गौशाला में गायों की मौत, खुर और सींग गायब: हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब

Amir Ahmad

29 Jan 2026 3:36 PM IST

  • गौशाला में गायों की मौत, खुर और सींग गायब: हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब

    पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने चंडीगढ़ के रायपुर कलां स्थित एक गौशाला में बड़ी संख्या में मवेशियों की संदिग्ध मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा।

    मीडिया रिपोर्ट्स में गौशाला में कथित क्रूरता, लापरवाही और शवों के अवैध निपटान के गंभीर आरोप सामने आए।

    चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की पीठ ने चंडीगढ़ यूटी प्रशासन को इस संबंध में अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया।

    इससे पहले 16 जनवरी को जस्टिस संजय वशिष्ठ ने प्रारंभिक आदेश पारित करते हुए कहा था कि लगभग सभी क्षेत्रीय समाचार पत्रों में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई कि चंडीगढ़ के माखन माजरा स्थित एक इंसीनरेटर प्लांट परिसर में कई गायों के शव पाए गए।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रायपुर कलां की उस गौशाला में जो कथित तौर पर नगर निगम चंडीगढ़ के नियंत्रण में है 50 से 60 गायों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि कई शव क्षत-विक्षत हालत में मिले जिनमें आंखें, खुर और सींग गायब थे, जिससे अवैध तस्करी और आपराधिक गतिविधियों की आशंका जताई गई।

    यह भी सामने आया कि रायपुर कलां स्थित कारकस डिस्पोज़ल प्लांट, जिसका उद्घाटन 12 सितंबर 2025 को 1.79 करोड़ रुपये की लागत से किया गया, बीते एक सप्ताह से अधिक समय से बंद पड़ा था जबकि वह पांच साल के वार्षिक रखरखाव अनुबंध के अंतर्गत आता है। इसके चलते बड़ी संख्या में पशु शवों का ढेर लग गया। मीडिया ने गौशाला में मवेशियों की दयनीय स्थिति को भी उजागर किया।

    16 जनवरी को प्रकाशित खबरों के अनुसार, माखन माजरा गौशाला प्रबंधन समिति की शिकायत पर मोल्ली जागरण थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत FIR दर्ज की गई।

    शिकायत में कहा गया कि उचित चारा, पीने का पानी, मेडिकल सुविधा और आश्रय के अभाव में कई मवेशियों की मौत हुई। 13 जनवरी को किए गए निरीक्षण में पाया गया कि गायें ठंड, भूख और बीमारी से पीड़ित थीं तथा वहां कोई पशु डॉक्टर या उपचार व्यवस्था मौजूद नहीं थी।

    घटना के बाद नगर निगम चंडीगढ़ ने रायपुर कलां के एक मेडिकल अधिकारी स्वास्थ्य और एक इंस्पेक्टर, कैटल पाउंड को निलंबित कर दिया, जबकि संविदा पर कार्यरत पशु डॉक्टर, सेनेटरी इंस्पेक्टर, सुपरवाइज़र और मल्टी टास्किंग स्टाफ की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इसके अलावा, चंडीगढ़ के अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए।

    पॉलीथिन कचरे के पहलू पर ध्यान दिलाते हुए हाईकोर्ट ने 'चंडीगढ़ भास्कर' में प्रकाशित एक रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें बताया गया कि नौ गायों के पोस्टमॉर्टम में से कम से कम सात मामलों में पेट के अंदर पॉलीथिन बैग और प्लास्टिक कचरा पाया गया, जिसे मृत्यु का प्रारंभिक कारण माना गया।

    जस्टिस वशिष्ठ ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि चंडीगढ़ में पॉलीथिन के उपयोग पर प्रतिबंध होने के बावजूद संबंधित प्राधिकरण इसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं, जिसके कारण खुलेआम पॉलीथिन का इस्तेमाल हो रहा है और आवारा पशु उसे खा रहे हैं।

    अदालत ने टिप्पणी की कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने आंख मूंदे रखी, जिससे अनुशासन का माहौल नहीं बन पाया, जबकि चंडीगढ़ को शिक्षित और जिम्मेदार नागरिकों का शहर माना जाता है। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी असाधारण अधिकारिता का प्रयोग करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत करने और इसे मुख्य जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

    अदालत ने रायपुर कलां गौशाला, भारत सरकार के स्वास्थ्य और पर्यावरण मंत्रालयों के सचिवों, चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के डिप्टी कमिश्नर तथा नगर निगम चंडीगढ़ के आयुक्त को नोटिस जारी किए।

    मामले की अगली सुनवाई अब 9 मार्च को होगी।

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