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राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराएँ 72 से 78: सिविल न्यायालय में अपील और वाद पर रोक
धारा 72 - सिविल न्यायालय में अपील और वाद पर रोकधारा 72 के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी विवाद को मध्यस्थता (arbitration) के माध्यम से सुलझाया गया है और उस पर राजस्व न्यायालय या अधिकारी ने निर्णय दे दिया है, तो उस निर्णय को तुरंत लागू किया जाएगा। उस निर्णय के विरुद्ध सामान्य रूप से अपील की अनुमति नहीं है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियाँ हैं जिनमें अपील संभव है: 1. यदि न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय मध्यस्थ के निर्णय से अधिक है या उसके अनुरूप नहीं है। 2. यदि यह तर्क दिया जाता है कि जो...
शिमला समझौता 1971: भारत-पाकिस्तान के बीच शांति की डोर और उसका कानूनी महत्व
2 जुलाई 1972 को भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ जिसे शिमला समझौता कहा जाता है। यह समझौता 1971 के युद्ध के बाद हुआ था जिसमें भारत की जीत हुई थी और बांग्लादेश एक नया देश बनकर उभरा था।इस समझौते का उद्देश्य यह था कि भारत और पाकिस्तान भविष्य में अपने सभी विवाद (Disputes) आपसी बातचीत (Bilateral Talks) से सुलझाएँगे और किसी तीसरे देश या संस्था की मदद नहीं लेंगे। आज यह समझौता एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि दोनों देशों के बीच हाल ही में बढ़े तनाव (Tension) के कारण इसकी वैधता (Validity) और...
राजस्थान न्यायालय शुल्क अधिनियम, 1961 की धारा 66 से 68 : Stamp के निरस्तीकरण की प्रक्रिया
राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 (Rajasthan Court Fees and Suits Valuation Act, 1961) एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न वादों और अपीलों में लगने वाले न्यायालय शुल्क को नियंत्रित करता है। इस अधिनियम के अध्याय आठ (Chapter VIII – Miscellaneous) में कुछ विविध लेकिन अत्यंत उपयोगी नियमों को शामिल किया गया है, जो न्यायालय शुल्क की वसूली की प्रक्रिया, दस्तावेजों में त्रुटि सुधार, और मुद्रांक (Stamp) के निरस्तीकरण से संबंधित हैं। यह अध्याय धारा 66, 67 और 68 में विभाजित है और इनका...
वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के समर्थन में तमिलनाडु का मूल निवासी पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं में तमिलनाडु के एक गांव के मूल निवासी ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप आवेदन दायर किया। बता दें, इस गांव पर पूरी तरह से वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा रहा है।यह आवेदन तमिलनाडु के थिरुचेंदुरई गांव के मूल निवासी श्रीमन चंद्रशेखर ने दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि थिरुचेंदुरई का पूरा गांव, जो 300 एकड़ से अधिक है, तमिलनाडु वक्फ बोर्ड द्वारा अपनी संपत्ति होने का दावा किया जा रहा है। हस्तक्षेप...
बाजार के प्रभावों की अनदेखी करते हुए कठोर नियम लागू करना भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के प्रयास में बाधा डालता है: सुप्रीम कोर्ट
ऐसे समय में जब भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने का लक्ष्य बना रहा है, सुप्रीम कोर्ट ने बाजार की वास्तविकताओं पर उनके प्रभाव को समझे बिना नियमों के कठोर प्रवर्तन के प्रति आगाह किया है, क्योंकि यह दीर्घकालिक पूंजी और प्रयासों को हतोत्साहित कर सकता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने आर्थिक विनियमन से संबंधित मामलों में प्रक्रियात्मक अनुपालन पर कठोर आग्रह के बजाय "प्रभाव-आधारित मानक" की वकालत की।प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत एक अपील पर विचार करते हुए खंडपीठ ने...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने विवाहेतर संबंध के दावे की पुष्टि के लिए महिला को आवाज का नमूना देने का आदेश दिया, कहा- मजिस्ट्रेट के पास घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अधिकार
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने हाल ही में कहा कि यदि रिकॉर्ड में पर्याप्त सामग्री है, तो किसी व्यक्ति को घरेलू हिंसा के मामलों में भी आवाज के नमूने देने के लिए बाध्य किया जा सकता है। पीठ ने ये टिप्पणियां एक पति की ओर से दायर अपील स्वीकार करते हुए कही, जिसमें उसने अपनी पत्नी को उसके 'विवाहेतर' संबंध को साबित करने के लिए आवाज का नमूना देने का निर्देश देने की मांग की थी। जस्टिस शैलेश ब्रह्मे की एकल पीठ ने एक महिला को तीन सप्ताह की अवधि के भीतर अपनी आवाज के नमूने उपलब्ध कराने का आदेश दिया, ताकि...
