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सामुदायिक नेता का अपमान धर्म का अपमान नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनोज जरांगे के खिलाफ FIR रद्द की
सामुदायिक नेता का अपमान धर्म का अपमान नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनोज जरांगे के खिलाफ FIR रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी सामाजिक या राजनीतिक नेता को अपमानित करना या उनके प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करना उनके धर्म या धार्मिक भावनाओं के अपमान के समान नहीं माना जा सकता।अदालत ने औरंगाबाद में बेंच के रूप में सुनवाई करते हुए मनोज जरांगे-पाटिल, जो मराठा समुदाय के आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता हैं, उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया।न्यायमंडल के जस्टिस विभा कंकणवाड़ी और जस्टिस हिटेन वेनेगावकर ने कहा कि धारा 295A IPC का उद्देश्य धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान रोकना है न कि किसी...

पहचान और जन्म प्रमाण देने से पुलिस को व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा नहीं होता: बॉम्बे हाईकोर्ट
पहचान और जन्म प्रमाण देने से पुलिस को व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा नहीं होता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट के गोवा बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के पहचान प्रमाण (POI) जन्म प्रमाण (POB) और पते का प्रमाण (POA) पुलिस को देने से उसकी व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा नहीं होता।यह आदेश जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस ने सुनाया।मामला गोवा राज्य द्वारा दायर उस आवेदन से संबंधित था, जिसमें यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह यानिव बेनाइम @ अतला एक इजरायली नागरिक से संबंधित डेमोग्राफिक जानकारी प्रदान करे। मामला इसलिए भी अहम था, क्योंकि यह विदेशी नागरिक...

BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया पर आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के लिए अंतरिम आदेश पारित करेगा दिल्ली हाईकोर्ट
BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया पर आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के लिए अंतरिम आदेश पारित करेगा दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (25 सितंबर) को कहा कि वह सीनियर एडवोकेट और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता गौरव भाटिया से जुड़े सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और कथित मानहानिपूर्ण पोस्ट हटाने के लिए अंतरिम आदेश पारित करेगा।जस्टिस अमित बंसल ने सुनवाई के दौरान कहा,“हम आपत्तिजनक वीडियो हटवाएंगे। अगर नहीं हटाए जाते हैं तो आप उन्हें सूचित करें और फिर उन्हें हटाना होगा।”भाटिया ने स्वयं पेश होकर कहा कि प्रतिवादी लगातार उनकी छवि खराब करने वाले पोस्ट डाल रहे हैं।उन्होंने दलील दी,“यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या...

न्यायपालिका को विकसित भारत की सबसे बड़ी बाधा कहना चिंताजनक: सिनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने संजीव सन्याल की टिप्पणी पर जताई आपत्ति
"न्यायपालिका को 'विकसित भारत की सबसे बड़ी बाधा' कहना चिंताजनक": सिनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने संजीव सन्याल की टिप्पणी पर जताई आपत्ति

सिनियर एडवोकेट विकास पाहवा का पत्रसिनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सन्याल को पत्र लिखकर उनकी हाल की उस टिप्पणी पर कड़ा आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका को भारत के “विकसित राष्ट्र” बनने की सबसे बड़ी बाधा बताया था।23 सितंबर को लिखे पत्र में पाहवा ने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की रचनात्मक आलोचना स्वागत योग्य है, लेकिन सन्याल की यह टिप्पणी न्यायपालिका के प्रति “सामान्य और नकारात्मक” संदेश देती है, जबकि न्यायपालिका हमारे संवैधानिक ढांचे की...

संजय कपूर की संपत्ति पर विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट में प्रिया कपूर की सील्ड कवर अर्जी पर सवाल
संजय कपूर की संपत्ति पर विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट में प्रिया कपूर की सील्ड कवर अर्जी पर सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (25 सितंबर) को स्वर्गीय उद्योगपति संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर द्वारा दायर उस अर्जी पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने दिवंगत पति की संपत्ति और देनदारियों का विवरण सील्ड कवर में दाखिल करने की अनुमति मांगी। प्रिया कपूर का कहना है कि याचिका की सुनवाई से जुड़े दस्तावेज लगातार मीडिया में लीक हो रहे हैं और इससे वित्तीय असर पड़ रहा है।जस्टिस ज्योति सिंह ने कुछ देर सुनवाई के बाद प्रिय कपूर के वकील को कहा कि वह शुक्रवार को कोई ऐसा सुझाव दें, जिससे सभी पक्षों को संतुलित समाधान...

