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S. 306 IPC | आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में यह जांच की जानी चाहिए कि क्या आरोपी ने अपने कृत्य से पीड़ित को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का इरादा किया था: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 अगस्त) को सांसद मोहनभाई डेलकर की आत्महत्या के मामले में दादरा एवं नगर हवेली के प्रशासक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। न्यायालय ने कहा कि आत्महत्या से प्रत्यक्ष और निकट संबंध के बिना उत्पीड़न, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आरोप कायम रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।न्यायालय ने कहा,"भले ही लंबे समय तक लगातार उत्पीड़न का आरोप हो; धारा 306 और धारा 107 के तत्वों को शामिल करने के लिए,...
हाईकोर्ट ने 14 साल पुरानी कथित घटना में सेवानिवृत्ति लाभों को अनुचित तरीके से रोकने के लिए पंजाब सरकार पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक पूर्व कर्मचारी की सेवानिवृत्ति से 14 वर्ष पूर्व घटी एक कथित घटना के आधार पर उसके सेवानिवृत्ति लाभों को अनुचित रूप से रोकने के लिए पंजाब सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया है। यह ध्यान देने योग्य है कि पंजाब सिविल सेवा नियम (इस मामले में लागू), किसी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने पर रोक लगाते हैं, यदि मामला कार्यवाही शुरू होने की तिथि से चार वर्ष से अधिक पहले घटित किसी घटना से संबंधित हो।जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने...
MSMED Act : मिश्रित SIT कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू नहीं होंगी MSE खरीद अनिवार्यताएं: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक खरीद नीति के तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) को दी गई प्राथमिकता की धाराएं 3 और 11 स्वतः मिश्रित अनुबंधों जैसे सप्लाई, इंस्टॉलेशन और टेस्टिंग (SIT) प्रोजेक्ट्स, पर लागू नहीं होंगी।जस्टिस वसीम सादिक नर्गल की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यद्यपि नीति प्रावधानों को MSMED Act के तहत वैधानिक मान्यता प्राप्त है, लेकिन उनका अनुप्रयोग व्यवस्थागत है, अनुबंध-विशिष्ट नहीं।अदालत ने कहा,“धाराएं 3 और 11 का उद्देश्य MSEs को सशक्त करना है,...
ICICI Bank के खिलाफ मानहानिपूर्ण बयान और सोशल मीडिया पोस्ट करने से पूर्व ट्रेनी पर रोक : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने ICICI Bank के एक पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर, जिन्हें प्रोबेशन अवधि के दौरान सेवा से हटा दिया गया, उसको बैंक के खिलाफ कोई भी मानहानिपूर्ण बयान या सोशल मीडिया पोस्ट करने से रोक दिया।जस्टिस अमित बंसल ने बैंक की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए पूर्व कर्मचारी से चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा।बैंक ने दलील दी कि प्रोबेशन से निकाले जाने के बाद पूर्व कर्मचारी ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर बैंक के खिलाफ अपमानजनक और मानहानिपूर्ण बयान देने शुरू कर दिए। अब तक 100 से अधिक वीडियो...
मामूली अपराधों के लिए केवल FIR लंबित होना अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि FIR का लंबित होना विशेष रूप से छोटे अपराधों के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहले से स्वीकृत अनुकंपा नियुक्ति को रोकने का वैध कारण नहीं हो सकता।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा,"जब तक आरोपी के खिलाफ आरोप तय नहीं हो जाते और उसे सक्षम न्यायालय द्वारा दोषी नहीं ठहराया जाता तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। यदि ऐसा है तो केवल FIR लंबित होने के आधार पर नियुक्ति से इनकार करना, वह भी छोटे अपराधों के लिए टिकने योग्य नहीं हो सकता।"याचिकाकर्ता के पिता प्रारंभिक शिक्षा विभाग में...
'बंगाल के जज को क्यों टाला जा रहा है?': जस्टिस दीपांकर दत्ता ने पश्चिम बंगाल मदरसा मामले को दूसरी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अचानक एक मामले को दूसरी समन्वय बेंच के समक्ष क्यों रखा, जबकि वह उस बेंच का हिस्सा थे, जिसने इसी तरह के तीन संबंधित मामलों में आदेश पारित किए।जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी की,"हम रजिस्ट्री द्वारा अपनाई गई व्यवस्था पर गंभीरता से सवाल उठा रहे हैं। ये मामले दूसरी बेंच के समक्ष कैसे जा सकते हैं? अगर कोरम नियम का पालन करना है तो यह मेरे समक्ष आना चाहिए। बंगाल के एक जज को क्यों टाला जा रहा है? हम जानते हैं कि वहां क्या हुआ...
