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डोमिसाइल में तकनीकी गलती पर उम्मीदवार को नहीं किया जा सकता बाहर: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एसएससी अभ्यर्थी को राहत देते हुए कहा कि डोमिसाइल से जुड़ी एक मामूली तकनीकी त्रुटि को तथ्यों को छिपाने के समान नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि सख्त नियमों का यांत्रिक तरीके से प्रयोग कर किसी योग्य उम्मीदवार का भविष्य खराब नहीं किया जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अभ्यर्थी की उम्मीदवारी खारिज करने का आदेश रद्द किया।मामला कांस्टेबल (GD) भर्ती परीक्षा 2018 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने ऑनलाइन आवेदन भरा था, लेकिन साइबर कियोस्क पर फॉर्म...
पत्नी के चरित्र पर शक मात्र से आत्महत्या के लिए उकसाना साबित नहीं होता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पति को बरी किया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पत्नी के चरित्र पर शक करना या सामान्य वैवाहिक विवाद, बिना किसी ठोस उकसावे या सहायता के आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर पति को बरी किया।जस्टिस आशीष नैथानी ने सेशन कोर्ट, उधम सिंह नगर का फैसला रद्द किया, जिसमें पति को भारतीय दंड संहिता धारा 306 के तहत दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई गई थी।मामला 15 सितंबर, 2004 का है, जब आरोपी की पत्नी ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अभियोजन का आरोप था...
उधारकर्ता की सहमति बिना तीसरे पक्ष को ऋण देने पर बैंक दोषी: उपभोक्ता आयोग
कुपवाड़ा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जम्मू-कश्मीर बैंक को सेवा में कमी (deficiency in service) का दोषी ठहराया। आयोग ने पाया कि बैंक ने शिकायतकर्ता की सहमति के बिना ऋण राशि का एक हिस्सा तीसरे पक्ष को जारी कर दिया, जो पूरी तरह अवैध और मनमाना कदम था।आयोग, जिसकी अध्यक्षता पीरज़ादा क़ौसर हुसैन (अध्यक्ष) और सदस्य सुश्री नायला यासीन ने की, ने यह भी कहा कि बिना वैध वितरण के पूरे ऋण पर EMI वसूलना और रिकवरी प्रक्रिया शुरू करना सेवा में कमी के दायरे में आता है।मामले के...
यूपी में 80% लापता लोग खोजे गए: नई रिपोर्ट पर हाईकोर्ट, पहले का 'चौंकाने वाला' आंकड़ा गलत तरीके से पेश हुआ
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश पुलिस ने ताजा आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि 1 जनवरी 2024 से 17 मार्च 2026 के बीच राज्य में 1,19,070 लोग लापता हुए, जिनमें से 95,061 (करीब 80%) को खोज लिया गया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ इस मामले में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।अदालत ने नए आंकड़ों पर गौर करते हुए कहा कि पहले जो आंकड़े पेश किए गए, वे सही तरीके से अदालत तक नहीं पहुंचे थे।खंडपीठ ने टिप्पणी की, “प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि 29.01.2026 के...
पेंशन व रिटायरमेंट लाभ न देने पर सख्ती, झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन अधिकारी का वेतन रोका
झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पलामू के जिला परिवहन पदाधिकारी का वेतन रोकने का निर्देश दिया। अदालत ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया, क्योंकि रिटायर कर्मचारी को अब तक पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ नहीं दिए गए।जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका उस आदेश से जुड़ी थी, जिसमें 23 अक्टूबर 2024 को अदालत ने रिटायर लिपिक को पेंशन, सभी रिटायरमेंट लाभ, 6 प्रतिशत ब्याज और 50 हजार रुपये खर्च देने का निर्देश दिया था।याचिकाकर्ता 31 मार्च 2011 को रिटायर हुए, लेकिन विभाग...
सिविल जज भर्ती में SC अभ्यर्थियों के लिए 45% न्यूनतम अंक शर्त में ढील पर विचार करें: सुप्रीम कोर्ट ने P&H हाईकोर्ट से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती परीक्षा में अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए 45% न्यूनतम अंकों की शर्त में ढील देने के अनुरोध पर “सहानुभूतिपूर्वक विचार” करे।यह मामला अनुसूचित जाति वर्ग की अभ्यर्थी दीक्षा काल्सन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। उन्होंने कहा कि वह केवल 1.9 अंकों से निर्धारित कट-ऑफ से पीछे रह गईं।याचिका के अनुसार, काल्सन ने 1100 में से 493.10 अंक प्राप्त किए, जबकि SC श्रेणी...
