हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को केंद्रीय/जिला जेलों की स्थिति में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को केंद्रीय/जिला जेलों की स्थिति में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया

गुहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में चार राज्यों- असम, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को निर्देश दिया था कि वे इन राज्यों में विभिन्न केंद्रीय जेलों और जिला जेलों की स्थिति के संबंध में एक समिति द्वारा अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में उजागर किए गए सभी मुद्दों पर अपने संबंधित व्यापक हलफनामे दाखिल करें।चीफ़ जस्टिस विजय बिश्नोई और जस्टिस कौशिक गोस्वामी की खंडपीठ ने आगे कहा: "असम, नागालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले विद्वान वकीलों को निर्देश दिया जाता है कि वे समिति द्वारा...

मेडिकल लापरवाही केवल देखभाल के अपेक्षित मानक के दावे से स्थापित नहीं होती: दिल्ली हाईकोर्ट
मेडिकल लापरवाही केवल 'देखभाल के अपेक्षित मानक' के दावे से स्थापित नहीं होती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि मेडिकल लापरवाही को केवल असंतोष या 'देखभाल के अपेक्षित मानक' के दावे से स्थापित नहीं किया जा सकता है, बल्कि यह प्रदर्शित किया जाना चाहिए कि डॉक्टर का आचरण समान परिस्थितियों में एक यथोचित सक्षम चिकित्सक के स्तर से नीचे गिर गया है।जस्टिस संजीव नरूला ने टिप्पणी की, "हालांकि यह स्वीकार किया जाता है कि डॉक्टरों से उचित स्तर की विशेषज्ञता लागू करने और अपनी प्रथाओं में उचित परिश्रम करने की उम्मीद की जाती है, उनके आचरण को किसी विशिष्ट प्रक्रिया या परिणाम की पूर्व धारणाओं के...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों पर हमला करने के आरोपी व्यक्ति, उसके परिवार के सदस्यों को दी राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों पर हमला करने के आरोपी व्यक्ति, उसके परिवार के सदस्यों को दी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक व्यक्ति और उसके परिवार के तीन सदस्यों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी, जिन पर इस महीने की शुरुआत में लखनऊ जिला अदालत परिसर के अंदर वकीलों पर हमला करने का आरोप है।जस्टिस जसप्रीत सिंह और जस्टिस राजीव सिंह की खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित क्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त याचिकाकर्ताओं के खिलाफ धारा 115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 351 (3) (आपराधिक धमकी), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और 131 (हमला या आपराधिक बल का उपयोग...

नमूना हस्ताक्षर या लिखावट देने के लिए स्वेच्छा से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करना जरूरी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
नमूना हस्ताक्षर या लिखावट देने के लिए स्वेच्छा से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करना जरूरी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्णय दिया है कि नमूना हस्ताक्षर या लिखावट देने के लिए जांच अधिकारी द्वारा दायर आवेदन के अनुसरण में स्वेच्छा से न्यायालय या मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करना आवश्यक नहीं है।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने CrPC की धारा 311A के प्रावधान की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। CrPC की धारा 311 A में प्रावधान है कि मजिस्ट्रेट के पास किसी भी जांच या कार्यवाही को करने के लिए नमूना हस्ताक्षर या लिखावट देने के लिए...

BREAKING | अन्ना यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट के कथित यौन उत्पीड़न की जांच के लिए SIT का गठन
BREAKING | अन्ना यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट के कथित यौन उत्पीड़न की जांच के लिए SIT का गठन

मद्रास हाईकोर्ट ने शनिवार (28 दिसंबर) को चेन्नई में अन्ना यूनिवर्सिटी कैंपस परिसर के अंदर सेकेंड ईयर की इंजीनियरिंग स्टूडेंट के कथित यौन उत्पीड़न की जांच के लिए महिला आईपीएस अधिकारियों वाली विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने शनिवार को विशेष बैठक की और घटना की CBI जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर आदेश पारित किए। अदालत ने कहा कि पुलिस और यूनिवर्सिटी की ओर से चूक हुई। इसलिए वह SIT बनाने के लिए इच्छुक है।अदालत ने आदेश दिया,"हमने पुलिस...

