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एक धर्म के व्यक्ति का दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेना किसी भी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि "किसी विशेष धर्म या आस्था को मानने वाले व्यक्ति का दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेना भारत के संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।"यह टिप्पणी मैसूर में दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए मुख्य अतिथि के रूप में बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को राज्य द्वारा आमंत्रित किए जाने को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज करते हुए की गई।चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सी. एम. जोशी की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत याचिकाकर्ताओं के धर्म का पालन और...
सुविधाओं की कमी के कारण रिटायर जज ट्रिब्यूनल में नियुक्तियां लेने से इनकार कर रहे हैं, इसके लिए केंद्र सरकार दोषी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर) को कई रिटायर हाईकोर्ट जजों द्वारा रिटायरमेंट के बाद ट्रिब्यूनल के सदस्य के रूप में नियुक्ति स्वीकार करने में अनिच्छा व्यक्त करने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि रिटायर जजों की यह अनिच्छा ट्रिब्यूनल में उचित सुविधाओं के अभाव के कारण है, जो केंद्र सरकार की गलती है।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के न्यायिक सदस्यों के रूप में नियुक्तियों को अस्वीकार करने वाले रिटायर जजों के मुद्दे पर विचार कर...
S. 223 CrPC/S. 243 BNSS | सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में जॉइंट ट्रायल के सिद्धांत निर्धारित किए
CrPCC की धारा 223 (अब BNSS की धारा 243) की व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां एक ही लेन-देन से उत्पन्न अपराधों में कई अभियुक्त शामिल हों, वहां संयुक्त सुनवाई स्वीकार्य है। अलग सुनवाई तभी उचित होगी जब प्रत्येक अभियुक्त के कृत्य अलग-अलग और पृथक करने योग्य हों।न्यायालय ने संयुक्त सुनवाई के संबंध में निम्नलिखित प्रस्ताव रखे:-(i) CrPC की धारा 218 के अंतर्गत अलग सुनवाई का नियम है। संयुक्त सुनवाई की अनुमति तब दी जा सकती है, जब अपराध एक ही लेन-देन का हिस्सा हों या CrPC की धारा 219-223 की...
ससुराल वालों से न बन पाने के कारण अलग रहना मानसिक क्रूरता नहीं : कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी अपने ससुराल वालों के साथ सामंजस्य स्थापित करने में असमर्थ रहती है। इस वजह से अलग रहने लगती है तो इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।जस्टिस डॉ. अजय कुमार मुखर्जी ने कहा कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि पति या अन्य ससुराल वालों ने ऐसा जानबूझकर कोई कृत्य किया हो, जो पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाए या उसके जीवन, अंग-भंग या मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाए।उन्होंने...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को लोकपाल से बाहर रखने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम 1975 के उन प्रावधानों को चुनौती दी थी जो मुख्यमंत्री को लोकायुक्त के दायरे से बाहर रखते हैं।अमिताभ ठाकुर ने इस प्रावधान [अधिनियम की धारा 2(g)] को बेहद मनमाना, अनुचित, अर्थहीन और खतरनाक" करार दिया, क्योंकि यह मुख्यमंत्री को किसी भी आरोप और शिकायत से बचाता है। ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा कि यह प्रावधान मुख्यमंत्री को अपने पद का दुरुपयोग कर किसी भी...
सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर रोक की मांग वाली याचिका पर राज्यों से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर) को विभिन्न राज्यों को उन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा, जिनमें धार्मिक धर्मांतरण से संबंधित उनके कानूनों पर रोक लगाने की मांग की गई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक के धर्मांतरण से संबंधित कानूनों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।खंडपीठ ने राज्यों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए...
बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: स्वीकृत पदों की अनुपलब्धता के कारण श्रमिकों को स्थायी दर्ज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जिन श्रमिकों ने लगातार सेवा की आवश्यक अवधि पूरी कर ली है, उन्हें केवल इस आधार पर स्थायी दर्जा देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसा इनकार श्रमिकों का लगातार शोषण होगा, जो कल्याणकारी कानून और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के 22 वन श्रमिकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। ये श्रमिक 2003 से चौकीदार, माली, रसोइया और जंगली जानवरों...
राजस्थान हाईकोर्ट का अहम कदम: केस से जुड़ी सभी जानकारी के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने पर नोटिस जारी
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में हाईकोर्ट के लिए एक आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने की मांग की गई ताकि केस लिस्ट, ई-फाइलिंग विवरण, आदेश/निर्णय आदि से संबंधित सभी जानकारी एक ही जगह पर मिल सके।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने प्रैक्टिसिंग वकील द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता ने बताया कि 2023 से हाईकोर्ट ने टेलीग्राम चैनल पर केस लिस्ट अपलोड करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा, कोर्ट की ई-कोर्ट्स वेबसाइट...
