16 करोड़ लोगों को, जो ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल थे, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अधिकारियों ने लॉजिकल विसंगतियों का हवाला देते हुए और वेरिफिकेशन के लिए नोटिस दिए।असल में बेंच ने पिछले हफ्ते पश्चिम बंगाल SIR के संबंध में...
ऑनलाइन मानहानि का मुकदमा केवल वहीं चलेगा, जहां प्रतिवादी स्थित हो या जहां वास्तविक नुकसान हुआ हो: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने आईआरएस अधिकारी समीर ज्ञानदेव वानखेड़े द्वारा नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज़ Ba***ds of Bollywood के खिलाफ दायर मानहानि वाद को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऑनलाइन मानहानि का मुकदमा केवल उसी न्यायालय में दायर किया जा सकता है, जहां प्रतिवादी स्थित हो या जहां वास्तव में प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची हो।अदालत ने यह भी दोहराया कि इंटरनेट पर सामग्री की हर जगह उपलब्धता मात्र से किसी भी मंच पर मुकदमा दायर करने का असीमित अधिकार नहीं मिल जाता।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि ऑनलाइन मानहानि...
गौशाला में गायों की मौत, खुर और सींग गायब: हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने चंडीगढ़ के रायपुर कलां स्थित एक गौशाला में बड़ी संख्या में मवेशियों की संदिग्ध मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा।मीडिया रिपोर्ट्स में गौशाला में कथित क्रूरता, लापरवाही और शवों के अवैध निपटान के गंभीर आरोप सामने आए।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की पीठ ने चंडीगढ़ यूटी प्रशासन को इस संबंध में अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया।इससे पहले 16 जनवरी को जस्टिस संजय वशिष्ठ ने प्रारंभिक आदेश पारित करते हुए...
30 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 5,000 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पुलिस ASI की सज़ा बरकरार रखी
दिल्ली हाईकोर्ट ने लगभग तीन दशक पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में एक पुलिस असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) की सज़ा और दोषसिद्धि बरकरार रखी।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा की बेंच ने कहा कि गवाहों की गवाही में मामूली कमियां अवैध रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार करने के स्पष्ट सबूत को छिपा नहीं सकतीं।बेंच ने कहा,"रिकॉर्ड पर मौजूद पूरे सबूतों को पढ़ने से पता चलता है कि कमियां मामूली हैं और बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने अभियोजन पक्ष के मुख्य मामले पर कोई असर नहीं डाला।"बेंच ने बलदेव सिंह द्वारा दायर...
कन्वॉय हमले मामले में सुवेंदु अधिकारी को राहत, 19 फरवरी तक कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं होगी: राज्य सरकार का हाईकोर्ट में आश्वासन
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को कलकत्ता हाईकोर्ट से अस्थायी राहत मिली। राज्य सरकार ने बुधवार को अदालत को आश्वासन दिया कि अधिकारी के खिलाफ 19 फरवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक कोई दमनात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी।यह मामला चंद्रकोणा थाने में दर्ज एक आपराधिक केस से जुड़ा है जिसके संबंध में सुवेंदु अधिकारी ने पिछले सप्ताह हाईकोर्ट का रुख करते हुए पुलिस द्वारा संभावित दमनात्मक कार्रवाई से संरक्षण की मांग की थी।जस्टिस सुव्रत घोष की एकल पीठ के समक्ष राज्य...
ट्रेड यूनियनों ने देश की औद्योगिक वृद्धि रोकी, कई उद्योग उनके कारण बंद हुए: सीजेआई सूर्यकांत
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने गुरुवार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में औद्योगिक विकास रुकने के लिए ट्रेड यूनियनवाद काफी हद तक जिम्मेदार रहा है।उन्होंने कहा कि देश के पारंपरिक उद्योगों के बंद होने के पीछे तथाकथित “झंडा यूनियनें” बड़ी वजह रही हैं।सीजेआई सूर्यकांत ने कहा,“देश में कितनी औद्योगिक इकाइयाँ ट्रेड यूनियनों के कारण बंद हुई हैं, यह सच्चाई सामने आनी चाहिए। पारंपरिक उद्योगों का पतन इन्हीं यूनियनों की वजह से हुआ है। ये लोग काम नहीं करना चाहते। ट्रेड यूनियन के नेता देश में...
नोटरी के समक्ष दिए गए हलफनामे से विवाह विच्छेद संभव नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी विवाह को केवल नोटरी के समक्ष दिए गए हलफनामे के माध्यम से भंग नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के प्रावधानों का विधिवत पालन किए जाने का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक केवल एक नोटरीकृत हलफनामे के आधार पर तलाक का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रांजल दास ने यह टिप्पणी उस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें बारपेटा के प्रधान जज, फैमिली कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को...
दिल्ली हाईकोर्ट ने रानी कपूर के प्रिया कपूर और करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ धोखाधड़ी वाले फैमिली ट्रस्ट मामले में समन जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर द्वारा अपनी बहू प्रिया कपूर और एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ दायर एक मुकदमे में समन जारी किया।बता दें, रानी कपूर ने आरोप लगाया कि उन्होंने गैर-कानूनी तरीके से उनकी पूरी संपत्ति हड़पने के लिए एक धोखाधड़ी वाला फैमिली ट्रस्ट बनाया है।जस्टिस मिनी पुष्करणा ने प्रतिवादियों को तीस दिनों के भीतर मुकदमे में लिखित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने रानी कपूर की अंतरिम राहत मांगने वाली अर्जी पर भी नोटिस जारी...
भूमि अधिग्रहण से विस्थापितों का पुनर्वास और रोजगार का अधिकार अनुच्छेद 21 से प्रवाहित होता है: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित व्यक्तियों को पुनर्वास और रोजगार का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से स्वाभाविक रूप से जुड़ा हुआ है। इस अधिकार से मनमाने ढंग से वंचित किया जाना अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है।जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि भूमि खोने वाले व्यक्तियों को पुनर्वास नीति के अंतर्गत रोजगार दिया जाना एक अत्यंत महत्वपूर्ण अधिकार है, जिसे भूमि अधिग्रहण की तिथि पर लागू नीति के अनुसार ही परखा जाना चाहिए। बाद में कोल इंडिया...




















