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गुजरात हाईकोर्ट ने पति की सजा बरकरार रखी, पत्नी की हत्या को आत्महत्या दिखाने की साजिश साबित
गुजरात हाईकोर्ट ने पति की सजा बरकरार रखी, पत्नी की हत्या को आत्महत्या दिखाने की साजिश साबित

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रायल कोर्ट द्वारा पति को दी गई सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या की और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की।यह मामला 20 सितंबर 2014 का है, जब पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर सूती दोरी/रस्सी से पत्नी का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने खुद को बचाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए घटना स्थल को इस तरह तैयार किया...

एक्टर मोहनलाल के पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा पर दिल्ली हाईकोर्ट देगा अंतरिम आदेश
एक्टर मोहनलाल के पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा पर दिल्ली हाईकोर्ट देगा अंतरिम आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मलयालम अभिनेता मोहनलाल के पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश पारित करने का संकेत दिया।जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनवाई के दौरान एक्टर की उस अर्जी को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने नए प्रतिवादियों को मुकदमे में पक्षकार बनाने की मांग की थी।अदालत ने एक्टर मोहनलाल को निर्देश दिया कि वे कथित रूप से उल्लंघन करने वाले लिंक की सूची प्रतिवादियों के साथ साझा करें ताकि मामले पर आगे विचार किया जा सके।गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में अदालत ने एक्टर को अपनी अंतरिम अर्जी वापस लेने की...

रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था ढह जाएगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर-पुलिस गठजोड़ पर जताई चिंता, DGP को दिए निर्देश
'रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था ढह जाएगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर-पुलिस गठजोड़ पर जताई चिंता, DGP को दिए निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में पुलिस पर गैंगस्टर को संरक्षण देने के आरोपों को चिंताजनक संस्थागत विफलता करार दिया। अदालत ने कहा कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही उसे तोड़ने लगें तो जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी के इशारे पर गैंगस्टर उन्हें और उनके परिवार को धमका रहा है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था के पूरी तरह ढहने...

एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की
एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की पेंशन केवल एक घटना में अनियमितता के आधार पर नहीं रोकी जा सकती। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि कर्मचारी का पूरा सेवा काल गंभीर रूप से असंतोषजनक रहा हो या उसने गंभीर कदाचार किया हो।चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ का फैसला बरकरार रखा।मामला जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर से जुड़ा था जिन पर माइक्रोलिफ्ट योजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे।...

समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत
समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत

राजस्थान हाइकोर्ट ने करुणामूलक नियुक्ति (कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि पहली अर्जी समय पर दी गई हो तो बाद में देरी का हवाला देकर दूसरी अर्जी खारिज नहीं की जा सकती।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया और राज्य को निर्देश दिया कि 90 दिनों के भीतर मामले पर दोबारा विचार कर उचित पद पर नियुक्ति दी जाए।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 2015 में करुणामूलक नियुक्ति के लिए आवेदन...

हाईकोर्ट ने किसी भी बात पर चर्चा नहीं की: दहेज हत्या मामले में यांत्रिक तरीके से ज़मानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की
'हाईकोर्ट ने किसी भी बात पर चर्चा नहीं की': दहेज हत्या मामले में यांत्रिक तरीके से ज़मानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की कि उसने कथित दहेज हत्या के एक मामले में पति को ज़मानत देने का आदेश बिना सोचे-समझे (यांत्रिक तरीके से) पारित किया।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने पाया कि हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता और रिकॉर्ड पर मौजूद उन सबूतों पर विचार किए बिना ज़मानत देकर गलती की, जिनसे पहली नज़र में आरोपी-पति की संलिप्तता का पता चलता है।कोर्ट ने कहा,"हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को ज़मानत पर रिहा करने का जो आदेश दिया गया, वह पूरी तरह से गलत है। दहेज हत्या जैसे...

