हाईकोर्ट
लंबित आपराधिक मामलों को दबाना उम्मीदवार की ईमानदारी पर चिंता बढ़ाता है: उड़ीसा हाईकोर्ट ने कर्मचारी की नियुक्ति रद्द करने का फैसला बरकरार रखा
उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना कि परिणाम के बावजूद लंबित आपराधिक मामलों को दबाना उम्मीदवार की ईमानदारी पर चिंता बढ़ाता है। ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी को रोकने के बाद कोई व्यक्ति नियुक्ति पाने के लिए अप्रतिबंधित अधिकार का दावा नहीं कर सकता है।अपनी उम्मीदवारी रद्द किए जाने से पीड़ित याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार करते हुए डॉ. जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही ने कहा,“कोई उम्मीदवार जो महत्वपूर्ण जानकारी को दबाता है या गलत घोषणाएं करता है, उसे नियुक्ति पाने का अप्रतिबंधित अधिकार नहीं है। आपराधिक पृष्ठभूमि को...
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का ईमानदारी से क्रियान्वयन किया जाना चाहिए: त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, इसके अंतर्गत बनाए गए नियम तथा वैधानिक प्राधिकारियों द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का संबंधित राज्य प्राधिकारियों द्वारा सभी स्तरों पर ईमानदारी से पालन किया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तथा जस्टिस विश्वजीत पालित की खंडपीठ ने राज्य प्राधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ऐसे दिशा-निर्देश एक बार फिर क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों को प्रसारित किए जाएं, जिससे ज़मीनी स्तर पर अधिकारियों...
'जीजा' और 'साली' के बीच संबंध अनैतिक, लेकिन अगर महिला बालिग है तो बलात्कार का अपराध नहीं बनता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जीजा और साली (जीजा और साली) के बीच संबंध अनैतिक है; हालांकि, अगर महिला बालिग है तो उक्त संबंध बलात्कार के अपराध को आकर्षित नहीं करता।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने आरोपी (जीजा) को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की, जिस पर धारा 366, 376, 506 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया कि उसने अपनी साली (पत्नी की बहन/साली) को शादी करने का झूठा वादा करके बहला-फुसलाकर भगा ले गया।आवेदक के लिए जमानत मांगते हुए उसके वकील ने एकल न्यायाधीश के समक्ष तर्क दिया कि...
याचिकाकर्ता का मामला वापस लेने का अधिकार कुछ प्रतिबंधों के साथ आता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
याचिकाकर्ता की स्वायत्तता और न्यायिक निगरानी के बीच सूक्ष्म अंतर्सम्बन्ध को उजागर करते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि मुकदमे में याचिकाकर्ता “डोमिनस लिटस” या मामले का स्वामी होता है, लेकिन उसे छोड़ने या वापस लेने का उसका अधिकार कुछ कानूनी बाधाओं के अधीन है।एक मामले को वापस लेने के लिए आवेदन को अनुमति देते हुए जस्टिस संजय धर ने कहा,“यह न्यायालय याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेने की अनुमति देने से इनकार नहीं कर सकता, खासकर तब जब याचिकाकर्ता उसी कारण से कोई नई कार्यवाही दायर...
पीड़िता के फटे कपड़े सहमति को दर्शाते हैं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में व्यक्ति को बरी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में व्यक्ति को बरी किया, क्योंकि अभियोक्ता की गवाही में विसंगति पाई गई तथा यह पाया गया कि कथित यौन संबंध सहमति से हुआ था, क्योंकि अभियोक्ता के कपड़े अपराध स्थल पर नहीं फटे थे।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस कीर्ति सिंह की खंडपीठ ने कहा,"अपराध स्थल पर अभियोक्ता के फटे कपड़े का पाया जाना इस बात का प्रमाण है कि अभियोक्ता कथित तौर पर आरोपी अर्जुन सिंह के कहने पर यौन संबंध बनाने में सहमति से भागीदार थी, खासकर यदि वह यौन उत्पीड़न में सहमति से भागीदार नहीं...
