राजस्थान हा कोर्ट ने कर्मचारी की 5 साल की गैरहाज़िरी को अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा मानने वाले ऑर्डर पर लगाई रोक
Shahadat
24 Feb 2026 8:17 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस ऑर्डर पर रोक लगाई, जिसमें एक कर्मचारी की लंबे समय तक गैरहाज़िरी को अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा माना गया। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को हो रही मेडिकल दिक्कतों को देखते हुए इस मामले में अंतरिम सुरक्षा की ज़रूरत है।
जस्टिस समीर जैन एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें राज्य के उस ऑर्डर को चुनौती दी गई। इसमें याचिकाकर्ता की लगभग 5 साल तक जानबूझकर गैरहाज़िर रहने को नौकरी से अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा माना गया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने कई छुट्टी की एप्लीकेशन दी थीं, जिन्हें या तो बिना सैलरी के मंज़ूर कर लिया गया या बिना बताए रिजेक्ट कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कृष्णकांत बी. परमार बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य के केस का ज़िक्र किया, जिसमें यह माना गया कि बिना इजाज़त के गैरहाज़िरी ऐसे ज़रूरी कारणों से जो कर्मचारियों के कंट्रोल से बाहर हों, उसे जानबूझकर गैरहाज़िर रहना नहीं माना जा सकता।
यह बताया गया कि उसकी माँ के कैंसर के डायग्नोसिस और इलाज के कारण, जिसमें लगभग 80 कीमो थेरेपी शामिल थीं, पिटीशनर को अपने कंट्रोल से बाहर के कारणों से गैरहाज़िर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने कहा,
“ऊपर बताई गई बातों और याचिकाकर्ता की माँ को हुई मेडिकल दिक्कतों पर विचार करने के बाद यह कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा है कि अंतरिम राहत देने के लिए सभी ज़रूरी बातें, यानी, पहली नज़र में मामला, सुविधा का संतुलन और अंतरिम राहत न देने की स्थिति में ऐसा नुकसान जिसकी भरपाई न हो सके, इस स्टेज पर, पिटीशनर के पक्ष में हैं।”
इसलिए कोर्ट ने अगली सुनवाई तक उस ऑर्डर पर रोक लगाई और राज्य को याचिकाकर्ता को अपनी ड्यूटी फिर से शुरू करने की इजाज़त देने का निर्देश दिया।
Title: Vikash Gupta v District and Sessions Judge