मुकदमे की अनुमति देना व्यर्थ होगा: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 44 साल बाद राज्य में सबसे पुराना मामला खारिज किया
मुकदमे की अनुमति देना व्यर्थ होगा: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 44 साल बाद राज्य में सबसे पुराना मामला खारिज किया

संभवतः राज्य में सबसे पुराने आपराधिक मामले को बंद करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में ऐसे व्यक्ति के खिलाफ दर्ज 44 साल पुराने हत्या का मामला खारिज किया, जो अब 68 साल का है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि मुकदमे की अनुमति देना व्यर्थ होगा।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने चंद्रा उर्फ ​​वी चंद्रशेखर भट की याचिका स्वीकार करते हुए और तथ्यों पर गौर करने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता की असंभवता बहुत बड़ी है।उन्होंने कहा,“यदि किसी मुकदमे में बरी होना तय है तो अभियुक्त के खिलाफ ऐसे मुकदमे की अनुमति देना...

उपभोक्ता आयोगों में गैर-वकीलों का पेश होना अधिवक्ता अधिनियम का उल्लंघन, दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किए
उपभोक्ता आयोगों में गैर-वकीलों का पेश होना अधिवक्ता अधिनियम का उल्लंघन, दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किए

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने उपभोक्ता अदालतों में गैर-वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व के मुद्दे को संबोधित किया और आवश्यक नियामक ढांचे के पालन के लिए निर्देश जारी किए। इसके अलावा, मामले को सुनवाई के लिए 18 मार्च, 2025 को सूचीबद्ध किया गया। संक्षिप्त तथ्ययाचिकाकर्ता दिल्ली बार काउंसिल के साथ पंजीकृत अधिवक्ता हैं और वे जिला और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता अदालतों में ग्राहकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने गैर-वकीलों द्वारा बिना उचित प्राधिकरण के उपभोक्ता अदालतों में पेश होने...

गुजरात हाईकोर्ट ने 6000 करोड़ के वित्तीय धोखाधड़ी मामले में आरोपी व्यवसायी को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
गुजरात हाईकोर्ट ने 6000 करोड़ के वित्तीय धोखाधड़ी मामले में आरोपी व्यवसायी को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

हाईकोर्ट ने 6000 करोड़ के कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में व्यवसायी और बीजेड समूह के प्रमुख भूपेंद्रसिंह जाला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। न्यायालय ने कहा कि यह बड़े पैमाने पर घोटाला प्रतीत होता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को उनके द्वारा ठगा गया प्रतीत होता है।जस्टिस एम.आर. मेंगडे ने 23 दिसंबर के अपने आदेश में कहा,"अब तक की गई जांच से संकेत मिलता है कि वर्तमान आवेदक द्वारा किया गया यह एक बड़े पैमाने पर घोटाला प्रतीत होता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को उनके द्वारा ठगा गया प्रतीत...

निलंबन मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमित शक्ति: राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप में निलंबित सरकारी कर्मचारी की याचिका खारिज की
'निलंबन मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमित शक्ति': राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप में निलंबित सरकारी कर्मचारी की याचिका खारिज की

राजस्‍थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने विभागीय जांच के मद्देनजर एक सरकारी कर्मचारी को निलंबित करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए निलंबन के मामलों में हस्तक्षेप का दायरा बहुत सीमित है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने अपने आदेश में कहा, "निलंबन के मामलों में, भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत इस न्यायालय में निहित न्यायिक समीक्षा की असाधारण शक्ति का प्रयोग बहुत सीमित है। विचार का दायरा कर्मचारी को निलंबित करने वाले प्राधिकारी की...

दिल्ली हाईकोर्ट ने अज्ञात संस्थाओं द्वारा ट्रेडमार्क, कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ  Upstox को अंतरिम राहत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने अज्ञात संस्थाओं द्वारा ट्रेडमार्क, कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ Upstox को अंतरिम राहत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में अज्ञात संस्थाओं को अपस्टॉक्स ट्रेडमार्क, वर्क मार्क और कॉपीराइट फोटोग्राफ का उल्लंघन करने से रोक दिया। यह ऑनलाइन ट्रेडिंग एप्लीकेशन है, जिसका स्वामित्व आरकेएसवी सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास है। यह भारतीय ब्रोकिंग फर्म है जो स्टॉक ट्रेडिंग के अवसर प्रदान करती है।वादी-RKSV सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि वह अपनी समूह कंपनियों के साथ यूपीएसटीओएक्स का स्वामित्व और संचालन करता है, जहां निवेशक शेयर बाजार में ट्रेडिंग गतिविधि और निवेश और...