दिल्ली हाईकोर्ट ने बाढ़ प्रभावित फसलों की देखभाल के लिए हत्या के दोषी की पैरोल बढ़ाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित अपनी फसलों की देखभाल करने के लिए पैरोल की अवधि चार सप्ताह के लिए बढ़ाई।जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने प्रवीण राणा नामक दोषी को पहले कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों पर ही चार सप्ताह की पैरोल दी।कोर्ट ने कहा,"याचिकाकर्ता की निरंतर उपस्थिति न केवल अप्रत्याशित है बल्कि भगवान के कार्य (भारी बारिश) के कारण भी आवश्यक है। यह उसके परिवार की आजीविका का एकमात्र स्रोत है, जिस पर उसकी विधवा मां और दो नाबालिग बच्चे पूरी तरह से निर्भर हैं। पानी कम...
राजस्थान की जोजरी नदी में औद्योगिक प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी नदी के संबंध में स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि औद्योगिक अपशिष्ट, मुख्यतः कारखानों से, नदी में बहाया जा रहा है। इससे सैकड़ों गाँव प्रभावित हो रहे हैं और पीने का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने का अनुरोध किया और आदेश दिया,"उचित आदेश के लिए मामले को माननीय चीफ जस्टिस के समक्ष रखा जाए।"गौरतलब है कि इसी खंडपीठ ने हाल ही में राजस्थान राज्य में हिरासत में मौतों की ओर इशारा करने वाली...
कोर्ट रूम पहुंची कोल्हापुरी चप्पल
दक्षिण भारतीय धूप में सुखाई जाने वाली सूती प्लेड लुंगी, जो कभी मज़दूरों, ताड़ी निकालने वालों और किसानों के कपड़ों में लिपटी रहती थी, 1960 के दशक में हाउते कुट्रे में शामिल हो गई। दुपट्टा स्कैंडिनेवियाई स्कार्फ़ बन गया, लहंगा बोहेमियन स्कर्ट में बदल गया।जब वैश्विक फ़ैशन पारंपरिक पहचान से उधार लेता है, तो प्रशंसा और विनियोग के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है, वे समुदाय, भूगोल और स्मृति का प्रतीक बन जाते हैं। भारतीय डिज़ाइनों से अक्सर संदर्भ, अर्थ और पहचान छीन ली जाती है, जिससे कारीगर छाया में रह...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लॉन्ड्रिंग मामले में वकील को भेजे ED समन पर लगाई रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा एडवोकेट अनिल गौड़ा को भेजे गए समन पर अंतरिम रोक लगाई। यह मामला अवैध ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाज़ी रैकेट से जुड़ा है जिसमें कांग्रेस विधायक के.सी. वीरेंद्र का नाम भी सामने आया है।जस्टिस सचिन शंकर मागदुम ने आदेश पारित करते हुए ED को निर्देश दिया कि वह आगे की कोई कार्यवाही न करे और न ही वकील के खिलाफ किसी प्रकार की ज़बरदस्ती की कार्रवाई करे।अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि प्रारंभिक दृष्टि से यह माना जाता है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट यह तय नहीं...
स्वतंत्रता बनाम पदानुक्रम: हाईकोर्ट में प्रत्यक्ष अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर बहस
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केरल हाईकोर्ट की उन अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर विचार करने के लिए आलोचना की है जो बिना सत्र न्यायालय में जाए, सीधे उसके समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं ।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यद्यपि सत्र न्यायालय और हाईकोर्ट को बीएनएसएस की धारा 482 (पूर्व में, धारा 438 सीआरपीसी) के तहत गिरफ्तारी-पूर्व ज़मानत (अग्रिम ज़मानत) के लिए प्रार्थना पर विचार करने का समवर्ती क्षेत्राधिकार प्रदान किया गया है, न्यायालयों के पदानुक्रम की मांग है कि ऐसे...
NDPS Act | जब्ती और सैंपल-ड्राविंग धारा 52ए के अनुसार विधिवत दर्ज हो तो ट्रायल में प्रतिबंधित पदार्थ का न होना घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के तहत मामलों में अभियोजन पक्ष का मामला केवल इसलिए विफल नहीं हो जाता, क्योंकि जब्त प्रतिबंधित पदार्थ अदालत में पेश नहीं किया गया, बशर्ते कि सूची और सैंपल-ड्राविंग रिकॉर्ड विधिवत तैयार किए गए हों और NDPS Act की धारा 52ए के अनुपालन में रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हों।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें NDPS मामले में केवल...
