कर चोरी के लिए फर्म पंजीकरण के लिए ग्राहक द्वारा प्रदान किए गए नकली दस्तावेजों को सत्यापित करने के लिए वकील उत्तरदायी नहीं: झारखंड हाईकोर्ट

  • कर चोरी के लिए फर्म पंजीकरण के लिए ग्राहक द्वारा प्रदान किए गए नकली दस्तावेजों को सत्यापित करने के लिए वकील उत्तरदायी नहीं: झारखंड हाईकोर्ट

    झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि एक वकील कर से बचने के लिए फर्म के पंजीकरण के लिए एक ग्राहक द्वारा प्रदान किए गए नकली दस्तावेजों को सत्यापित करने के लिए उत्तरदायी नहीं है।

    जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की पीठ एक ऐसे मामले से निपट रही थी जहां एक वकील ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406/420/468/471/120B और झारखंड माल एवं सेवा कर (JGST) की धारा 132 (1) (b)/131 (1) (e)/132 (1) (1) (1) के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी।

    इस मामले में, याचिकाकर्ता, जो एक कर व्यवसायी है, ने सह-अभियुक्तों के जीएसटी पंजीकरण की सुविधा प्रदान की। याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप यह है कि सह-आरोपी के साथ मिलकर उसने सरकारी करों से बचने के लिए फर्जी और अस्पष्ट दस्तावेजों के आधार पर एक मालिकाना फर्म के पंजीकरण की सुविधा प्रदान की है।

    एडवोकेट-याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि यह न तो कर्तव्य है और न ही याचिकाकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह उन दस्तावेजों को सत्यापित करे जो उसके मुवक्किल द्वारा उसे प्रस्तुत किए गए थे।

    याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट सह-आरोपी के खिलाफ है और याचिकाकर्ता के खिलाफ इसका कोई हिस्सा होने का कोई आरोप नहीं है। यह भी प्रस्तुत किया गया है कि याचिकाकर्ता अभी भी पेशे से एक वकील और एक स्थापित कर व्यवसायी है, इसलिए उसके फरार होने की कोई संभावना नहीं है।

    इसके बाद यह प्रस्तुत किया जाता है कि याचिकाकर्ता नकदी सुरक्षा सहित पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का वचन देता है और मामले की जांच में सहयोग करने का वचन भी देता है। इसलिए, यह प्रस्तुत किया गया था कि याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का विशेषाधिकार दिया जाए।

    पीठ ने इस प्रकार कहा कि "यह एक उपयुक्त मामला है जहां उपरोक्त याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का विशेषाधिकार दिया जाए। इसलिए, इस आदेश की तारीख से छह सप्ताह की अवधि के भीतर उसकी गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की स्थिति में, उसे 50,000/- रुपये की नकद सुरक्षा जमा करने और 25,000/- रुपये के जमानत बांड के साथ जेएम प्रथम श्रेणी, जमशेदपुर की संतुष्टि के लिए प्रत्येक राशि की दो जमानतों के साथ जमानत पर रिहा किया जाएगा।

    उपरोक्त के मद्देनजर, पीठ ने एडवोकेट को अग्रिम जमानत दे दी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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