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इलाहाबाद हाईकोर्ट: सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद के खिलाफ बेदखली आदेश बरकरार, लेकिन रेवेन्यू कोड के तहत जुर्माना रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट: सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद के खिलाफ बेदखली आदेश बरकरार, लेकिन रेवेन्यू कोड के तहत जुर्माना रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि ग्राम सभा की 'खलिहान' भूमि पर बनी मस्जिद अवैध रूप से निर्मित है, लेकिन वर्तमान कब्जाधारियों पर लगाया गया जुर्माना टिकाऊ नहीं है, क्योंकि उन्हें मस्जिद के निर्माण से जोड़ने वाला कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है।जस्टिस आलोक माथुर की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता संबंधित भूमि पर अपना कोई अधिकार, शीर्षक या हित (right, title or interest) साबित नहीं कर सके। ऐसे में तहसीलदार द्वारा पारित बेदखली का आदेश विधि सम्मत है और इसमें यू.पी. रेवेन्यू...

कानून को सैनिक तक पहुंचना चाहिए: CJI सूर्यकांत ने लेह में सेना को किया संबोधित, सैनिक परिवारों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता योजना पर ज़ोर दिया
'कानून को सैनिक तक पहुंचना चाहिए': CJI सूर्यकांत ने लेह में सेना को किया संबोधित, सैनिक परिवारों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता योजना पर ज़ोर दिया

एक ऐतिहासिक पहल में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने लद्दाख के लेह सैन्य शिविर में सेना के जवानों को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि न्याय तक पहुंच उन सैनिकों तक भी पहुंचनी चाहिए, जो दूरदराज और ऑपरेशन के लिहाज़ से संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं।रक्षा कर्मियों और उनके परिवारों के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा,"कानून को सैनिक तक पहुंचना चाहिए, क्योंकि सैनिक हमेशा कानून तक नहीं पहुंच सकता।"यह पहली बार है जब भारत के किसी मौजूदा चीफ...

हाईकोर्ट ने जज पर सरकारी दबाव में काम करने का आरोप लगाने वाले वकील के खिलाफ खत्म की अवमानना कार्यवाही
हाईकोर्ट ने जज पर 'सरकारी दबाव' में काम करने का आरोप लगाने वाले वकील के खिलाफ खत्म की अवमानना कार्यवाही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही खत्म की। इस वकील ने खुली अदालत में एक सिंगल जज पर सरकारी दबाव में काम करने का आरोप लगाया।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने वकील द्वारा दी गई बिना शर्त माफ़ी को स्वीकार करने के बाद इस मामले को बंद कर दिया।यह घटना 12 फरवरी, 2026 को ज़मानत अर्ज़ी की सुनवाई के दौरान हुई थी। संबंधित वकील आरोपी की ओर से पेश हो रहा था।सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वे तीन हफ़्तों के भीतर...

शिकायत वाले मामलों में सिर्फ़ समन जारी होने पर अग्रिम ज़मानत नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2025 के फ़ैसले पर संदेह जताया, मामला बड़ी बेंच को सौंपा
शिकायत वाले मामलों में सिर्फ़ समन जारी होने पर अग्रिम ज़मानत नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2025 के फ़ैसले पर संदेह जताया, मामला बड़ी बेंच को सौंपा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह सवाल एक बड़ी बेंच को सौंप दिया कि क्या किसी शिकायत वाले मामले में, जिसमें कोई गैर-ज़मानती अपराध शामिल हो, आरोपी को समन जारी होने के बाद भी अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी स्वीकार की जा सकती है।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने 'आशीष कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य' (2025 LiveLaw (AB) 293) मामले में 2025 के एक अन्य बेंच के फ़ैसले से असहमति जताई। उस फ़ैसले में यह कहा गया कि BNSS की धारा 482 के तहत अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी सिर्फ़ समन जारी होने के आधार पर स्वीकार नहीं की जा...