पेंशन की गणना उस समय लागू नियमों के अनुसार होती है जब कर्मचारी सेवा में शामिल हुआ था; नए नियमों को पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
पेंशन की गणना उस समय लागू नियमों के अनुसार होती है जब कर्मचारी सेवा में शामिल हुआ था; नए नियमों को पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर स्थित जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें सरकारी कर्मचारी को पेंशन गणना में अपनी प्रादेशिक सेना सेवा को शामिल करने की अनुमति दी गई थी। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि 1996 में शुरू किए गए पेंशन नियमों को राजस्थान सेवा नियम, 1951 के तहत शामिल होने वालों पर पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता। पृष्ठभूमिजगदीश प्रसाद चौधरी 1983 में राजस्थान की सिविल सेवा में शामिल होने से पहले प्रादेशिक सेना...

राजस्थान हाईकोर्ट ने वीहिकल फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यूअल के लिए आवेदन में प्रत्येक दिन की देरी के लिए 50 रुपये शुल्क लगाने के नियम को खारिज किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने वीहिकल फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यूअल के लिए आवेदन में प्रत्येक दिन की देरी के लिए 50 रुपये शुल्क लगाने के नियम को खारिज किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्रीय मोटर वाहन नियमों के उस प्रावधान को अवैध करार देते हुए खारिज कर दिया है, जिसमें परिवहन संचालकों द्वारा अपने वाहनों को सड़कों पर चलाने के लिए आवश्यक फिटनेस प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन करने में होने वाली देरी के लिए प्रत्येक दिन के लिए 50 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाने की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क की आड़ में राज्य ने फिटनेस प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन न करने पर मोटर...

विकलांगता पेंशन | जब नियुक्त होने के चरण में बीमारी का कोई रिकॉर्ड न हो तो सैनिक को स्वस्थ माना जाता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
विकलांगता पेंशन | जब नियुक्त होने के चरण में बीमारी का कोई रिकॉर्ड न हो तो सैनिक को स्वस्थ माना जाता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आदेश को निरस्त करते हुए विकलांग सशस्त्र बल अधिकारी की विकलांगता पेंशन को प्रोसेस करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि विशिष्ट चिकित्सा निष्कर्ष के अभाव में सैनिक को स्वस्थ माना जाता है। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा, "संबंधित रक्षा प्रतिष्ठान के किसी भी सदस्य के स्वस्थ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में एक अनुमान लगाया जाता है, खासकर तब जब उसके रोल पर आने के चरण में, उसके किसी बीमारी से ग्रस्त...

यदि मामला मूल न्यायालय में वापस भेजा जाता है तो अपीलीय न्यायालय को कोर्ट फीस वापस करना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यदि मामला मूल न्यायालय में वापस भेजा जाता है तो अपीलीय न्यायालय को कोर्ट फीस वापस करना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

कोर्ट फीस एक्ट की धारा 13 पर चर्चा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि एक बार किसी अपील को किसी भी कारण से मूल न्यायालय में वापस भेज दिया जाता है तो अपीलीय न्यायालय को अपीलकर्ता को अपील ज्ञापन के साथ भुगतान की गई पूरी कोर्ट फीस वापस प्राप्त करने के लिए प्राधिकरण का प्रमाण पत्र प्रदान करना चाहिए।जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र ने कहा,“धारा 13 अपीलीय न्यायालय पर यह दायित्व डालती है कि वह अपीलकर्ता को एक प्रमाण पत्र प्रदान करे, जिसमें उसे अपील ज्ञापन पर भुगतान की गई फीस की पूरी राशि कलेक्टर से वापस...

POCSO Act की धारा 29 के तहत दोष का अनुमान साक्ष्य के अभाव में नहीं लगाया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में दोषसिद्धि खारिज की
POCSO Act की धारा 29 के तहत दोष का अनुमान साक्ष्य के अभाव में नहीं लगाया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में दोषसिद्धि खारिज की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत यौन उत्पीड़न के एक मामले में दो व्यक्तियों को बरी किया। कोर्ट ने उक्त आदेश यह देखते हुए दिया कि एक्ट के तहत कुछ अपराधों को करने के लिए उकसाने या प्रयास करने के लिए धारा 29 के तहत अनुमान साक्ष्य के अभाव के कारण नहीं लगाया जा सकता।POCSO Act की धारा 29 के अनुसार, जहां किसी व्यक्ति पर इस अधिनियम की धारा 3, 5, 7 और धारा 9 के तहत कोई अपराध करने या करने के लिए उकसाने या प्रयास करने के लिए मुकदमा चलाया जाता है तो...

