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वकील को कोर्ट में धमकाया गया, वकालतनामा वापस लेने के लिए मजबूर किया गया? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट जज को आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया
वकील के साथ कोर्ट रूम के अंदर बुरा बर्ताव करने और उसे धमकाकर अपना वकालतनामा वापस लेने के लिए मजबूर करने के आरोपों पर गंभीर चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज, लखनऊ से आरोपों की जांच करने के लिए एक रिपोर्ट मांगी।जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी की बेंच ने कहा कि अगर ऐसे आरोपों को उनके पहले के बयानों के आधार पर सही मान लिया जाता है तो वे "न्याय देने में रुकावट" पैदा करते हैं और "न्याय देने के सिस्टम को बदनाम" करते हैं।यह टिप्पणी तब आई जब बेंच देवी प्रसाद और अन्य...
Bareilly Violence | हाईकोर्ट ने पुलिस फोर्स पर एसिड अटैक और फायरिंग के आरोपों वाली FIR रद्द करने से किया इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते सितंबर 2025 के बरेली हिंसा मामले में FIR रद्द करने की मांग वाली रिट पिटीशन को मंज़ूरी देने से मना कर दिया। इस मामले में आरोप है कि पुलिस फोर्स पर भीड़ ने ईंट-पत्थरों, पत्थरों और एसिड की बोतलों से हमला किया।हालांकि, जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने यह कहते हुए पिटीशन का निपटारा कर दिया कि पिटीशनर सलाह के मुताबिक दूसरे कानूनी उपाय अपना सकता है।बेंच असल में हिंसा मामले में आरोपी अदनान की फाइल की गई पिटीशन पर विचार कर रही थी।एडिशनल एडवोकेट जनरल अनूप...
सेस टैक्सेशन का ब्रैकेट तय करने के लिए इंडस्ट्री का मुख्य मकसद ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि किसी इंडस्ट्री के लिए सेस तय करते समय असेसिंग अथॉरिटी को इंडस्ट्री के मुख्य मकसद पर विचार करना चाहिए।जस्टिस इरशाद अली ने कहा,“इस मामले में जहां सवाल यह है कि क्या कोई खास इंडस्ट्री एक्ट के शेड्यूल I में शामिल इंडस्ट्री है तो आम तौर पर यह तय किया जाना चाहिए कि वह इंडस्ट्री मुख्य रूप से क्या बनाती है। हर इंडस्ट्री अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कई तरह के काम करती है, जिसके लिए कई अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। कोई खास इंडस्ट्री टैक्सेशन के दायरे में आती है या...
हाईकोर्ट ने हरियाणा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को 80 साल की विधवा के पेंशन बेनिफिट्स के लिए पांच दशक पुराने दावे की खुद जांच करने का निर्देश दिया
यह देखते हुए कि पांच दशक पुराना मामला "एडमिनिस्ट्रेटिव लापरवाही और सही बकाए के लिए लगातार संघर्ष की कहानी दिखाता है", पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के संबंधित प्रिंसिपल सेक्रेटरी को दो महीने के अंदर विधवा के पेंशन बेनिफिट्स के दावों की सच्चाई की खुद जांच करने और यह पक्का करने का निर्देश दिया कि उसे मिलने वाले सभी कानूनी बकाए "तुरंत" दिए जाएं।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"यह केस एडमिनिस्ट्रेटिव लापरवाही की एक निराशाजनक और परेशान करने वाली तस्वीर दिखाता है, जिसमें पिटीशनर की बढ़ती...
आर्थिक अपराधी की मेडिकल वजहों से विदेश जाने की अर्ज़ी तब सही नहीं है, जब भारत में इलाज आसानी से मिल रहा हो: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि एक आर्थिक अपराधी की मेडिकल वजहों का हवाला देकर विदेश जाने की अर्ज़ी तब सही नहीं है, जब भारत में सही इलाज आसानी से मिल रहा हो।जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा,“यह कोर्ट आर्टिकल 21 के तहत पर्सनल लिबर्टी के प्रिंसिपल्स को जानता है। हालांकि, इन अधिकारों को पब्लिक इंटरेस्ट के साथ बैलेंस करना होगा ताकि यह पक्का हो सके कि गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोपी लोग कानूनी प्रोसेस के लिए तैयार रहें।”यह बेंच एक ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया की अर्ज़ी पर विचार कर रही थी, जिसके खिलाफ Net4 नेटवर्क...