बॉलीवुड के बाद दिल्ली हाईकोर्ट अब तेलुगु एक्टर नागार्जुन के व्यक्तित्व अधिकारों की करेगी रक्षा
बॉलीवुड के बाद दिल्ली हाईकोर्ट अब तेलुगु एक्टर नागार्जुन के व्यक्तित्व अधिकारों की करेगी रक्षा

बॉलीवुड सितारों को व्यक्तित्व अधिकार की सुरक्षा देने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अब तेलुगु सुपरस्टार नागार्जुन अक्किनेनी को भी इसी तरह की राहत देने की बात कही है।जस्टिस तेजस कारिया ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,“जब आप यूआरएल पहचान सकते हैं तो सबसे अच्छा यही है कि उन्हें हटाने का निर्देश दिया जाएं आदेश पारित करेंगे।”नागार्जुन की ओर से एडवोकेट प्रवीन आनंद पेश हुए और अदालत को बताया कि एक्टर तीन तरह के उल्लंघनों से पीड़ित हैं।पहला, अश्लील वेबसाइटों पर उनकी छवि का दुरुपयोग दूसरा, बिना अनुमति के उनके...

ओबुलापुरम खनन मामले में जस्टिस सुधांशु धूलिया के नेतृत्व में समिति गठित
ओबुलापुरम खनन मामले में जस्टिस सुधांशु धूलिया के नेतृत्व में समिति गठित

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया को आंध्र प्रदेश राज्य के ओबुलापुरम खनन मामले में अवैध अतिक्रमण, खनन और अन्य अनधिकृत गतिविधियों की सीमा की जांच हेतु पट्टे वाले क्षेत्रों और आरक्षित वन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करने हेतु गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस मामले में कर्नाटक के पूर्व पर्यटन और अवसंरचना मंत्री गली जनार्दन रेड्डी भी अभियुक्तों में से एक हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी.आर. गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने मिलकर...

छत्तीसगढ़ में फर्जी मुठभेड़ में मारे गए व्यक्ति का अंतिम संस्कार रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
छत्तीसगढ़ में 'फर्जी मुठभेड़' में मारे गए व्यक्ति का अंतिम संस्कार रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

छत्तीसगढ़ में एक कथित फर्जी मुठभेड़ में राज्य के अधिकारियों द्वारा शव के अंतिम संस्कार को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई।यह मामला जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया।अदालत के एक प्रश्न पर मामले का उल्लेख करने वाले वकील ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता ने पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, तत्काल सुनवाई की अनुमति नहीं दी गई और आशंका है कि प्रतिवादी शव का अंतिम संस्कार कर देंगे।जब वकील ने दावा...

भरण-पोषण के दायित्व का उल्लंघन होने पर बच्चे को माता-पिता की संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
भरण-पोषण के दायित्व का उल्लंघन होने पर बच्चे को माता-पिता की संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के अंतर्गत न्यायाधिकरण को सीनियर सिटीजन की संपत्ति से बच्चे को बेदखल करने का आदेश देने का अधिकार है, यदि सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण के दायित्व का उल्लंघन होता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने 80 वर्षीय व्यक्ति और उनकी 78 वर्षीय पत्नी द्वारा दायर अपील स्वीकार की और बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें उनके बड़े बेटे के खिलाफ पारित बेदखली के निर्देश को अमान्य कर दिया गया...

स्कूल ग्राउंड में जारी रहेगा रामलीला उत्सव, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
स्कूल ग्राउंड में जारी रहेगा रामलीला उत्सव, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद स्थित एक स्कूल ग्राउंड में चल रहे रामलीला समारोह पर रोक लगा दी गई थी।यह देखते हुए कि उत्सव शुरू हो चुका है, कोर्ट ने फ़िरोज़ाबाद के टूंडला स्थित जिला परिषद विद्यालय के खेल के मैदान में रामलीला समारोह जारी रखने की अनुमति इस शर्त पर दी कि स्टूडेंट को कोई असुविधा न हो।यह देखते हुए कि उक्त मैदान का उपयोग लगभग 100 वर्षों से उत्सवों के लिए किया जाता रहा है, कोर्ट ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह ज़िला प्रशासन...

पीली मटर का शुल्क-मुक्त आयात भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है: जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
'पीली मटर का शुल्क-मुक्त आयात भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है:' जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (25 सितंबर) को जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्र सरकार की बिना किसी शुल्क के पीली दाल के आयात की अनुमति देने की नीति को चुनौती दी गई।जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एनके सिंह की पीठ किसान संगठन 'किसान महापंचायत' द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें तर्क दिया गया कि यह नीति भारतीय कृषकों को नुकसान पहुंचा रही है।याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इस नीति के परिणामस्वरूप सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, मूंग और अरहर...

क्या आप बुद्धिमत्ता को रोकना चाहते हैं: 10 वर्षीय स्टूडेंट के कक्षा 9 में एडमिशन पर CBSE की अपील में एमपी हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगी नीति
क्या आप बुद्धिमत्ता को रोकना चाहते हैं: 10 वर्षीय स्टूडेंट के कक्षा 9 में एडमिशन पर CBSE की अपील में एमपी हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगी नीति

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को 10 वर्षीय स्टूडेंट को कक्षा 9 में अस्थायी एडमिशन दिए जाने के खिलाफ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की अपील पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि प्रतिभाशाली बच्चों को लेकर उनकी क्या नीति है।यह मामला उस समय उठा जब सिंगल बेंच ने एक पिता की याचिका पर आदेश देते हुए CBSE को स्टूडेंट को कक्षा 9 में अस्थायी एडमिशन देने पर विचार करने को कहा था। पिता ने दावा किया कि उनके पुत्र ने कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई पूरी की। हालांकि, उसे कक्षा 9 में एडमिशन देने से इनकार कर...

