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CAPF को संगठित समूह-ए सेवाओं के सभी लाभ प्राप्त करने का अधिकार, CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति में धीरे-धीरे कमी लाई जाए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) को संगठित समूह-ए सेवाओं (OGAS) का हिस्सा माना जाना चाहिए, न केवल गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (NFFU) प्रदान करने के उद्देश्य से, बल्कि कैडर समीक्षा सहित सभी कैडर-संबंधी मामलों के लिए भी।न्यायालय ने कहा,“अब जबकि केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि CAPFs को OGAS में शामिल किया गया तो स्वाभाविक परिणाम सामने आने चाहिए। CAPFs से संबंधित पात्र अधिकारियों को हरनंदा (सुप्रा) में इस न्यायालय के निर्णय के बाद पहले ही NFFU प्रदान किया जा चुका...
'आचरण न्यायालय की अंतरात्मा को विचलित करने वाला है': दिल्ली हाईकोर्ट ने अपील दायर करने में देरी और पुनः अपील दायर करने के लिए माफ़ी मांगने वाले आवेदनों को खारिज किया
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस अजय दिगपॉल की पीठ ने कहा कि इस मामले में अपीलकर्ताओं का आचरण न्यायालय की अंतरात्मा को बहुत परेशान करने वाला है। उन्होंने न तो प्रतिवादियों को वर्तमान अपील दायर करने के बारे में सूचित किया और न ही न्यायालय को इसके बारे में बताया, जबकि उसी मध्यस्थ निर्णय को चुनौती देने वाली प्रतिवादियों की अपीलें कई बार सूचीबद्ध और सुनी जा चुकी थीं। इन परिस्थितियों में, अपीलकर्ताओं की स्पष्ट रूप से ईमानदारी की कमी के कारण अपील दायर करने और फिर से दायर करने में देरी...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'सामाजिक-आर्थिक मानदंड' के आधार पर बोनस अंक देने वाली हरियाणा सरकार की भर्ती अधिसूचना को असंवैधानिक घोषित किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की वर्ष 2019 की अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें ग्रुप बी और सी पदों के लिए भर्ती में "सामाजिक-आर्थिक मानदंड और अनुभव" के लिए 10 बोनस अंक दिए जाने की बात कही गई थी। न्यायालय ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन माना है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मीनाक्षी आई मेहता की खंडपीठ ने कहा,"हमें लगता है कि बोनस अंक दिए जाने के कारण चयन प्रक्रिया "दूषित" हो गई है। यदि चयन प्रक्रिया से बोनस अंक हटा दिए जाते, तो योग्य उम्मीदवारों का चयन...
मेहनतकश महिला की कमाई को 'हराम का माल' कहना उसकी शिष्टता का अपमान: दिल्ली कोर्ट ने व्यक्ति को दोषी ठहराया
दिल्ली कोर्ट ने हाल ही में कहा कि 'हराम' शब्द का अर्थ है कुछ ऐसा जो गलत तरीके से या घटिया तरीके से कमाया गया हो और यह किसी भी मेहनतकश महिला की शिष्टता का अपमान करता है।तीस हजारी कोर्ट के जेएमएफसी करणबीर सिंह ने कहा,"हराम शब्द ऐसा शब्द नहीं है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ़ किसी व्यक्ति का अपमान करने के लिए किया जाता है। हराम शब्द का मतलब है कुछ ऐसा जो निषिद्ध है। गलत तरीके से/घटिया तरीके से कमाया गया। यह शब्द किसी भी मेहनतकश महिला की शिष्टता का अपमान करने के लिए बाध्य है।"न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता,...
“प्रयागराज मेडिकल माफियाओं के कब्जे में है”: स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल की स्थिति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल की दयनीय स्थिति को देखते हुए कहा कि मेडिकल माफिया और अस्पताल के कर्मचारियों के बीच सांठगांठ है, जिसके कारण गरीब मरीज सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की निजी सुविधाओं का सहारा लेने को मजबूर हैं। उपभोक्ता फोरम में स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में कार्यरत एक डॉक्टर द्वारा अपने निजी अस्पताल में मरीज का इलाज करने के मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा,“प्रयागराज मेडिकल माफियाओं के चंगुल में है।...
S.11 SARFAESI Act| DRT सुरक्षित परिसंपत्तियों पर बैंकों के बीच विवादों का फैसला नहीं कर सकता; इसे मध्यस्थता के लिए भेजा जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (23 मई) को SARFAESI अधिनियम, 2002 (अधिनियम) के तहत दिए एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा, अंतर-ऋणदाता विवाद (सुरक्षित ऋणदाताओं के बीच) को सरफेसी अधिनियम की धारा 11 सहपठित मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (Arbitration & Conciliation Act, 1996) के तहत मध्यस्थता के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, मध्यस्थता और सुलह अधिनियम के विपरीत, जिसमें संदर्भ के लिए लिखित समझौते की आवश्यकता होती है, अधिनियम की धारा 11 मध्यस्थता के लिए एक वैधानिक अधिदेश बनाती है, जिससे ऐसे...
