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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार आरोपी की बरी बरकरार रखी, कहा– पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान न होना सहमति दर्शाता है
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बलात्कार मामले में आरोपी की बरी (acquittal) को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल सबूतों में पीड़िता के शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट या हिंसा के निशान नहीं पाए गए, जिससे यह प्रतीत होता है कि उसने प्रतिरोध नहीं किया और वह सहमति से इस कृत्य में शामिल थी।पीड़िता ने 2013 में शिकायत दी थी कि उसके पति के काम पर होने और बच्चों के स्कूल में रहने के दौरान उसका चचेरा भाई घर में घुसकर बलात्कार कर गया।उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके कपड़े फाड़े, बलात्कार किया और धमकी दी कि...
Sec.138 NI Act| मुआवज़ा जमा न करने मात्र से अपीलीय अदालत ज़मानत नहीं रोक सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 138 एनआई एक्ट (चेक बाउंस केस) में दोषी व्यक्ति को केवल इस आधार पर जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसने अपीलीय अदालत के आदेश अनुसार 20% मुआवजा राशि जमा नहीं की है।अदालत ने कहा—धारा 148 एनआई एक्ट अपीलीय अदालत को यह अधिकार देता है कि अपील लंबित रहते समय दोषी से कम से कम 20% जुर्माना/मुआवजा जमा कराने का निर्देश दे।लेकिन यह प्रावधान न तो अपील दायर करने का अधिकार छीनता है और न ही सज़ा निलंबन (suspension of sentence) पर रोक लगाता है।यदि विधायिका...
BREAKING| 'संवेदनशील मामलों में डे-टू-डे ट्रायल की प्रथा पुनर्जीवित की जानी चाहिए': सुप्रीम कोर्ट ने फास्ट ट्रायल के लिए दिशा-निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण या संवेदनशील मामलों में डे-टू-डे ट्रायल की प्रथा को बंद किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। साथ ही कहा कि तीन दशक पहले की परंपरा अब "पूरी तरह से समाप्त" हो गई है।खंडपीठ ने कहा,"हमारा मानना है कि अब समय आ गया कि अदालतें उस प्रथा को अपनाएं।"उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि न्याय प्रदान करने के लिए, विशेष रूप से गंभीर सामाजिक या राजनीतिक परिणामों वाले मामलों में त्वरित और निरंतर सुनवाई आवश्यक है।अदालत ने निर्देश दिया कि सभी हाईकोर्ट को इस पर विचार-विमर्श करने के लिए...
पोर्टल से न्यूज़ हटाने का मामला: अडानी एंटरप्राइजेज ने हाईकोर्ट में कहा- न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट्स हटाने के लिए कोई नया अनुरोध नहीं करेंगे
अडानी एंटरप्राइजेज ने गुरुवार (25 सितंबर) को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वह डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा कंपनी से संबंधित मीडिया रिपोर्टों के संबंध में कोई नया अनुरोध नहीं करेगा।जस्टिस सचिन दत्ता के समक्ष अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट अनुराग अहलूवालिया ने यह दलील दी।अदालत डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री और पत्रकार रवीश कुमार की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें केंद्र सरकार के उस निर्देश को चुनौती दी गई। इसमें डिजिटल न्यूज़...
'बाबरी मस्जिद का निर्माण ही मूलतः अपवित्रीकरण का कार्य था': पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अयोध्या फैसले के निष्कर्षों का खंडन किया
पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अयोध्या विवाद पर अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया है कि बाबरी मस्जिद का निर्माण ही मूलतः अपवित्रीकरण का कार्य था।सीजेआई ने न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार श्रीनिवासन जैन के साथ एक साक्षात्कार के दौरान यह टिप्पणी की, जिसके कुछ अंश सोशल मीडिया पर साझा किए गए। इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या दिसंबर 1949 में मस्जिद के अंदर मूर्तियां रखने जैसे अपवित्रीकरण के कृत्यों के लिए हिंदू पक्ष जवाबदेह हैं, जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मस्जिद का निर्माण ही...
BREAKING| S.138 NI Act - ₹20,000 से अधिक के नकद लोन पर भी चेक बाउंस का मामला सुनवाई योग्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (25 सितंबर) को केरल हाईकोर्ट का फैसला खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि आयकर अधिनियम, 1961 (IT Act) का उल्लंघन करते हुए बीस हज़ार रुपये से अधिक के नकद लेनदेन से उत्पन्न ऋण को परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 138 के तहत "कानूनी रूप से प्रवर्तनीय ऋण" नहीं माना जा सकता।जस्टिस मनमोहन और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा कि पी.सी. हरि बनाम शाइन वर्गीस एवं अन्य मामले में 25 जून, 2025 को दिया गया केरल...
BREAKING | NI Act की धारा 138 मामले में अभियुक्तों को पूर्व-संज्ञान समन की आवश्यकता नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्देश जारी किए
एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के अनुसार, चेक अनादर के लिए दायर शिकायतों के पूर्व-संज्ञान चरण में अभियुक्त की सुनवाई आवश्यक नहीं है।अदालत ने अशोक बनाम फैयाज अहमद मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से सहमति व्यक्त की कि एनआई अधिनियम की शिकायतों के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के तहत पूर्व-संज्ञान चरण में अभियुक्तों को समन जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हाल ही में, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अशोक बनाम...
