सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद यूपी सरकार ने मोटर वाहन मामलों में ट्रायल समाप्त करने वाले कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा
Amir Ahmad
30 Jan 2026 3:03 PM IST

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश के कानून पर गंभीर चिंता जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज मामलों में ट्रायल समाप्त (एबेट) करने से संबंधित प्रावधान में संशोधन का प्रस्ताव रखा।
यह मामला उत्तर प्रदेश आपराधिक कानून (अपराधों का संयोजन और ट्रायल की समाप्ति) अधिनियम से जुड़ा है, जिसके तहत 31 दिसंबर 2021 तक लंबित मोटर वाहन अधिनियम के मामलों को स्वतः समाप्त करने का प्रावधान किया गया।
पिछले वर्ष नवंबर में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रावधान के लागू होने से शराब पीकर वाहन चलाने जैसे गंभीर अपराधों के मामले भी समाप्त हो जाएंगे जो जनसुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
इन चिंताओं के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया। राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट रुचिरा गोयल ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में 9 जनवरी को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने की। इस बैठक में कानून में संशोधन के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया।
सरकार ने उत्तर प्रदेश अपराधों के संयोजन अधिनियम की धारा 9 में संशोधन का प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार ऐसे मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े अपराध जिनमें अपराध का संयोजन संभव नहीं है, जिनमें अनिवार्य कारावास का प्रावधान है या जो दोहराए गए अपराध हैं, उनके मामलों में ट्रायल समाप्त नहीं किया जाएगा। केवल वे मामले जो इन तीन श्रेणियों में नहीं आते वही समाप्त माने जाएंगे।
हालांकि, मामले में नियुक्त एमिक्स क्यूरी और सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि यह संशोधन उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगा और उत्तर प्रदेश का यह अधिनियम मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत होने के कारण असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह देखना चाहता है कि प्रस्तावित संशोधन से कानून को व्यवहारिक बनाया जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह इस अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करने के प्रश्न को खुला रखेगा।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को कानून के अनुसार आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए और संशोधन लागू होने के बाद इस मुद्दे पर आगे बहस की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को संशोधन को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया।

