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नोएडा में मुस्लिम मौलवी पर हमले के मामले में FIR में हेट क्राइम धाराएँ न जोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस से सवाल किया
नोएडा के एक मुस्लिम मौलवी द्वारा दायर कथित हेट क्राइम से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि वर्ष 2021 में दर्ज एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 153B और 295A जैसे प्रावधान क्यों नहीं लगाए गए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ काज़ीम अहमद शेरवानी की याचिका पर विचार कर रही थी, जिनका आरोप है कि उन पर उनकी मुस्लिम पहचान के कारण हमला किया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से निष्पक्ष जांच और शिकायत पर कार्रवाई से इनकार करने वाले...
डिजिटल ठगी के खिलाफ देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान की जरूरत: राजस्थान हाइकोर्ट
डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताते हुए राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया, टीवी और रेडियो के माध्यम से देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि आम लोगों को ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा सके।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह टिप्पणी दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। इन आरोपियों के खिलाफ कई साइबर शिकायतें दर्ज थीं और उनके बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।मामले में...
7 साल में सिर्फ 7 गवाह: सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर यूटी को लगाई फटकार, लंबित आपराधिक मामलों का ब्योरा तलब
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश में आपराधिक मुकदमों की धीमी सुनवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि एक विचाराधीन कैदी को सात साल तक जेल में रखना और इस दौरान सिर्फ सात गवाहों की गवाही कराना संविधान के अनुच्छेद 21 और त्वरित सुनवाई के अधिकार का खुला उल्लंघन है।कोर्ट ने इस मामले में आरोपी को जमानत देते हुए जम्मू-कश्मीर के गृह सचिव को अगली सुनवाई में ऑनलाइन पेश होने का निर्देश दिया m।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह भी आदेश दिया कि गृह सचिव उन सभी...
दिल्ली दंगों के मामले में पुलिस जांच पर कड़ी टिप्पणी, कोर्ट ने कहा- आरोपियों के अधिकार रौंद दिए गए
दिल्ली कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस आयुक्त को कार्रवाई के निर्देश दिए।अदालत ने सबूत जुटाने और उन्हें साबित करने में गंभीर चूक पाते हुए कहा कि जिस तरीके से मामले के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई, वह निगरानी तंत्र के पूरी तरह विफल होने को दर्शाता है।कड़कड़डूमा कोर्ट के अपर सेशन जज प्रवीण सिंह ने कहा कि जिस ढिठाई और दंडमुक्ति के साथ केस रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया उससे यह साफ कि सीनियर लेवल पर निगरानी व्यवस्था ने काम ही...
'आप भारतीयों के डेटा से खिलवाड़ नहीं कर सकते': प्राइवेसी पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट ने Meta और WhatsApp से किए तीखे सवाल
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने Meta Platforms और WhatsApp LLC की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत भारतीय नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा के शोषण की अनुमति नहीं देगी।अदालत Meta और WhatsApp द्वारा दायर उन अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा व्हाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी पर लगाए गए ₹213.14 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा था। इस मामले में CCI की ओर से...
बा*ड्स ऑफ बॉलीवुड वेब सीरीज पर मानहानि मामला: समीर वानखेड़े को मुंबई कोर्ट जाने की अनुमति
दिल्ली हाइकोर्ट ने मंगलवार को आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े को नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज बा*ड्स ऑफ बॉलीवुड में उनके कथित मानहानिकारक चित्रण को लेकर मुंबई की सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट दिनडोशी में मुकदमा दायर करने की अनुमति दी।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने वानखेड़े की उस अर्जी को मंजूरी दी, जिसमें उन्होंने हाल ही में दिए गए आदेश के तहत सक्षम अदालत से संपर्क करने की अनुमति मांगी थी।इससे पहले दिल्ली हाइकोर्ट ने क्षेत्राधिकार के अभाव में वानखेड़े की मानहानि याचिका सुनने से इनकार करते हुए वाद पत्र...
पति की अधिक आय का अर्थ पत्नी को अधिक भरण-पोषण नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने पत्नी द्वारा भरण-पोषण राशि बढ़ाने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल पति की अधिक आय के आधार पर पत्नी को अधिक या निश्चित अनुपात में भरण-पोषण देना कानून का उद्देश्य नहीं है।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण को पति की आय में हिस्सेदारी का साधन नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस फरजंद अली ने अपने आदेश में कहा कि कानून यह नहीं कहता कि यदि पति अधिक कमाता है तो पत्नी को अनिवार्य रूप से उसकी आय का आधा या बड़ा हिस्सा दिया जाए। ऐसा करना भरण-पोषण की कार्यवाही को संपत्ति या आय के बंटवारे...
