झारखंड हाईकोट

उपभोक्ता आयोगों के रिटायर अध्यक्षों-सदस्यों को भी मिलेगा सेवा जारी रखने का लाभ, झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अधिसूचना बदली
झारखंड हाईकोर्ट ने उपभोक्ता आयोगों के उन पूर्व अध्यक्षों और सदस्यों को भी सेवा जारी रखने का लाभ देने का निर्देश दिया, जो 21 मई 2025 से पहले रिटायर हो चुके थे।हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना में संशोधन किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के मनेंद्र भास्कर लिमये मामले में दिए निर्देशों का लाभ केवल 21 मई 2025 या उसके बाद रिटायर्ड हुए पदाधिकारियों तक सीमित कर दिया गया। जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि 21 मई 2025 सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख मात्र है। यह ऐसी पात्रता तिथि नहीं है, जिसके आधार पर उपभोक्ता...

वैवाहिक क्रूरता साबित करने के लिए पहले पुलिस शिकायत या चोट का दस्तावेज जरूरी नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक क्रूरता और मारपीट के आरोपों को साबित करने के लिए पीड़िता की ओर से पहले पुलिस शिकायत दर्ज कराना या चोटों का चिकित्सकीय दस्तावेज पेश करना अनिवार्य मानना अनुचित है। अदालत ने ऐसी शर्त को बेतुका और अनावश्यक बताया।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने पति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत बरी करने वाले अपीलीय अदालत का फैसला रद्द किया और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि तथा सजा बहाल की।मामला सुषमा देवी और संजय कुमार उर्फ राजेश कुमार के विवाह से...

अंबेडकर जयंती की बैठक को चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने की कोशिश नहीं माना जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट ने केस रद्द किया
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल के सभागार में अंबेडकर जयंती मनाने के लिए बैठक आयोजित करना अपने आप में चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने का अपराध नहीं है।अदालत ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान स्कूल में आयोजित ऐसी ही एक बैठक को लेकर दो लोगों के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 171एफ, 171एच और 188 के तहत दर्ज मामले में आरोप पत्र, संज्ञान आदेश और आरोपमुक्ति आवेदन खारिज करने के आदेश समेत पूरी कार्यवाही रद्द की।मामला सरस्वती...

सिर्फ़ महिला पर हमला करना, रेप करने की कोशिश नहीं माना जाएगा: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि रेप करने की कोशिश के तौर पर किसी खास हरकत के बिना, महिला पर किया गया हमला अपने आप में रेप की कोशिश नहीं माना जाएगा।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच ने एक व्यक्ति की सज़ा को बदला। उसे पहले इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 376/511 के तहत रेप की कोशिश का दोषी ठहराया गया था, जिसे बदलकर IPC की धारा 354 के तहत महिला की मर्यादा भंग करने का दोषी माना गया।यह अपील डाल्टनगंज (पलामू) के एडिशनल सेशन जज के 2005 के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर की गई। उस फ़ैसले में अपील करने वाले...

झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं-13वीं JPSC परीक्षाओं के ज़रिए की गई नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फ़ैसले पर लगाई रोक
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार (20 अगस्त) को एक अंतरिम आदेश में राज्य सरकार के उन आदेशों पर रोक लगाई, जिनके तहत 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षाओं के ज़रिए की गई नियुक्तियों को रद्द किया गया।गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में JPSC परीक्षाओं के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के कई हफ़्तों तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद इन परीक्षाओं को रद्द कर दिया था।हाईकोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें नियुक्तियां रद्द करने वाले राज्य सरकार के...

पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के कौशल को लेकर ताने मारना मात्र IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ क्रूरता का मामला रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के खराब कौशल को लेकर ताने मारने के आरोप, अकेले IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए काफी नहीं हैं।संदर्भ के लिए, IPC की धारा 498A में क्रूरता को इस तरह परिभाषित किया गया: a) ऐसा कोई जानबूझकर किया गया व्यवहार जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो सकती है या उसके शरीर या स्वास्थ्य को गंभीर चोट पहुँच सकती है, या b) उसे या उसके रिश्तेदारों को दहेज...

सिर्फ UAPA आरोपी की पत्नी होना आतंकवाद की कमाई से संपत्ति खरीदने का आधार नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने UAPA के एक आरोपी की पत्नी की स्कूटी की कुर्की रद्द करते हुए कहा कि केवल किसी आरोपी से पारिवारिक संबंध होने के आधार पर उसकी संपत्ति को आतंकवाद से हुई कमाई से अर्जित संपत्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जब महिला की अपनी आय का स्वतंत्र स्रोत हो और संपत्ति उसके नाम पर दर्ज हो, तो उसकी खरीद के स्रोत की जांच तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए।जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने पाया कि महिला सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में कार्यरत है और उसकी नियमित आय...

