ट्रेड यूनियनों ने देश की औद्योगिक वृद्धि रोकी, कई उद्योग उनके कारण बंद हुए: सीजेआई सूर्यकांत
Amir Ahmad
29 Jan 2026 2:53 PM IST

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने गुरुवार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में औद्योगिक विकास रुकने के लिए ट्रेड यूनियनवाद काफी हद तक जिम्मेदार रहा है।
उन्होंने कहा कि देश के पारंपरिक उद्योगों के बंद होने के पीछे तथाकथित “झंडा यूनियनें” बड़ी वजह रही हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा,
“देश में कितनी औद्योगिक इकाइयाँ ट्रेड यूनियनों के कारण बंद हुई हैं, यह सच्चाई सामने आनी चाहिए। पारंपरिक उद्योगों का पतन इन्हीं यूनियनों की वजह से हुआ है। ये लोग काम नहीं करना चाहते। ट्रेड यूनियन के नेता देश में औद्योगिक विकास रोकने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। शोषण जरूर होता है, लेकिन उससे निपटने के और भी तरीके हैं। लोगों को उनके व्यक्तिगत अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए था, उन्हें अधिक कुशल बनाया जाना चाहिए और कई अन्य सुधार किए जाने चाहिए।”
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ घरेलू कामगारों के कल्याण से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
यह याचिका पेन थोज़िलारगल संगम और अन्य ट्रेड यूनियनों द्वारा दायर की गई, जिसमें घरेलू कामगारों को न्यूनतम वेतन अधिसूचना के दायरे में लाने सहित कई कल्याणकारी उपायों की मांग की गई।
मामले की शुरुआत में ही सीजेआई ने याचिका पर सुनवाई को लेकर अनिच्छा जताते हुए कहा कि यदि इस तरह की मांगें स्वीकार की गईं तो “हर घर मुकदमेबाजी में उलझ जाएगा।”
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि सिंगापुर जैसे देशों में घरेलू कामगारों की नियुक्ति पंजीकरण के बिना नहीं हो सकती और वहां साप्ताहिक अवकाश, न्यूनतम वेतन जैसी शर्तें अनिवार्य हैं।
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुधारों की अत्यधिक चिंता कभी-कभी अनचाहे परिणाम भी पैदा कर सकती है, जिससे शोषण के नए रूप सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि न्यूनतम वेतन तय कर दिया गया तो रोजगार की मांग और आपूर्ति के संतुलन पर असर पड़ेगा और लोग घरेलू कामगार रखना ही बंद कर देंगे, जिससे और अधिक कठिनाइयाँ पैदा होंगी।
जब रामचंद्रन ने कहा कि सामूहिक सौदेबाजी कारगर होती है और याचिकाकर्ता कोई बाहरी तत्व नहीं बल्कि पंजीकृत ट्रेड यूनियन हैं तो सीजेआई ने ट्रेड यूनियनों की भूमिका पर अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी दोहराई। इस पर रामचंद्रन ने अदालत से सामान्यीकरण न करने का अनुरोध किया।
सीजेआई ने आगे कहा कि घरेलू कामगारों का असली शोषण रोजगार एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में एजेंसियों का वर्चस्व हो गया और यही संस्थाएं वास्तविक शोषक हैं।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने एक एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों को 40,000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से रखा तो संबंधित कामगारों को वास्तव में केवल 19,000 रुपये ही मिल रहे थे।
सीजेआई ने कहा कि जब घरेलू कामगार और नियोक्ता के बीच भरोसा टूटता है तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम होते हैं।
उन्होंने कहा कि देश में लाखों परिवार घरेलू कामगारों को परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं, उनके साथ रहते हैं और वही भोजन साझा करते हैं, क्योंकि उनके बीच भरोसे का रिश्ता होता है। एजेंसियों के माध्यम से नियुक्ति होने पर यह मानवीय संबंध समाप्त हो जाता है, जिससे गंभीर अपराधों की संभावना भी बढ़ सकती है।
न्यूनतम वेतन लागू किए जाने को लेकर सीजेआई ने यह भी कहा कि यूनियनें हर घर को मुकदमेबाजी में घसीट देंगी।
वहीं, राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि अपर्याप्त वेतन पर घरेलू कामगारों से काम लेना 'बेगार' या बंधुआ मजदूरी के समान है, जो सुप्रीम कोर्ट के बंदुआ मुक्ति मोर्चा मामले के फैसले के विपरीत है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 का उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ राज्यों ने घरेलू कामगारों को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाया है, जबकि कई राज्यों ने अब तक ऐसा नहीं किया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि ऐसे राज्यों से जवाब तलब किया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने जस्टिस सूर्यकांत द्वारा 2025 में दिए गए अजय मलिक बनाम उत्तराखंड राज्य मामले के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें घरेलू कामगारों के कल्याण के लिए कानून बनाने की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया गया।
हालांकि, केंद्र सरकार ने यह कहते हुए जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी थी कि इस विषय पर कानून बनाना राज्यों का विषय है।
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि मांगी गई राहतें कानून बनाने के निर्देश से जुड़ी हैं, जो न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं।
खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए राज्यों से आग्रह किया कि वे घरेलू कामगारों की समस्याओं और शिकायतों पर गंभीरता से विचार करें।