अगर मुद्दों को तय करने से पहले क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति नहीं उठाई जाती तो उसे छोड़ दिया गया माना जाएगा: दिल्ली हा कोर्ट ने वाद-पत्र लौटाने का आदेश रद्द किया
अगर मुद्दों को तय करने से पहले क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति नहीं उठाई जाती तो उसे छोड़ दिया गया माना जाएगा: दिल्ली हा कोर्ट ने वाद-पत्र लौटाने का आदेश रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ़ किया कि क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति को तब छोड़ दिया गया माना जाएगा, अगर उसे शुरुआती चरण में, खासकर मुद्दों को तय करने से पहले नहीं उठाया जाता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें इसी आधार पर वाद-पत्र (Plaint) लौटा दिया गया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस तरह वादी (Plaintiff) द्वारा दायर एक अपील को मंज़ूरी दी। इस अपील में CPC के आदेश VII नियम 10 के तहत पारित आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत ट्रायल कोर्ट ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर...

कानूनी शादी में यौन संबंध के लिए सहमति का कोई महत्व नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ IPC की धारा 377 के तहत आरोप रद्द किए
'कानूनी शादी में यौन संबंध के लिए सहमति का कोई महत्व नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ IPC की धारा 377 के तहत आरोप रद्द किए

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पति की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की, जिसमें उसने यौन शोषण और दहेज उत्पीड़न के आरोप में दर्ज FIR रद्द करने की मांग की। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि बलात्कार से जुड़े प्रावधानों में दी गई छूटों को देखते हुए एक पति द्वारा अपनी वयस्क पत्नी के साथ किया गया कोई भी यौन संबंध या यौन कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए शादी के दायरे में सहमति का पहलू कानूनी तौर पर महत्वहीन है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने यह टिप्पणी की:"...IPC की धारा 375 के अपवाद 2 (Exception 2)...

ऊपरी अदालतों के आदेशों का सम्मान बुनियादी सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने रेंट अथॉरिटी को एससी द्वारा पुष्ट बेदखली आदेश पर फिर से विचार करने के लिए फटकारा
'ऊपरी अदालतों के आदेशों का सम्मान बुनियादी सिद्धांत': सुप्रीम कोर्ट ने रेंट अथॉरिटी को एससी द्वारा पुष्ट बेदखली आदेश पर फिर से विचार करने के लिए फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की रेंट कंट्रोल अथॉरिटी (किराया नियंत्रण प्राधिकरण) को फटकार लगाई। अथॉरिटी ने किरायेदार की बेदखली की पुष्टि करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की और किरायेदार के आवेदन पर मामले को फिर से खोल दिया, जबकि यह मामला पहले ही अंतिम रूप ले चुका था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें किरायेदार की बेदखली का मामला अंतिम रूप ले चुका था और सुप्रीम कोर्ट तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके बावजूद, रेंट कंट्रोल अथॉरिटी...

आरोपी को आरोप पढ़कर सुनाए जाने पर आरोप तय करते समय ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होने पर ट्रायल रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
आरोपी को आरोप पढ़कर सुनाए जाने पर आरोप तय करते समय ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होने पर ट्रायल रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने वाली ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होना एक ठीक किया जा सकने वाला प्रक्रियागत दोष है और इससे ट्रायल रद्द नहीं होता, खासकर तब जब आरोपी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के बारे में ठीक से बताया गया हो और वे उन्हें समझ गए हों।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,“आरोप पत्र पर दस्तखत न होने से जुड़ा दोष कोई गैर-कानूनी काम नहीं है। यह ज़्यादा से ज़्यादा CrPC की धारा 215 और 464 के दायरे में आने वाली एक ठीक की जा सकने वाली प्रक्रियागत अनियमितता है।...

किसी एक धर्म को एकमात्र सच्चा धर्म बताना गलत, इससे दूसरे धर्मों का अपमान होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IPC की धारा 295A के तहत दर्ज केस रद्द करने से इनकार किया
किसी एक धर्म को 'एकमात्र सच्चा धर्म' बताना गलत, इससे दूसरे धर्मों का अपमान होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IPC की धारा 295A के तहत दर्ज केस रद्द करने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि धर्मनिरपेक्ष भारत में किसी भी व्यक्ति के लिए यह दावा करना 'गलत' है कि कोई विशेष धर्म ही "एकमात्र सच्चा धर्म" है, क्योंकि ऐसा करने का मतलब है कि वह दूसरे धर्मों का 'अपमान' कर रहा है, और पहली नज़र में इस पर IPC की धारा 295A लागू होती है।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने यह टिप्पणी रेवरेंड फादर विनीत विंसेंट परेरा द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए की। परेरा पर IPC की धारा 295A [जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक...

