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BREAKING| न्यायिक सेवा में शामिल होने के लिए 3 वर्ष के प्रैक्टिस नियम से सुप्रीम कोर्ट चिंतित, कहा- महिलाएं होंगी प्रभावित
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को न्यायिक सेवा की प्रवेश स्तर की नियुक्तियों के लिए अनिवार्य 3 वर्ष की वकालत प्रैक्टिस की शर्त पर मौखिक रूप से कुछ चिंताएं व्यक्त कीं, विशेष रूप से महिला अभ्यर्थियों पर इसके प्रभाव को लेकर।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस ए.जी. मसीह की खंडपीठ पिछले वर्ष के उस फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 3 वर्ष की प्रैक्टिस की शर्त को बहाल किया गया था।चीफ़ जस्टिस ने कहा कि इस नियम से महिला अभ्यर्थियों में चिंता पैदा हुई है।...
कोयंबटूर श्मशान भूमि विवाद में समझौते की संभावना तलाशे ईशा फाउंडेशन: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आज ईशा फाउंडेशन से कोयंबटूर के बाहरी इलाके में स्थापित उसके 'कायंथा स्थानम्' (श्मशान) से जुड़े भूमि विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने की संभावना तलाशने को कहा।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टीस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ कोयंबटूर के एक निवासी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अपने घर के पास फाउंडेशन द्वारा श्मशान बनाए जाने पर आपत्ति जताई है।याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील दी कि स्थानीय नियमों के अनुसार ग्राम पंचायत की अनुमति के बिना...
नाबालिग की अभिरक्षा को लेकर माता-पिता के बीच विवाद में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका ग्राह्य नहीं: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने एक पिता द्वारा अपनी नाबालिग पुत्री की पेशी और अभिरक्षा की मांग को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि माता-पिता के बीच अभिरक्षा विवाद की स्थिति में उचित उपाय सक्षम अभिभावक न्यायालय के समक्ष ही उपलब्ध है।चीफ जस्टिस जी. एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने कहा कि जब नाबालिग का ठिकाना स्पष्ट रूप से ज्ञात हो, तो उस स्थान पर अधिकार क्षेत्र रखने वाले न्यायालय से ही राहत मांगी जानी चाहिए।याचिकाकर्ता -पिता ने बंदी...
स्कूल परिसर में तंबाकू बेचने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी बरकरार, हाइकोर्ट ने खारिज की याचिका
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल के एक चपरासी की सेवा समाप्ति को सही ठहराते हुए उसकी याचिका खारिज की।कर्मचारी पर स्कूल परिसर के भीतर तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी और गुटखा बेचने का आरोप है।जस्टिस आनंद सिंह बहारावत की पीठ ने कहा,“याचिकाकर्ता की सेवाएं गंभीर आरोपों के कारण समाप्त की गईं। राज्य और केंद्र सरकार ने स्कूल परिसरों के निर्धारित क्षेत्रों में ऐसे पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश और नियम बनाए हैं।”मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने दलील दी कि 28 वर्ष की सेवा के बाद उसे...
एमपी मेडिकल एडमिशन नियम 2018 | PG अभ्यर्थी ने NRI कोटा को स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक बढ़ाने की मांग को लेकर खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
PG मेडिकल कोर्स में NRI कोटा के तहत एडमिशन चाहने वाले एक अभ्यर्थी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एम.पी. मेडिकल एजुकेशन एडमिशन रूल्स, 2018 के नियम 14(2) की वैधता को चुनौती दी।याचिका विशेष रूप से उस प्रावधान के खिलाफ है, जिसके तहत तीसरे काउंसलिंग राउंड के बाद रिक्त NRI सीटों को अन्य श्रेणी में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई।याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसी सीटों को स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक NRI अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की...
सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका: केरल हाईकोर्ट ने Kerala Story 2 की रिलीज पर लगाई रोक, CBFC को पुनः परीक्षण का निर्देश
केरल हाईकोर्ट ने फिल्म Kerala Story 2: Goes Beyond की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाई। बता दें, यह फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी।अदालत ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को फिल्म का पुनः परीक्षण करने का निर्देश दिया।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने अपने आदेश में कहा कि टीज़र की सामग्री, जिसे फिल्म का हिस्सा माना गया, प्रथम दृष्टया सार्वजनिक धारणा को प्रभावित करने और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की क्षमता रखती है।अदालत ने कहा कि ऐसी सामग्री का प्रसार जो कानून-व्यवस्था या सामाजिक...
