ताज़ा खबरे

गैर-जमानती मामलों में आरोपी महिलाएं अलग श्रेणी; CrPC की धारा 437 की कठोरता से बंधे नहीं रह सकते न्यायालय: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
गैर-जमानती मामलों में आरोपी महिलाएं अलग श्रेणी; CrPC की धारा 437 की कठोरता से बंधे नहीं रह सकते न्यायालय: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने यह दोहराया कि गैर-जमानती अपराधों में आरोपी महिलाएं एक विशिष्ट श्रेणी बनाती हैं और उनकी जमानत याचिकाओं पर विचार करते समय न्यायालयों को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 437 की कठोरता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अदालत ने हत्या के एक मामले में तीन महिला विचाराधीन बंदियों को जमानत देते हुए कहा कि CrPC की धारा 437(1) का प्रावधान मात्र औपचारिक नहीं बल्कि मानवीय विधायी मंशा को दर्शाता है, जिसे न्यायिक विवेक में वास्तविक रूप से लागू किया जाना चाहिए।जस्टिस राहुल भारती...

बिना दोषसिद्धि केवल जेल जाने के आधार पर CISF कर्मी को सेवा से नहीं हटाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बिना दोषसिद्धि केवल जेल जाने के आधार पर CISF कर्मी को सेवा से नहीं हटाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मामले में केवल गिरफ्तारी या जेल में रहने के आधार पर, बिना दोषसिद्धि के केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के किसी कर्मी को सेवा से हटाया नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि मात्र कारावास को अनुशासनात्मक कार्रवाई या बर्खास्तगी का आधार बनाना न तो तथ्यात्मक रूप से उचित है और न ही कानूनी रूप से टिकाऊ।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए सिंगर जज का आदेश बरकरार रखा, जिसमें हत्या के एक मामले में आरोपित...

रोज़गार अनुबंध अधिकार का वैध प्रमाण, आविष्कारक की मृत्यु के बाद भी पेटेंट आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
रोज़गार अनुबंध अधिकार का वैध प्रमाण, आविष्कारक की मृत्यु के बाद भी पेटेंट आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने निप्पॉन स्टील कॉरपोरेशन के एक पेटेंट आवेदन खारिज करने वाले पेटेंट ऑफिस का आदेश रद्द कर दिया। यह आवेदन “हाई-स्ट्रेंथ स्टील शीट और उसकी निर्माण विधि” से संबंधित था। अदालत ने स्पष्ट किया कि रोजगार (एम्प्लॉयमेंट) अनुबंध पेटेंट के लिए आवेदन करने के अधिकार का वैध प्रमाण हो सकता है, भले ही संबंधित आविष्कारक का निधन हो चुका हो।जस्टिस तेजस कारिया ने 24 दिसंबर, 2025 को दिए अपने फैसले में कहा कि पेटेंट ऑफिस ने यह मानकर गंभीर त्रुटि की कि निप्पॉन स्टील अपने “प्रूफ ऑफ राइट” यानी पेटेंट के...

पान मसाला और तंबाकू निर्माण पर हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस 1 फरवरी, 2026 से लागू
पान मसाला और तंबाकू निर्माण पर 'हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी' सेस 1 फरवरी, 2026 से लागू

केंद्र सरकार ने पान मसाला, तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों पर लगाए जाने वाले 'हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस' को 1 फरवरी 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के साथ ही हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस अधिनियम, 2025 का प्रवर्तन प्रभावी हो जाएगा।इस अधिनियम के तहत पान मसाला और इसी प्रकार के उत्पादों के निर्माण में प्रयुक्त मशीनों या प्रक्रियाओं पर सेस लगाया जाएगा। कानून के अनुसार, प्रत्येक...

मूल अपराध में तो चार्जशीट, न ही समन: PMLA मामले में महिला आरोपी को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत
मूल अपराध में तो चार्जशीट, न ही समन: PMLA मामले में महिला आरोपी को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत दर्ज एक मामले में महिला आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जिस महिला को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया, वह न तो मूल अपराध में पुलिस द्वारा चार्जशीट की गई और न ही मजिस्ट्रेट द्वारा समन जारी किया गया।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पुलिस जांच के स्तर पर भी आवेदिका को दोषी नहीं पाया गया और निजी शिकायत की कार्यवाही में भी मजिस्ट्रेट ने उसके खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया...