दिल्ली हाईकोर्ट ने विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए झूठी गवाही की याचिकाओं के गलत इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी, CrPC की धारा 340 के तहत अर्जी खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए झूठी गवाही की याचिकाओं के गलत इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी, CrPC की धारा 340 के तहत अर्जी खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने झूठी गवाही (Perjury) की कार्यवाही के बढ़ते गलत इस्तेमाल के खिलाफ आगाह किया। कोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 340 के तहत अर्जियां अब झूठे सबूतों के असली मामलों को सुलझाने के बजाय, विरोधियों पर "दबाव बनाने" और मुकदमों में देरी करने के लिए ज़्यादा दायर की जा रही हैं।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने पारिवारिक संपत्ति विवाद में एक प्रतिवादी के खिलाफ झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने की मांग वाली एक अर्जी को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।यह मामला भाई-बहनों के बीच उनके पिता की मृत्यु के बाद...

मुसलमान भी नाबालिग की कस्टडी मांगने के लिए गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट के प्रावधानों का सहारा ले सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मुसलमान भी नाबालिग की कस्टडी मांगने के लिए 'गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट' के प्रावधानों का सहारा ले सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जो लोग मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आते हैं, उन्हें 'गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890' के तहत किसी नाबालिग की कस्टडी मांगने से रोका नहीं जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने कहा कि हालांकि पर्सनल लॉ पार्टियों के अधिकारों को तय करने में कोर्ट की मदद कर सकता है। फिर भी सबसे ज़रूरी बात हमेशा नाबालिग का भला ही होता है, जो बाकी सभी बातों से ऊपर होता है।कोर्ट असल में रिज़वाना नाम की एक महिला की तरफ से दायर 'हैबियस कॉर्पस' रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में रिज़वाना...

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दशक पुराने मर्डर केस में उम्रकैद की सज़ा पाए दोषियों को बरी किया, गवाह को अविश्वसनीय बताया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दशक पुराने मर्डर केस में उम्रकैद की सज़ा पाए दोषियों को बरी किया, गवाह को अविश्वसनीय बताया

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 के मर्डर केस में दो लोगों की सज़ा और उम्रकैद रद्द की। कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन का केस ऐसे अविश्वसनीय गवाह पर आधारित था, जिसकी गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीज़न बेंच ने आरोपियों की अपील मंज़ूर की। इन आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने IPC की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सज़ा सुनाई।यह मामला सितंबर, 2016 में रोहिणी के मैक्सफ़ोर्ट स्कूल के पास विनय सिंह नाम के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या से जुड़ा था।...

सबूत का एक भी अंश नहीं: दिल्ली कोर्ट ने बंदर कोल ब्लॉक मामले में सभी को बरी किया, पूर्व कोयला सचिव को सम्मानपूर्वक बरी किया गया
'सबूत का एक भी अंश नहीं': दिल्ली कोर्ट ने बंदर कोल ब्लॉक मामले में सभी को बरी किया, पूर्व कोयला सचिव को सम्मानपूर्वक बरी किया गया

दिल्ली स्पेशल कोर्ट ने बंदर कोल ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता, राज्यसभा के पूर्व सांसद विजय दर्डा, कारोबारी मनोज कुमार जायसवाल, देवेंद्र दर्डा और कंपनी AMR Iron & Steel Pvt. Ltd. को बरी किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आवंटन प्रक्रिया में किसी भी तरह की आपराधिकता, अनुचित प्रभाव या बेईमानी की नीयत को साबित करने वाला सबूत का एक भी अंश मौजूद नहीं था।यह फैसला 27 मार्च, 2026 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल जज सुनेना शर्मा ने सुनाया। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)...

CPC: कोर्ट में की गई साफ स्वीकारोक्ति को बाद में बदलने के लिए संशोधन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता- दिल्ली हाईकोर्ट
CPC: कोर्ट में की गई साफ स्वीकारोक्ति को बाद में बदलने के लिए संशोधन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता- दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पक्ष को अपनी दलीलों (pleadings) में की गई स्पष्ट और ठोस स्वीकारोक्ति (admission) से पीछे हटने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर जब इससे विरोधी पक्ष को महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हो चुके हों। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए एक सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रतिवादी को चार वर्ष से अधिक समय बाद अपना लिखित बयान संशोधित करने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेणु भटनागर की डिवीजन बेंच ने कहा कि यद्यपि संशोधन की शक्ति व्यापक है और अदालतें...

