जानिए हमारा कानून
क्या भारत में सच में राजद्रोह कानून समाप्त हो गया? बीएनएस 152 बनाम आईपीसी 124A की तुलना
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS), 2023 को लागू करने से भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) में एक बड़ा बदलाव आया।इसने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code - IPC), 1860 को पूरी तरह से बदल दिया। आईपीसी की धारा 124A, जो राजद्रोह (Sedition) से संबंधित थी, सबसे विवादास्पद प्रावधानों में से एक थी। सरकार ने दावा किया कि नए कानून में इसे हटा दिया गया है, लेकिन बीएनएस की धारा 152 को गहराई से देखने पर पता चलता है कि राजद्रोह की मूल अवधारणा अब भी नए रूप में मौजूद...
Transfer Of Property में डिपॉजिट टू कोर्ट किसे कहा जाता है?
संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 के अंतर्गत किसी भी बंधककर्ता को अपनी बंधक संपत्ति को मोचन करने का अधिकार प्राप्त है। यदि किसी बंधककर्ता ने अपनी कोई संपत्ति बंधक की संविदा के अंतर्गत बंधकदार को अंतरण की है तो उस संपत्ति की ऋण की अदायगी के समय विमोचन के अधिकार का प्रयोग कर पुनः प्राप्त कर सकता है। इस अधिनियम की धारा-83 इसी प्रकार मोचन के अधिकार का एक प्रारूप है। यदि कोई व्यक्ति अपने मोचन के अधिकार का प्रयोग करना चाहता है तथा अपने लिए गए ऋण की अदायगी करना चाहता है तब उसके पास में यह विकल्प उपलब्ध होगा...
Transfer Of Property की धारा 91 के प्रावधान
एक बंधककर्ता को अपनी संपत्ति पर मोचन का अधिकार प्राप्त होता है। बंधककर्ता के अलावा भी कुछ व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें मोचन का अधिकार प्राप्त है, धारा-91 उन्हीं व्यक्तियों का उल्लेख कर रही है।विधि बन्धककर्ता को यह अधिकार प्रदान करती है कि वह बन्धक रकम का भुगतान कर बन्धक सम्पत्ति वापस प्राप्त करे। बन्धककर्ता का यह अधिकार मोचनाधिकार कहलाता है। मोचनाधिकार की विवेचना अधिनियम की धारा 60 में की गयी है। धारा 91 उन व्यक्तियों के सम्बन्ध में प्रावधान करती है जो मोचन हेतु वाद ला सकेंगे या बन्धक सम्पत्ति का...
अन्य कारणों से लाइसेंस रद्द करने की शक्ति – राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 की धारा 35
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) शराब और नशीले पदार्थों (Intoxicating Substances) के निर्माण, बिक्री, वितरण और परिवहन को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया एक कानून है।यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियाँ एक वैध (Legal) ढांचे के अंतर्गत रहें। इसके तहत सरकार को लाइसेंस (Licence), परमिट (Permit) या पास (Pass) जारी करने का अधिकार प्राप्त होता है, और यदि आवश्यक हो तो इन्हें निलंबित (Suspend) या रद्द (Cancel) भी किया जा सकता है। ...
भारतीय न्याय प्रणाली में अपराधों के समझौते की सीमाएँ और शर्तें : BNSS, 2023 की धारा 359
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS), 2023 की धारा 359 अपराधों के समझौते (Compounding of Offences) की प्रक्रिया को निर्धारित करती है।इस धारा का पहला भाग यह बताता है कि कौन से अपराध समझौतायोग्य (Compoundable) हैं और उनका समझौता कौन कर सकता है। हालांकि, धारा 359 का दूसरा भाग, विशेष रूप से उपधारा (3) से (9) तक, इस प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत प्रावधानों को स्पष्ट करता है। इस भाग में यह बताया गया है कि अपराध के उकसावे (Abetment) और प्रयास (Attempt) का समझौता कैसे...
क्या हर महिला, चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित, सुरक्षित और कानूनी गर्भपात का अधिकार रखती है?
सुरक्षित और कानूनी गर्भपात (Abortion) का अधिकार महिलाओं के प्रजनन अधिकार (Reproductive Rights) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Autonomy) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। X बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट, दिल्ली सरकार (2022) के ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम, 1971 और उसके नियमों की व्याख्या की।कोर्ट ने कहा कि सभी महिलाओं को, चाहे वे विवाहित (Married) हों या अविवाहित (Unmarried), गर्भपात की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।...
आतंकवादी अपराधों की परिभाषा, सजा और कानूनी प्रक्रियाओं में अंतर : UAPA और BNS के बीच अंतर
भारत में आतंकवाद (Terrorism) से निपटने के लिए Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 (UAPA) और Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) दो महत्वपूर्ण कानून हैं। हालांकि दोनों का उद्देश्य आतंकवाद को रोकना और दंडित करना है, लेकिन इनकी संरचना (Structure), क्षेत्र (Scope), प्रक्रियाएं (Procedures) और कानूनी प्रभाव (Legal Implications) अलग-अलग हैं।UAPA एक विशेष कानून (Special Law) है, जो आतंकवाद को रोकने और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के लिए बनाया गया था। दूसरी ओर, BNS, जो अब भारतीय दंड संहिता...
