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अगर कर्मचारी को नौकरी की तलाश में बर्खास्तगी का 'अपमानजनक' कारण बताने के लिए मजबूर किया जाता है तो नियोक्ता उत्तरदायित्व से बच नहीं सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने मानहानि के मामलों में "बाध्यकारी स्व-प्रकाशन" के सिद्धांत की व्याख्या की है और कहा है कि नियोक्ता गोपनीय पत्राचार को ढाल बनाकर मानहानि कानून के तहत दायित्व से बच नहीं सकते। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि यह सिद्धांत, पारंपरिक सिद्धांतों का अपवाद होते हुए भी, मानहानि कानून में एक तर्कसंगत और न्यायसंगत विकास का प्रतिनिधित्व करता है।न्यायालय ने कहा, "यह सुनिश्चित करता है कि नियोक्ता गोपनीय पत्राचार को ढाल बनाकर दायित्व से बच नहीं सकते, जबकि उनके कार्यों से वास्तव में वही...
बेंगलुरु भगदड़: IPS विकास कुमार के निलंबन को सही ठहराते हुए सरकार ने कहा– 'RCB के सेवक की तरह किया काम'
बेंगलुरु में भगदड़ की घटना को लेकर आईपीएस अधिकारी विकास कुमार विकास के निलंबन को उचित ठहराते हुए राज्य सरकार ने आज कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा कि राज्य सरकार के संबंधित पुलिसकर्मियों ने आरसीबी के 'सेवक' की तरह काम किया और उनके कार्यों से सरकार को शर्मिंदगी उठानी पड़ी।सीनियर एडवोकेट पीएस राजगोपाल (राज्य सरकार के लिए) ने प्रस्तुत किया कि आईपीएल फाइनल शुरू होने से पहले ही, आरसीबी ने पुलिस अधिकारियों को अपने प्रस्तावित जीत के जश्न को रेखांकित करते हुए एक आवेदन प्रस्तुत किया था, और बाद में, अधिकारियों...
Registration Bill, 2025,: भारत में संपत्ति पंजीकरण का आधुनिकीकरण
पंजीकरण विधेयक (Registration Bill), 2025, भारत सरकार द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) के भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources) की एक महत्वपूर्ण विधायी पहल (legislative initiative) है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य भारत में मौजूदा संपत्ति पंजीकरण प्रणाली (property registration system) को आधुनिक बनाना और उसमें सुधार करना है, जो काफी हद तक संविधान-पूर्व (pre-Constitution) पंजीकरण अधिनियम (Registration Act), 1908 द्वारा शासित रहा है।विधेयक का लक्ष्य एक...
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 15-16: तलाक के बाद पुनर्विवाह और शून्य/शून्यकरणीय विवाहों के बच्चों की वैधता
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) न केवल विवाह को भंग करने के लिए आधार (Grounds for Dissolution) प्रदान करता है, बल्कि यह तलाक के बाद की महत्वपूर्ण कानूनी स्थितियों (Crucial Legal Situations) को भी संबोधित करता है।धारा 15 (Section 15) तलाकशुदा व्यक्तियों (Divorced Persons) के पुनर्विवाह (Remarriage) के अधिकारों को नियंत्रित करती है, जबकि धारा 16 (Section 16) विवाह की कानूनी वैधता (Legal Validity) में अनियमितताओं (Irregularities) के बावजूद बच्चों की वैधता (Legitimacy of...
सुप्रीम कोर्ट ने मंगेतर की हत्या के मामले में महिला की सजा बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को अपने मंगेतर की हत्या के दोषी एक महिला दोषी की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए, उसे कर्नाटक राज्य के राज्यपाल के समक्ष क्षमा मांगने का अवसर दिया।न्यायालय ने यह भी माना कि क्षमा देने के लिए अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल की शक्तियां सुधार की दिशा में व्यापक "संवैधानिक लोकाचार, लक्ष्य और संस्कृति" को दर्शाती हैं । अदालत ने जोर देकर कहा कि दोषी, जिसे उसकी इच्छा के खिलाफ मृतका से शादी करने के लिए मजबूर किया जा रहा था, ने "उसकी समस्या को दूर करने के लिए गलत कार्रवाई...
क्या केवल सज़ा पर रोक से दोषसिद्ध सरकारी कर्मचारी सेवा में बने रह सकते हैं, जबकि दोषसिद्धि बनी रहे?
State of Punjab v. Punjab State Veterinary Officers Association (2023) के महत्वपूर्ण निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब किसी सरकारी कर्मचारी को आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया हो, और अपील में केवल उसकी सज़ा पर रोक (Stay of Sentence) लगी हो, लेकिन दोषसिद्धि (Conviction) को स्थगित (Stayed) नहीं किया गया हो तो क्या वह सेवा में बना रह सकता है?यह निर्णय पंजाब सिविल सेवा (सजा एवं अपील) नियम, 1970 की नियम 18(1) और संविधान के अनुच्छेद 311(2)(a) की व्याख्या करता है, तथा K.C. Sareen v....