लिखित किरायेदारी एग्रीमेंट न होना या किरायेदारी की जानकारी न देना, रेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र को नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लिखित किरायेदारी एग्रीमेंट न होना या किरायेदारी की जानकारी न देना, रेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र को नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत रेंट अथॉरिटी के पास किरायेदार को बेदखल करने के लिए मकान मालिक के आवेदन पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है, भले ही कोई किरायेदारी एग्रीमेंट न हुआ हो और मकान मालिक ने किरायेदारी की जानकारी भी न दी हो।उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा,“2021 के अधिनियम के प्रावधानों के तहत गठित रेंट अथॉरिटी के पास उन मामलों में...

इंदौर के पानी में मिलावट: हाईकोर्ट ने नगर निगम को साफ पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, राज्य प्रभावित लोगों का इलाज करेगा
इंदौर के पानी में मिलावट: हाईकोर्ट ने नगर निगम को साफ पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, राज्य प्रभावित लोगों का इलाज करेगा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (31 दिसंबर) को इंदौर नगर निगम को इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके के निवासियों को साफ पीने के पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।ये टिप्पणियां जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दीं, जिसमें असुरक्षित और दूषित पीने के पानी की सप्लाई से जुड़ी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य इमरजेंसी पर प्रकाश डाला गया, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर लोग बीमार हुए और जानमाल का नुकसान हुआ।इसने निर्देश दिया;"अंतरिम उपाय के तौर...

परिवीक्षा अवधि में सेवा से मुक्त करना दंडात्मक नहीं, केवल लंबित आपराधिक मामले से नहीं बनता कलंक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
परिवीक्षा अवधि में सेवा से मुक्त करना दंडात्मक नहीं, केवल लंबित आपराधिक मामले से नहीं बनता कलंक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट में चपरासी के पद पर कार्यरत रहे फकीर चंद की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने परिवीक्षा अवधि के दौरान सेवा से मुक्त किए जाने को चुनौती दी थी।अदालत ने स्पष्ट किया कि परिवीक्षा काल में सेवा से मुक्त किया जाना, यदि नियुक्ति की शर्तों और सेवा नियमों के अनुरूप हो, तो उसे केवल इस आधार पर दंडात्मक या कलंकित नहीं माना जा सकता कि कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है।चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि नियोक्ता की संतुष्टि भंग...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोर्ट स्टाफ को इलेक्शन ड्यूटी पर बुलाए जाने के बाद चीफ जस्टिस के घर से इमरजेंसी सुनवाई की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोर्ट स्टाफ को इलेक्शन ड्यूटी पर बुलाए जाने के बाद चीफ जस्टिस के घर से इमरजेंसी सुनवाई की

मंगलवार देर शाम बॉम्बे हाईकोर्ट ने चीफ जस्टिस के घर पर एक "इमरजेंसी" सुनवाई की, जब उन्हें बताया गया कि बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) कमिश्नर ने शहर की निचली अदालतों के स्टाफ को एक कम्युनिकेशन जारी किया, जिसमें उन्हें 30 दिसंबर को शाम 2 घंटे के लिए "इलेक्शन ड्यूटी" पर रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया।बता दें, हाईकोर्ट अभी सर्दियों/नए साल की छुट्टियों के कारण 4 जनवरी तक बंद है और 5 जनवरी से फिर से शुरू होगा और केवल वेकेशन कोर्ट के जज (एक या दो) ही बारी-बारी से इमरजेंसी सुनवाई करते...

“पीड़िता ने अपने बयान में धीरे-धीरे सुधार किए”: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप और आपराधिक धमकी के मामले में बरी करने का फैसला बरकरार रखा
“पीड़िता ने अपने बयान में धीरे-धीरे सुधार किए”: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप और आपराधिक धमकी के मामले में बरी करने का फैसला बरकरार रखा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप और आपराधिक धमकी के मामले में एक आरोपी को बरी करने का फैसला यह मानते हुए बरकरार रखा कि पीड़िता की गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें कई विरोधाभास थे और कार्यवाही के हर स्टेज पर इसमें सुधार किए गए।कोर्ट ने आगे टिप्पणी की कि पीड़िता ने समय के साथ अपने बयान को बढ़ा-चढ़ाकर बताया, जिससे उसके बयानों पर भरोसा करना मुश्किल हो गया।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस सुशील कुकरेजा की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की,“यह एक ऐसा मामला है, जहां पीड़िता ने अपने बयान में...