क्या भारत के बाहर हुई हिरासत को धारा 428 सीआरपीसी के तहत सजा में समायोजित किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न (Legal Question) पर विचार किया। यह प्रश्न था कि क्या किसी आरोपी (Accused) को किसी विदेशी (Foreign) देश में बिताए गए हिरासत (Detention) के समय को भारतीय अदालत द्वारा दी गई सजा में समायोजित (Set-Off) करने का अधिकार मिल सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धारा 428 सीआरपीसी (CrPC) केवल भारत में बिताए गए हिरासत (Detention) के समय पर लागू होती है। किसी अन्य देश में किसी अन्य मामले में...
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत लाइसेंस को रद्द और निलंबित करने की शक्ति – धारा 34
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) राज्य में शराब और अन्य नशीले पदार्थों के व्यापार को नियंत्रित करता है। इस अधिनियम के तहत शराब के निर्माण, बिक्री और परिवहन को कानूनी रूप से संचालित करने के लिए लाइसेंस (Licence), परमिट (Permit) और पास (Pass) दिए जाते हैं।हालांकि, सरकार ये लाइसेंस जारी करती है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करती है कि इनका दुरुपयोग न हो। धारा 34 (Section 34) विशेष रूप से उन परिस्थितियों को निर्धारित करती है जिनमें लाइसेंस, परमिट या पास को रद्द (Cancel) या निलंबित...
भारतीय न्याय संहिता, 2023 में नए प्रावधान और महत्वपूर्ण बदलाव
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) में कई नए प्रावधान (Provisions) जोड़े गए हैं और पहले से मौजूद कई कानूनी परिभाषाओं (Legal Definitions) और धाराओं में बदलाव किए गए हैं।इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य नए अपराधों को शामिल करना, कानून को अधिक स्पष्ट बनाना और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code - IPC) के कई प्रावधानों को हटाया गया, बदला गया या विस्तारित किया गया है। इस लेख में हम बीएनएस में शामिल कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों (Modifications) और...
अपराधों के समझौते या Compounding of Offences पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 359
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS), 2023 की धारा 359 उन अपराधों से संबंधित है, जिनका समझौता (Compounding) किया जा सकता है। समझौते का मतलब होता है कि अपराध के पीड़ित (Victim) और आरोपी (Accused) आपसी सहमति से मामला निपटा सकते हैं, जिससे केस बिना ट्रायल (Trial) के समाप्त हो जाता है।यह प्रावधान (Provision) अदालतों (Courts) का बोझ कम करने के लिए बनाया गया है, ताकि छोटी-मोटी आपराधिक घटनाओं को अदालत से बाहर सुलझाया जा सके। लेकिन सभी अपराधों का समझौता नहीं किया जा...
Transfer Of Property की धारा 81 और 82 के प्रावधान
संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 81 जो क्रमबंधन का उल्लेख करती है तथा धारा 82 जो अभिदाय का उल्लेख करती है।क्रमबंधन- (धारा 81)'क्रमबन्धन' से अभिप्रेत है चीजों को या वस्तुओं को एक क्रम में रखना क्रमबन्धन का अधिकार पाश्चिक बन्धकदार का अधिकार है।धारा 81 प्रतिभूतियों का क्रमबन्धन सम्बन्धी सिद्धान्त अधिनियमित करती है। क्रमबन्धन के सिद्धान्त के अनुसार यदि दो या अधिक सम्पत्तियों का स्वामी, जब उन्हें एक व्यक्ति के पास बन्धक रखता है और तत्पश्चात् उन सम्पत्तियों में से एक या अधिक सम्पत्तियों को किसी अन्य...
Transfer Of Property में एक से ज्यादा व्यक्ति के पास संपत्ति Mortgage रखने पर क्या होगा
Transfer Of Property, 1882 की धारा 29 के अंतर्गत एक संपत्ति को अनेक व्यक्तियों के पास बंधक रखने के परिणामस्वरूप नियमों का उल्लेख किया गया है। किसी भी संपत्ति को एक से अधिक व्यक्तियों के समक्ष भी बंधक रखा जा सकता है तथा उन पर ऋण लिया जा सकता है। ऐसी परिस्थितियां होती है कि एक से अधिक व्यक्तियों के पास कोई संपत्ति बंधक रखी गई है उसका बंधक के अंतर्गत अंतरण किया गया है तब इस धारा की सहायता ली जाती है। इस धारा संबंधित मामलों में विभिन्न बन्धकदारों की वरीयता काल की दृष्टि से निर्धारित की जाती है। इस...