बिल्डर द्वारा लिया गया ब्याज खरीदार को दिया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट के विलंबित हस्तांतरण पर देय ब्याज बढ़ाया
सुप्रीम कोर्ट ने एक दिलचस्प आदेश में प्लॉट के विलंबित हस्तांतरण (Delayed Handover) पर ब्याज दर को 9% से बढ़ाकर 18% करके घर खरीदारों को राहत प्रदान की। साथ ही कोर्ट ने कहा कि जो बिल्डर विलंबित भुगतान के लिए खरीदारों पर 18% ब्याज लगाता है, वह उपभोक्ता को समय पर कब्जा न देने पर उसी दायित्व से बच नहीं सकता।अदालत ने कहा,"कानून का कोई सिद्धांत नहीं है कि बिल्डर द्वारा चूक पर लिया गया ब्याज खरीदार को कभी नहीं दिया जा सकता।"अदालत ने कहा कि हालांकि बिल्डर द्वारा घर खरीदार से विलंबित भुगतान पर ली जाने...
'धोखाधड़ी' और 'आपराधिक विश्वासघात' के अपराध एक ही आरोपों के आधार पर एक साथ नहीं रह सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी का अपराध एक ही आरोपों के आधार पर एक साथ नहीं रह सकते। अदालत ने कहा कि धोखाधड़ी (IPC की धारा 420/BNS की धारा 318) के अपराध में शुरू से ही आपराधिक इरादा शामिल होता है। हालांकि, आपराधिक विश्वासघात (IPC की धारा 406/BNS की धारा 316) के अपराध में शुरुआत में वैध रूप से भरोसा सौंपा जाता है, जिसका बाद में दुरुपयोग किया जाता है।इसलिए ये दोनों अपराध एक ही तथ्य पर एक साथ नहीं रह सकते, क्योंकि ये एक-दूसरे के "विरोधाभासी" हैं।अदालत ने कहा,"धोखाधड़ी के...
BREAKING| जिला जजों की सीधी भर्ती के लिए न्यायिक अधिकारियों की पात्रता पर फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या बार में सात वर्ष पूरे कर चुके न्यायिक अधिकारी को बार रिक्तियों के विरुद्ध जिला जज के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पांच जजों की पीठ ने इस मामले पर विचार किया।सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन जजों की पीठ द्वारा 12 अगस्त को एक आदेश पारित करने के बाद इस...
Maintenance & Welfare Of Senior Citizens Act | आवेदन की तिथि के आधार पर आयु का निर्धारण: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि माता-पिता एवं सीनियर सिटीजन का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत किसी व्यक्ति को "सीनियर सिटीजन" के रूप में निर्धारित करने की प्रासंगिक तिथि, भरण-पोषण न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन दायर करने की तिथि है, न कि निर्णय की तिथि।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने 80 वर्षीय कमलाकांत मिश्रा और उनकी पत्नी की बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील स्वीकार करते हुए यह निर्णय दिया, जिसमें उनके बेटे को बेदखल करने का आदेश रद्द कर दिया गया।यह मामला तब...
दिल्ली हाईकोर्ट ने तुर्क कंपनी Celebi की सुरक्षा मंजूरी रद्द करने के खिलाफ याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को तुर्की की कंपनी Celebi Ground Handling India Pvt. Ltd. की याचिका खारिज कर दी। यह याचिका केंद्र सरकार की ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) द्वारा कंपनी की सुरक्षा मंजूरी रद्द करने के फैसले को चुनौती देती थी। कोर्ट ने कहा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।जस्टिस तेजस कारिया ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह याचिका पहले वाली याचिकाओं जैसी ही है, जिन्हें 5 जुलाई को समन्वय पीठ ने खारिज किया था। उस समय भी कोर्ट ने माना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में...
Criminal law में नेचुरल जस्टिस का महत्व
कानून पार्लियामेंट द्वारा बनाया जाता है। इसे सामान्य बोध में विधायिका द्वारा कानून निर्माण कहा जाता है। लेकिन कानून केवल वही नहीं होता जो विधायिका द्वारा बना दिया जाए अपितु उसमे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का भी दखल होता है। यह वैश्विक अवधारणा है कि कोई भी कानून इस प्रकार नहीं बनाया जाएगा कि उसमे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का अभाव हो। न्याय प्रशासन में प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों का महत्वपूर्ण स्थान है। न्याय की सार्थकता प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों पर ही निर्भर करती है। प्राकृतिक न्याय...
