सुप्रीम कोर्ट ने NDPS केस को लापरवाही से संभालने पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर और NCB IG की व्यक्तिगत पेशी का आदेश दिया
Amir Ahmad
30 Jan 2026 2:58 PM IST

नशीले पदार्थों की कमर्शियल मात्रा से जुड़े मामले में देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के डायरेक्टर और NCB गुवाहाटी के इंस्पेक्टर जनरल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब वे गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली NCB की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें एक आरोपी को जमानत दी गई, जिसके पास कथित तौर पर 1.045 किलोग्राम हेरोइन पाई गई। जमानत इस आधार पर दी गई कि ट्रायल में बेवजह देरी हुई, क्योंकि मामला 2021 का था और आठ में से किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई।
17 दिसंबर, 2025 को हुई पहली सुनवाई के बाद कोर्ट ने पहली नज़र में हाईकोर्ट के जमानत देने के फैसले को NDPS Act की धारा 37 का उल्लंघन माना और प्रतिवादी-आरोपी को तुरंत सरेंडर करने का निर्देश दिया। इसने संबंधित सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस को भी प्रतिवादी को नोटिस तामील कराने का निर्देश दिया।
जब 27 जनवरी, 2026 को मामले की सुनवाई हुई तो कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2025 को दिए गए अपने ही प्रक्रियात्मक निर्देशों का पालन न होने पर ध्यान दिया, क्योंकि सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस से कोई जवाब नहीं मिला था और याचिकाकर्ता (NCB) ने दस्ती नोटिस तामील के नतीजे दिखाने वाला कोई भी सबूत रिकॉर्ड पर नहीं रखा था।
इसके अलावा कोर्ट ने गवाहों से पूछताछ में देरी के लिए NCB से सवाल किया यह देखते हुए कि सबूत दर्ज करने में लंबी देरी जमानत के खिलाफ अभियोजन पक्ष की दलीलों को कमजोर करती है और अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के जल्द ट्रायल के दावे को मजबूत करती है। बेंच ने संकेत दिया कि जब अभियोजन पक्ष की देरी के कारण जमानत दी जाती है तो जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्य मशीनरी पर होती है क्योंकि अभियोजन पक्ष अपनी गलती का फायदा नहीं उठा सकता।
कोर्ट ने कहा,
"आठ में से किसी भी गवाह से पूछताछ क्यों नहीं की जा सकी यह रिकॉर्ड से साफ नहीं है।"
साथ ही कोर्ट ने इस याचिका को दायर करने में हुई बिना वजह की देरी पर भी ध्यान दिलाया और कहा कि जब हाईकोर्ट का जमानत देने वाला विवादित आदेश 20.04.2024 का था तो विशेष अनुमति याचिका 10.11.2025 को ही दायर की गई यानी लगभग डेढ़ साल बाद। कोर्ट जानना चाहता था कि क्या NCB या भारत सरकार के पास प्रतिकूल बेल आदेशों की निगरानी करने, खासकर NDPS मामलों में जिनमें कमर्शियल मात्रा शामिल हो, और उन्हें तुरंत चुनौती देने के लिए कोई प्रभावी सिस्टम है।
कोर्ट ने कहा,
"भले ही विवादित आदेश 20.04.2024 को पारित किया गया लेकिन विशेष अनुमति याचिका 10.11.2025 को ही दायर की गई। इस बात से अवगत होते हुए कि हमने देरी को माफ कर दिया लेकिन याचिकाकर्ता द्वारा ऐसी याचिकाओं को जल्द से जल्द दायर करने के लिए अपनाए गए तंत्र के बारे में कोई और स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।"
उपरोक्त के अनुसार मामले की अगली सुनवाई 12.02.2026 को होगी।