Indian Partnership Act, 1932 की धारा 56-58: फर्मों का पंजीकरण
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (Indian Partnership Act, 1932) का अध्याय VII (Chapter VII) फर्मों के पंजीकरण (Registration) से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों को विस्तृत रूप से वर्णित करता है। यह अध्याय फर्मों को कानूनी पहचान प्रदान करने और उनके संचालन में पारदर्शिता (Transparency) लाने के लिए एक ढाँचा (Framework) स्थापित करता है। पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, अर्थात फर्म का पंजीकरण कराए बिना भी उसे कानूनी रूप से वैध माना जा सकता है।हालाँकि, अपंजीकृत (Unregistered) फर्मों को कुछ कानूनी अधिकार और...
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी को पक्षकार बनाने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ JD (S) सांसद एचडी कुमारस्वामी (केंद्रीय मंत्री) द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका में आज (17 जुलाई) को नोटिस जारी किया, जिसमें हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही में नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट के 17 अप्रैल के आदेश को भी स्थगित कर दिया गया है, जिसमें उन्हें एक पक्ष के रूप में शामिल किया गया था।यह मुद्दा समाज परिवर्तन द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष दायर एक रिट याचिका से उत्पन्न हुआ है, जिसमें केंद्रीय मंत्री और उनके परिवार...
सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ एक्टर दर्शन को रेनुकास्वामी हत्या मामले में जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने आज (17 जुलाई) मौखिक टिप्पणी की कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने रेणुकास्वामी हत्या मामले में अभिनेता दर्शन को जमानत देने में अपने विवेक का प्रयोग करने के तरीके से वह बिल्कुल भी आश्वस्त नहीं है। खंडपीठ ने दर्शन के वकीलों से मौखिक रूप से अच्छे कारण बताने को कहा कि अदालत को हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप क्यों नहीं करना चाहिए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ कर्नाटक राज्य द्वारा 13 दिसंबर, 2024 को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही...
Hindu Marriage Act की धारा 9 के प्रावधान
जब विवाह के पक्षकारों में से कोई पक्षकार बिना किसी युक्तियुक्त कारण के विवाह के दूसरे पक्षकार को छोड़कर चला गया है तो ऐसी परिस्थिति में जिस पक्षकार को छोड़ कर गया है वह पक्षकार कोर्ट की शरण ले सकता है। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 9 विवाह को उस पक्षकार को यह अधिकार देती है कि वह कोर्ट के माध्यम से विवाह के उस पक्षकार को वापस अपने साथ रहने के लिए बुला सकता है जो उसे छोड़ कर गया है।'जबकि पति या पत्नी में से किसी ने युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना दूसरे से अपना साहचर्य प्रत्याहृत कर लिया है तब...
Hindu Marriage Act में मैरिज के लिए सपिंड नहीं होना और विवाह के लिए ज़रूरी संस्कार का होना
इस एक्ट की धारा 5 के अधीन किसी भी हिंदू विवाह के संपन्न होने के लिए विवाह के पक्षकारों का आपस में सपिंड संबंध का नहीं होना चाहिए। यदि विवाह के पक्षकार आपस में सपिंड संबंध के होते हैं तो इस प्रकार का विवाह अधिनियम की धारा 11 के अनुसार शून्य होता है। सपिंडा रिलेशनशिप का हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत कड़ाई से पालन किए जाने का प्रयास किया गया है।सपिंड नातेदारी के अंदर वाले दो हिंदू पक्षकारों के बीच विवाह प्रारंभ से ही कोई भी वजूद नहीं रखता है तथा इस प्रकार का विवाह किए जाने पर तो अधिनियम के अंतर्गत...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने UAPA और राजद्रोह के अपराध की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124ए (राजद्रोह) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने आज अपना फैसला सुनाते हुए कहा,"UAPA अपने वर्तमान स्वरूप में संवैधानिक रूप से वैध है... चुनौती विफल।"जजों के समक्ष अनिल बाबूरा बेले नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका विचाराधीन थी, जिन्हें 10 जुलाई, 2020 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एल्गार परिषद मामले के...
रशियन माँ द्वारा बच्चे को लेकर भागने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – उसे ढूंढो और बच्चा पिता को दो
बच्चों की कस्टडी के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उस बच्चे का पता लगाने के लिए आज एक तरह का आदेश पारित किया जो अपनी रूसी मां की कस्टडी में आखिरी बार था। अदालत ने संघ और दिल्ली के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि रूसी महिला देश न छोड़े और साथ ही उसे ढूंढकर उसके भारतीय पिता को बच्चे को सौंप दिया जाए।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ को सूचित किया गया कि रूसी मां और बच्चा जंगल में गायब हो गए हैं। कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश पारित किए: (i) आयुक्त सहित दिल्ली...
