हाईकोर्ट

अनुशासनात्मक कार्यवाही में बिना किसी स्पष्ट कारण के बर्खास्तगी आदेश और प्रक्रियागत चूक प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अनुशासनात्मक कार्यवाही में बिना किसी स्पष्ट कारण के बर्खास्तगी आदेश और प्रक्रियागत चूक प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस संजय द्विवेदी की एकल पीठ ने प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों का महत्वपूर्ण उल्लंघन पाते हुए भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) के कर्मचारी की बर्खास्तगी को अमान्य करार दिया। न्यायालय ने माना कि विजय सिंह यादव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही गवाहों की गवाही की अनुपस्थिति, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफलता और तर्कपूर्ण आदेशों की कमी के कारण मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण थी। भेदभावपूर्ण व्यवहार और प्रक्रियागत चूकों को उजागर करते हुए न्यायालय ने यादव को पूर्ण वेतन और लाभ के साथ...

राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 वर्षों तक गिरफ्तारी से बचने वाले व्यक्ति के खिलाफ चेक बाउंस मामला खारिज करने से इनकार किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 वर्षों तक गिरफ्तारी से बचने वाले व्यक्ति के खिलाफ चेक बाउंस मामला खारिज करने से इनकार किया

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने चेक बाउंस मामले में पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर दर्ज की गई व्यक्ति की याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका वास्तव में एक पूर्व पुनर्विचार याचिका की "पुनर्विचार" थी, जिसे न्यायालय ने पिछले वर्ष ही खारिज कर दिया था।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति की पुनर्विचार याचिका खारिज करने वाले समन्वय पीठ के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसे 2011 में निचली अदालत ने एक वर्ष की जेल की सजा सुनाई थी, लेकिन उसे इस वर्ष सितंबर में ही गिरफ्तार किया गया,...

S.139 NI Act | शिकायतकर्ता के यह साबित कर देने पर कि चेक आरोपी द्वारा ऋण चुकाने के लिए जारी किया गया तो इसका भार आरोपी पर आ जाता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
S.139 NI Act | शिकायतकर्ता के यह साबित कर देने पर कि चेक आरोपी द्वारा ऋण चुकाने के लिए जारी किया गया तो इसका भार आरोपी पर आ जाता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 139 के तहत साक्ष्य भार में महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित करते हुए जम्मू-कश्मीर एडं लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब शिकायतकर्ता यह साबित कर देता है कि चेक आरोपी द्वारा ऋण चुकाने के लिए जारी किया गया था तो धारा 139 के अनुसार साक्ष्य भार आरोपी पर आ जाता है।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने स्पष्ट किया,इसके बाद आरोपी को यह साबित करना होता है कि चेक किसी देनदारी के निपटान के लिए जारी नहीं किया गया और जब तक आरोपी द्वारा साक्ष्य भार का निर्वहन...

औद्योगिक न्यायालय के पास नियोक्ता-कर्मचारी के बीच स्पष्ट संबंध न होने के कारण अधिकार क्षेत्र नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
औद्योगिक न्यायालय के पास नियोक्ता-कर्मचारी के बीच स्पष्ट संबंध न होने के कारण अधिकार क्षेत्र नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस संदीप वी. मार्ने की एकल पीठ ने टाटा स्टील की रिट याचिका स्वीकार की। इसने माना कि औद्योगिक न्यायालय के पास कैंटीन कर्मचारियों की रोजगार स्थिति तय करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि नियोक्ता-कर्मचारी संबंध की प्रकृति ही विवादित है। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि महाराष्ट्र ट्रेड यूनियनों की मान्यता और अनुचित श्रम व्यवहार रोकथाम (एमआरटीयू और पल्प) अधिनियम, 1971 के तहत औद्योगिक न्यायालय (Industrial Court) केवल उन मामलों की सुनवाई कर सकता है, जहां निर्विवाद रोजगार संबंध...

