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मृतक किसान के छोटे-मोटे काम उसके परिवार को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लाभ से वंचित नहीं करेंगे: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि केवल इसलिए कि किसान अपनी मृत्यु के समय छोटे-मोटे काम कर रहा था, अपने आप में उसके परिवार को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की खंडपीठ ने सविता यादव नामक महिला द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की, जिसके पति की आजमगढ़ जिले में एक ट्रक पर गेहूं की बोरियां लादते समय बिजली का झटका लगने से मृत्यु हो गई।जिला मजिस्ट्रेट ने उक्त योजना के तहत अनुग्रह राशि के लिए...
सुप्रीम कोर्ट ने PMLA मामले में बिहार के ठेकेदार की ED गिरफ्तारी पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 अक्टूबर) को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा बिहार स्थित ठेकेदार रिशु श्री की गिरफ्तारी पर रोक लगाई।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने ED के खिलाफ रिशु श्री द्वारा दायर रिट याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को राहत के लिए हाईकोर्ट जाने को कहा और ED की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर 10 नवंबर तक रोक लगाई।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी...
डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, फर्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल को 'गंभीर चिंता का विषय' बताया
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट घोटालों के बढ़ते मामलों पर स्वत: संज्ञान लिया, जहां जालसाज कानून प्रवर्तन एजेंसियों या न्यायिक अधिकारियों का प्रतिरूपण करके नागरिकों विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से पैसे वसूलते हैं।कोर्ट की यह कार्रवाई हरियाणा के अंबाला की एक 73 वर्षीय महिला की शिकायत के बाद हुई, जिसने आरोप लगाया कि धोखेबाजों ने सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेशों का उपयोग करके उसे तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में सीमित कर दिया और 1 करोड़ से अधिक की उगाही की।महिला ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) भूषण गवई को संबोधित...
पाकिस्तानी वीडियो पर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' लिखने वाले आरोपी को मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक 20 वर्षीय युवक को जमानत दी, जिस पर एक पाकिस्तानी नागरिक द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो को लाइक करने और उस पर पाकिस्तान जिंदाबाद टिप्पणी पोस्ट करने का आरोप था।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने आरोपी जैद को राहत देते हुए कहा कि उसने कोई धार्मिक टिप्पणी या देश की गरिमा और संप्रभुता को ठेस पहुंचाने वाली कोई अन्य टिप्पणी नहीं की थी।मामले का विवरणआरोपी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 115(2), और 351(2) के तहत दर्ज मामले में हाईकोर्ट का रुख...
राजस्व अभिलेखों में प्रविष्टि हटाना या बदलना न्यायिक मामला, सुनवाई का अवसर देना आवश्यक: इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भू-राजस्व अधिनियम की धारा 34 के तहत राजस्व अभिलेखों में किसी भी तरह का बदलाव, जिसमें प्रविष्टि को हटाना या बदलना शामिल है, एक न्यायिक मामला है, जिसके लिए संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है।जस्टिस इरशाद अली की पीठ ने कहा,"प्रशासनिक मामलों में सुनवाई का अवसर प्रदान करना अपेक्षाकृत नया सिद्धांत है। जहां तक न्यायिक मामलों का संबंध है, जब से अदालतों की स्थापना हुई है, यह प्रक्रियात्मक कानून का सबसे आवश्यक घटक रहा है कि संबंधित पक्षों को सुने...
HPNLU, शिमला ने तीसरी समन्वय अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता प्रतियोगिता (SIMC) 2025 का सफल आयोजन किया
हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HPNLU), शिमला ने माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीति सक्सेना के नेतृत्व में 18-20 सितंबर और 13-15 अक्टूबर 2025 तक तीसरी समन्वय अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता प्रतियोगिता (SIMC) का सफल आयोजन किया। यह प्रतिष्ठित आयोजन विश्वविद्यालय के वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रकोष्ठ द्वारा किया गया, जिसमें देश-विदेश के 33 प्रमुख विधि संस्थानों ने भाग लिया, जिनमें राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के साथ सिंगापुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय भी शामिल था। प्रतियोगिता हाइब्रिड मोड में...
हरियाणा ADA भर्ती: हाईकोर्ट ने लॉ ग्रेजुएट की याचिका स्वीकार की, सिलेबस में मनमाने बदलाव को पलटा
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हरियाणा सहायक जिला अटॉर्नी (ADA) भर्ती परीक्षा के सिलेबस में किए गए अचानक बदलाव को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली है। यह बदलाव परीक्षा के फोकस को कानून-केंद्रित विषयों से हटाकर पूरी तरह सामान्य ज्ञान पर केंद्रित कर रहा था।जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने याचिका अनुमति देते हुए हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) को विज्ञापन वापस लेने और स्क्रीनिंग टेस्ट के सिलेबस को संशोधित करने का निर्देश दिया है। इस मामले में विस्तृत निर्णय आना अभी...