मोटरसाइकिल वाला मुड़ने से पहले सड़क साफ़ न देख पाए तो एक्सीडेंट के लिए बस ड्राइवर को लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
लापरवाही से मौत के मामले में बरी करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क पर देखभाल की ज़िम्मेदारी सभी मोटर चलाने वालों पर बराबर लागू होती है। हर उस मामले में बस ड्राइवर पर ज़िम्मेदारी नहीं डाली जा सकती, जहां दूसरे ड्राइवर की तरफ़ से लापरवाही साफ़ दिखती हो।कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-A, 279, 427 के तहत सज़ा रद्द कर दिया, जिसमें अपील करने वाले को 1 साल की सख़्त कैद की सज़ा सुनाई गई।जस्टिस एच.एस. ग्रेवाल ने कहा,"ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बस ड्राइवर की यह...
125 CrPC मामलों में फैसले में 'निर्णय के बिंदु' लिखना ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य की सभी फैमिली कोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वे धारा 125 दं.प्र.सं. (CrPC) के तहत पारित होने वाले सभी अंतिम आदेशों में अनिवार्य रूप से 'निर्णय हेतु बिंदु' (points for determination) तय करें। कोर्ट ने कहा कि यह धारा 354(6) CrPC का स्पष्ट पालन है, जिसे हर फैमिली कोर्ट को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा।जस्टिस मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने यह निर्देश दिया और आदेश को सभी ज़िला जजों तथा सभी फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीशों को सख़्ती से पालन हेतु प्रसारित करने का निर्देश दिया। ...
गंभीर तथ्य छुपाने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पोपी सीड्स तस्करी मामले में याचिकाकर्ता पर ₹5 लाख जुर्माना लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक कंपनी के पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर पर ₹5 लाख का भारी जुर्माना लगाया, जिस पर अफीम (poppy seeds) और सुपारी जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी में शामिल होने का संदेह था।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने यह तथ्य छुपाया कि कस्टम विभाग द्वारा लगाए गए पेनल्टी आदेश के खिलाफ उसकी चुनौती पहले भी हाई कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है। कोर्ट ने टिप्पणी की— “याचिकाकर्ता के वकील का दायित्व था कि वह इस याचिका में सभी संबंधित तथ्य और...
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 रद्द किया, कहा- न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया। यह कानून विभिन्न ट्रिब्यूनलों के सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और सेवा शर्तों से संबंधित था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह कानून न्यायिक स्वतंत्रता और शक्तियों के पृथक्करण जैसे मूल संवैधानिक सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन करता है।पूर्व चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ के उत्तराधिकारी के रूप में न्यायिक नेतृत्व संभाल चुके चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की...
सेल एग्रीमेंट के विशिष्ट निष्पादन हेतु डिक्री के समनुदेशन के लिए रजिस्ट्रेशन आवश्यक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 नवंबर) को व्यवस्था दी कि सेल एग्रीमेंट के विशिष्ट निष्पादन हेतु डिक्री को बिना रजिस्ट्रेशन के भी वैध रूप से समनुदित किया जा सकता है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसी डिक्री स्वयं कोई स्वामित्व हित उत्पन्न नहीं करती जिससे अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता उत्पन्न हो।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए,"क्या अचल संपत्ति के विक्रय समझौते के विशिष्ट निष्पादन हेतु डिक्री समनुदेशन करने वाले डीड को रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के...