धारा 25F नोटिस के बिना बर्खास्तगी; कर्मचारी के समान रोजगार में पाए जाने पर मौद्रिक मुआवजा पर्याप्त: बॉम्बे हाईकोर्ट
धारा 25F नोटिस के बिना बर्खास्तगी; कर्मचारी के समान रोजगार में पाए जाने पर मौद्रिक मुआवजा पर्याप्त: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल एल. पानसरे की एकल न्यायाधीश पीठ ने श्रम न्यायालय का निर्णय बरकरार रखा, जिसमें आकस्मिक मजदूर को बहाल करने के बजाय मौद्रिक मुआवजा देने का निर्णय लिया गया था, जिसकी सेवाओं को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना समाप्त कर दिया गया। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25एफ का पालन किए बिना बर्खास्तगी अवैध है, लेकिन बहाली स्वचालित उपाय नहीं है, खासकर जब कर्मचारी को कहीं और समान रोजगार मिल गया हो।मामले की पृष्ठभूमियह मामला शरद माधवराव...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने IFS संजीव चतुर्वेदी के पैनल रिकॉर्ड की आपूर्ति के आदेशों का पालन न करने पर DoPT के संयुक्त सचिव को अवमानना ​​नोटिस जारी किया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने IFS संजीव चतुर्वेदी के पैनल रिकॉर्ड की आपूर्ति के आदेशों का पालन न करने पर DoPT के संयुक्त सचिव को अवमानना ​​नोटिस जारी किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के संयुक्त सचिव को IFS संजीव चतुर्वेदी के केंद्र में संयुक्त सचिव के पद पर पैनल में शामिल होने की प्रक्रिया और निर्णय लेने से संबंधित रिकॉर्ड की आपूर्ति करने के न्यायालय के आदेश का पालन न करने पर अवमानना ​​नोटिस जारी किया।जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने भारतीय वन सेवा अधिकारी (IFS) संजीव चतुर्वेदी द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई की, जो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।न्यायालय ने दर्ज किया,“संजीव चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि...

पत्नी के खिलाफ व्यभिचार के आरोपों पर धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण के लिए आवेदन करने से पहले निर्णय लिया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पत्नी के खिलाफ व्यभिचार के आरोपों पर धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण के लिए आवेदन करने से पहले निर्णय लिया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी के खिलाफ व्यभिचार के आरोपों पर धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण के लिए आवेदन करने से पहले निर्णय लिया जाना चाहिए।संशोधनवादी पति ने एडिशनल प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट, फिरोजाबाद के उस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें प्रतिवादी-पत्नी को धारा 125 CrPC के तहत 7000/- रुपये का अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया गया। यह तर्क दिया गया कि व्यभिचारी होने के कारण पत्नी धारा 125(4) CrPC के आधार पर किसी भी राहत की हकदार नहीं थी।धारा 125(4) में प्रावधान है कि यदि...

ट्रायल कोर्ट जज हाईकोर्ट के डर से बरी होने के स्पष्ट मामले के बावजूद आरोपियों को दोषी ठहराते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ट्रायल कोर्ट जज हाईकोर्ट के डर से बरी होने के स्पष्ट मामले के बावजूद आरोपियों को दोषी ठहराते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट के जज अक्सर हाईकोर्ट के डर से बरी होने के स्पष्ट मामले के बावजूद जघन्य अपराधों के मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराते हैं।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"वे ऐसे मामलों में हाईकोर्ट के क्रोध से डरते हैं। केवल अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और कैरियर की संभावनाओं को बचाने के लिए ऐसे निर्णय और दोषसिद्धि के आदेश पारित करते हैं।"साथ ही खंडपीठ ने इस बात पर अफसोस जताया कि सरकार ने विधि आयोग द्वारा अपनी 277वीं...