क्या “अभियोजन पक्ष के गवाह” से उसके 161 (3) CrPC (BNSS की धारा 180 (3)) कथन के संबंध में धारा 145 साक्ष्य अधिनियम ( धारा 148 BSA) के दोनों अंगों का सहारा लेकर क्रॉस एक्जामिनेशन की जा सकती है?
Whether A “Prosecution Witness” Can Be Cross-Examined By Resort To Both The Limbs Of Section 145 Evidence Act (S.148 BSA) With Regard To His161 (3) Cr.P.C. (S.180 (3) Of BNSS) Statement
गांव/नगर परिषद प्रमुख की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तर्कसंगत निर्णय लिए बिना स्कूल की कृषि भूमि को पट्टे पर नहीं दिया जाएगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
विद्यालयों की भूमि को अवैध रूप से पट्टे पर दिए जाने से संबंधित जनहित याचिका का निपटारा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित विद्यालय की समिति द्वारा तर्कसंगत निर्णय लिए बिना विद्यालय की कृषि भूमि को पट्टे पर नहीं दिया जा सकता।अदालत ने कहा कि गठित की जाने वाली समिति में ग्राम प्रधान या नगर पालिका अध्यक्ष को अध्यक्ष के रूप में शामिल किया जाना चाहिए तथा नायब तहसीलदार से ऊपर के पद के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट द्वारा नामित व्यक्ति और संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को इसके सदस्य के रूप...
रिवीजन क्षेत्राधिकार में डिस्चार्ज याचिका पर विचार करते समय न्यायालय को केवल यह देखना होता है कि जांच अधिकारी ने पर्याप्त सामग्री एकत्र की है, या नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि डिस्चार्ज आवेदन के विरुद्ध रिवीजन का दायरा बहुत सीमित है। न्यायालय को केवल जांच अधिकारी द्वारा एकत्र की गई सामग्री पर विचार करना है चाहे वह पर्याप्त हो या नहीं।जस्टिस एच पी संदेश ने डॉ. मोहनकुमार एम द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह कहा।सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा,"न्यायालय एक छोटा परीक्षण नहीं कर सकता है। डिस्चार्ज आवेदन में बचाव पर विचार नहीं किया जा सकता है और न्यायालय को केवल जांच अधिकारी द्वारा एकत्र की गई सामग्री को देखना है...
नियोक्ता 5 वर्ष की अवधि के लिए अतिरिक्त राशि वसूल नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया
जस्टिस ज्योति सिंह की सदस्यता वाली दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने माना कि 9 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि की वसूली न्यायसंगत और उचित नहीं होगी। न्यायालय ने दोहराया कि यद्यपि नियोक्ता को किसी कर्मचारी को गलती से भुगतान की गई अतिरिक्त राशि वसूलने का अधिकार है लेकिन ऐसा उन मामलों में नहीं किया जा सकता, जहां वसूली का आदेश जारी होने से पहले पांच वर्ष से अधिक की अवधि के लिए अतिरिक्त भुगतान किया गया हो और जहां वसूली अन्यायपूर्ण, कठोर या मनमानी हो।पूरा मामलायाचिकाकर्ता के पति गुरु तेग बहादुर खालसा (शाम)...
वित्त अधिनियम की धारा 73(4b) के तहत जहां ऐसा करना संभव है, वाक्यांश सेवा कर बकाया निर्धारित करने की समयसीमा को 'संकेतक नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि जहां ऐसा करना संभव है, वाक्यांश का उपयोग वित्त अधिनियम, 1994 की धारा 73(4बी) के तहत सेवा कर बकाया निर्धारित करने के लिए निर्धारित समयसीमा को संकेतक प्रकृति का नहीं बनाता।एक्टिंग चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की खंडपीठ ने कहा,"कराधान के प्रभावी प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए धारा 73(4बी) को वित्त अधिनियम में तैयार और पेश किया गया। हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कराधान किसी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है लेकिन राजस्व विभाग...