पिता-बेटी को 'सच्चाई जानने का अधिकार': भरण-पोषण विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने DNA टेस्ट का दिया आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक नाबालिग बच्ची को धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण (maintenance) देने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि पहले बच्ची की वास्तविक पितृत्व (biological parentage) की पुष्टि के लिए DNA टेस्ट कराया जाना आवश्यक है।जस्टिस मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में पिता और बेटी दोनों को जैविक सच्चाई जानने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि वास्तविक पिता की पहचान स्पष्ट नहीं होगी, तो...
बाइपोलर डिसऑर्डर मात्र से नहीं मिलेगा स्थानांतरण में छूट, बेंचमार्क दिव्यांगता जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय संगठन की एक शिक्षिका के स्थानांतरण को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि केवल बाइपोलर डिसऑर्डर होने से मेडिकल आधार पर छूट नहीं मिल सकती, जब तक कि बेंचमार्क दिव्यांगता का प्रमाण न हो।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज की। अधिकरण ने भी शिक्षिका के दिल्ली से बाबूगढ़ छावनी स्थित केंद्रीय विद्यालय में स्थानांतरण में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।याचिकाकर्ता जो केंद्रीय विद्यालय संगठन...
22 बार सुनवाई के बावजूद आदेश की अवहेलना, एमपी हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दो माह की सजा सुनाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश का बार-बार पालन न करने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो माह की साधारण कारावास की सजा सुनाई।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला 22 बार सूचीबद्ध हुआ फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया।जस्टिस प्रणय वर्मा की पीठ ने कहा,“याचिका 22वीं बार सूचीबद्ध हुई और अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया। 06.02.2026 के आदेश के अनुसार प्रतिवादी अवमानना के दोषी है। उन्हें दो माह के साधारण कारावास की सजा दी जाती है।”हालांकि, अदालत...
डंकी रूट से मानव तस्करी मामले में आरोपियों को राहत नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डंकी रूट के जरिए अवैध तरीके से लोगों को विदेश भेजने वाले मानव तस्करी गिरोह से जुड़े आरोपियों को नियमित जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है। इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हैं। इसलिए आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती।जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की पीठ आरोपियों की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष जज (NIA) द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।मामले में आरोप है कि आरोपी लोगों को कानूनी तरीके से विदेश...
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जज द्वारा मध्यस्थता पर उठे सवालों वाली जनहित याचिका निपटाई, याचिकाकर्ता को समिति के पास जाने का निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जजों द्वारा स्वयं मध्यस्थता करने और बाद में उसी मामले की सुनवाई करने की प्रथा को लेकर दायर जनहित याचिका का निपटारा किया।हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय पर उचित होगा कि याचिकाकर्ता संबंधित जजों की समिति के समक्ष अपनी बात रखे।चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता फैमिली कोर्ट्स से जुड़े मामलों को देखने वाली समिति के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करे। अदालत ने यह भी कहा कि समिति याचिकाकर्ता के सुझावों पर शीघ्रता से...
धर्म परिवर्तन के बाद कब मिल सकता है SC दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने तय किए सख्त मानदंड
एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में परिवर्तित होता है, तो वह तुरंत अनुसूचित जाति का दर्जा खो देता है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसा व्यक्ति पुनः हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में वापस आता है, तो उसे SC दर्जा दोबारा पाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को साबित करना होगा:यह स्पष्ट प्रमाण होना चाहिए कि व्यक्ति मूल रूप से संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत अधिसूचित जाति से संबंधित...
बच्चे की कस्टडी पिता के पास हो तो हैबियस कॉर्पस याचिका नहीं चलेगी: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि जब बच्चा अपने प्राकृतिक अभिभावक (नेचुरल गार्जियन) के पास हो और उसके जीवन या सुरक्षा को कोई तात्कालिक खतरा न हो तो ऐसे मामलों में हैबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य नहीं होती।जस्टिस सुमीत गोयल ने यह फैसला एक मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उसने अपनी 9 वर्षीय बेटी की कस्टडी पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।पूरा मामलामां ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी को पिता और उसके परिवार ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। उसने कहा कि मां होने...
विदेश में रह रहे आरोपी को भगोड़ा घोषित करना गलत: हाईकोर्ट ने प्रोक्लेमेशन आदेश और LOC रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एक व्यक्ति के खिलाफ जारी प्रोक्लेमेशन आदेश और लुकआउट सर्कुलर (LOC) रद्द किया।अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने विदेश में रह रहे आरोपी को समन भेजने का कोई ठोस प्रयास ही नहीं किया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,“जब जांच एजेंसी को पता था कि आरोपी ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, तब भी वहां उसके पते पर समन या वारंट भेजने की कोई कोशिश नहीं की गई। विदेश मंत्रालय या अन्य वैधानिक माध्यमों से भी सेवा कराने का प्रयास नहीं हुआ।”हाईकोर्ट ने पाया कि दंड...