“यात्रा का सबूत नहीं, तो मुआवज़ा नहीं”: दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों हाथ कटने के बावजूद रेलवे क्लेम खारिज किया
“यात्रा का सबूत नहीं, तो मुआवज़ा नहीं”: दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों हाथ कटने के बावजूद रेलवे क्लेम खारिज किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना मुआवज़े से जुड़े एक अहम मामले में कहा है कि गंभीर चोट, जैसे दोनों हाथों का कट जाना, अपने आप में “अनटुवर्ड इंसीडेंट” का प्रमाण नहीं हो सकता, जब तक कि घटना के तथ्य स्पष्ट और विश्वसनीय रूप से सिद्ध न हों।जस्टिस मनोज कुमार की पीठ ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एक व्यक्ति को मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया गया था। अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वह Malwa Express से सोनीपत से झांसी की यात्रा कर रहा था और भारी भीड़ के कारण ट्रेन से गिर गया,...

मनगढ़ंत घटनाओं वाले फ़र्ज़ी इंश्योरेंस क्लेम आम बात: सुप्रीम कोर्ट ने फ़र्ज़ी आग के क्लेम की SIT जांच का आदेश दिया
'मनगढ़ंत घटनाओं वाले फ़र्ज़ी इंश्योरेंस क्लेम आम बात': सुप्रीम कोर्ट ने फ़र्ज़ी आग के क्लेम की SIT जांच का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केमिकल कंपनी सयोना कलर्स प्राइवेट लिमिटेड में 2011 में लगी आग की घटना की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि कंपनी का इंश्योरेंस क्लेम फ़र्ज़ी था।17 मार्च, 2026 को जारी अपने आदेश में कोर्ट ने कहा,"आगे बढ़ने से पहले हम यह कहना ज़रूरी समझते हैं कि मनगढ़ंत घटनाओं पर आधारित फ़र्ज़ी इंश्योरेंस क्लेम कोई नई बात नहीं है। इनका इंश्योरेंस सिस्टम की ईमानदारी और उस पर लोगों के भरोसे पर गंभीर असर पड़ता है।" कोर्ट ने अहमदाबाद के पुलिस...

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की हेरिटेज साइट्स पर हलफनामा दाखिल न करने पर ASI डायरेक्टर को जारी किया अवमानना ​​का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की हेरिटेज साइट्स पर हलफनामा दाखिल न करने पर ASI डायरेक्टर को जारी किया अवमानना ​​का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के डायरेक्टर जनरल को दिल्ली में 173 हेरिटेज स्मारकों के संरक्षण के संबंध में हलफनामा दाखिल न करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस नोंगमेइकाबम कोटिश्वर सिंह की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। यह सुनवाई राजीव सूरी द्वारा दायर याचिका से शुरू हुई, जिसमें दिल्ली में विभिन्न नागरिक प्राधिकरणों के तहत आने वाले स्मारकों के संरक्षण और निगरानी की मांग की गई। यह मामला मूल रूप से 'शेख अली की गुमटी' से जुड़ा...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने रेप केस में व्यक्ति को बरी किया, कहा - रिश्ता टूटने के बाद रंजिश में शिकायत दर्ज की गई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रेप केस में व्यक्ति को बरी किया, कहा - रिश्ता टूटने के बाद "रंजिश" में शिकायत दर्ज की गई

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2008 में रेप का दोषी पाए गए व्यक्ति की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने माना कि प्रॉसिक्यूशन के केस में कई विरोधाभास, ज़रूरी बातों की कमी और सबूतों की पुष्टि का अभाव था — खासकर शिकायतकर्ता का यह कबूलनामा कि उसने बाद में आरोपी से शादी कर ली थी और उसकी पत्नी के तौर पर उसके साथ रही थी।जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने क्रिमिनल अपील CRA 76 of 2009 (मिथुन पॉल बनाम पश्चिम बंगाल राज्य) पर फैसला सुनाते हुए कहा कि लिखित शिकायत में ही शादी की बात छिपाई गई। यह बात ट्रायल के दौरान ही सामने आई, जिससे...