नसबंदी करवाने वाले समाजसेवी व्यक्ति को परिवार नियोजन योजना के तहत अग्रिम वेतन वृद्धि से वंचित नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने कहा कि यदि कोई समाजसेवी व्यक्ति (चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या न हो) निःस्वार्थ भाव से परिवार नियोजन के लिए नसबंदी करवाता है, तो ऐसे व्यक्ति को बाद में परिवार नियोजन अपनाने वाले सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली अग्रिम वेतन वृद्धि की सरकारी योजना के तहत किसी भी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।ऐसा करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसा व्यक्ति भी लाभ का हकदार है, भले ही उसने सरकारी सेवा में आने से पहले ऐसे कार्य में योगदान दिया हो।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल...
आभूषण ब्रांड द्वारा स्वर्ण बचत योजनाओं को नियंत्रित करने वाले कानून
स्वर्ण बचत योजनाएं आम तौर पर आभूषण की दुकानों द्वारा पेश की जाने वाली योजनाएं हैं, जो उपभोक्ता को 11-12 महीने से अधिक नहीं के मासिक भुगतान करके सोना खरीदने की अनुमति देती हैं।स्वर्ण बचत योजनाओं के लिए आम तौर पर आभूषण विक्रेता उपभोक्ताओं के लिए निवेश के एक/कुछ महीने (आम तौर पर अंतिम महीने) के लिए परिपक्वता छूट प्रदान करते हैं। हालांकि, यह अनिवार्य प्रकृति का नहीं है।इस तरह की योजना उपभोक्ता को कम कीमत पर अपनी किस्तों के बाद सोना खरीदने का लाभ देती है (क्योंकि एक महीने का भुगतान आम तौर पर माफ कर...
एक ही दुर्घटना के लिए कई दावे कर्मचारी मुआवज़ा अधिनियम के तहत स्वीकार्य नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस सुशील कुकरेजा की एकल पीठ ने कर्मचारी मुआवज़ा अधिनियम के तहत आश्रित माँ द्वारा दायर अपील खारिज की। इसने माना कि एक ही दुर्घटना के लिए कई दावा याचिकाएं स्वीकार्य नहीं हैं। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि जब मृतक कर्मचारी की विधवा और बेटी ने 2015 में ही अपना दावा निपटा लिया था तो 2023 में माँ द्वारा बाद में दायर की गई याचिका को अनुमति नहीं दी जा सकती।मामले की पृष्ठभूमिराजू नामक एक ट्रक चालक की 2013 में चंडीगढ़ से ठियोग तक ईंटें ले जाते समय सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई...
नियुक्ति में ड्राइवर सेवा नियम का पालन नहीं किया गया, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष चीनी निधि कर्मचारी को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने से किया इनकार
चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने माना कि विशेष चीनी निधि के तहत नियुक्त कर्मचारी को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता, क्योंकि नियुक्ति उत्तर प्रदेश चीनी विभाग ड्राइवर सेवा नियम, 1984 के अनुसार नहीं की गई।पृष्ठभूमि तथ्यविशेष चीनी निधि का निर्माण वर्ष 1974 में उत्तर प्रदेश गन्ना (क्रय कर) अधिनियम, 1961 (1961 का अधिनियम) से किया गया। उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त को विशेष चीनी निधि के तहत नियुक्त कर्मचारियों की नियुक्ति प्राधिकारी के रूप में कार्य करने...
रिटायरमेंट से पहले अंतिम 24 महीनों में प्राप्त परिलब्धियों की शुद्धता रिटायरमेंट लाभों के लिए निर्विवाद: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि रिटायरमेंट लाभों की गणना करते समय सेवा के अंतिम 24 महीनों के दौरान किसी कर्मचारी द्वारा प्राप्त परिलब्धियों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।जम्मू-कश्मीर सीएसआर के अनुच्छेद 242 का हवाला देते हुए जस्टिस संजीव कुमार और पुनीत गुप्ता ने कहा,“किसी कर्मचारी द्वारा अपनी रिटायरमेंट से चौबीस (24) महीने पहले प्राप्त परिलब्धियों की शुद्धता पर ऐसे कर्मचारी के रिटायरमेंट लाभों की गणना करते समय विवाद नहीं किया जा सकता।”ये टिप्पणियां नियोक्ता की लापरवाही और रिटायरमेंट के...
