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न्यायालय में अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 355
न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) के दौरान कई बार ऐसे हालात उत्पन्न होते हैं जब अभियुक्त (Accused) की व्यक्तिगत उपस्थिति (Personal Attendance) को लेकर लचीला दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होती है।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 355 इस विषय को संबोधित करती है और अभियुक्त को कुछ विशेष परिस्थितियों में न्यायालय (Court) में उपस्थित होने से छूट (Exemption) प्रदान करने की अनुमति देती है। यह प्रावधान पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 317...
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत शराब निर्माण और बिक्री के विशेष अधिकार : धारा 24, 26 और 27
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) एक व्यापक कानून (Comprehensive Law) है जो राज्य में शराब (Liquor) और मादक पदार्थों (Intoxicating Drugs) के निर्माण (Manufacture), बिक्री (Sale) और वितरण (Distribution) को नियंत्रित (Regulate) करता है।इस अधिनियम (Act) के तहत, सरकार को यह अधिकार (Right) है कि वह किसी व्यक्ति या व्यवसाय (Business) को किसी विशेष क्षेत्र (Particular Area) में शराब निर्माण या बिक्री का विशेषाधिकार (Exclusive Privilege) प्रदान कर सकती है। विशेषाधिकार...
भारतीय न्याय संहिता 2023 की अंतिम धारा 358 : IPC के निरसन और इसके प्रभाव
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) 2023 के लागू होने के साथ ही भारत में दंड कानून (Penal Law) में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। इस संहिता ने 160 वर्षों से अधिक समय तक प्रभावी रहे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code – IPC) को पूरी तरह से निरस्त (Repeal) कर दिया है।धारा 358 (Section 358) इसी संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यह स्पष्ट करती है कि IPC के निरसन (Repeal) का प्रभाव क्या होगा और इसके तहत पहले किए गए कार्यों, दायित्वों और लंबित मामलों का क्या होगा। इस धारा के...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 353: अभियुक्त को गवाह बनने का अधिकार
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) भारत में आपराधिक प्रक्रिया (Criminal Procedure) को आधुनिक बनाने के लिए लाई गई थी। इस संहिता की एक महत्वपूर्ण धारा 353 अभियुक्त (Accused) को एक सक्षम गवाह (Competent Witness) बनने का अधिकार देती है।यह धारा अभियुक्त को अपने बचाव में शपथ (Oath) लेकर गवाही देने का अवसर देती है, लेकिन यदि वह गवाही नहीं देना चाहता, तो उसके चुप रहने पर कोई भी नकारात्मक निष्कर्ष (Negative Inference) नहीं निकाला जा सकता। धारा 353(1): अभियुक्त...
क्या नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल हाई कोर्ट के अधिकारों को सीमित करता है?
सुप्रीम कोर्ट ने MP Bar Association बनाम Union of India (2022) मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की संवैधानिक वैधता (Constitutional Validity) और पर्यावरण से जुड़े मामलों में इसकी भूमिका की जांच की। याचिकाकर्ताओं (Petitioners), जो मध्य प्रदेश के अधिवक्ता (Advocates) थे, ने NGT अधिनियम, 2010 (NGT Act, 2010) की कुछ धाराओं को चुनौती दी।उन्होंने कहा कि यह हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को सीमित करता है और लोगों को न्याय (Justice) पाने के लिए प्रभावी उपाय (Effective Remedy) नहीं...
धारा 352 BNSS 2023 के तहत मौखिक तर्क और तर्क-सार प्रस्तुत करने की प्रक्रिया
किसी भी कानूनी प्रक्रिया (Legal Proceeding) में पक्षकारों द्वारा दिए गए तर्क (Arguments) मुकदमे के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS) की धारा 352 यह स्पष्ट रूप से बताती है कि अदालत में मौखिक तर्क (Oral Arguments) कैसे दिए जाने चाहिए और किसी पक्षकार को तर्कों का लिखित सार (Memorandum of Arguments) कैसे प्रस्तुत करना चाहिए।यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि तर्क संक्षिप्त (Concise), व्यवस्थित (Structured) और...
असहाय व्यक्ति की देखभाल और आवश्यकताओं को पूरा करने के अनुबंध के उल्लंघन पर कानूनी प्रावधान : धारा 357 भारतीय न्याय संहिता, 2023
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) 2023 में कई अपराधों और उनके लिए सजा के प्रावधान हैं।इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण धारा 357 (Section 357) है, जो उन मामलों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति कानूनी अनुबंध (Legal Contract) के तहत किसी असहाय व्यक्ति (Helpless Person) की देखभाल करने या उसकी आवश्यकताएँ (Needs) पूरी करने के लिए बाध्य है, लेकिन स्वेच्छा से अपनी ज़िम्मेदारी निभाने से इनकार कर देता है। यह धारा उन मामलों में सजा का प्रावधान करती है, जहाँ कोई व्यक्ति, जो किसी बच्चे, बुजुर्ग,...
क्या बिना किसी अपराध का आरोपी बनाए किसी व्यक्ति पर LOC लगाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है?