भीमा कोरेगांव मामला मामले में महेश राउत को मिली अंतरिम ज़मानत
सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले के आरोपी महेश राउत को मेडिकल आधार पर 6 हफ़्तों की अंतरिम ज़मानत दी। महेश राउत को कथित माओवादी संबंधों के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत गिरफ़्तार किया गया। जून 2018 में गिरफ़्तारी के बाद से ही वह हिरासत में है।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट सी.यू. सिंह द्वारा राउत को रूमेटाइड अर्थराइटिस (र्यूमेटॉइड अर्थराइटिस) से पीड़ित होने का ज़िक्र किए जाने के बाद ज़मानत दी। यह...
सुप्रीम कोर्ट ने 'अवैध फायरआर्म्स' मामले में एक्सपर्ट कमेटी से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सुझावों पर विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिना लाइसेंस वाले फायरआर्म्स से संबंधित मामले का निपटारा कर दिया। उसे बताया गया कि केंद्र सरकार ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया ताकि देश भर में अवैध आग्नेयास्त्रों और वैध आग्नेयास्त्रों के अनधिकृत उपयोग की समस्या से निपटने और उसे रोकने के लिए योजना सुझाई जा सके।पिछले साल नवंबर में अदालत ने प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में समिति का गठन किया, क्योंकि उसे शस्त्र अधिनियम, 1959 और शस्त्र...
फैशन और परंपरा का मिलन: भारतीय कोल्हापुरी शिल्पकला के संरक्षण में बौद्धिक संपदा की कमी
कला और उसके रचनाकारों की सच्ची समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि उत्साही और नवोन्मेषी आविष्कारकों और कलाकारों को उनके काम के लिए उचित मान्यता और संरक्षण मिले। इसका एक ज्वलंत उदाहरण कोल्हापुरी चप्पलों की कहानी है।ये हस्तनिर्मित चमड़े की चप्पलें भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रही हैं। आमतौर पर भारतीय बाजारों में 1000 रुपये से ज़्यादा की कीमत पर नहीं बिकतीं। फिर भी, हाल ही में इतालवी लक्ज़री ब्रांड प्राडा ने इन्हें 1-1.2 लाख रुपये में सूचीबद्ध किया है, जबकि उन कारीगरों को कोई प्रतिफल, मुआवजा या...
केवल FIR दर्ज होना पदोन्नति रोकने का आधार नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने कहा कि केवल FIR दर्ज होना आपराधिक कार्यवाही का लंबित होना नहीं माना जाता है और पदोन्नति केवल आरोप-पत्र दाखिल होने या आरोप तय होने के बाद ही रोकी जा सकती है।पृष्ठभूमि तथ्यसेवा के दौरान, याचिकाकर्ता के पक्ष में जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) के पद पर पदोन्नति के लिए दिनांक 25.05.2022 को पदोन्नति आदेश जारी किया गया। हालांकि, प्रतिवादियों द्वारा इस आधार पर पदोन्नति लागू नहीं की गई कि याचिकाकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई...
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने DC और SSP के कब्जे वाले गेस्ट हाउस जिला जजों को आवंटित करने का निर्देश दिया
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पंजाब के मलेरकोटला में उपायुक्त (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के कब्जे वाले सरकारी गेस्ट हाउस खाली करके जिला जज को आधिकारिक और आवासीय उपयोग के लिए आवंटित किए जाएं।पंजाब सरकार ने 2021 में मलेरकोटला को ज़िला घोषित किया था। उसके बाद 2023 में वहां सेशन कोर्ट का गठन किया गया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि संबंधित अधिसूचना के अनुसार निर्धारित मानकों के अनुरूप कोई आवासीय सुविधा उपलब्ध नहीं है, जो जिला एंड सेशन जज, एडिशनल जिला...
बिना आरोप पत्र दाखिल किए आपराधिक मामला लंबित होने पर पदोन्नति से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले का लंबित होना, जिसमें आरोप पत्र दाखिल न किया गया हो, विभागीय जांच में सभी आरोपों से बरी हुए कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:"निश्चित रूप से याचिकाकर्ता को कोई आरोप पत्र नहीं दिया गया। हालांकि, संबंधित मजिस्ट्रेट को आगे की जांच का आदेश देने का पूरा अधिकार है। हालांकि, ऐसा कोई भी तथ्य, यदि कोई हो, प्रतिवादियों को उच्च पद पर पदोन्नति से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता, खासकर जब आरोप पत्र अभी तक तय...




