पहले का खरीदार बाद की बिक्री रद्द करने की मांग कर सकता है, बाद के सौदे पहले के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
पहले का खरीदार बाद की बिक्री रद्द करने की मांग कर सकता है, बाद के सौदे पहले के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पहले के सौदे के तहत कोई खरीदार उसी विक्रेता द्वारा उसी प्रॉपर्टी की बाद में की गई बिक्री को चुनौती देने और उसे रद्द करवाने का हकदार है। कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि ऐसे बाद के सौदे पहले के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते।जस्टिस मिनी पुष्करणा ने अपने 86 पेज के फैसले में यह टिप्पणी की:“जहां एक ही अचल संपत्ति के दो लगातार ट्रांसफर किए गए हों, वहां कानून में उस ट्रांसफर को प्राथमिकता मिलती है, जो समय के हिसाब से पहले हुआ हो, न कि उस ट्रांसफर को जो बाद में हुआ हो। यह...

बिना ट्रायल के जेल में रखना सज़ा के बराबर: सुप्रीम कोर्ट ने दो साल की अंडरट्रायल कस्टडी के बाद व्यक्ति को ज़मानत दी
बिना ट्रायल के जेल में रखना सज़ा के बराबर: सुप्रीम कोर्ट ने दो साल की अंडरट्रायल कस्टडी के बाद व्यक्ति को ज़मानत दी

यह देखते हुए कि किसी आरोपी को बिना ट्रायल शुरू हुए लगभग दो साल तक हिरासत में रखना सज़ा के बराबर है, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में प्रदीप कुमार नाम के एक व्यक्ति को ज़मानत दे दी, जिस पर कथित तौर पर रंगदारी मांगने और हत्या की कोशिश का आरोप था।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 11 जुलाई, 2025 के उस आदेश के खिलाफ अपील को मंज़ूरी दी, जिसमें ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया।कोर्ट ने कहा,"अपीलकर्ता की गिरफ्तारी को लगभग दो साल बीत चुके हैं, जबकि...

अर्णब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे अनिल अंबानी, दायर किया मानहानि का मुकदमा
अर्णब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे अनिल अंबानी, दायर किया मानहानि का मुकदमा

उद्योगपति अनिल अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने न्यूज़ चैनल रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर-इन-चीफ़ अर्णब गोस्वामी के खिलाफ रोक लगाने की मांग की। अंबानी का दावा है कि चैनल की लगातार कवरेज ने उनकी प्रतिष्ठा को "नुकसान" पहुंचाया है।अंबानी द्वारा दायर इस मुकदमे की सुनवाई 1 अप्रैल को सिंगल-जज जस्टिस मिलिंद जाधव करेंगे।अपने मुकदमे में अंबानी ने दावा किया है कि वे प्रतिवादियों द्वारा हाल ही में लिखे और प्रकाशित किए गए कुछ लेखों से आहत हैं, जिन्हें प्रतिवादियों के न्यूज़...

भोजशाला मंदिर - कमाल मौला मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, हाईकोर्ट के जजों के साइट पर जाने के फैसले को चुनौती
भोजशाला मंदिर - कमाल मौला मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, हाईकोर्ट के जजों के साइट पर जाने के फैसले को चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के दो जजों के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें उन्होंने भोजशाला मंदिर-सह-कमाल मौला मस्जिद परिसर का निरीक्षण करने का निर्णय लिया था। यह विवाद इस संरचना के असली धार्मिक स्वरूप से जुड़ा है।यह याचिका 'मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी' ने दायर की। इसमें हाईकोर्ट की एक डिवीज़न बेंच द्वारा 16 मार्च को पारित आदेश को चुनौती दी गई। यह आदेश 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' द्वारा दायर एक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें इस साइट को देवी...