एमपी हाईकोर्ट ने अवैध रेत खनन के मामले में दोषी व्यक्ति की सजा कम करने से इनकार किया, पर्यावरणीय प्रभाव का दिया हवाला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का हवाला देते हुए आरोपी की सजा कम करने से इनकार कर दिया, जिसे नदी से अवैध रूप से रेत की चोरी (खनन) के लिए दोषी ठहराया गया था।जस्टिस अचल कुमार पालीवाल ने अपने आदेश में कहा,“सजा के प्रश्न पर इस न्यायालय ने याचिकाकर्ता के वकील के तर्कों पर विचार किया है। यह सही है कि याचिकाकर्ता का समान प्रकृति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उसने 1 वर्ष की सजा में से 4 माह की सजा पहले ही काट ली है। वर्तमान याचिकाकर्ता के विरुद्ध जो...
लंबे समय तक कारावास जीवन के अधिकार को कमजोर करता है, सशर्त स्वतंत्रता को MCOCA के तहत जमानत की पाबंदियों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) की धारा 21 के तहत जमानत पर लगाए गए वैधानिक प्रतिबंधों की तुलना में सशर्त स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि हालांकि किसी आरोपी को जमानत देने के लिए कानून द्वारा कठोर शर्तें तय की गई, फिर भी यदि मुकदमे में अत्यधिक देरी हो रही हो तो उस आधार पर जमानत दी जा सकती है।कोर्ट ने कहा,“विभिन्न न्यायालयों ने इस बात को स्वीकार किया कि लंबे समय तक कारावास व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के...
बच्चे की देखभाल के लिए पत्नी का नौकरी छोड़ना स्वैच्छिक काम छोड़ना नहीं, गुजारा भत्ता पाने की हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि यदि पत्नी को बच्चे की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया तो उसे केवल इसलिए भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह योग्य है और नौकरी करती है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,"...नाबालिग बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी हिरासत वाले माता-पिता पर असमान रूप से आती है, जो अक्सर पूर्णकालिक रोजगार करने की उनकी क्षमता को सीमित कर देती है, खासकर ऐसे मामलों में जहां मां के काम पर रहने के दौरान बच्चे की देखभाल करने के लिए परिवार का कोई समर्थन भी नहीं होता है। ऐसी...
रजिस्टर्ड यूजर्स की डिटेल्स/फुल अकाउंट क्रेडेंशियल मांगने के खिलाफ PhonePe की याचिका खारिज
कर्नाटक हाईकोर्ट ने डिजिटल भुगतान मध्यस्थ 'Phonepe' द्वारा दायर याचिका खारिज की दी, जिसमें आपराधिक मामले की जांच करते समय उसके रजिस्टर्ड यूजर्स और व्यापारियों के लेन-देन विवरण/पूर्ण खाता क्रेडेंशियल मांगने वाले पुलिस नोटिस को चुनौती दी गई।ऐसा करते हुए जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा,"जहां सार्वजनिक हित और आपराधिक जांच एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं, वहां डेटा की सुरक्षा का कर्तव्य अवश्य ही समाप्त हो जाना चाहिए। उपभोक्ता निजता की सुरक्षा जांच अधिकारियों द्वारा साक्ष्य सुरक्षित करने और जांच को उसके...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पंजाब सरकार से कहा, कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा को “सक्रिय बम” वाले बयान की जांच के बहाने परेशान न किया जाए
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार (13 मई) को पंजाब सरकार के अधिकारियों से कहा कि वे जांच के नाम पर कांग्रेस विधायक और राज्य के विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा को परेशान न करें। बाजवा पर एक टीवी शो में कथित तौर पर यह टिप्पणी करने के लिए एफआईआर दर्ज की गई थी कि “पंजाब में 50 बम पहुंच चुके हैं”।जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि बाजवा को “जांच के नाम पर अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए, जिसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सख्ती से किया जाएगा।”बाजवा की ओर से पेश...
'वकील को इंटरव्यू के लिए भेजना उसकी गरिमा का हनन': सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर डेजिग्नेशन के लिए अंक-आधारित प्रणाली क्यों खत्म की?
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि वरिष्ठ वकीलों के पद के लिए 100-बिंदु आधारित मूल्यांकन तंत्र, जो इंदिरा जयसिंह के 2017 और 2023 के निर्णयों (इंदिरा जयसिंह-1 और 2) में स्थापित किया गया था, पिछले साढ़े सात सालों में अपने इच्छित उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है।जस्टिस अभय ओक, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा -"पिछले साढ़े सात वर्षों के अनुभव से पता चलता है कि अंक आधारित प्रारूप के आधार पर पद के लिए आवेदन करने वाले वकीलों की योग्यता, बार में उनकी स्थिति और कानून में उनके...
अप्रैल 2007 से पहले नियुक्त निजी कॉलेज शिक्षक वेतन अनुदान के हकदार: पटना हाईकोर्ट ने राज्य को तीन महीने में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि 19 अप्रैल, 2007 से पहले नियुक्त बिहार के निजी डिग्री कॉलेजों के सभी शिक्षक राज्य सरकार से वेतन अनुदान प्राप्त करने के हकदार हैं, भले ही उनके कॉलेजों को घाटा अनुदान या प्रदर्शन-आधारित अनुदान द्वारा वित्त पोषित किया गया हो। चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, “19.04.2007 से पहले नियुक्त सभी संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षक 2015 के संशोधन अधिनियम के अंतर्गत आते हैं और राज्य द्वारा इस लाभ को केवल ऐसे डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों तक...