हाईकोर्ट ने COVID-19 के दौरान तब्लीगी जमात के लोगों को पनाह देने के आरोप वाले 16 मामले किए रद्द
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने भारतीय नागरिकों के खिलाफ दर्ज आरोपपत्रों को रद्द कर दिया और उनके खिलाफ दर्ज 16 FIR रद्द करने की उनकी याचिकाओं का निपटारा कर दिया।जज ने आदेश सुनाते हुए कहा,"आरोपपत्र रद्द किए जाते हैं।"इस मामले में 22 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व एडवोकेट आशिमा मंडला ने किया।जनवरी, 2022 में दिल्ली पुलिस ने याचिकाओं को रद्द करने का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों ने न केवल दिल्ली सरकार द्वारा जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया है, बल्कि कोविड-19...
दिल्ली कोर्ट ने आरोपियों को समय बर्बाद करने की सज़ा के तौर पर हाथ ऊपर करके खड़े रहने को कहा
आपराधिक अतिक्रमण के मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली कोर्ट ने चार आरोपियों को न्यायिक समय बर्बाद करने और समय पर ज़मानत बांड जमा न करने की सज़ा के तौर पर "अदालत उठने तक अपने हाथ ऊपर सीधे खड़े रहने" का आदेश दिया।द्वारका कोर्ट के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ गोयल ने आरोपियों को अदालती अवमानना का दोषी ठहराया और उन्हें भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 228 (न्यायिक कार्यवाही में लगे किसी लोक सेवक का जानबूझकर अपमान करना या उसके काम में बाधा डालना) के तहत दोषी ठहराया।6 मई को आरोपियों को 15...
PSU ठेकों में SC/ST ठेकेदारों को आरक्षण अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की निविदा शर्तों की वैधता को बरकरार रखा है, जिसमें पेट्रोलियम परिवहन अनुबंधों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) बोलीदाताओं को आरक्षण और रियायतें प्रदान की गई हैं, यह मानते हुए कि सकारात्मक कार्रवाई केवल सार्वजनिक रोजगार तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए।चीफ़ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस संदीप वी. मार्ने की खंडपीठ ने मैसर्स पाटिल रोडलाइन्स और अन्य ट्रांसपोर्टरों द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें बल्क पीओएल (पेट्रोलियम,...
दिल्ली हाईकोर्ट ने विप्रो को कर्मचारी को बदनाम करने वाले टर्मिनेशन लेटर पर ₹2 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने विप्रो लिमिटेड के साथ काम करने वाले एक कर्मचारी के चरित्र के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी को उसके बर्खास्तगी पत्र से हटा दिया है।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कर्मचारी की प्रतिष्ठा को नुकसान, भावनात्मक कठिनाई और उसकी पेशेवर विश्वसनीयता के नुकसान के निवारण के लिए कर्मचारी के पक्ष में 2 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया। अदालत ने कहा, "इसके अलावा, किसी भी मानहानिकारक सामग्री से रहित वादी को एक नया टर्मिनेशन लेटर जारी किया जाएगा, और इसके परिणामस्वरूप, जहां तक मानहानिकारक सामग्री का...
दो दिनों में प्रमाणन पर फैसला लेंगे: योगी आदित्यनाथ पर आधारित फिल्म पर CBFC ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वह 'अजय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी' नामक फिल्म के निर्माताओं द्वारा प्रमाणन के लिए दायर याचिका पर दो कार्यदिवसों के भीतर फैसला करेगा।फिल्म के निर्माताओं ने प्रमाणन के लिए उनके आवेदन पर जल्द से जल्द फैसला लेने के निर्देश देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने CBFC के सीनियर वकील अभय खांडेपारकर का बयान दर्ज किया कि वे दो कार्यदिवसों के भीतर...
दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिक साथी को मेडिकल प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने की याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को नोटिस जारी किया। यह याचिका महिला अर्शिया टक्कर द्वारा दायर की गई, जिसमें मांग की गई कि मरीज के समलैंगिक साथी को मेडिकल प्रतिनिधि के रूप में मान्यता दी जाए ताकि वह आपातकालीन मेडिकल स्थितियों में मरीज की ओर से निर्णय ले सके और सहमति दे सके।जस्टिस सचिन दत्ता की एकल पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय...
पंजाब एंड हरियाणा सुप्रीम कोर्ट ने जिला अस्पतालों में बुनियादी मेडिकल अवसंरचना पर राज्यों की नीतियों की जानकारी मांगी
जिला अस्पतालों में आवश्यक मेडिकल उपकरणों की कमी पर चिंता जताते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन से बुनियादी मेडिकल अवसंरचना पर अपनी नीति की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा है।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा,"प्रत्येक जिला अस्पताल में बुनियादी चिकित्सा अवसंरचना के संबंध में राज्य की मेडिकल नीति क्या है?"यह देखते हुए कि जिला अस्पताल मलेरकोटला में MRI और सीटी स्कैन मशीन अभी तक नहीं खरीदी गई,...




