Look Out Circular (LOC) भारत में एक कानूनी प्रक्रिया (Legal Process) है, जिसका उपयोग अधिकारियों द्वारा उन व्यक्तियों की यात्रा (Travel) रोकने के लिए किया जाता है, जो किसी आपराधिक जांच (Criminal Investigation) में शामिल होते हैं।राहुल सुराना बनाम Serious Fraud Investigation Office (SFIO) मामले में, मद्रास हाईकोर्ट ने एक LOC की वैधता (Validity) की जांच की, जिसे राहुल सुराना के खिलाफ जारी किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह उनके यात्रा करने के मौलिक अधिकार (Fundamental Right to Travel) का...
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत शराब बिक्री और रोजगार पर प्रतिबंध
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) राज्य में शराब और नशीले पदार्थों (Intoxicating Substances) की बिक्री, वितरण और नियंत्रण को विनियमित (Regulate) करता है। इस कानून के तहत शराब विक्रेताओं (Liquor Vendors) के लिए कुछ प्रतिबंध (Restrictions) लागू किए गए हैं ताकि समाज में इसकी गलत खपत (Consumption) को रोका जा सके।इस अधिनियम में कुछ खास वर्गों के लोगों को शराब बेचने पर रोक लगाई गई है, जैसे कि नाबालिग (Minors), मानसिक रूप से अस्वस्थ लोग (People of Unsound Mind), और ड्यूटी पर...
अच्छी नीयत में की गई आलोचना और सार्वजनिक हित में दी गई चेतावनी : BNS 2023 की धारा 356 भाग IV के तहत मानहानि के कानूनी अपवाद
यह लेख भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) की धारा 356 (Section 356) में दिए गए मानहानि (Defamation) से जुड़े प्रावधानों को सरल हिंदी में समझाने के लिए लिखा गया है। पिछले भागों में हमने मानहानि की परिभाषा (Definition), किन परिस्थितियों में यह लागू होती है, और इसके कुछ अपवादों (Exceptions) को समझाया था। इस अंतिम भाग में, हम बचे हुए अपवादों और मानहानि के लिए निर्धारित सजा पर चर्चा करेंगे।अपवाद 7: कानूनी अधिकार (Lawful Authority) रखने वाले व्यक्ति द्वारा की गई आलोचना (Censure)...
क्या राज्यपाल दया याचिका पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है या उन्हें राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने ए.जी. पेरारिवालन बनाम तमिलनाडु राज्य (2022) केस में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक (Constitutional) मुद्दे पर फैसला सुनाया। यह मामला इस सवाल पर केंद्रित था कि क्या राज्यपाल (Governor) को राज्य मंत्रिमंडल (State Cabinet) की सलाह माननी होती है या वे राष्ट्रपति (President) को अंतिम निर्णय के लिए मामला भेज सकते हैं।इस फैसले ने दया याचिका (Remission) देने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी संवैधानिक (Constitutional) पदाधिकारी अपनी शक्तियों का अनुचित उपयोग न करे। ...
बिना लाइसेंस मदिरा और अन्य उत्पाद बेचने पर रोक : राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 धारा 20 और धारा 21
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) का मुख्य उद्देश्य मदिरा (Liquor) और अन्य नशीले पदार्थों (Intoxicating Substances) के उत्पादन, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करना है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि इन उत्पादों का व्यापार एक व्यवस्थित तरीके से हो और अवैध बिक्री (Illegal Sale) को रोका जा सके।इस अधिनियम की धारा 19 (Section 19) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से अधिक मदिरा (Liquor) या अन्य उत्पाद बिना अनुमति अपने पास नहीं रख सकता। अब धारा 20 (Section...
अदालत द्वारा आरोपी की जांच की प्रक्रिया: धारा 351 BNSS, 2023 और पुरानी धारा 313 CrPC, 1973 से तुलना
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) का मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) और न्याय सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में यह आवश्यक होता है कि जिस व्यक्ति पर अपराध का आरोप लगाया गया है (Accused), उसे अपना पक्ष स्पष्ट करने का पूरा अवसर मिले।इसी सिद्धांत को लागू करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS, 2023) की धारा 351 (Section 351) में अदालत को यह शक्ति दी गई है कि वह किसी भी मुकदमे या जांच (Inquiry or Trial) के...
Transfer Of Property में Mortgage लेने वाले व्यक्ति की ड्यूटी
धारा 76 में कब्जा सहित बन्धकदार के दायित्वों का उल्लेख हुआ है। खण्ड (ग) तथा (घ) में वर्णित दायित्वों के सिवाय सभी दायित्व बाध्यकारी हैं। अतः किसी प्रतिकूल संविदा द्वारा इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक मामले में इनका अनुपालन होना आवश्यक है। सकब्जा बन्धकदार, बन्धक सम्पत्ति के न्यासी की हैसियत से होता है। इस धारा के अन्तर्गत उसके निम्नलिखित दायित्व हैं :-(क) सामान्य प्रज्ञा से सम्पत्ति का प्रबन्ध करना - यह खण्ड उपबन्धित करता है कि बन्धकदार सामान्य प्रज्ञा वाले व्यक्ति की भाँति बन्धक...