पर्यावरणीय मंज़ूरी को चुनौती देने की समय-सीमा, इसके सार्वजनिक संप्रेषण की सबसे प्रारंभिक तिथि से शुरू होती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि पर्यावरणीय मंज़ूरी (EC) के विरुद्ध अपील दायर करने की समय-सीमा पर्यावरणीय मंज़ूरी के सार्वजनिक संप्रेषण की सबसे प्रारंभिक तिथि से मानी जाएगी।कोर्ट ने सेव मोन रीजन फेडरेशन एवं अन्य बनाम भारत संघ, 2013(1) अखिल भारतीय NGT रिपोर्टर 1 के NGT के निर्णय का समर्थन किया, जिसमें कहा गया कि "पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, परियोजना प्रस्तावक और अन्य का दायित्व है कि वे किसी भी पीड़ित व्यक्ति को पर्यावरणीय मंज़ूरी के बारे में सूचित करें और यह भी माना कि जहां विभिन्न हितधारकों को...
'CBI से जांच क्यों नहीं करवाई जाए?': सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस से वकील की गिरफ्तारी के मामले में पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा राज्य से पूछा कि जिस हत्या के मामले में वकील को गिरफ्तार किया गया, उसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को क्यों न सौंप दिया जाए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ वकील विक्रम सिंह द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने मामले में अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती दी थी। वकील ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने मुवक्किलों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए गिरफ्तार किया गया। पिछले हफ़्ते, अदालत ने वकील की...
रद्द किए गए प्रावधानों को फिर से लागू करना दर्शाता है कि प्रशासन का स्वरूप संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है: ट्रिब्यूनल रिफॉर्म एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट
ट्रिब्यूनल रिफॉर्म एक्ट, 2021 रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हीं प्रावधानों को फिर से लागू करने की तीखी आलोचना की, जिन्हें पहले कोर्ट ने रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे पता चलता है कि "प्रशासन का स्वरूप" संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई द्वारा लिखे गए फैसले में डॉ. बीआर अंबेडकर के इस प्रसिद्ध कथन का उल्लेख किया गया कि संविधान के स्वरूप को बनाए रखते हुए भी प्रशासन को संविधान की भावना के अनुरूप नहीं बनाकर संविधान को विकृत किया जा सकता है।यह देखते हुए...
AI-Generated फर्जी सामग्री के लिए बिचौलियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए: जस्टिस राजेश बिंदल
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि तकनीकी बिचौलियों को उनके द्वारा होस्ट की जाने वाली सामग्री के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, खासकर जब इसमें हेरफेर की गई मीडिया और डीप फेक सामग्री शामिल हो। उन्होंने कहा कि भारत एक "बिल्ली-और-चूहे के युग" में प्रवेश कर रहा है, जहां तकनीक विनियमन से भी तेज़ी से विकसित हो रही है, जिससे निजता, डेटा सुरक्षा और न्याय प्रणाली के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो रहे हैं।ऑल इंडिया लॉयर्स फ़ोरम द्वारा "कानूनी व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका" विषय पर...
सुप्रीम कोर्ट ने 'तलाक-ए-हसन' में खामियों की ओर इशारा किया, पतियों के वकीलों द्वारा पत्नियों को तलाक का नोटिस भेजने की प्रथा पर सवाल उठाए
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस्लामी कानून में तलाक के एक रूप 'तलाक-ए-हसन' की प्रथा में कुछ मुद्दों पर ध्यान दिलाया और पतियों के वकीलों द्वारा पत्नियों को तलाक का नोटिस भेजने की प्रथा पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि इससे पति बाद में तलाक देने से इनकार कर देते हैं और जब उनकी पत्नी दोबारा शादी करती है तो उन पर बहुपतित्व का आरोप लगा देते हैं।अदालत ने न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना पर पक्षकारों से सुझाव मांगे।तलाक-ए-हसन इस्लामी कानून में तलाक का एक रूप है, जिसमें पति तीन महीने की अवधि में महीने में एक...