बार काउंसिल चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने नॉमिनेशन फीस ₹1.25 लाख तय करने के BCI के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 अक्टूबर) को दो वकीलों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया, जिसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा राज्य बार काउंसिल चुनाव लड़ने के लिए नॉमिनेशन फीस बढ़ाकर ₹1,25,000 करने के फैसले को चुनौती दी गई।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ द्वारा मामले पर सुनवाई करने में अनिच्छा व्यक्त करने के बाद याचिकाकर्ताओं ने मामला वापस ले लिया।याचिकाकर्ता के सीनियर वकील ने दलील दी कि BCI ने फीस ₹9,000 से बढ़ाकर ₹1,25,000 किया। उन्होंने कहा कि बार में...
सुप्रीम कोर्ट ने जेंडर पहचान के आधार पर बर्खास्त ट्रांस महिला शिक्षिका को मुआवज़ा दिया, ट्रांसजेंडर अधिकारों पर समिति का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसले में ट्रांस महिला शिक्षिका को मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसकी शिक्षिका के रूप में सेवा एक साल के भीतर दो निजी स्कूलों, एक उत्तर प्रदेश और दूसरा गुजरात में, उन्होंने उसकी लैंगिक पहचान के आधार पर समाप्त कर दी थी।कोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए समान अवसर नीति तैयार करने हेतु दिल्ली हाईकोर्ट की रिटायर जज जस्टिस आशा मेनन की अध्यक्षता में समिति का भी गठन किया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने...
सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण एक्ट के तहत SHUATS यूनिवर्सिटी के VC और अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने सैम हिगिनबॉटम कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (SHUATS), प्रयागराज के कुलपति और अन्य अधिकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत दर्ज FIR और उसके बाद की आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इन FIR पर लोगों का कथित रूप से जबरन ईसाई धर्म अपनाने का आरोप था।इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कुलपति (डॉ.) राजेंद्र बिहारी लाल, निदेशक विनोद बिहारी लाल और संस्थान के अन्य अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करने के आदेश के खिलाफ अनुच्छेद...
पुत्र जीवित है तो पुत्री मिताक्षरा हिंदू पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं हो सकती, जिनकी मृत्यु 1956 से पहले हुई थी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि मिताक्षरा विधि के अनुसार, यदि पुत्र जीवित है तो पुत्री अपने मृत हिंदू पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं हो सकती, जिनकी मृत्यु 1956 (हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के लागू होने के वर्ष) से पहले हुई।जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पुत्र की अनुपस्थिति में पुत्री ऐसी संपत्ति पर अपना अधिकार जता सकती है।कोर्ट ने कहा,“यह विधिक स्थिति सर्वविदित है कि मिताक्षरा कानून के अनुसार, पुत्री, अधिनियम, 1956 के लागू होने से पूर्व अपने पिता की संपत्ति की...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने Deepfakes की वास्तविक प्रकृति पर चिंता जताई, अक्षय कुमार के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके बनाई जा रही Deepfake तस्वीरों और वीडियो की "वास्तविक" प्रकृति पर चिंता व्यक्त की।सिंगल जज जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर ने अपने 15 अक्टूबर के आदेश में कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग करने वाले मशहूर हस्तियों के ऐसे मामलों में यह देखना चिंताजनक है कि AI द्वारा बनाई गई सामग्री भ्रामक और इतनी परिष्कृत है कि किसी के लिए भी यह समझना संभव नहीं होगा कि यह नकली है या...
सेशन कोर्ट केवल पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए अभियुक्त की सज़ा निलंबित नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC/BNSS में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो प्रथम अपीलीय कोर्ट को किसी अभियुक्त की सज़ा निलंबित करने या उसे केवल इस आधार पर रिहा करने का अधिकार देता हो कि वह हाईकोर्ट में दोषसिद्धि को चुनौती देने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर कर सके।अदालत ने कहा कि विधायिका का इरादा अपीलीय कोर्ट को सज़ा स्थगित करने या निलंबित करने या अभियुक्त को आत्मसमर्पण करने के लिए दी गई समय सीमा बढ़ाने का अधिकार देने का नहीं है ताकि वह पुनरीक्षण याचिका दायर कर सके।हाईकोर्ट इस बात पर विचार कर रहा था...