शेयरधारक को दी गई व्यावसायिक अग्रिम राशि, जिसका कंपनी के काम में उपयोग नहीं किया गया, आयकर अधिनियम के तहत डीम्ड लाभांश मानी जाएगी: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि जहां कोई कंपनी अपने किसी शेयरधारक को अग्रिम राशि प्रदान करती है और यह प्रदर्शित नहीं होता कि इस अग्रिम राशि का उपयोग कंपनी के व्यवसाय के लिए किया गया है, वहां आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(22)(e) के अंतर्गत उस राशि को लाभांश माना जाएगा। न्यायालय ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसने ऐसे अग्रिमों को लाभांश के रूप में जोड़ने को सही ठहराया था।चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस संदीप वी मार्ने की खंडपीठ एक निजी कंपनी के...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने लीलावती अस्पताल की शिकायत की पुष्टि किए बिना HDFC MD शशिधर जगदीशन को नोटिस जारी करने के मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक शशिधर जगदीशन को राहत देते हुए एक न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की ओर से उनके खिलाफ दर्ज एक निजी शिकायत पर उन्हें नोटिस जारी करने के आदेश को रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि शिकायतकर्ता ट्रस्ट मुंबई में प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल चलाता है। अपनी प्राथमिकी में, ट्रस्ट ने जगदीशन पर पूर्व ट्रस्टी चेतन मेहता से 2.05 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है, ताकि उन्हें वित्तीय सलाह दी जा सके और ट्रस्ट के संचालन पर...
'अगर ट्रैफिक जाम 12 घंटे तक रहता है तो टोल क्यों चुकाएं?': सुप्रीम कोर्ट ने एनएच 544 में पलियेक्कारा टोल वसूली को लेकर NHAI की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 अगस्त) को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग 544 पर एडापल्ली-मन्नुथी खंड की खराब स्थिति के कारण त्रिशूर जिले के पलियेक्कारा टोल बूथ पर टोल वसूली पर रोक लगा दी गई थी। पीठ ने टोल वसूलने वाली रियायतग्राही कंपनी गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई...
दिल्ली में दो घंटे की बारिश से ठप हो जाता है पूरा शहर : चीफ जस्टिस बी.आर. गवई
राष्ट्रीय राजमार्ग 544 पर पालयेक्कारा टोल वसूली मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई ने टिप्पणी की कि सिर्फ दो घंटे की बारिश से दिल्ली पूरी तरह ठप हो जाती है।चीफ जस्टिस गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच NHAI की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केरल हाईकोर्ट द्वारा खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम की वजह से पालयेक्कारा टोल वसूली चार हफ्तों के लिए निलंबित करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।सुनवाई के दौरान NHAI ने दलील दी कि सेवा मार्गों का काम...
ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में एक्टर विजय को राहत, हाईकोर्ट ने पार्टी के झंडे पर रोक लगाने से इनकार किया
मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को अभिनेता विजय की तमिलगा वेत्री कझगम पार्टी को एक ट्रस्ट के ट्रेडमार्क के कथित उल्लंघन के मामले में पार्टी के झंडे के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग वाली एक याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति ने वादी के इस दावे को खारिज कर दिया कि विजय की पार्टी द्वारा झंडे का इस्तेमाल कॉपीराइट उल्लंघन, ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग ऑफ के समान है। हालांकि, अदालत ने कहा कि ये अस्थायी टिप्पणियां हैं और इस मामले पर सितंबर में विचार किया जाएगा।थोंडाई...
सुप्रीम कोर्ट ने सैन्य प्रशिक्षण के दौरान विकलांग हुए कैडेटों के बीमा कवरेज और पुनर्वास पर संघ से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 अगस्त) को सैन्य प्रशिक्षण के दौरान विकलांग हुए कैडेटों की कठिनाइयों से संबंधित एक स्वतः संज्ञान मामले में केंद्रीय रक्षा, वित्त और सामाजिक न्याय मंत्रालयों के साथ-साथ रक्षा प्रमुखों, थलसेना, वायुसेना और नौसेना को नोटिस जारी किया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने अधिकारियों से यह जांच करने को कहा कि क्या विकलांग कैडेटों के मासिक चिकित्सा व्यय में वृद्धि की जा सकती है, क्या मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में बीमा कवरेज प्रदान किया जा सकता है, और क्या...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में मुख्य गवाह की क्रॉस एग्जामिनेशन सात हफ़्तों से ज़्यादा समय तक टालने पर निचली अदालत के जज से स्पष्टीकरण मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में मुख्य गवाह की क्रॉस एग्जामिनेशन सात हफ़्तों से ज़्यादा समय तक टालने पर निचली अदालत के न्यायाधीश से स्पष्टीकरण मांगा। न्यायालय ने कहा कि इस तरह की अनुचित देरी निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों को कमज़ोर करती है और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों के विपरीत है।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,"मुकदमे की कार्यवाही जिस तरह से चल रही है, वह विनोद कुमार बनाम पंजाब राज्य (2015) और सेल्वामणि बनाम पुलिस निरीक्षक द्वारा राज्य प्रतिनिधि, 2024 में माननीय सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों...
दिल्ली हाईकोर्ट ने संसद में उपस्थित होने के लिए 4 लाख के जुर्माने के खिलाफ सांसद इंजीनियर राशिद की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के सांसद इंजीनियर राशिद की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने संसद में उपस्थित होने के लिए हिरासत में पैरोल देते समय निचली अदालत द्वारा उन पर लगाए गए जुर्माने को चुनौती दी थी।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने अदालत को राशिद पर लगाए गए जुर्माने की राशि की गणना का ब्यौरा समझाया।जस्टिस भंभानी ने मौखिक रूप से कहा कि अगर राशिद को...