मामूली विरोधाभास और शत्रुतापूर्ण गवाह दोषसिद्धि को प्रभावित नहीं करते: 33 साल पुराने मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने धारा 324 IPC की सज़ा बरकरार रखी
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाहों के बयान में मामूली विरोधाभास या कुछ अभियोजन गवाहों के शत्रुतापूर्ण हो जाने मात्र से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं होता, यदि संपूर्ण साक्ष्य विश्वसनीय और संगत हो।जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने यह टिप्पणी धारा 324 भारतीय दंड संहिता (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना) के तहत दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई करते हुए की।अपीलकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि अभियोजन के कुछ गवाह शत्रुतापूर्ण हो गए पीड़ित पक्ष के पारिवारिक गवाहों के बयानों में विरोधाभास है तथा...
श्रम कानून फायदेमंद कानून, लिमिटेशन पर बहुत ज़्यादा तकनीकी नज़रिए से बचना चाहिए: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मज़दूरों द्वारा किए गए दावों को लिमिटेशन के बहुत ज़्यादा तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए खासकर जब देरी COVID-19 महामारी और कानूनी जागरूकता की कमी के कारण हुई हो।श्रम कल्याण कानूनों के फायदेमंद स्वभाव पर ज़ोर देते हुए कोर्ट ने मेडिकैप्स लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज की, जिसमें इंदौर की इंडस्ट्रियल कोर्ट द्वारा पारित रिमांड आदेश को चुनौती दी गई थी।यह मामला 22 नवंबर, 2019 को मेडिकैप्स लिमिटेड के औद्योगिक प्रतिष्ठान के बंद होने से जुड़ा है। नियोक्ता...
आम जनता की जान से खिलवाड़: दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो केबल चोरी के आरोपी को ज़मानत देने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो के इंफ्रास्ट्रक्चर से हाई-वोल्टेज केबल चुराने के आरोपी एक व्यक्ति को ज़मानत देने से इनकार किया।कोर्ट ने कहा कि ऐसे काम आम जनता की जान से खिलवाड़ करने जैसा है और इसका पब्लिक सेफ्टी पर गंभीर असर पड़ता है।जस्टिस सौरभ बनर्जी मेट्रो ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली 33 kV पावर केबल की चोरी के मामले में आरोपी की ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी पर दिल्ली मेट्रो रेलवे (ऑपरेशन और मेंटेनेंस) एक्ट और दूसरे आपराधिक कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया।याचिका खारिज करते...
अविवाहित पोती की सीमित संपत्ति पहले से मौजूद अधिकार के आधार पर पूर्ण स्वामित्व में बदल सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पहले से मृत बेटे की अविवाहित नाबालिग बेटी का भरण-पोषण करने का कर्तव्य "पहले से मौजूद अधिकार" हो सकता है, जो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14(1) के तहत उसकी सीमित संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में बदलने में सक्षम है।जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शास्त्रीय हिंदू कानून महिलाओं की सुरक्षा और भरण-पोषण के लिए निरंतर पारिवारिक दायित्व को मान्यता देता है, जो मुख्य अभिभावक की मृत्यु के साथ समाप्त नहीं होता है, बल्कि निकटतम रिश्तेदारों...
आर्बिट्रेशन एग्रीमेंट के जाली होने का आरोप हो तो विवाद आर्बिट्रेशन योग्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 फरवरी) को कहा कि पार्टियों को आर्बिट्रेशन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब आर्बिट्रेशन क्लॉज वाले कॉन्ट्रैक्ट के अस्तित्व पर ही सवाल उठाया गया हो।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा,"...ऐसे मामले में जहां आर्बिट्रेशन क्लॉज या एग्रीमेंट के अस्तित्व में न होने के संबंध में दलील दी जाती है तो यह धोखाधड़ी का एक गंभीर आरोप होगा और यह एग्रीमेंट के विषय को आर्बिट्रेशन योग्य नहीं बनाएगा।"कोर्ट ने उक्त टिप्पणी यह बताते हुए कि आर्बिट्रेशन क्लॉज वाले...
'सुप्रीम कोर्ट बैन के बाद भी यूपी में बुलडोज़र कार्रवाई जारी': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा— क्या यह सत्ता का गलत इस्तेमाल है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र से मकान गिराने की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के “बुलडोज़र जस्टिस” फैसले के बाद भी राज्य में दंड के तौर पर मकान तोड़े जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि क्या किसी अपराध के तुरंत बाद मकान गिरा देना सरकार की शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं है। अदालत ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहाँ एफआईआर दर्ज होते ही पहले नोटिस दिए गए और बाद...