वॉलंटियर के नाम पर नागरिकों का शोषण कर रहे अधिकारी': पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन दशकों से सेवारत होमगार्ड को नियमित करने का निर्देश दिया
लंबे समय से सेवारत कर्मियों के शोषण के विरुद्ध कड़ी टिप्पणी करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लगभग तीन दशकों से सेवारत एक होमगार्ड को नियमित करने का निर्देश दिया।जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा,"जो सदस्य दिन के कुछ भाग, महीने के कुछ भाग या वर्ष के कुछ भाग में काम करता है और अपनी आजीविका के लिए कोई अन्य कार्य करता है, उसे वॉलंटियर कहा जा सकता है। हालांकि, जो व्यक्ति तीन दशकों से बिना किसी रुकावट के पूरे दिन काम कर रहा है, उसे स्वयंसेवक नहीं कहा जा सकता।"अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह अनुचित और...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (14 अक्टूबर) को राज्य सरकार को गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 और गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की योग्यता संबंधी नियम, 2014 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया।ऐसा करते हुए अदालत ने एक पत्रकार द्वारा दायर जनहित याचिका खारिज की, जो केवल एक व्यक्ति को निशाना बना रहा था और उक्त संस्थान या अन्य संस्थानों द्वारा उल्लंघन के उदाहरण दिखाने में विफल रहा।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा...
CRPF के जलवाहक ने जमा किया था फर्जी मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट, हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी बरकरार रखी
यह कहते हुए कि सुरक्षा बलों में कोई भी भूमिका मामूली नहीं होती, दिल्ली हाईकोर्ट ने CRPF के जलवाहक को फर्जी मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र जमा करने पर बर्खास्त किए जाने का फैसला बरकरार रखा।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस विमल कुमार यादव की खंडपीठ ने इस तर्क को खारिज करते हुए कि वह गैर-लड़ाकू कर्मचारी था- किसी भी सुरक्षा ड्यूटी में शामिल नहीं था और बर्खास्तगी की सजा अनुपातहीन है, टिप्पणी की,"सुरक्षा/पुलिस संगठन में इससे ज़्यादा अपरिहार्य कुछ नहीं हो सकता। एक मामूली और मामूली-सी चूक CRPF कर्मियों, आम...
OBC युवक को दूसरे के पैर धोने के लिए मजबूर करने का मामला | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपियों को NSA के तहत हिरासत में लेने पर उठाए सवाल
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि उन्होंने OBC समुदाय के एक युवक को दूसरे के पैर धोने के लिए मजबूर करने के आरोपी व्यक्तियों को अदालत के आदेश - जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत भी शामिल है - उसके आधिकारिक तौर पर अपलोड होने से पहले ही हिरासत में क्यों लिया।अदालत OBC समुदाय के एक युवक को दूसरे व्यक्ति के पैर धोने और उस पानी को पीने के लिए मजबूर करने वाले वीडियो पर स्वतः संज्ञान लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी।14 अक्टूबर को जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप...
आरोपी का केवल मृतका को परेशान करना आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ केवल उत्पीड़न का आरोप भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।अदालत ने मृतका की सास को बरी कर दिया, जिसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दोषी ठहराया गया। आरोप लगाया गया कि सास और ननद दहेज के अभाव और बच्चे न होने के कारण उसे परेशान कर रही थीं और ट्रायल कोर्ट ने उसे IPC की धारा 306 के तहत दोषी ठहराया था।जस्टिस कीर्ति सिंह ने कहा,"चूंकि आत्महत्या का कारण विशेष रूप से...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) में मजिस्ट्रेट के दिए गए संरक्षण आदेश का भंग किया जाना
घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 31 संरक्षण आदेश, अन्तिम अथवा अन्तरिम के भंग को उक्त अधिनियम के अधीन अपराध बनाता है। उसमें विहित परिसीमा अवधि की समाप्ति के पश्चात् संज्ञान लेने के लिए रोक विहित करते हुए बीएनएसएस को प्रयोज्यनीयता का विवाद घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 31 के अधीन यथा अभिव्यक्त ऐसे अपराध का केवल संज्ञान लेने के समय ही उद्भूत होगा। प्रत्यर्थीगण के अभिकथित अभित्यजन की तारीख पर कोई संरक्षण आदेश नहीं था और इसके कारण उक्त घटना को उक्त अधिनियम की धारा 31 के अधीन यथा अभिव्यक्त उसे अपराध में...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) के तहत दिए गए फैसलों का Execution
इस एक्ट की धारा 31 में इस एक्ट में दिए गए ऑर्डर के एग्जीक्यूशन की व्यवस्था की गई है अगर कोई व्यक्ति मजिस्ट्रेट के आर्डर को नहीं मानता है तब उसे जेल भिजवा कर ऑर्डर का पालन करवाया जाता है। किसी भी कोर्ट के आदेश को नहीं मानने पर पहले भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दंडित किया जाता था लेकिन अभी के अधिनियम ऐसे हैं जिनमें यह व्यवस्था उक्त अधिनियम में ही कर दी गई है। इस ही तरह घरेलू हिंसा अधिनियम में भी दंड की व्यवस्था की गई है।इस एक्ट की धारा 31 के अनुसार-प्रत्यर्थी द्वारा संरक्षण आदेश के भंग के लिए...




