AI से बने नकली फ़ैसलों का हवाला देने का ख़तरा सिर्फ़ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैला हुआ: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि AI (आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस) से बने असल में मौजूद न होने वाले फ़ैसलों का हवाला देने का चलन एक "ख़तरा" बन गया, जो न सिर्फ़ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में तेज़ी से फैल रहा है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सावधान रहने की चेतावनी दी।ये टिप्पणियां जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने एक कंपनी के डायरेक्टर की तरफ़ से दायर स्पेशल लीव पिटीशन (विशेष अनुमति याचिका) पर सुनवाई करते हुए कीं। इस याचिका में डायरेक्टर ने बॉम्बे हाईकोर्ट की उन टिप्पणियों को हटाने की...
गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकालना अपने आप में नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हकदार नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि अगर यह पाया जाता है कि किसी को गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे अपने आप ही नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हक मिल जाएगा।जस्टिस शैल जैन ने इसलिए प्रोप्राइटरशिप फर्म द्वारा गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को नौकरी पर वापस रखने और पिछले वेतन देने से मना किया। उन्होंने इसके लिए काफी समय बीत जाने का हवाला दिया, खासकर तब जब कई कर्मचारी पहले ही रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच चुके थे और उन्होंने अपनी कानूनी...
बाद में दी गई पर्यावरण मंज़ूरी से, जो प्रोजेक्ट्स मंज़ूर नहीं हैं, वे भी राज्य के दखल तक चलते रहते हैं: सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चिंता जताई कि अगर बाद में पर्यावरण मंज़ूरी देने की इजाज़त दी जाती है तो पर्यावरण के लिए नुकसानदेह प्रोजेक्ट्स, राज्य के दखल तक चलते रहेंगे।कोर्ट ने कहा कि इसके विपरीत, अगर पहले से पर्यावरण मंज़ूरी लेना ज़रूरी माना जाए तो अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी होगी कि वे बिना मंज़ूरी के की जा रही किसी भी गतिविधि को रोकें।जस्टिस बागची ने कहा,“जब कानून बनते हैं तो वे सबके लिए एक जैसे होते हैं। हालांकि, उन्हें लागू एक जैसा नहीं किया जाता। अगर ओएम (ऑफिस मेमोरेंडम) में कहा गया कि इसे...
'देशभक्ति ज़बरदस्ती नहीं हो सकती': वंदे मातरम विवाद पर संजय हेगड़े ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, CJI ने पूछा- 'क्या राष्ट्रगान के लिए भी नहीं?'
स्कूलों में राष्ट्रगीत-वंदे मातरम गाने के संबंध में MHA के सर्कुलर की आलोचना करते हुए सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने आज सुप्रीम कोर्ट के सामने व्यक्तिगत अंतरात्मा की रक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया और तर्क दिया कि "देशभक्ति ज़बरदस्ती नहीं हो सकती"।इस संबंध में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सीनियर वकील से सवाल किया कि क्या यही तर्क राष्ट्रगान के संदर्भ में भी लागू होता है।हेगड़े ने जवाब दिया, "देशभक्ति अपने आप में ज़बरदस्ती नहीं हो सकती। अगर संविधान का कोई मतलब है, जहां तक किसी व्यक्ति का...
बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के कारण प्रॉपर्टी डील्स में समय-सीमा का पालन ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट ने 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' का आदेश देने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिक्री के एक कथित समझौते के 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' (समझौते को लागू करने) का आदेश देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की कि प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के कारण प्रॉपर्टी के लेन-देन में समय-सीमा का पालन करना बहुत ज़रूरी हो जाता है।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच ने कहा,"दिल्ली जैसे बड़े शहरों में, जहां प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार और काफ़ी तेज़ी से बढ़ती रहती हैं, प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन की व्यावसायिक सच्चाई यह है कि समझौते की शर्तों को पूरा करने में समय की...
शराब का कारोबार मौलिक अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डिस्टिलरी के लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसले सही ठहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज़ के कई लाइसेंस सस्पेंड करने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है और यह सख्त कानूनी नियमों के अधीन है।जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने कहा:"पहली बात तो यह कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है। दूसरी बात यह कि जब आनुपातिकता (Proportionality) की कसौटी पर इसे परखा जाता है तो उस आधार पर भी अथॉरिटी का फैसला एक्साइज एक्ट और उसके तहत बनाए गए नियमों के दायरे में है, इसलिए इसमें कोई गलती नहीं निकाली जा...




















