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अनधिकृत निर्माण के बहाने याचिकाओं के दुरुपयोग पर दिल्ली हाईकोर्ट की चेतावनी, याचिकाकर्ता पर 50,000 रुपये का जुर्माना
अनधिकृत निर्माण के बहाने याचिकाओं के दुरुपयोग पर दिल्ली हाईकोर्ट की चेतावनी, याचिकाकर्ता पर 50,000 रुपये का जुर्माना

दिल्ली हाईकोर्ट ने कल अनधिकृत निर्माण के बहाने फर्जी याचिकाएं दायर करने वालों के खिलाफ चेतावनी दी और स्पष्ट किया कि ऐसी याचिकाएं केवल वही व्यक्ति दायर कर सकते हैं जो सीधे प्रभावित हों।जस्टिस मिनी पुष्करना ने एक याचिकाकर्ता पर 50,000 रुपये जुर्माना लगाया क्योंकि उसने जमिया नगर क्षेत्र में स्थित उस संपत्ति का अधिकार या कब्जा पाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, जिस पर उसने अनधिकृत निर्माण का दावा किया था। इस राशि को दिल्ली हाईकोर्ट बार क्लर्क एसोसिएशन में जमा करना होगा। कोर्ट ने कहा, “हम पहले भी कई...

धन वितरण टिप्पणी | दुश्मनी बढ़ाने का कोई इरादा नहीं: यूपी कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका खारिज की
धन वितरण टिप्पणी | दुश्मनी बढ़ाने का कोई इरादा नहीं: यूपी कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका खारिज की

बरेली की स्पेशल सांसद/विधायक अदालत ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज की, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ धन वितरण पर उनके चुनावी भाषण को लेकर FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था।बरेली के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज देवाशीष ने मजिस्ट्रेट के 27 अगस्त, 2024 का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि गांधी की टिप्पणी विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य या शत्रुता, घृणा या दुर्भावना की भावनाओं को बढ़ावा देने वाली नहीं लगती।पुर्नविचार...

पहली तलाक याचिका खारिज होने पर भी अलग आधार पर दूसरी याचिका दायर की जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पहली तलाक याचिका खारिज होने पर भी अलग आधार पर दूसरी याचिका दायर की जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि एक ही आधार पर तलाक की याचिका खारिज होने पर भी, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत दूसरे आधार पर तलाक की याचिका दायर करने में कोई रोक नहीं है।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा— “हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत किसी एक आधार पर याचिका का निर्णय, दूसरे आधार पर तलाक की याचिका दायर करने पर रोक नहीं लगाता। यदि पहली याचिका खारिज होने के बाद भी पक्षकार को दूसरी याचिका दायर करने की अनुमति मिलती है, तो संशोधन के माध्यम से नए आधार जोड़ने में कोई...

Bihar SIR | फाइनल वोटर लिस्ट में जोड़े गए नाम पहले हटाए गए नामों में से हैं या नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने ECI से पूछा
Bihar SIR | फाइनल वोटर लिस्ट में जोड़े गए नाम पहले हटाए गए नामों में से हैं या नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने ECI से पूछा

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अक्टूबर) को मौखिक रूप से कहा कि इस बात को लेकर कुछ भ्रम है कि अंतिम मतदाता सूची में जोड़े गए मतदाता उन मतदाताओं की सूची से हैं, जिन्हें पहले ड्राफ्ट सूची से हटा दिया गया था या बिल्कुल नए नाम हैं।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ याचिकाकर्ताओं की इस मांग पर सुनवाई कर रही थी कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) को फाइनल लिस्ट से हटाए गए 3.66 लाख अतिरिक्त मतदाताओं और उसमें शामिल...

साक्ष्य या बयान दर्ज करते समय अभद्र या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग न करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट
साक्ष्य या बयान दर्ज करते समय अभद्र या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग न करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मुकदमों की सुनवाई के दौरान साक्ष्य या बयानों में प्रयोग की गई गाली-गलौज या अभद्र भाषा को रिकॉर्ड न करें।विशेष न्यायाधीश (SC/ST अधिनियम), वाराणसी के आदेश के खिलाफ दायर एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस हरवीर सिंह ने कहा — “दलीलों या आदेशों में अभद्र या गाली-गलौज भरी भाषा का प्रयोग अनुचित और अस्वीकार्य है। इसलिए यह निर्देश दिया जाता है कि न केवल संबंधित अधिकारी, बल्कि प्रदेश के सभी न्यायिक...

