कन्वॉय हमले मामले में सुवेंदु अधिकारी को राहत, 19 फरवरी तक कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं होगी: राज्य सरकार का हाईकोर्ट में आश्वासन
Amir Ahmad
29 Jan 2026 3:24 PM IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को कलकत्ता हाईकोर्ट से अस्थायी राहत मिली। राज्य सरकार ने बुधवार को अदालत को आश्वासन दिया कि अधिकारी के खिलाफ 19 फरवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक कोई दमनात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह मामला चंद्रकोणा थाने में दर्ज एक आपराधिक केस से जुड़ा है जिसके संबंध में सुवेंदु अधिकारी ने पिछले सप्ताह हाईकोर्ट का रुख करते हुए पुलिस द्वारा संभावित दमनात्मक कार्रवाई से संरक्षण की मांग की थी।
जस्टिस सुव्रत घोष की एकल पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से यह कहा गया कि अब तक अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और अगली सुनवाई तक भी कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।
अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए यह भी मौखिक टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता की आशंकाओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी के लिए सूचीबद्ध कर दी गई।
याचिका में सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि 10 जनवरी 2026 को उनके काफिले पर हमला किया गया। उनके अनुसार अराजक तत्वों ने उनकी गाड़ी पर केरोसिन डालकर आग लगाने की कोशिश की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और वह केवल अपने निजी सुरक्षा कर्मियों की तत्परता के कारण सुरक्षित बच सके।
राज्य सरकार की ओर से समय मांगे जाने से पहले, सुवेंदु अधिकारी के वकील ने अदालत को बताया कि दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल होने और मई 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री को हराने के बाद से उनके मुवक्किल के खिलाफ लगभग 47 से 48 FIR दर्ज की जा चुकी हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला कोई तात्कालिक विवाद नहीं, बल्कि वर्ष 2021 से जारी कथित संस्थागत उत्पीड़न की एक कड़ी है।
कन्वॉय हमले के संदर्भ में वकील ने यह भी कहा कि यह घटना मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए कथित झूठे आरोपों को लेकर 9 जनवरी को कानूनी नोटिस भेजे जाने के ठीक अगले दिन हुई।
उन्होंने बताया कि 10 जनवरी की शाम करीब 7:30 बजे कुछ लोगों ने अधिकारी की गाड़ी को घेर लिया और उस पर केरोसिन डालने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उल्टा सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ ही “क्रॉस-एफआईआर” दर्ज कर ली।
इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से आग्रह किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
हाईकोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार के आश्वासन को दर्ज करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए 19 फरवरी को सूचीबद्ध किया।