सह-मालिक की सहमति न होने पर बिजली कनेक्शन देने से मना नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
सह-मालिक की सहमति न होने पर बिजली कनेक्शन देने से मना नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी संपत्ति पर मालिकाना हक या कब्ज़े के अधिकार का सवाल, किसी ऐसे उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन देने से जुड़ा नहीं है, जो अन्यथा इसके लिए हकदार है।कोर्ट ने आगे कहा कि कोई कंपनी किसी उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन देने के लिए संपत्ति के अन्य सह-मालिकों की सहमति पर ज़ोर नहीं दे सकती।मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता ने एक ज़मीन के लिए बिजली कनेक्शन मांगा था, लेकिन बिजली कंपनी ने एक सूचना भेजकर कहा कि उस ज़मीन पर स्थित एक कुआं किसी अन्य व्यक्ति की भी संयुक्त संपत्ति है, इसलिए आगे...

पटना हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट भर्ती में वेटलिस्टेड उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश रद्द किया, कहा- खामोश बैठने वाले समानता का दावा नहीं कर सकते
पटना हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट भर्ती में वेटलिस्टेड उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश रद्द किया, कहा- 'खामोश बैठने वाले' समानता का दावा नहीं कर सकते

पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो उम्मीदवार चयन पैनल के अस्तित्व में रहने के दौरान अपने अधिकारों का दावा करने में विफल रहते हैं, वे बाद में उन दूसरों के साथ समानता की मांग नहीं कर सकते, जिन्होंने समय पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने दोहराया कि रिट राहत में देरी और लापरवाही के कारण रोक है और अनुच्छेद 14 "नकारात्मक समानता" के आधार पर लाभों के विस्तार की अनुमति नहीं देता।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की एक खंडपीठ (Division Bench) C.W.J.C. संख्या 10521/2022 में एक...

पत्नी को प्रेमी के साथ अंतरंग अवस्था में देखना गंभीर और अचानक उकसावा: गुजरात हाईकोर्ट ने 2001 की गैर-इरादतन हत्या की सज़ा बरकरार रखी
पत्नी को प्रेमी के साथ अंतरंग अवस्था में देखना गंभीर और अचानक उकसावा: गुजरात हाईकोर्ट ने 2001 की गैर-इरादतन हत्या की सज़ा बरकरार रखी

गुजरात हाईकोर्ट ने 2001 का ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें एक पति को गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) का दोषी ठहराया गया। इस पति ने अपनी पत्नी पर तब हमला किया, जब उसने उसे अपने ही घर में किसी दूसरे आदमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इसे "गंभीर और अचानक उकसावा" माना जा सकता है।ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह मामला IPC की धारा 304-भाग II के अंतर्गत आता है, क्योंकि पति पर अपनी पत्नी की मौत का इरादा या जानकारी होने का आरोप नहीं लगाया जा...

MUDA जमीन घोटाला: सीएम सिद्धारमैया को राहत देने वाली बी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
MUDA जमीन घोटाला: सीएम सिद्धारमैया को राहत देने वाली बी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) जमीन घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा कदम उठाते हुए बी रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) स्वीकार करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस एस सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी बीएम पार्वती, रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी, भूमि मालिक देवराजु, प्रवर्तन निदेशालय और लोकायुक्त पुलिस को नोटिस जारी किया।यह याचिका स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर की गई, जिसमें 28 जनवरी को ट्रायल कोर्ट...

भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी को जेल कंप्यूटर उपयोग की अनुमति पर विचार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी को जेल कंप्यूटर उपयोग की अनुमति पर विचार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग को साक्ष्यों की समीक्षा के लिए जेल में कंप्यूटर उपयोग की अनुमति देने के सवाल पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की पीठ ने गाडलिंग को निजी लैपटॉप इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, लेकिन यह संकेत दिया कि जेल में उपलब्ध कंप्यूटर के उपयोग पर विचार किया जा सकता है।अदालत ने कहा,“लैपटॉप के उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे जेल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं और यह गलत...