जिम्मेदारी से भागने की कोशिश: कोरोना योद्धा योजना के तहत मुआवज़ा न देने पर MP हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने COVID ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए पुलिसकर्मी की पत्नी को मुआवज़ा न देने पर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने मुआवज़ा न देने का आदेश रद्द करते हुए राज्य को निर्देश दिया कि वह मुख्यमंत्री COVID-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत पीड़िता को 50 लाख रुपये का मुआवज़ा 45 दिनों के भीतर प्रदान करे।जस्टिस प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने कहा,“जब पूरा देश लॉकडाउन में था और लोग घर से निकलने में डर रहे थे, तब सरकारी कर्मचारी, जैसे कि याचिकाकर्ता के पति, अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे...
झारखंड हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों पर निरीक्षण शुल्क, सिक्योरिटी डिपॉजिट लगाने वाले आरटीई संशोधन नियमों के प्रावधानों को रद्द किया
झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (प्रथम संशोधन) नियम, 2019 के खिलाफ दायर रिट याचिकाओं के एक समूह को आंशिक रूप से अनुमति दी है। न्यायालय ने निजी स्कूलों को आवेदन और निरीक्षण शुल्क का भुगतान करने और मान्यता के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट रखने की आवश्यकता वाले प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया, यह मानते हुए कि राज्य के पास बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत कानूनी अधिकार का अभाव है। हालांकि, न्यायालय ने निजी स्कूलों...
देरी को केवल उदारता के रूप में माफ नहीं किया जाना चाहिए; स्पष्टीकरण की नेकनीयती आवश्यक: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया, जिसमें एकपक्षीय डिक्री के खिलाफ अपील दायर करने में 1,116 दिन की देरी को माफ कर दिया गया, जो एक अलग कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद अंतिम हो गई।कोर्ट ने कहा कि एक वादी के लिए, जिसके खिलाफ एकपक्षीय आदेश पारित किया गया, एकपक्षीय आदेश को चुनौती देने वाली अपील दायर करना अस्वीकार्य होगा, जिसमें उन मुद्दों को फिर से उठाया गया हो, जिन्हें पहले आदेश IX नियम 13 सीपीसी (एकपक्षीय डिक्री को रद्द करने के लिए आवेदन) के तहत अलग-अलग...
Civil Rights Protection Act की धारा 3 और 4
संविधान में स्पष्ट उल्लेख कर छुआछूत को खत्म करने के लिए प्रावधान किए गए और इसके साथ ही एक आपराधिक कानून भी बनाया गया जिसका नाम 'सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955' यह कानून 8 मई 1955 को बनकर तैयार हुआ। इस कानून के अंतर्गत कुछ ऐसे कार्यों को अपराध घोषित किया गया जो छुआछूत से संबंधित है। इस प्रथक विशेष कानून को बनाए जाने का उद्देश्य छुआछूत का अंत करना तथा छुआछूत को प्रसारित करने वाले व्यक्तियों को दंडित करना था।इस अधिनियम का विस्तार संपूर्ण भारत पर है। इस समय अधिनियम संपूर्ण भारत पर विस्तारित होकर...
'मात्रा आधारित छूट प्रतिस्पर्धा विरोधी नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने CCI की अपील खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 मई) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की ओर से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एक ग्लास निर्माण कंपनी द्वारा वॉल्यूम-आधारित (लक्ष्य) छूट के उपयोग को चुनौती दी गई थी, और कहा कि ऐसी छूट प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग नहीं है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की, जहां यह आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादी- शॉट ग्लास इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (शॉट इंडिया), जो फार्मास्युटिकल पैकेजिंग में उपयोग किए जाने...
Schedule Tribe को मिलने वाला Forest Right
Schedule Tribe को वनों के उपभोग का अधिकार प्राप्त है। एक प्रकार से वनों की मालिक राज्य है परंतु उनके उपभोग का अधिकार अनुसूचित जनजातियों को प्राप्त है।इस उद्देश्य से भारत की संसद द्वारा 'अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 पारित किया गया। यह अधिनियम का विस्तार संपूर्ण भारत पर है। यह अधिनियम अनुसूचित जनजाति के वन अधिकारों को मान्यता देता है। वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत, वन निवासियों के मान्यताप्राप्त अधिकारों में,...
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल सेवा शुल्क की सीमा तय करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने आज क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (सेंट्रल गवर्नमेंट) रूल्स, 2012 के नियम 9(i) और 9(ii) को लागू करने की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। संदर्भ के लिए, 2012 के नियम 9 में यह अनिवार्य किया गया है कि अस्पताल और क्लीनिकल प्रतिष्ठान प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए दरें प्रदर्शित करें और राज्य सरकारों के परामर्श से केन्द्र द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर शुल्क लें। यह नियम लागू नहीं किया गया है क्योंकि सरकार ने अभी तक सेवा शुल्क की सीमाएँ निर्दिष्ट नहीं की हैं।जस्टिस बीआर गवई और...




