रेलवे भूमि पर बने दुर्गा पंडाल मामले में एमपी हाईकोर्ट का निर्देश, याचिकाकर्ता आयोजकों को बनाए पक्षकार
रेलवे भूमि पर बने दुर्गा पंडाल मामले में एमपी हाईकोर्ट का निर्देश, याचिकाकर्ता आयोजकों को बनाए पक्षकार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (24 सितंबर) को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि रेलवे भूमि पर कथित रूप से अवैध रूप से बनाए गए दुर्गा पंडाल मामले में याचिकाकर्ता आयोजकों को पक्षकार बनाए।यह याचिका जबलपुर के ग्वारीघाट क्षेत्र में सार्वजनिक और रेलवे भूमि पर अवैध ढांचे खड़े करने के खिलाफ सीनियर सिटीजन द्वारा दायर की गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुरानी बस्ती और ब्रह्मऋषि कॉलोनी जाने वाली सड़क पर तथा रामलला मंदिर चौक स्थित खाली पड़ी रेलवे भूमि पर पंडाल बनाया गया।याचिका में यह भी उल्लेख...

अपील के अधिकार पर डिक्री राशि जमा कराने की शर्त नहीं लगाई जा सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
अपील के अधिकार पर डिक्री राशि जमा कराने की शर्त नहीं लगाई जा सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि अपील करने के अधिकार को डिक्री की राशि जमा कराने जैसी शर्त से बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि विलंब को माफ करने के लिए धारा 5 सीमांकन अधिनियम (Limitation Act) के तहत जो आवेदन दायर होता है, उस पर सुनवाई के दौरान अपीलीय अदालत इस प्रकार की शर्त नहीं लगा सकती।मामला उस समय सामने आया जब याचिकाकर्ता ने सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96 के तहत निचली अदालत द्वारा पारित धन संबंधी डिक्री को चुनौती दी। अपील निर्धारित समयसीमा से देरी...

क्या न्यायिक अधिकारी के अनुभव को जिला जज की सीधी नियुक्ति के लिए 7 साल की प्रैक्टिस में गिना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई [दूसरा दिन]
क्या न्यायिक अधिकारी के अनुभव को जिला जज की सीधी नियुक्ति के लिए '7 साल की प्रैक्टिस' में गिना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई [दूसरा दिन]

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ में इस मुद्दे पर सुनवाई जारी रखी कि क्या एक न्यायिक अधिकारी, जिसने बार में 7 साल पूरे कर लिए हैं, बार में रिक्त पद पर जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने का हकदार है।याचिकाकर्ताओं ने आज इस बात पर ज़ोर दिया कि एक संभावित उम्मीदवार द्वारा वकालत छोड़ने के पीछे कई कारक देखे जाने चाहिए; सिर्फ़ वकालत छोड़ने का मतलब यह नहीं हो सकता कि उम्मीदवार में जिला न्यायाधीश के रूप में विचार किए जाने के लिए पर्याप्त योग्यता नहीं है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस एमएम...

अरविंद केजरीवाल को 10 दिनों के भीतर मिल जाएगा आवास: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में बताया
अरविंद केजरीवाल को 10 दिनों के भीतर मिल जाएगा आवास: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में बताया

केंद्र सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में अरविंद केजरीवाल को उनके पद को देखते हुए 10 दिनों के भीतर "उपयुक्त" आवासीय आवास आवंटित किया जाएगा।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस सचिन दत्ता के समक्ष यह दलील दी।जस्टिस दत्ता ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए एक उचित आदेश पारित किया जाएगा।मेहता ने कहा कि इस मुद्दे का समाधान हो गया और केजरीवाल को लागू नियमों के अनुसार "कानून के अनुसार" एक उपयुक्त आवासीय आवास...

वैवाहिक विवादों में आपराधिक शिकायतों की गहन जांच की आवश्यकता: सुप्रीम कोर्ट ने देवर के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न का मामला खारिज किया
'वैवाहिक विवादों में आपराधिक शिकायतों की गहन जांच की आवश्यकता': सुप्रीम कोर्ट ने देवर के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न का मामला खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि वैवाहिक विवादों से उत्पन्न होने वाले आपराधिक मामलों की व्यावहारिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए अत्यंत सावधानी से जांच की जानी चाहिए।एक पत्नी द्वारा अपने देवर के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न, घरेलू क्रूरता आदि के आरोपों के साथ दर्ज कराई गई FIR खारिज करते हुए अदालत ने कहा:"अदालतों को शिकायतों से निपटने में सावधानी और सतर्कता बरतनी चाहिए और वैवाहिक विवादों से निपटते समय व्यावहारिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखना चाहिए, जहां न्याय की विफलता और कानूनी प्रक्रिया के...