मुख्य नियोक्ता यह दावा करके EC Act के तहत दायित्व से बच नहीं सकता कि कर्मचारी ठेकेदार के माध्यम से काम कर रहे थे: बॉम्बे हाईकोर्ट
मुख्य नियोक्ता यह दावा करके EC Act के तहत दायित्व से बच नहीं सकता कि कर्मचारी ठेकेदार के माध्यम से काम कर रहे थे: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस शर्मिला यू. देशमुख की एकल न्यायाधीश पीठ ने मृतक पायलट के आश्रितों को दिए गए मुआवजे के खिलाफ एयर इंडिया चार्टर्स लिमिटेड की अपील को खारिज किया। न्यायालय ने माना कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 (EC Act) की धारा 12 के तहत मुख्य नियोक्ता मुआवजे के लिए प्राथमिक दायित्व वहन करता है। भले ही कर्मचारी ठेकेदारों के माध्यम से काम कर रहे हों। न्यायालय ने पुष्टि की कि मुआवजे की गणना AICL द्वारा पहले स्वीकार की गई $11,000 की उच्च वेतन राशि के आधार पर की जानी चाहिए। देरी से भुगतान के...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 4 वर्षीय बच्ची के यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 4 वर्षीय बच्ची के यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 4 वर्षीय बच्ची के यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने धारा 161 और 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज अपने बयान में अभियोजन पक्ष की कहानी का समर्थन किया।अपने आदेश में न्यायालय ने यह भी कहा कि बलात्कार जघन्य अपराध है। इस प्रकार के मामले हमारे समाज में दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं, भले ही हमारे देश में छोटी बच्चियों की पूजा की जाती है।जस्टिस शेखर कुमार यादव की बेंच ने कहा,“न्यायालय ने बार-बार कहा कि इस प्रकार का कृत्य न केवल...

हर हिरासत और गिरफ्तारी हिरासत में यातना के बराबर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
हर हिरासत और गिरफ्तारी हिरासत में यातना के बराबर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इस बात पर जोर देते हुए कि हर गिरफ्तारी और हिरासत हिरासत में यातना के बराबर नहीं होती, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब हिरासत में यातना के आरोपों का समर्थन किसी मेडिकल रिपोर्ट या अन्य पुष्टिकारी साक्ष्य द्वारा नहीं किया जाता तो न्यायालय को इस तरह की कार्यवाही पर विचार नहीं करना चाहिए।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने कहा कि हिरासत में किसी भी तरह की यातना के शिकार लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हुए न्यायालय को समाज के हित में सभी झूठे, प्रेरित और...

मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत समीक्षा की शक्ति का प्रयोग छह महीने के भीतर किया जाना चाहिए: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत समीक्षा की शक्ति का प्रयोग छह महीने के भीतर किया जाना चाहिए: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस संजय द्विवेदी की एकल पीठ ने विभागीय जांच में रिटायर उप मंडल मजिस्ट्रेट की दोषमुक्ति की राज्य द्वारा की गई देरी से समीक्षा को अमान्य करार दिया। न्यायालय ने माना कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 29(1) के तहत समीक्षा की शक्ति का प्रयोग छह महीने के भीतर किया जाना चाहिए। इस अवधि से परे कोई भी समीक्षा अवैध है। न्यायालय ने रोके गए रिटायरमेंट लाभों को 8% ब्याज के साथ जारी करने का आदेश दिया।मामले की पृष्ठभूमिकामेश्वर चौबे 38 साल की...

गुजरात हाईकोर्ट ने बिना NOC के पासपोर्ट नवीनीकरण करने के लिए सरकारी अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र खारिज किया
गुजरात हाईकोर्ट ने बिना NOC के पासपोर्ट नवीनीकरण करने के लिए सरकारी अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र खारिज किया