[UAPA] आतंकवादी कृत्य पर वर्षों तक विचार करना, भले ही उसे अंजाम न दिया गया हो, आतंकवादी कृत्य माना जाता है: दिल्ली हाईकोर्ट
[UAPA] आतंकवादी कृत्य पर वर्षों तक विचार करना, भले ही उसे अंजाम न दिया गया हो, आतंकवादी कृत्य माना जाता है: दिल्ली हाईकोर्ट

गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (QIS) के सदस्य की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि आतंकवादी कृत्य पर वर्षों तक विचार करना, भले ही उसे कई वर्षों के बाद अंजाम दिया गया हो, आतंकवादी कृत्य माना जाता है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने कहा,"UAPA की धारा 15 के तहत 'आतंकवादी कृत्य' की परिभाषा में स्पष्ट रूप से "आतंकवाद फैलाने के इरादे से" अभिव्यक्ति शामिल है, चाहे वह किसी भी तरह का हो या होने की...

केवल योग्यता होने से पदोन्नति का कोई अधिकार नहीं मिलता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया
केवल योग्यता होने से पदोन्नति का कोई अधिकार नहीं मिलता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया कि पदोन्नति कोई मौलिक अधिकार नहीं है तथा किसी पद के रिक्त होने की तिथि से इसका दावा नहीं किया जा सकता, न ही केवल योग्यता होने से पदोन्नति का कोई अधिकार मिलता है।वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने उस तिथि से पदोन्नति की मांग की, जिस दिन वह पद के लिए पात्र हुई थी।इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए जस्टिस नमित कुमार ने कहा,"यह कानून का एक सुस्थापित प्रस्ताव है कि पदोन्नति एक मौलिक अधिकार नहीं है। हालांकि, पदोन्नति के लिए विचार मौलिक अधिकार है...

मद्रास हाईकोर्ट ने अन्ना यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट के साथ कथित यौन उत्पीड़न का स्वतः संज्ञान लिया
मद्रास हाईकोर्ट ने अन्ना यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट के साथ कथित यौन उत्पीड़न का स्वतः संज्ञान लिया

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (27 दिसंबर) को चेन्नई में अन्ना यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर सेकेंड ईयर की इंजीनियरिंग स्टूडेंट के साथ कथित यौन उत्पीड़न का स्वतः संज्ञान लिया।जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने एडवोकेट आर. वरलक्ष्मी के पत्र के आधार पर घटना का स्वतः संज्ञान लिया।हालांकि, खंडपीठ ने यह कहते हुए कोई आदेश पारित करने से परहेज किया कि चीफ जस्टिस से औपचारिक आदेश अभी प्राप्त नहीं हुए। न्यायालय ने कहा कि चूंकि स्वतः संज्ञान लेते समय प्रक्रिया का पालन किया जाना था,...

ADJ से अपेक्षा की जाती है कि वे निष्कर्ष वापस करने से पहले न केवल अपना विवेक लगाएं बल्कि पक्षों के तर्कों से भी निपटें: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ADJ से अपेक्षा की जाती है कि वे निष्कर्ष वापस करने से पहले न केवल अपना विवेक लगाएं बल्कि पक्षों के तर्कों से भी निपटें: इलाहाबाद हाईकोर्ट

संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत एक मामले से निपटने के दौरान, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एडिशनल जज और सेशन जज रैंक के जज से न केवल अपने न्यायिक दिमाग का उपयोग करने की अपेक्षा की जाती है, बल्कि किसी भी मामले को वापस करने से पहले पक्षों की दलीलों से भी निपटा जाता है। निष्कर्ष यह मानते हुए कि पुनरीक्षण को एक अपील के रूप में माना जाना चाहिए जहां अपील का उपाय विशेष रूप से उपलब्ध नहीं है lजस्टिस अजीत कुमार ने कहा “अतिरिक्त रैंक के एक जज से। जिला एवं सेशन जज से यह अपेक्षा की जाती है कि वह न केवल उठाए...