मेधावी महिला उम्मीदवारों को उम्र में छूट देने से उन्हें ओपन कैटेगरी में मुकाबला करने से नहीं रोका जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मेधावी महिला उम्मीदवारों को उम्र में छूट देने से उन्हें ओपन कैटेगरी में मुकाबला करने से नहीं रोका जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अगर महिला उम्मीदवार मेधावी हैं तो उन्हें उम्र में छूट देने से वे ओपन अनारक्षित कैटेगरी की पोस्ट के लिए मुकाबला करने से अयोग्य नहीं हो जातीं।जस्टिस दीपक खोट की बेंच ने अधिकारियों को याचिकाकर्ता की आई असिस्टेंट (मिनिस्ट्रियल) के पद पर नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्टिकल या हॉरिजॉन्टल आरक्षण के लिए आवेदन करने वाला उम्मीदवार अनारक्षित ओपन कैटेगरी में मुकाबला कर सकता है, अगर उसके अंक उस कैटेगरी के लिए तय कट-ऑफ मार्क्स से ज़्यादा...

अनुच्छेद 16 का उल्लंघन: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निवास-आधारित आरक्षण रद्द किया
अनुच्छेद 16 का उल्लंघन: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निवास-आधारित आरक्षण रद्द किया

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट भर्ती विज्ञापन के एक क्लॉज़ को असंवैधानिक घोषित कर दिया, जो निवास के आधार पर जिला कैडर पदों के लिए पात्रता को सीमित करता था।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की,"जहां चयन प्रक्रिया विज्ञापन नोटिफिकेशन में नियमों या शर्तों के अनुसार आयोजित की गई, जिससे भेदभावपूर्ण परिणाम निकलते हैं तो यह उस उम्मीदवार की चुनौती से मुक्त नहीं है, जिसने इसमें भाग लिया।"ये टिप्पणियां सांबा जिले के एक अनुसूचित जाति के उम्मीदवार बलविंदर कुमार...

अंबाजी मंदिर सार्वजनिक संपत्ति, तीर्थयात्रियों के अधिकारों में कटौती नहीं की जा सकती: गुजरात हाईकोर्ट ने शाही परिवार के विशेष अनुष्ठान करने का दावा खारिज किया
अंबाजी मंदिर सार्वजनिक संपत्ति, तीर्थयात्रियों के अधिकारों में कटौती नहीं की जा सकती: गुजरात हाईकोर्ट ने शाही परिवार के विशेष अनुष्ठान करने का दावा खारिज किया

गुजरात हाईकोर्ट ने पूर्व दांता शाही परिवार के वारिसों के अंबाजी मंदिर में नवरात्रि के आठवें दिन और एक खास तरीके से अनुष्ठान करने के "विशेष अधिकारों" का दावा खारिज किया, जिससे तीर्थयात्रियों की प्रार्थना करने के अधिकार में "कटौती" होती, जिसे कोर्ट ने कहा कि इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती, क्योंकि मंदिर एक सार्वजनिक धार्मिक संस्थान है।बता दें, मंदिर के संबंध में कई कार्यवाही हुई थीं, जिसमें अपीलकर्ता द्वारा (1948 में तत्कालीन दांता राज्य के शासक और भारत सरकार के बीच विलय के बाद) 1953 में बॉम्बे...

मंदिर में विशेष सम्मान को पूर्ण अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता, पहला सम्मान हमेशा भगवान को: मद्रास हाईकोर्ट
मंदिर में विशेष सम्मान को पूर्ण अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता, पहला सम्मान हमेशा भगवान को: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मंदिर में विशेष सम्मान को पूर्ण अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता और मंदिर में पहला सम्मान हमेशा भगवान को होता है। इस तरह कोर्ट ने एक आश्रम की याचिका खारिज की, जिसमें कांचीपुरम के श्री देवराज स्वामी मंदिर में अपने प्रमुख के लिए पहले विशेष सम्मान की मांग की गई।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस सी कुमारप्पन की बेंच ने कहा कि हालांकि प्रमुखों को सम्मानित करने की मौजूदा प्रथा थी, लेकिन क्या इसे अधिकार के रूप में दावा किया जा सकता है या नहीं, यह एक ऐसा...