गुजरात हाईकोर्ट की जज जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस गीता गोपी की खंडपीठ ने लेखा और कोषागार निदेशक के रूप में कार्यरत चारु भट्ट के खिलाफ जारी आरोपपत्र खारिज किया, जिन पर राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किए बिना 2013 में अपना पासपोर्ट नवीनीकृत करने का आरोप था।पासपोर्ट खरीद और अनधिकृत विदेश यात्रा से संबंधित दो अन्य आरोपों को खारिज कर दिया गया, न्यायालय ने माना कि NOC के बिना नवीनीकरण गुजरात सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के तहत "कदाचार" नहीं माना जाता है, क्योंकि यह केवल एक...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल में बंद कैदियों के बच्चों को नियमित स्कूलों में भेजने की उत्तर प्रदेश सरकार की नीति का ब्यौरा मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल में बंद कैदियों के बच्चों को नियमित स्कूलों में भेजने की उत्तर प्रदेश सरकार की नीति का ब्यौरा मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जेल में बंद कैदियों (जो अपने माता-पिता के साथ जेल में रहते हैं) के बच्चों को पूरे राज्य में नियमित स्कूलों में दाखिला दिलाने की अपनी नीति के बारे में विस्तृत हलफनामा पेश करे।जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने रेखा नामक महिला की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि आवेदक का पांच साल का बच्चा जेल में है। जब न्यायालय ने बच्चे की शिक्षा की स्थिति के बारे में पूछा तो पीठ को बताया गया कि बच्चा जेल...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने MBBS स्टूडेंट को राहत दी, बौद्ध धर्म प्रमाणपत्र को वापस लेने के यूपी सरकार के आदेश पर रोक लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने MBBS स्टूडेंट को राहत दी, बौद्ध धर्म प्रमाणपत्र को वापस लेने के यूपी सरकार के आदेश पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाई। उक्त आदेश में स्टूडेंट के बौद्ध धर्म प्रमाणपत्र को वापस लेने/रद्द करने का आदेश दिया गया था, जिसके कारण अंततः उसका सुभारती यूनिवर्सिटी, मेरठ में MBBS में एडमिशन रद्द हो गया था।उत्तर प्रदेश सरकार ने इस साल अगस्त में याचिकाकर्ता अंजलि का धर्म प्रमाणपत्र रद्द कर दिया था, जिसमें उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 8 और 9 का हवाला दिया गया था।यह निर्णय कथित तौर पर राज्य के...

प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए अभिशाप: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए 'अभिशाप': इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए अभिशाप है। इसे कानून के अनुसार उचित उपाय करके रोका जाना चाहिए।न्यायालय ने राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से हलफनामा भी मांगा, जिसमें इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में उठाए गए कदमों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शिक्षकों की अनुपस्थिति को रोकने के लिए प्रस्तावित उपायों के बारे में बताया गया हो।जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने मऊ जिले की...

FSL के पास लंबित मामलों की बड़ी संख्या राज्यों द्वारा समय पर न्याय देने में घोर विफलता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
FSL के पास लंबित मामलों की बड़ी संख्या राज्यों द्वारा समय पर न्याय देने में घोर विफलता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को निर्देश दिया कि वे हरियाणा एवं पंजाब राज्यों में फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) के कामकाज के लिए गठित समितियों द्वारा की गई सिफारिशों के क्रियान्वयन पर विचार करें।न्यायालय ने कहा,FSL के पास लंबित मामलों की बड़ी संख्या, जिसके कारण मुकदमों में अनावश्यक देरी हुई है, यह दर्शाती है कि राज्य समय पर न्याय देने में घोर विफलता दिखा रहे हैं।जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने कहा,"यह रेखांकित किया जाना चाहिए कि FSL रिपोर्ट जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण घटक है,...

तारीख पे तारीख संस्कृति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट को 1 सप्ताह में आदेश पारित करने का निर्देश दिया
'तारीख पे तारीख' संस्कृति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट को 1 सप्ताह में आदेश पारित करने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मजिस्ट्रेट को बलिया कोर्ट में पिछले 7 साल से लंबित शिकायत मामले में धारा 203 या 204 सीआरपीसी के तहत उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने कहा कि न्याय के उद्देश्यों को सुरक्षित करने और 'तारीख पे तारीख' की संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट को ऐसा निर्देश दिया जा रहा है।अदालत के आदेश में कहा गया,“न्याय के उद्देश्यों को सुरक्षित करने और 'तारीख पे तारीख' की संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए इस न्यायालय की अंतर्निहित...