S.141 NI Act | चेक अनादर की शिकायत में कंपनी के निदेशकों की विशिष्ट प्रशासनिक भूमिका बताने की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चेक अनादर के अपराध के लिए कंपनी के निदेशकों को उत्तरदायी बनाने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि शिकायत में कंपनी के भीतर उनकी विशिष्ट भूमिका बताई जाए।कोर्ट ने कहा कि जबकि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 141(1) के तहत यह स्पष्ट रूप से कहा जाना आवश्यक है कि वह व्यक्ति "कंपनी के व्यवसाय के संचालन के लिए प्रभारी और कंपनी के प्रति उत्तरदायी था", कानून की भाषा को शब्दशः अपनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, भौतिक अनुपालन पर्याप्त है, बशर्ते शिकायत में निदेशक की भूमिका...
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को केंद्र और एलजी के खिलाफ AAP सरकार द्वारा दायर याचिकाएं वापस लेने की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (23 मई) को दिल्ली सरकार को पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार और उपराज्यपाल (Delhi LG) के खिलाफ कई प्रशासनिक मुद्दों पर दायर सात याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दी।दिल्ली सरकार की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि नवगठित सरकार ने अब याचिकाओं को वापस लेने का फैसला किया।उन्होंने कहा,"इन मामलों से अब इस अदालत को परेशानी...
IPC की धारा 498 | झूठे आरोप समाज में निराशा फैलाते हैं, असली पीड़ितों के प्रति भी संदेह उत्पन्न करते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) की धारा 498A से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में झूठे आरोप समाज पर व्यापक प्रभाव डालते हैं, क्योंकि वे समाज में निराशा (Cynicism) फैलाते हैं और यहां तक कि असली पीड़ितों के प्रति भी संदेह उत्पन्न कर देते हैं।जस्टिस गिरीश कठपालिया उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जो एक पति और उसके परिवार वालों द्वारा उनके खिलाफ पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR रद्द करने के लिए दायर की गई।यह FIR पिछले वर्ष IPC की धारा 498ए (क्रूरता) 406...
व्यभिचार के आधार पर तलाकशुदा पत्नी CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की हकदार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी महिला को उसके पति द्वारा साबित किए गए व्यभिचार (Adultery) के आधार पर तलाक दिया गया है तो वह आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती।इस संबंध में जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने अपने आदेश में कहा,CrPC की धारा 125 की उपधारा (4) यह प्रावधान करती है कि यदि कोई महिला, जिसकी शादी अभी भी कायम है, व्यभिचारपूर्ण जीवन जी रही हो तो उसे अपने पति से भरण-पोषण पाने का अधिकार नहीं है। अब यदि पति को व्यभिचार का...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संस्था और यूनिवर्सिटी शब्दों के बीच अंतर का आरोप लगाने वाली याचिका पर जारी किया नोटिस
लखनऊ स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के तहत संस्था और यूनिवर्सिटी शब्दों के बीच अंतर का आरोप लगाने वाली रिट याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ताओं ने संस्कृति यूनिवर्सिटी से अलग-अलग वर्षों में फिजियोथेरेपी में ग्रेजुएट की डिग्री और साइंस (मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) में ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त की, जो उनके अनुसार उत्तर प्रदेश अधिनियम 2016 के तहत एक वैधानिक यूनिवर्सिटी है। इसके अलावा यह प्रस्तुत किया गया कि यू.पी. प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट, 2019 के तहत...
पक्षकार बनाये जाने पर आपत्ति खारिज होने के बाद पार्टी को हटाने के लिए बाद में किया गया आवेदन रेस जुडिकाटा द्वारा प्रतिबंधित: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सीपीसी के आदेश I नियम 10 के तहत अभियोग की कार्यवाही पर रेस जुडिकाटा का सिद्धांत लागू होता है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी पक्ष को उचित चरण में अपने अभियोग या गैर-अभियोग के बारे में आपत्तियां उठाने का अवसर मिला था, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहा तो वह बाद में उसी मुद्दे को नहीं उठा सकता, क्योंकि यह रचनात्मक रेस जुडिकाटा के सिद्धांत द्वारा प्रतिबंधित होगा।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ उस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता को प्रतिवादी के...