राजस्थान बार काउंसिल चुनाव: एडवोकेट जनरल की निगरानी पर BCI का नोटिस 'हस्तक्षेप'—इलेक्शन कमेटी
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (BCR) के चुनाव की निगरानी कर रही हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी ने राज्य बार निकाय के कार्यों की निगरानी के लिए एडवोकेट जनरल की नियुक्ति पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस को “हस्तक्षेप” करार दिया है।कमेटी ने BCI के नोटिस को “अमान्य” बताते हुए BCR के कार्यवाहक सचिव को उसका जवाब न देने का निर्देश दिया।सेवानिवृत्त दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस जे.आर. मिधा की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 24 फरवरी की बैठक की कार्यवाही में कहा कि यदि वर्तमान अध्यक्ष और सदस्य...
झूठे मामलों पर रोक की मांग वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को झूठी शिकायतों, फर्जी साक्ष्यों और दुर्भावनापूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पचोली की खंडपीठ एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में निर्दोष नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा के लिए प्रशासनिक सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई...
सम्मेलनों से नहीं सुधरेगी न्याय व्यवस्था, जज और ढांचा बढ़ाना होगा: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने 23 साल से जेल में रहे हत्या के आरोपी को बरी किया
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने पत्नी और तीन बच्चों की निर्मम हत्या के आरोप में करीब 23 वर्ष जेल में बिताने वाले एक व्यक्ति को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा है। साथ ही न्यायालय ने आपराधिक न्याय प्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल सम्मेलन और बैठकों से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि जजों की संख्या, सहायक स्टाफ और आधारभूत ढांचे में वास्तविक वृद्धि की आवश्यकता है।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने अपने 10...
Unnao Custodial Death: 'फर्जी' कैंसर पर्चियों के आरोप के बीच दिल्ली हाइकोर्ट ने AIIMS से जयदीप सेंगर की स्वास्थ्य जांच कराने को कहा
दिल्ली हाइकोर्ट ने उन्नाव प्रकरण में दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मृत्यु मामले में दोषी ठहराए गए जयदीप सिंह सेंगर के स्वास्थ्य की स्वतंत्र जांच के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। जयदीप सेंगर, उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी कुलदीप सेंगर का भाई है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ जयदीप सेंगर की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने मेडिकल आधार पर सजा के अंतरिम निलंबन की मांग की।जयदीप सेंगर ने दावा किया कि वह...
NCERT किताब विवाद पर स्वतः संज्ञान: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया की भूमिका की सराहना की
न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय वाली NCERT की किताब पर स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया की सराहना करते हुए कहा कि समय पर रिपोर्टिंग न होती तो न्यायपालिका की साख को अपूरणीय क्षति हो सकती थी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई करते हुए विवादित अध्याय वाली NCERT किताब के प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। अदालत ने बाजार में उपलब्ध प्रतियों को जब्त कर सील करने का भी आदेश दिया।...
पुणे पोर्शे केस | नाबालिग चालक के पिता की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने आज पुणे के 19 मई 2024 के पोर्शे कार हादसे से जुड़े मामले में नाबालिग चालक के पिता विशाल अग्रवाल की जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया। इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी। विशाल अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने रक्त नमूनों की अदला-बदली कर साजिश रची, ताकि कार में सवार लोगों की शराब जांच रिपोर्ट “शून्य (Nil Alcohol)” दिखाई जा सके।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 3 मार्च 2026 के लिए निर्धारित की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी...
ट्रिब्यूनलीकरण से अव्यवस्था पैदा हुई, ट्रिब्यूनल बोझ बन गए: चीफ जस्टिस की कड़ी टिप्पणी
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने देश में ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली पर गंभीर असंतोष जताते हुए कहा कि ट्रिब्यूनलीकरण के नाम पर एक अव्यवस्था खड़ी कर दी गई और कई अधिकरण अब बोझ बन गए।चीफ जस्टिस ने खुलासा किया कि उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिली कि एक महत्वपूर्ण वित्तीय अधिकरण के तकनीकी सदस्य स्वयं निर्णय नहीं लिख रहे हैं बल्कि न्यायिक सदस्यों से अपने नाम से निर्णय लिखवाने का आग्रह कर रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ मामलों में निर्णय लिखने का कार्य बाहर से कराया जा रहा है, जो न्यायिक व्यवस्था में...
सेवा में बने रहे दिव्यांग सैनिकों के आश्रितों को प्राथमिकता-द्वितीय का लाभ नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि सैन्य कार्रवाई के दौरान दिव्यांग हुए किंतु सेवा से बाहर नहीं किए गए और पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले सैनिकों के आश्रितों को रक्षा कोटे में प्राथमिकता-द्वितीय का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे आश्रितों को केवल निम्न श्रेणी की प्राथमिकता में ही माना जाएगा।जस्टिस विकास महाजन ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकता-द्वितीय श्रेणी केवल उन सैनिकों के आश्रितों के लिए है, जिन्हें सैन्य सेवा से संबंधित दिव्यांगता के कारण चिकित्सीय बोर्ड की प्रक्रिया के बाद सेवा से पृथक कर दिया...