बाल कल्याण समिति के आदेश के तहत नाबालिग की कस्टडी को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बाल कल्याण समिति के आदेश के तहत नाबालिग की कस्टडी को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब नाबालिग बच्चे की कस्टडी किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत बाल कल्याण समिति (CWC) द्वारा पारित न्यायिक आदेश के अनुसार सौंपी गई हो तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी की खंडपीठ ने एक मां द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें उसने अपने 11 वर्षीय बेटे की कस्टडी की मांग करते हुए दावा किया था कि वह उसकी प्राकृतिक अभिभावक है।याचिका में...

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहरे दंड के आधार पर रिटायर कर्मचारी के खिलाफ़ दूसरी चार्जशीट रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने 'दोहरे दंड' के आधार पर रिटायर कर्मचारी के खिलाफ़ दूसरी चार्जशीट रद्द की

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में रिटायर सरकारी कर्मचारी के खिलाफ़ समान आरोपों पर जारी की गई दूसरी चार्जशीट रद्द की। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 20(2) के तहत डबल जियोपार्डी (दोहरा दंड) के सिद्धांत का उल्लंघन माना।जस्टिस अनूप कुमार ढंड की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ पहले भी इन्हीं आरोपों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई, जिसे 1991 में बंद कर दिया गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के स्पेशल कोर्ट की अदालत से उन्हें 2000 में बरी भी कर दिया...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 साल पुराने संपत्ति विवाद में देरी की रणनीति अपनाने के लिए वादी पर 25,000 का जुर्माना लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 साल पुराने संपत्ति विवाद में देरी की रणनीति अपनाने के लिए वादी पर 25,000 का जुर्माना लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वादी पर 21 साल पुराने संपत्ति विवाद में निर्णय में देरी की मांग करते हुए पुनर्विचार याचिका दायर करने पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह विवाद ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के अंतिम चरण में है।जस्टिस तारा वितस्ता गंजू ने मुकदमे में प्रतिवादी कृष्णा देवी द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा सीपीसी के आदेश VII नियम 11(डी) के तहत दायर अपने आवेदन को खारिज करने को चुनौती दी थी।यह मुकदमा 2004 में दायर किया गया जिसमें 14 मई, 2003 के सेल डीड को अमान्य घोषित...

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम वर्चस्व वाली BJP Assam के AI वीडियो को हटाने की याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम वर्चस्व वाली BJP Assam के AI वीडियो को हटाने की याचिका पर नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने उस आवेदन पर नोटिस जारी किया, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) की असम इकाई द्वारा 'X' पर पोस्ट किए गए एआई-जनरेटेड वीडियो को हटाने की मांग की गई। इस वीडियो में स्पष्ट रूप से यह आशंका जताई गई कि अगर पार्टी चुनाव हार जाती है तो राज्य पर मुसलमानों का कब्ज़ा हो जाएगा।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने वकील निज़ाम पाशा (आवेदक की ओर से) की दलील सुनने के बाद यह आदेश पारित किया:"आगामी चुनाव के सिलसिले में एक वीडियो अभी पोस्ट किया गया...इसमें दिखाया गया कि अगर एक खास...

उन्नाव बलात्कार पीड़िता की माँ ने CRPF सुरक्षा बहाल करने की मांग की, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से खतरे की आशंका पर रिपोर्ट मांगी
उन्नाव बलात्कार पीड़िता की माँ ने CRPF सुरक्षा बहाल करने की मांग की, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से खतरे की आशंका पर रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (7 अक्टूबर) को 2017 के उन्नाव बलात्कार पीड़िता की माँ द्वारा दायर एक विविध आवेदन पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के जीवन और स्वतंत्रता को गंभीर खतरा बताया। उन्होंने अपने परिवार से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) सुरक्षा वापस लेने की अनुमति देने वाले कोर्ट के हालिया आदेश को वापस लेने की माँग की।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी वराले की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें यह बताया जाए कि क्या...