केरल हाईकोर्ट ने कहा, राष्ट्रीय राजमार्ग ढहने की घटना 'चिंता का विषय; NHAI ने कुछ चूकें स्वीकार कीं
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (23 मई) ने मलप्पुरम जिले में हाल ही में एलिवेटेड नेशनल हाईवे- 66 के ढहने के मद्देनजर सड़कों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की।न्यायालय ने कहा, “श्री बिदन चंद्रन, NHAI के विद्वान स्थायी वकील ने माना कि कुछ स्थानों पर NHAI की ओर से राजमार्ग के निर्माण के संबंध में कुछ खामियां थीं...।”जस्टिस देवन रामचंद्रन ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिया कि उच्च स्तरीय समिति द्वारा मामले की जांच किए जाने के बाद वह रिपोर्ट प्रस्तुत करे।विद्वान एकल न्यायाधीश ने आगे...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी का लॉ एंट्रेंस रद्द करने से किया इनकार, 'पेपर कठिन' होने के आधार पर दी गई थी चुनौती
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब विश्वविद्यालय की ओर से 5 वर्षीय स्नातक विधि पाठ्यक्रम के लिए आयोजित विधि प्रवेश परीक्षा को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसे बहुत कठिन होने के आधार पर चुनौती दी गई थी। शेक्सपियर की उक्ति 'क्या मनुष्य कभी संतुष्ट होता है?' को उद्धृत करते हुए न्यायालय ने कहा, प्रश्न "अभी तक किसी समाधान या व्यवहार्य उत्तर तक नहीं पहुंच सका।"चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल ने कहा, "तर्क को मानते हुए, कुछ प्रश्न कठिन या कठोर थे, फिर भी चूंकि विचाराधीन प्रवेश परीक्षा एक...
जस्टिस अभय एस ओक: सर्वश्रेष्ठ जजों में से एक, न्यायिक स्वतंत्रता के दुर्लभ प्रतीक
कभी-कभी हम चाहते हैं कि कुछ न्यायाधीशों को कभी सेवानिवृत्त न होना पड़े। जस्टिस अभय एस ओक ऐसे ही न्यायाधीशों में से एक हैं। निर्भीक, स्वतंत्र, कानून के शासन के प्रति निष्ठावान, सत्ता को जवाबदेह ठहराने में संकोच न करने वाले और हमेशा संविधान को कायम रखने वाले जस्टिस ओक एक ऐसे न्यायिक सितारे हैं जिन्होंने न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को तब भी बढ़ाया जब वह विभिन्न विश्वसनीयता चुनौतियों का सामना कर रही थी।इस लेखक ने जस्टिस ए एस ओक के बारे में पहली बार 2013 में सुना था, जब उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के...
वैज्ञानिक साक्ष्य के बिना नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर पेटेंट अस्वीकार करना अवैध: कोलकाता हाईकोर्ट
कोलकाता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि किसी आविष्कार को केवल नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर वह भी बिना किसी वैज्ञानिक या तकनीकी साक्ष्य के पेटेंट देने से इनकार करना कानूनन टिकाऊ नहीं है।यह टिप्पणी जस्टिस रवि किशन कपूर ने ITC लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दी, जिसमें ऐसे हीटर असेंबली के पेटेंट की मांग की गई थी, जो एरोसोल उत्पन्न करने के लिए डिजाइन किया गया था।पेटेंट कंट्रोलर ने इस आविष्कार को जन स्वास्थ्य और नैतिकता के आधार पर विशेष रूप से ई-सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 का हवाला...
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कॉलेजों की मंजूरी को मनमाने तरीके से खारिज करने की निंदा की
फार्मा कॉलेजों द्वारा इसके खिलाफ शुरू किए जा रहे कई मुकदमों की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की निंदा की और कहा कि इसके जैसे विशेषज्ञ निकायों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"इन सभी मामलों में तथ्यों को देखते हुए हमारा मानना है कि अब समय आ गया है कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं, जिन्हें विशेष शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञ माना जाता है, उचित परिश्रम के साथ...
कोलकाता हाईकोर्ट ने आंदोलन में पुलिस से झड़प करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध बल प्रयोग पर लगाई रोक
कोलकाता हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे उन शिक्षकों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न करें, जो राज्य शिक्षा विभाग के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक झड़पों में शामिल थे। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा शिक्षकों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिसों (Show Cause Notices) पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाए।यह आदेश जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने पारित किया।याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने...
मानक फॉर्म रोजगार अनुबंध: सुप्रीम कोर्ट ने व्याख्या के सिद्धांत निर्धारित किए
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मानक फॉर्म अनुबंधों की व्याख्या करने के लिए लागू कानूनी सिद्धांतों को रेखांकित किया, जिन्हें अक्सर कर्मचारी के दृष्टिकोण से कमजोर अनुबंध के रूप में देखा जाता है, जिन्हें आमतौर पर नियोक्ताओं (जैसे निगमों या संस्थानों) द्वारा एकतरफा रूप से तैयार किया जाता है और कर्मचारियों को “इसे ले लो या छोड़ दो” के आधार पर पेश किया जाता है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मानक प्रारूप रोजगार अनुबंधों की व्याख्या से संबंधित कानूनी सिद्धांतों को इस प्रकार...
अनुच्छेद 21 के तहत बचाव के अधिकार का प्रयोग न कर सकने के कारण किसी पागल को दोषी नहीं ठहराया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा पाए व्यक्ति की सजा इस आधार पर खारिज कर दी कि अपराध के समय उसकी मानसिक स्थिति के बारे में उचित संदेह से अधिक है।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने कहा कि पागल को आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वह अपना बचाव करने की स्थिति में नहीं है। अपना बचाव करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।न्यायालय ने टिप्पणी की,“कानून यह निर्धारित करता है कि पागल द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध...




