सड़क डिवाइडर पर लगे विज्ञापन बोर्ड सड़क से कम-से-कम 12 फुट ऊपर हों: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम को निर्देश दिया कि सड़क डिवाइडर पर लगे स्ट्रीट लाइट या बिजली के खंभों पर लगाए जाने वाले विज्ञापन बोर्ड सड़क की सतह से कम-से-कम 12 फुट की ऊंचाई पर लगाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि कम ऊंचाई पर लगे बोर्ड यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं और दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।जस्टिस आनंद सेन की सिंगल बेंच ने कहा कि यदि कोई विज्ञापन बोर्ड 12 फुट से कम ऊंचाई पर लगा है तो उसे तुरंत हटाया जाए या निर्धारित ऊंचाई से ऊपर स्थापित किया जाए।यह आदेश विज्ञापन एजेंसियों...

पति की स्वेच्छा से लिए गए कर्ज से पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी कम नहीं होगी: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पति द्वारा भविष्य में संपत्ति बनाने के उद्देश्य से लिया गया स्वैच्छिक कर्ज सामान्यतः पत्नी के भरण-पोषण या स्थायी गुजारा भत्ते की जिम्मेदारी को कम करने का आधार नहीं बन सकता।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संपत्ति निर्माण के लिए लिए गए कर्ज की किस्तों को पति की आय से केवल इस आधार पर घटाकर नहीं देखा जा सकता कि इससे उसकी उपलब्ध आय कम हो गई । जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक वैवाहिक अपील पर सुनवाई करते हुए की। पति ने फैमिली कोर्ट द्वारा...

मध्यस्थता में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद महज मन बदलने पर सहमति वापस नहीं ले सकता पक्ष: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत से जुड़ी मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान यदि पक्षकारों के बीच लिखित समझौता हो जाता है और दोनों उस पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो बाद में केवल मन बदल जाने के आधार पर कोई एक पक्ष अपनी सहमति से पीछे नहीं हट सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सहमति वापस लेने का अधिकार मध्यस्थता की प्रक्रिया चलने तक ही रहता है। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद वह बाध्यकारी हो जाता है।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पति की ओर से दायर अपील पर...

लोन की रकम 'सौंपी गई संपत्ति' नहीं; सिर्फ़ लोन न चुका पाना 'क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट' नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि लोन के तौर पर दी गई रकम को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 के तहत 'क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट' (भरोसा तोड़ने का अपराध) के मकसद से उधार लेने वाले को 'सौंपी गई संपत्ति' नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि लोन लेने वाला लोन की रकम का इस्तेमाल करने के लिए आज़ाद होता है, जबकि किसी को सौंपी गई संपत्ति पाने वाले व्यक्ति को मालिक के निर्देशों के अनुसार ही उसका इस्तेमाल करना होता है।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल जज बेंच ने बकाया लोन की रकम न चुकाने के आरोप में धोखाधड़ी और...

बिना कानूनी अधिकार दुकान तोड़ने पर मुआवजे के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील खारिज: झारखंड हाईकोर्ट ने कार्रवाई को बताया मनमाना
झारखंड हाईकोर्ट ने बिना कानूनी अधिकार के दुकान तोड़े जाने के मामले में दुकानदार को मुआवजा देने के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अपील खारिज की। कोर्ट ने कहा कि यह अपील न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है और ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों ने खुद पर मुआवजे की जिम्मेदारी तय होने के डर से इसे दाखिल किया।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार 13 साल तक चली रिट कार्यवाही के दौरान भूमि से जुड़े कोई स्वामित्व दस्तावेज पेश नहीं कर सकी और एकल पीठ के आदेश तथा अवमानना...

अंतरिम कस्टडी की मुख्य मांग पर फैसला दिए बिना केवल मुलाकात का अधिकार नहीं दिया जा सकता : झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी अभिभावक ने अदालत में अंतरिम अभिरक्षा (कस्टडी) की मुख्य मांग की और उसके विकल्प के रूप में मुलाकात के अधिकार की मांग की है तो फैमिली कोर्ट मुख्य मांग पर कारण सहित फैसला दिए बिना सीधे वैकल्पिक राहत नहीं दे सकता।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने रांची की एडिशनल प्रिंसिपल फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए नाबालिग बच्ची की अंतरिम अभिरक्षा उसकी मां को सौंपने का निर्देश दिया।हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल अस्थायी होगी और...