BREAKING: सुप्रीम ने किया हिंदू महिलाओं से वसीयत बनाने का आग्रह, कहा- बिना वसीयत मरने वाली महिलाओं के उत्तराधिकार में मुकदमे-पूर्व मध्यस्थता अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि देश की सभी महिलाओं, खासकर हिन्दू महिलाओं, को चाहिए कि वे अपनी मृत्यु के बाद संपत्ति के बंटवारे को लेकर किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए वसीयत (Will) अवश्य बनाएं। अदालत ने यह सुझाव इसलिए दिया ताकि भविष्य में माता-पिता और ससुराल पक्ष के बीच संपत्ति से जुड़े मुकदमेबाज़ी से बचा जा सके।खंडपीठ ने कहा, “हम सभी महिलाओं, विशेषकर उन हिन्दू महिलाओं से जो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(1) की स्थिति में हो सकती हैं, अपील करते हैं कि वे अपनी...
फिल्म '120 बहादुर' की रिलीज़ को हाईकोर्ट की मंजूरी, निर्माता बोले- सभी सैनिकों के नाम क्रेडिट्स में शामिल
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को फरहान अख्तर की आगामी फिल्म “120 बहादुर”, जो 1962 के रेज़ांग ला युद्ध पर आधारित है, की देशभर में थिएटर रिलीज़ की अनुमति दे दी।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने फिल्म निर्माता के उस बयान पर ध्यान दिया कि युद्ध में शामिल सभी 120 शहीद सैनिकों के नाम फिल्म के अंत में श्रेय (credits) के रूप में शामिल किए गए हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह भाटी के शौर्य पर आधारित है, जिन्हें 1962 के रेज़ांग ला युद्ध में वीरता के लिए परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।...
खेल मंत्रालय किसी भी इंटरनेशनल फेडरेशन द्वारा चुनी गई किसी भी संस्था को NSF मान्यता देने के लिए रबर स्टैंप की तरह काम नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि केंद्रीय खेल मंत्रालय किसी भी इंटरनेशनल फेडरेशन द्वारा चुनी गई किसी भी संस्था या बॉडी को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (NSF) की मान्यता देने के लिए सिर्फ़ "रबर स्टैंप" की तरह काम नहीं कर सकता।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा,"साफ़ है कि किसी NSF की मान्यता किसी भी इंटरनेशनल फेडरेशन के आदेश/मर्जी/निर्देश पर नहीं हो सकती। MYAS से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह सिर्फ़ रबर स्टैंप की तरह काम करे और इंटरनेशनल फेडरेशन द्वारा चुनी गई किसी भी बॉडी/संस्था को मान्यता दे (भले ही उस बॉडी से...
डिजीपब ने केंद्र की कंटेंट ब्लॉकिंग शक्तियों को चुनौती देने वाली X कॉर्प की याचिका खारिज होने के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील की
डिजीपब न्यूज़ इंडिया फाउंडेशन और पत्रकार अभिनंदन सेखरी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील की, जिसमें एक सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई। इसमें US-बेस्ड माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X कॉर्प (पहले ट्विटर) द्वारा केंद्र की कंटेंट ब्लॉकिंग शक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी।डिजीपब डिजिटल मीडिया न्यूज़ का प्रतिनिधि समूह है और उसका कहना है कि उसके सदस्य X जैसे इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म पर न केवल अपनी पत्रकारिता सामग्री साझा करने और वितरित करने के लिए बल्कि डिजिटल युग में अपनी राय व्यक्त करने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने हिट एंड रन केस में व्यक्ति के प्रत्यर्पण के लिए कनाडा सरकार की रिक्वेस्ट पर मजिस्ट्रियल जांच को सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उसने केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी। इसमें कनाडा सरकार की उस रिक्वेस्ट पर मजिस्ट्रियल जांच शुरू करने का आदेश दिया गया था, जिसमें एक कथित हिट-एंड-रन मामले में पैदल चलने वाले व्यक्ति की मौत हो गई थी और उसके प्रत्यर्पण की मांग की गई थी।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि पवन मलिक ने प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 5 के तहत विदेश मंत्रालय द्वारा दर्ज की गई संतुष्टि में कोई कमी नहीं दिखाई।कोर्ट ने कहा कि जो बात मायने रखती है, वह मलिक...




