गुजरात हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले की सुनवाई के दौरान आचरण पर 'गंभीर आरोपों' को लेकर न्यायिक अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार (23 दिसंबर) को सेशन जज के पद के न्यायिक अधिकारी से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा, क्योंकि जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले में कार्यवाही की सुनवाई के दौरान अधिकारी के आचरण के बारे में "गंभीर आरोप" लगाने वाली याचिका पर "प्रथम दृष्टया" संज्ञान लिया गया था।यह आदेश उस याचिका पर पारित किया गया, जिसमें याचिकाकर्ता ने न्यायिक अधिकारी के समक्ष कार्यवाही को इस "आशंका के आधार पर स्थानांतरित करने की मांग की कि उसके साथ अन्याय होगा, न कि इसलिए कि उसके पास कोई मामला नहीं है, बल्कि इसलिए कि...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विधानसभा द्वारा भूमि अधिग्रहण अधिनियम में शामिल किए गए भूमि को गैर-अधिसूचित करने का प्रावधान खारिज किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विधानसभा द्वारा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 में शामिल की गई धारा 101ए खारिज किया।यह प्रावधान राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत अधिग्रहीत भूमि को गैर-अधिसूचित करने का अधिकार देता है, यदि वह सार्वजनिक उद्देश्य जिसके लिए भूमि अधिग्रहित की गई, अव्यवहारिक या अनावश्यक हो जाता है।इसे हरियाणा विधानमंडल द्वारा 2018 में पारित संशोधन के माध्यम से शामिल किया गया।जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस...
डिलीवरी बॉय से सिविल जज तक - यासीन शाह मुहम्मद की प्रेरणादायक कहानी
केरल न्यायिक सेवा परीक्षा 2024 में दूसरे स्थान पर आने वाले और सिविल जज बनने के लिए योग्य वकील यासीन शान मुहम्मद का जीवन वास्तव में प्रेरणादायक है। यासीन के अनुसार, उनकी सफलता की कुंजी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत है। यासीन की जीवन की किताब के पन्नों को पलटना उन कई लोगों को उम्मीद देगा, जो महसूस करते हैं कि उनका भविष्य अंधकारमय, निराश और उदास है।लाइव लॉ ने यासीन से बातचीत की और हमें अपने पाठकों के साथ उनकी कहानी साझा करने पर गर्व है।यासीन केरल के पलक्कड़ जिले से हैं। उनकी माँ ने छठी कक्षा में ही...
हरदा फैक्ट्री ब्लास्ट| मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मालिकों को NGT के समक्ष चोटों, संपत्ति के नुकसान के लिए पीड़ितों के दावों पर आपत्ति करने की अनुमति दी
हरदा में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट में कथित रूप से प्रभावित पीड़ितों के दावों पर सवाल उठाते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने फैक्ट्री मालिकों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण भोपाल के समक्ष उनकी चोटों और घरों के विनाश के लिए भुगतान की जाने वाली राशि के संबंध में दावेदारों की वास्तविकता के बारे में अपनी आपत्तियां उठाने की अनुमति दी।ऐसा करते हुए, अदालत ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता इस तरह की आपत्तियां उठाता है तो एनजीटी कानून के अनुसार उन पर विचार करेगा और कहा कि प्रशासन एनजीटी के निर्देश...
समानता का सिद्धांत एक ही प्रशासनिक ढांचे के तहत विभिन्न बलों में दंड पर लागू होता है: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शैलिंदर कौर की खंडपीठ ने सीआईएसएफ के दो कांस्टेबलों को सेवा से हटाए जाने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि उनकी सजा उसी घटना में शामिल आईटीबीपी के अधिकारी की तुलना में अधिक नहीं है। यह माना गया कि समानता का सिद्धांत गृह मंत्रालय के तहत विभिन्न बलों में दंड पर लागू होता है। इसने स्पष्ट किया कि समान प्रशासनिक ढांचे के तहत काम करने वाले बलों को समान उपचार प्राप्त करना चाहिए।मामले की पृष्ठभूमि: विकेश कुमार सिंह और अरुणचलम पी ढाका में भारतीय उच्चायोग में कार्यरत...




















