दिल्ली महिला आयोग में अध्यक्ष व स्टाफ की नियुक्ति की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
Praveen Mishra
30 Jan 2026 5:33 PM IST

दिल्ली महिला आयोग (DCW) में अध्यक्ष और अन्य स्टाफ पदों की लंबे समय से रिक्तियों को भरने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। यह याचिका राजद सांसद सुधाकर सिंह ने अपने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि वैधानिक रूप से गठित और महिलाओं को संस्थागत सहायता, शिकायत निवारण, परामर्श और संकट हस्तक्षेप प्रदान करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद, दिल्ली महिला आयोग लंबे समय से न तो भौतिक रूप से सुलभ है और न ही प्रभावी रूप से कार्यरत है।
'संस्थागत पक्षाघात' की स्थिति
याचिका में आयोग की मौजूदा स्थिति को “संस्थागत पक्षाघात (institutional paralysis)” बताते हुए कहा गया है कि अध्यक्ष पद की रिक्ति के कारण आयोग में नेतृत्व, प्रशासनिक दिशा और जवाबदेही का पूर्ण अभाव है।
याचिका के अनुसार—
“आयोग के निष्क्रिय होने से उसके वैधानिक कार्यक्रमों की एक पूरी श्रृंखला ठप हो गई है, जिनमें सहयोगिनी फैमिली काउंसलिंग यूनिट, हेल्पडेस्क, रेप क्राइसिस सेल, क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर्स और अन्य संबंधित तंत्र शामिल हैं। इसका सीधा असर यह हुआ है कि संकट में फंसी महिलाओं को तत्काल संस्थागत सहायता से वंचित होना पड़ा है।”
सरकार को कई बार अवगत कराया, फिर भी कार्रवाई नहीं
याचिका में यह भी कहा गया है कि सांसद सुधाकर सिंह ने दिसंबर 2025 में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और उपराज्यपाल को विस्तृत प्रतिवेदन भेजकर दिल्ली महिला आयोग के लगातार गैर-कार्यशील रहने की स्थिति की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में की गई मांगें
जनहित याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट से निम्नलिखित निर्देश देने का आग्रह किया गया है—
दिल्ली महिला आयोग को उसके अधिसूचित परिसर में पूर्ण रूप से भौतिक और प्रशासनिक रूप से कार्यशील बनाया जाए;
अध्यक्ष सहित सभी रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए;
आयोग के सभी वैधानिक कार्यक्रमों और सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए पर्याप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और सहायक स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
याचिका में कहा गया है कि यदि आयोग को शीघ्र कार्यशील नहीं किया गया, तो दिल्ली में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी संवैधानिक एवं वैधानिक गारंटियां मात्र कागज़ी बनकर रह जाएंगी।