IBC | आपस में जुड़ी कॉर्पोरेट संस्थाओं के खिलाफ सिंगल इनसॉल्वेंसी याचिका दायर की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
घर खरीदारों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 फरवरी) को फैसला सुनाया कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 7 के तहत एक से ज़्यादा कॉर्पोरेट संस्थाओं के खिलाफ एक ही इनसॉल्वेंसी याचिका दायर की जा सकती है, अगर वे प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन और मार्केटिंग में आपस में जुड़ी हुई हैं।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने NCLAT का फैसला बरकरार रखा, जिसने दो कॉर्पोरेट संस्थाओं के खिलाफ जॉइंट कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) की...
ज्यूडिशियल ऑफिसर को प्रभावित करने के लिए वकील ने मांगी ₹30 लाख की रिश्वत, हाईकोर्ट ने कहा- आरोपी को जमानत का हक नहीं
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने वकील की स्थायी जमानत याचिका खारिज की, जिस पर आरोप है कि उसने तलाक के मामले में मनपसंद फैसला पाने के लिए एक ज्यूडिशियल ऑफिसर को प्रभावित करने के लिए ₹30 लाख की अवैध रिश्वत मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि ये आरोप न्याय व्यवस्था की नींव पर ही हमला करते हैं और इस मामले में सावधानी बरतने की जरूरत है।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,"न्यायिक प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और प्रभाव के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में ऐसे कारक अपने आप में जमानत देने के लिए काफी नहीं हैं, खासकर जब आरोप पहली नज़र...
दिल्ली पुलिस ने संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में जमानत का विरोध किया, कहा - सांसदों के मन में डर पैदा करने को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता
दिल्ली पुलिस ने सोमवार कोहाईकोर्ट में 13 दिसंबर, 2023 को हुए संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में आरोपी तीन लोगों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया।दिल्ली पुलिस के वकील ने जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच को बताया कि आरोपियों द्वारा स्मोक कैनिस्टर में ज्वलनशील पदार्थ ले जाने और सांसदों के मन में डर पैदा करने के काम को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।जस्टिस मधु जैन भी इस बेंच का हिस्सा थीं, जो आरोपी मनोरंजन डी, सागर शर्मा और ललित झा द्वारा UAPA मामले में जमानत के लिए दायर याचिकाओं पर...
हाईकोर्ट ने कलेक्टर द्वारा नियुक्त 'ट्री ऑफिसर' की अनुमति पर इंदौर में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई, कहा- सिर्फ़ राज्य सरकार ही नियुक्त कर सकती है
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने कलेक्टर द्वारा नियुक्त ट्री ऑफिसर द्वारा दी गई अनुमतियों के आधार पर इंदौर में पेड़ों की कटाई पर यह मानते हुए रोक लगाई कि ऐसी नियुक्ति मध्य प्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 के तहत कानून के अधिकार के बिना है।कोर्ट डॉ. अमन शर्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 2001 के अधिनियम की धारा 4 और 6 की संवैधानिक वैधता और इंदौर के मल्हार आश्रम और MOG लाइन्स में विकास...
सोनम वांगचुक नेपाल जैसे Gen-Z विरोध प्रदर्शन भड़का रहे थे, गांधीवादी तरीका सिर्फ दिखावा: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने लद्दाख के युवा पीढ़ी को पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में Gen-Z आंदोलनों से प्रेरित होने के लिए उकसाया, अगर लद्दाख को छठी अनुसूची की मांग नहीं मानी जाती है। राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लद्दाख में विरोध प्रदर्शन हिंसक होने के बाद वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि...
NCCI ने 12 राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती देते हुए दायर की सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नेशनल काउंसिल ऑफ़ चर्चेज़ ऑफ़ इंडिया (NCCI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर बारह राज्यों - ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान - द्वारा बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले को धार्मिक धर्मांतरण कानूनों से संबंधित अन्य समान याचिकाओं के साथ टैग कर दिया। इन याचिकाओं पर तीन-जजों की...
PMLA जमानत के लिए नाजुक संतुलन ज़रूरी, गुनाह या बेगुनाही पर आखिरी फैसला नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि PMLA के तहत बरी करने या दोषी ठहराने के आखिरी फैसले और जमानत देने या न देने के आदेश के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखना होगा।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि बेल के स्टेज पर कोर्ट को यह पॉजिटिव नतीजा देने की ज़रूरत नहीं है कि आरोपी ने कथित अपराध नहीं किया।कोर्ट ने कहा,"ऐसे आवेदनों पर विचार करते समय कोर्ट से यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वह जांचकर्ता द्वारा इकट्ठा किए गए सबूतों का बारीकी से विश्लेषण करके आरोप की खूबियों में गहराई से जाए; कोर्ट को खुद को सिर्फ इस बात...



