पहली पत्नी के रहते हुआ विवाह शून्य, उसकी मृत्यु के बाद भी दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन का अधिकार नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पुरुष का दूसरा विवाह उसकी पहली शादी के रहते हुआ है तो वह विवाह कानूनन शून्य माना जाएगा। ऐसी दूसरी पत्नी को सेना पेंशन नियमावली 1961 के तहत फैमिली पेंशन का अधिकार नहीं मिलेगा, भले ही बाद में पहली पत्नी का निधन हो जाए।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 11 के अनुसार, यदि विवाह के समय पति या पत्नी में से किसी की पूर्व वैध शादी विद्यमान है तो दूसरा विवाह शून्य है।यह...
खेदजनक स्थिति: ठेकेदार का 2014 से भुगतान लंबित, भिंड नगर परिषद से हाइकोर्ट ने मांगा जवाब
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने भिंड नगर परिषद द्वारा वर्ष 2014 से ठेकेदार के बकाया भुगतान नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने इस स्थिति को खेदजनक बताते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा।मामला रामकुमार मिश्रा द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने वर्ष 2014 से 2017 के बीच कराए गए कार्यों का भुगतान न किए जाने की शिकायत की।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने फरवरी, 2026 में मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जारी एक पत्र का उल्लेख किया। इस पत्र में याचिकाकर्ता के बकाया दावा...
IPC की धारा 464 | पब्लिक ऑफिस के रिकॉर्ड में ट्रेस न होने के कारण ही डॉक्यूमेंट को जाली नहीं कहा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी डॉक्यूमेंट को सिर्फ़ इसलिए 'जाली' नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह रिकॉर्ड में ट्रेस नहीं हो सकता।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा,“सिर्फ़ इसलिए कि कोई डॉक्यूमेंट जारी होने के कई सालों बाद भी रिकॉर्ड में ट्रेस नहीं हो पाता, यह नहीं कहा जा सकता कि वह डॉक्यूमेंट जाली है।” उन्होंने आगे कहा, “किसी डॉक्यूमेंट को जाली डॉक्यूमेंट तभी माना जाएगा, जब आरोप इस तरह के हों कि वह IPC की धारा 464 के तहत एक झूठा डॉक्यूमेंट है।” IPC की धारा 464 के अनुसार, जो...
मनीष सिसोदिया की 2020 चुनाव जीत को चुनौती देने वाली अपील खारिज
दिल्ली हाइकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता मनीष सिसोदिया की 2020 विधानसभा चुनाव में पटपड़गंज सीट से जीत को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करने से इनकार किया। हाइकोर्ट ने कहा कि यह अपील उसके समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है। इसे सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर किया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 116ए के तहत चुनाव याचिकाओं पर हाइकोर्ट द्वारा पारित अंतिम आदेश के विरुद्ध सीधी अपील सुप्रीम कोर्ट में की जाती है।यह...
सीनियर सिटीजन का सम्मानपूर्वक जीवन जीना संवैधानिक दायित्व: राजस्थान हाइकोर्ट ने वृद्धाश्रमों का राज्यव्यापी लेखा-परीक्षण कराने के दिए निर्देश
राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटीजन को सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अधिकार संविधान से प्राप्त है। इसी संदर्भ में हाइकोर्ट ने राज्य में संचालित 31 वृद्धाश्रमों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं का व्यापक आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह राज्य के सभी 31 वृद्धाश्रमों की स्थिति, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं, चिकित्सीय व्यवस्था और कल्याणकारी उपायों का समग्र अध्ययन...
CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण सिर्फ़ एक बार नहीं, बार-बार और लगातार मिलने वाला अधिकार: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस देने की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से है। साथ ही बेरोज़गारी, पैसे की तंगी, या दूसरी कार्रवाई के पेंडिंग होने के बहाने इससे बचा नहीं जा सकता। इसके अलावा, भरण-पोषण का कानूनी आधार इस सिद्धांत पर टिका है कि पत्नी, नाबालिग बच्चे, और डिपेंडेंट माता-पिता उस व्यक्ति के स्टेटस और साधनों के हिसाब से गुज़ारा पाने के हकदार हैं, जो कानूनी तौर पर उनका गुज़ारा करने के लिए ज़िम्मेदार है।कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का अधिकार “एक बार का इनाम” नहीं है, बल्कि एक चलता-फिरता, बार-बार...




