फ्री कानूनी मदद पर कानून
गरीब लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता के लिए लीगल एड क़ानून बनाया गया है। आज के समय में न्याय अत्यंत खर्चीला है, ऐसे में एक निर्धन अभियुक्त अपने बचाव से विरत रह जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए ही निःशुल्क विधिक सहायता की अवधारणा अस्तित्व में आई है। जहां एक निर्धन अभियुक्त को अपना बचाव करने के लिए सरकार द्वारा अपने खर्च से एडवोकेट उपलब्ध कराया जाता है जो अभियुक्त की ओर से उसका बचाव करता है। इस आलेख में इस ही निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित कानून पर चर्चा की जा रही है।प्राकृतिक न्याय का यह...
सरकार को निशाना बना रहे हैं : पीएम मोदी-अमित शाह के खिलाफ़ FIR दर्ज करने की मांग करने वाले वकील पर लगा 50,000 का जुर्माना
राजस्थान हाईकोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सांसद रविशंकर प्रसाद और अन्य के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को ख़ारिज करते हुए याचिकाकर्ता वकील पर 50,000 का लागत (जुर्माना) लगाया।जस्टिस सुदेश बंसल ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप अस्पष्ट, निराधार और केवल सरकार को निशाना बनाने की नीयत से लगाए गए।अदालत ने टिप्पणी की कि एक एडवोकेट से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह ऐसे गंभीर और अपमानजनक आरोप बिना किसी तथ्य या...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने AAP MLA मेहराज दीन मलिक की PSA के तहत गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज दीन मलिक की हिरासत को चुनौती देने वाली हेबियस कॉर्पस याचिका को स्वीकार कर सरकार को नोटिस जारी किया। यह गिरफ्तारी जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ़्टी एक्ट (PSA), 1978 के तहत की गई है।जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ ने सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाख़िल करने का निर्देश दिया है।सीनियर एडीशनल एडवोकेट जनरल मोनिका कोहली ने प्रतिवादी नंबर 1, 2, 4 और 5 की ओर से नोटिस स्वीकार किया, जबकि प्रतिवादी नंबर 3 को दस्ती नोटिस देने की...
आप उनकी रक्षा कर रहे हैं: सुप्रीम कोर्ट की मध्यप्रदेश सरकार को फटकार, हिरासत मौत मामले में फरार पुलिसकर्मियों पर सख़्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्यप्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया और सवाल किया कि 26 वर्षीय देवा परधि की हिरासत में मौत के मामले में आरोपित दो पुलिस अधिकारी पांच महीने से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हैं। फिर भी उन्हें निलंबित क्यों नहीं किया गया।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे मृतक देवा परधि की मां ने दायर किया है।कोर्ट ने इससे पहले 15 मई, 2025 को CBI को एक माह के भीतर सभी दोषी अधिकारियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया था।जस्टिस...
समीर वानखेडे ने आर्यन खान की नेटफ्लिक्स सीरीज Ba**ds of Bollywood पर लगाया मानहानि का आरोप, पहुंचे हाईकोर्ट
भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी समीर वानखेड़े ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुक़दमा दायर किया। उन्होंने यह मुक़दमा रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट, गौरी खान तथा अन्य के विरुद्ध दायर किया।उनका आरोप है कि आर्यन खान द्वारा निर्देशित नेटफ्लिक्स सीरीज Ba**ds of Bollywood उनकी छवि को झूठे और दुर्भावनापूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है।वानखेड़े ने न्यायालय से दो करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह पूरी राशि वे टाटा स्मारक कैंसर चिकित्सालय को दान करेंगे ताकि कैंसर रोगियों के उपचार में उपयोग हो...
अरुंधति की किताब के खिलाफ याचिका दायर करने वाले वकील को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, नोटिस न देखने पर उठाए सवाल
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार (25 सितंबर) को वकील से मौखिक रूप से सवाल किया कि उन्होंने अरुंधति रॉय की किताब 'Mother Mary Comes To Me' पर PIL दायर करते समय इसके पिछले पृष्ठ पर मौजूद धूम्रपान संबंधी डिस्क्लेमर पर ध्यान क्यों नहीं दिया।मामला एक PIL से संबंधित है, जिसमें वकील ने किताब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी यह दावा करते हुए कि किताब पर स्टेट्यूटरी लेबल नहीं लगाया गया।डिवीजन बेंच जिसमें चीफ जस्टिस नितिन जमदार और जस्टिस बसंत बालाजी शामिल थे, ने मौखिक रूप से कहा कि वकील ने किताब अदालत को...
बाढ़ के चलते पंजाब में जलाशयों से मलबा निकालने की अनुमति: हाईकोर्ट ने PIL को मंजूरी दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब में वर्तमान बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य में जलाशयों की डी-सेल्टिंग (मलवा निकालने) की अनुमति दी। यह आदेश उस PIL के संदर्भ में आया, जिसमें राज्य में कथित अवैध वाणिज्यिक रेत खनन का आरोप लगाया गया था।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी ने कहा,“राज्य में बाढ़ की वर्तमान स्थिति और न्याय के हित को ध्यान में रखते हुए। साथ ही पंजाब के अधिवक्ता जनरल द्वारा दी गई गारंटी को ध्यान में रखते हुए इस याचिका के परिणाम के अधीन रहते हुए, राज्य और उसके अधिकारियों को...




