5 साल तक सहमति से बने संबंधों को शादी न होने पर रेप नहीं कहा जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि यदि दो वयस्क लंबे समय तक सहमति से रिश्ते में रहे हों, तो केवल शादी नहीं होने के आधार पर उसे रेप नहीं माना जा सकता।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने आईपीसी की धारा 376 के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया।अभियोजन के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर लगभग पांच वर्षों तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। ट्रायल कोर्ट ने...

पिता का अपनी नाबालिग संतान को उसकी माँ की कस्टडी से ले जाना किडनैपिंग नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पिता, जो अपनी नाबालिग संतान का स्वाभाविक संरक्षक (Natural Guardian) होता है, उस पर अपनी पत्नी की कस्टडी से अपने ही बेटे को ले जाने के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 के तहत किडनैपिंग का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने माना कि जब आरोपी खुद बच्चे का स्वाभाविक संरक्षक हो तो अपराध के ज़रूरी तत्व पूरे नहीं होते।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल जज बेंच ने एक व्यक्ति के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। उस व्यक्ति पर अपने चार साल के बेटे को किडनैप करने,...

पत्नी के चरित्र पर बेबुनियाद आरोप और बच्चे का पिता होने से इनकार करना वैवाहिक क्रूरता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के चरित्र (पवित्रता) पर सवाल उठाने वाले बेबुनियाद आरोप और उसके बच्चे का पिता होने से इनकार करना उसके चरित्र, सम्मान और प्रतिष्ठा पर गंभीर हमला है और यह वैवाहिक क्रूरता के दायरे में आता है।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की डिवीजन बेंच ने पति की अपील खारिज की, जिसमें उसने स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 की धारा 27(1)(b) और 27(1)(d) के तहत क्रूरता और परित्याग (छोड़ देने) के आधार पर शादी खत्म करने से फैमिली कोर्ट के इनकार को चुनौती दी थी।दोनों पक्षों ने 25...

10 साल की बच्ची का हाथ पकड़कर शादी का प्रस्ताव देना मात्र से धारा 354 लागू नहीं होगी, गलत मंशा साबित होना जरूरी: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 10 वर्षीय बच्ची का हाथ पकड़कर उससे शादी का प्रस्ताव देता है, लेकिन उसके पीछे कोई यौन या अशोभनीय मंशा साबित नहीं होती, तो मात्र इस आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना) का अपराध नहीं बनता।जस्टिस राजेश कुमार की सिंगल बेंच ने आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए धारा 354 के तहत दोषी ठहराए गए आरोपी को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के अपने बयान से ही इस अपराध के आवश्यक तत्व साबित नहीं होते।यह अपील सरायकेला-खरसावां के विशेष अदालत...

सिर्फ उग्रवादी की पत्नी होना और मुठभेड़ स्थल पर बच्चे के साथ मौजूद रहना दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सिर्फ किसी उग्रवादी की पत्नी होना और डेढ़ साल की बच्ची के साथ मुठभेड़ स्थल पर मौजूद रहना किसी महिला को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि जब तक अभियोजन यह साबित न करे कि आरोपी ने कोई आपराधिक कृत्य किया या वह किसी उग्रवादी संगठन की सदस्य थी, तब तक उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।यह फैसला जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने प्रमिला देवी की अपील स्वीकार करते हुए सुनाया। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा रद्द करते हुए...

झारखंड हाईकोर्ट ने ज़मीन विवाद के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी प्रशासनिक आदेश में दखल देने से इनकार किया
झारखंड हाईकोर्ट ने ज़मीन विवाद के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश में दखल देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि ज़मीन पर कब्ज़े और उसकी पहचान से जुड़े विवादित सवालों का निपटारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कार्यवाही में नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि ऐसे विवादों के लिए सबूतों की ज़रूरत होती है और इनका सही निपटारा सिविल कोर्ट में ही हो सकता है, न कि रिट अधिकार क्षेत्र (writ jurisdiction) में।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच एक...

केवल नियंत्रण से तय नहीं होगा मालिक-कर्मचारी संबंध, सभी परिस्थितियों पर होगा विचार: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के तहत मालिक और कर्मचारी के संबंध का निर्धारण केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि काम पर किसका नियंत्रण था। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'नियंत्रण परीक्षण' कई मानकों में से केवल एक है और अंतिम निर्णय सभी तथ्यों, परिस्थितियों तथा अनुबंध की शर्तों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल बेंच वर्ष 2016 में रांची स्थित झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) स्टेडियम में फ्लडलाइट की मरम्मत के दौरान तीन...