नागपुर का फ़ुटाला झील वेटलैंड नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण की अनुमति दी, NGO की याचिका ख़ारिज
नागपुर का फ़ुटाला झील वेटलैंड नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण की अनुमति दी, NGO की याचिका ख़ारिज

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें नागपुर की फ़ुटाला झील को वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत 'वेटलैंड' के रूप में वर्गीकृत करने से इनकार कर दिया गया था। इस फैसले के साथ ही राज्य के अधिकारियों को झील के आसपास फ्लोटिंग रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल, म्यूजिकल फाउंटेन और व्यूइंग गैलरी जैसे अस्थायी निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने नागपुर स्थित NGO...

कोमा में गए कर्मचारी को दो साल से वेतन न देना अमानवीय, अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: राजस्थान हाईकोर्ट ने 7 दिन में बकाया देने का आदेश दिया
कोमा में गए कर्मचारी को दो साल से वेतन न देना अमानवीय, अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: राजस्थान हाईकोर्ट ने 7 दिन में बकाया देने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस बेरुखी पर कड़ी नाराज़गी जताई, जिसमें एक सरकारी कर्मचारी, जो 2023 से कोमा में है, उसको दो साल से वेतन नहीं दिया जा रहा और उसके इलाज के बिलों की अदायगी भी नहीं की गई। अदालत ने इसे अमानवीय मनमाना और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया।जस्टिस रवि चिरानिया की पीठ ने कहा कि राज्य का यह रवैया न केवल संवेदनहीन है बल्कि कानून द्वारा स्थापित सिद्धांतों के भी विपरीत है। अदालत ने बिना राज्य का जवाब मांगे सीधे निर्देश दिया कि कर्मचारी के वेतन और चिकित्सीय...

BREAKING| न्यायिक अधिकारियों के लिए पदोन्नति मामले पर अब संविधान पीठ करेगी सुनवाई
BREAKING| न्यायिक अधिकारियों के लिए पदोन्नति मामले पर अब संविधान पीठ करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अक्टूबर) को न्यायिक सेवा में पदोन्नति के सीमित अवसरों के कारण प्रवेश स्तर के पदों पर नियुक्त होने वाले युवा न्यायिक अधिकारियों के करियर में आने वाले ठहराव से संबंधित मुद्दों को संविधान पीठ को सौंप दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ मामले में यह संदर्भ आदेश पारित किया।इससे पहले, खंडपीठ ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट और राज्य सरकारों से जवाब मांगा था। मामले में एमिक्स क्यूरी...

वैवाहिक स्थिति की घोषणा समाज के मूल को प्रभावित करती है, केवल सक्षम न्यायालय द्वारा ही हो सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
वैवाहिक स्थिति की घोषणा समाज के मूल को प्रभावित करती है, केवल सक्षम न्यायालय द्वारा ही हो सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि वैवाहिक स्थिति की घोषणा समाज के मूल को प्रभावित करती है और यह केवल हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 11 के तहत सक्षम न्यायालय द्वारा ही की जा सकती है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस सैयद क़मर हसन रिज़वी की खंडपीठ ने अवलोकन किया,"यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि पक्षकारों की वैवाहिक स्थिति की घोषणा समाज के मूल को प्रभावित करती है। हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 11 के आलोक में घोषणा केवल पक्षों के बीच उपयुक्त कार्यवाही में और कानून की अन्य...

दिल्ली हाईकोर्ट ने JAG महिला सेना अधिकारियों को परमानेंट कमीशन के लिए याचिका पर जल्द सुनवाई के निर्देश दिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने JAG महिला सेना अधिकारियों को परमानेंट कमीशन के लिए याचिका पर जल्द सुनवाई के निर्देश दिए

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय सेना की जज एडवोकेट जनरल JAG शाखा की महिला अधिकारियों की याचिका पर सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) को जल्द से जल्द फैसला करने का निर्देश दिया। ये अधिकारी सेना में स्थायी कमीशन की मांग कर रही हैं।वर्तमान में ये महिला अधिकारी शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) पर कार्यरत हैं।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि ये अधिकारी सेवा में हैं, इसलिए वे सेना अधिनियम 1950 के प्रावधानों के अधीन हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम,...