Transfer Of Property में Mortgage लेने वाले व्यक्ति के राइट्स
एक बंधकदार के अधिकार और कर्तव्य संपत्ति अंतरण अधिनियम कि किसी एक धारा में समाहित नहीं किए गए हैं अपितु धारा 67 से लेकर धारा 77 तक बंधकदार के अधिकारों एवं कर्तव्यों से संबंधित है। बंधकदार उसे कहा जाता है जो किसी संपत्ति को अपने पास बंधक रखता है। धारा 67 से 77 तक की धाराएँ बन्धकदार के अधिकारों एवं कर्तव्यों की विवेचना करती हैं। धारा 67 से 73 तक बन्धकदार के अधिकारों का उल्लेख करती हैं जबकि धारा 67क, 76 और 77 उसके कर्तव्यों का उल्लेख करती हैं। यह धारा, धारा 60 की प्रतिरूप (Counter part) है जो...
Explained| हाईकोर्ट में एडहॉक जज : नियुक्ति और कार्यकाल की प्रक्रिया
आपराधिक अपीलों की बढ़ती हुई लंबितता से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में हाईकोर्ट में एडहॉक जज की नियुक्ति की शर्तों में ढील दी। न्यायालय ने अपने 2021 के फैसले में लगाई गई शर्त को निलंबित कर दिया, जिसके अनुसार तदर्थ नियुक्तियां तभी की जा सकती हैं, जब हाईकोर्ट में रिक्तियां स्वीकृत पदों के 20% से अधिक हों।2021 में भारत के तत्कालीन चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने लोक प्रहरी बनाम भारत संघ के मामले में एडहॉक जज की नियुक्ति के लिए...
Transfer Of Property में प्रॉपर्टी Mortgage रखने वाले व्यक्ति का प्रॉपर्टी को वापस लेने का राइट
Transfer Of Property की धारा 60 बंधककर्ता के मोचन के अधिकार का उल्लेख करती है। मोचनाधिकार से तात्पर्य बन्धककर्ता के उस अधिकार से है जिसके माध्यम से वह बन्धकधन के भुगतान हेतु प्रतिभूत रखी गयी सम्पत्ति, बन्धक धन की अदायगी होते ही बन्धकदार से वापस प्राप्त करता है। 'रिडीम' शब्द से तात्पर्य है सम्पत्ति को वापस प्राप्त करना या दायित्व से मुक्त कराना। इंग्लिश विधि के अन्तर्गत इस अधिकार को मोचन की साम्या के नाम से जाना जाता है। इसका कारण यह है कि यह अधिकार साम्या कोर्ट्स की देन है। बन्धकदार के जप्तीकरण...
Transfer Of Property में Mortgage से रिलेटेड Redemption rights के एलिमेंट
Transfer Of Property में मोर्टगेज में Redemption rights दिया गया है उस व्यक्ति को जिसने प्रॉपर्टी बंधक रखी है उसके कुछ एलिमेंट हैं।बन्धक धन का भुगतान या भुगतान हेतु निविदाभुगतान या निविदा उचित समय पर होभुगतान या निविदा उचित स्थान पर होअधिकार के प्रवर्तन हेतु वाद दायर किया जायेंअधिकार के प्रवर्तन की सूचनाबन्धक धन का भुगतान या भुगतान हेतु निविदा- मोचनाधिकार के प्रयोग हेतु आवश्यक है कि बन्धककर्ता, बन्धकधन का ब्याज़ के साथ भुगतान बन्धकदार या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को करे या भुगतान करने की...
मजिस्ट्रेट की शक्ति - हस्ताक्षर, हस्तलिपि या आवाज़ के नमूने देने का आदेश : धारा 349, BNSS 2023
किसी भी अपराध की जांच (Investigation) में साक्ष्य (Evidence) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अपराधी को पहचानने और उसके अपराध को साबित करने के लिए कई प्रकार के वैज्ञानिक तरीकों (Forensic Methods) का उपयोग किया जाता है।इन तरीकों में हस्ताक्षर (Signature), हस्तलिपि (Handwriting), आवाज़ (Voice Sample), और उंगलियों के निशान (Finger Impressions) शामिल हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS, 2023) की धारा 349 के तहत प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (First-Class...
अगर किसी अपराध का ट्रायल किसी अन्य राज्य में हुआ हो तो किस राज्य सरकार को दोषी की Remission याचिका पर निर्णय लेने का अधिकार होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने राधेश्याम भगवंदास शाह बनाम गुजरात राज्य (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर फैसला दिया कि क्या किसी दोषी (Convict) को उसी Remission नीति (Premature Release Policy) के तहत रिहाई का अधिकार है, जो उसकी सजा (Conviction) के समय लागू थी, या उसे बाद में बदली गई नीति के अनुसार देखा जाएगा।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषी की Remission याचिका (Application) पर उसी नीति के अनुसार विचार किया जाना चाहिए, जो उसके सजा सुनाए जाने (Conviction) के समय प्रभावी थी। इस फैसले ने सजा और सजा के...



