क्या भारतीय न्यायपालिका को मृत्यु दंड देने से पहले सुधारात्मक न्याय और बचाव में दी गई परिस्थितियों पर ध्यान देना चाहिए?
Manoj & Ors. बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2022 LiveLaw (SC) 510) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को मृत्यु दंड (Death Penalty) देने से पहले उसके बचाव में दी गई सभी परिस्थितियों (Mitigating Factors) पर विचार करना आवश्यक है।अदालत ने यह पाया कि निचली अदालतों ने अभियुक्त (Accused) की मानसिक और सामाजिक स्थिति की सही जांच किए बिना उसे मृत्यु दंड दे दिया था। यह लेख इस मामले में न्यायालय द्वारा दिए गए प्रमुख कानूनी सिद्धांतों (Legal Principles) को समझाने का प्रयास करेगा,...
किसी नए अभियुक्त को मुकदमे में शामिल करने की प्रक्रिया : BNSS, 2023 की धारा 358
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) भारत की आपराधिक प्रक्रिया (Criminal Procedure) को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लाई गई।धारा 358 एक महत्वपूर्ण प्रावधान (Provision) है जो अदालत को यह शक्ति देता है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम शुरू में अभियुक्त (Accused) के रूप में दर्ज नहीं किया गया था, लेकिन मुकदमे (Trial) के दौरान उसके अपराध में शामिल होने का प्रमाण (Evidence) मिलता है, तो अदालत उसे भी मुकदमे में अभियुक्त बना सकती है। यह प्रावधान पहले दंड प्रक्रिया...
भारतीय न्याय संहिता, 2023 में हटाए गए पुराने कानून
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS 2023) ने भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इनमें कुछ पुराने प्रावधानों (Provisions) को हटाना भी शामिल है।इनमें प्रमुख रूप से व्यभिचार (Adultery), धारा 377 (Section 377) और राजद्रोह (Sedition) कानून को हटाया गया है। ये सभी प्रावधान कई वर्षों से न्यायालयों (Courts), समाज और सरकार के बीच चर्चा और बहस का विषय रहे हैं। इन प्रावधानों को हटाने का मुख्य उद्देश्य संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के अनुरूप कानून बनाना और...
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत लाइसेंस, परमिट और पास – धारा 31, 32 और 33
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) राज्य में शराब और अन्य नशीले पदार्थों (Intoxicating Substances) के निर्माण, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करता है।इस अधिनियम के तहत सरकार ने एक लाइसेंस (Licence), परमिट (Permit) और पास (Pass) की प्रणाली बनाई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी व्यवसाय वैध तरीके से संचालित हों, आवश्यक शुल्क (Fees) जमा करें और निर्धारित शर्तों (Conditions) का पालन करें। धारा 31, 32 और 33 इन कानूनी दस्तावेजों के रूप, शर्तों, पहले से जारी लाइसेंस की...
धारा 357, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023: जब आरोपी अदालती कार्यवाही को नहीं समझ पाता
भारतीय न्याय प्रणाली (Justice System) यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) का अधिकार मिले, चाहे वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो या नहीं।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 357 उन मामलों से संबंधित है जहां कोई आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) तो नहीं है, लेकिन फिर भी अदालत में चल रही कार्यवाही को समझने में असमर्थ है। यह प्रावधान (Provision) यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे व्यक्ति के अधिकारों (Rights) की रक्षा की जाए और उसे बिना पूरी समझ के...
क्या Sex Workers को कानून और समाज में समानता और सुरक्षा का अधिकार मिल पाया है?
सुप्रीम कोर्ट ने Budhadev Karmaskar v. State of West Bengal & Ors. (2022) केस में Sex Workers के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) को Article 21 के तहत मान्यता दी। कोर्ट ने यह स्वीकार किया कि समाज में Sex Workers के साथ भेदभाव (Discrimination) होता है और उन्हें मानवीय गरिमा (Human Dignity) से वंचित कर दिया जाता है।इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण निर्देश (Directions) दिए ताकि Sex Workers को पुलिस उत्पीड़न (Harassment) से सुरक्षा मिले, उन्हें Aadhaar कार्ड जैसी पहचान (Identity)...
भारतीय न्याय संहिता, 2023 में किए गए प्रमुख परिवर्तन और संशोधन
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 - BNS) ने भारत के आपराधिक कानून (Criminal Law) में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।यह नया कानून भारतीय दंड संहिता, 1860 (Indian Penal Code, 1860 - IPC) का स्थान लेता है और इसमें डिजिटल अपराध (Digital Crimes), सामुदायिक सेवा (Community Service), लैंगिक समावेशिता (Gender Inclusivity) और झपटमारी (Snatching) को लेकर नए प्रावधान (Provisions) जोड़े गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य कानून को आधुनिक बनाना और बदलते समय के अनुसार अपराधों को पहचानना और...



