सुप्रीम कोर्ट ने केरल विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्तियों के लिए जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में खोज समिति का गठन किया
केरल सरकार और राज्य के राज्यपाल के बीच विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर जारी गतिरोध को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 अगस्त) को जस्टिस सुधांशु धूलिया को दो राज्य विश्वविद्यालयों - एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और डिजिटल विज्ञान नवाचार एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय - में नियमित कुलपति नियुक्तियों के लिए नामों की सूची बनाने हेतु खोज-सह-चयन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। कोर्ट ने एक आदेश पारित किया, "हमारा दृढ़ विश्वास है कि इस गतिरोध को जल्द से जल्द दूर...
'निजी कंपनी को 3000 बीघा ज़मीन दे दी गई! क्या ये मज़ाक है?': गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सीमेंट कंपनी को आदिवासी ज़मीन आवंटित करने पर आपत्ति जताई
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम राज्य के दीमा हसाओ क्षेत्र में खनन के उद्देश्य से एक निजी सीमेंट कंपनी (महाबल सीमेंट्स) को लगभग 3000 बीघा ज़मीन दिए जाने पर अपनी आपत्ति जताई है। जस्टिस संजय कुमार मेधी ने मौखिक रूप से कहा, "3000 बीघा! पूरा ज़िला? क्या हो रहा है? 3000 बीघा ज़मीन एक निजी कंपनी को आवंटित? हम जानते हैं कि ज़मीन कितनी बंजर है...3000 बीघा? यह कैसा फ़ैसला है? क्या यह कोई मज़ाक है या कुछ और? आपकी ज़रूरत मुद्दा नहीं है...जनहित मुद्दा है।"सीमेंट कंपनी के वकील ने कहा कि आवंटित ज़मीन सिर्फ़ बंजर...
क्या केवल गिरफ्तारी का कारण बताना पर्याप्त है या लिखित आधार देना ज़रूरी है?
सुप्रीम कोर्ट ने Prabir Purkayastha v. State (NCT of Delhi) (2024 INSC 414, दिनांक 15 मई 2024) में एक अहम फैसला दिया। यह निर्णय इस बात पर केंद्रित है कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय लिखित रूप (Written Form) में उसके गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) बताना ज़रूरी है। यह मामला Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 (UAPA) के तहत दर्ज हुआ था और इसमें संविधान (Constitution) के अनुच्छेद 20, 21 और 22 तथा Section 43B UAPA की व्याख्या की गई।अदालत ने साफ कहा कि “Reason for Arrest” और...
वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 47-49 : राज्य बोर्डों का पर्यवेक्षण, विघटन और विलय
वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अध्याय VII में ऐसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं जो राज्य बोर्डों के कामकाज पर सरकार के नियंत्रण को स्थापित करते हैं, जबकि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास बिना किसी रुकावट के जारी रहें। यह अध्याय राज्य बोर्ड को अधिकार से हटाए जाने (supersession), अन्य कानूनों के तहत गठित बोर्डों के साथ विलय (merger) और शक्तियों के हस्तांतरण (transfer) से संबंधित है।धारा 47 - राज्य बोर्ड को अधिकृत करने की राज्य सरकार की शक्ति (Power of...
पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 90, 91: सरकारी दस्तावेजों की छूट और निरीक्षण
आइए पंजीकरण अधिनियम, 1908 (Registration Act, 1908) के अंतिम भाग को समझते हैं, जो कुछ विशेष सरकारी दस्तावेजों को पंजीकरण की आवश्यकता से छूट देता है और उनके निरीक्षण की प्रक्रिया को निर्धारित करता है। यह धाराएं पंजीकरण प्रणाली के दायरे और सीमाओं को परिभाषित करती हैं।90. सरकार द्वारा या उसके पक्ष में निष्पादित कुछ दस्तावेजों की छूट (Exemption of certain documents executed by or in favour of Government)यह धारा उन विशिष्ट दस्तावेजों या नक्शों को सूचीबद्ध करती है जिन्हें पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती।...
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 41-42 : महानिदेशक के कर्तव्य और आयोग के आदेशों का उल्लंघन
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए एक मजबूत और समर्पित जांच टीम की आवश्यकता होती है। यह भूमिका महानिदेशक (Director General - DG) द्वारा निभाई जाती है।भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 41 महानिदेशक की शक्तियों और कर्तव्यों को परिभाषित करती है, जबकि धारा 42 यह सुनिश्चित करती है कि CCI द्वारा दिए गए आदेशों का उल्लंघन करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ें। ये दोनों धाराएं मिलकर CCI को एक शक्तिशाली और प्रभावी नियामक बनाती हैं, जो न केवल उल्लंघन की जांच कर सकता है, बल्कि...




















