हाईकोर्ट

घरेलू हिंसा की कार्यवाही में कोर्ट धारा 482 CrPC के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग कर सकता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
घरेलू हिंसा की कार्यवाही में कोर्ट धारा 482 CrPC के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग कर सकता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायालय घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act)के तहत कार्यवाही पर धारा 482 CrPC के तहत अपनी अंतर्निहित शक्ति का प्रयोग कर सकता है।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस पंकज जैन ने कहा,"2005 के अधिनियम (घरेलू हिंसा अधिनियम) की योजना यह प्रावधान करती है कि 2005 के अधिनियम की धारा 12 के तहत सभी कार्यवाही दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रावधानों द्वारा शासित होगी> इस प्रकार यह मानना ​​संभव नहीं है कि धारा 482 सीआरपीसी 2005 के अधिनियम के तहत दायर शिकायतों से...

हाईकोर्ट ने MUDA मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग वाली याचिका पर सीएम सिद्धारमैया से जवाब मांगा
हाईकोर्ट ने MUDA मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग वाली याचिका पर सीएम सिद्धारमैया से जवाब मांगा

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार (5 नवंबर) को कथित मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) "घोटाले" की जांच को वर्तमान में लोकायुक्त पुलिस द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के निर्देश की मांग वाली याचिका में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का पक्ष मांगा।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया - जिसमें याचिकाकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की याचिका में सीएम, उनकी पत्नी पार्वती और अन्य व्यक्ति शामिल हैं।कोर्ट ने मामले को 26 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया।हाईकोर्ट ने लोकायुक्त पुलिस...

अमान्य विवाह से पैदा हुए बच्चों को जन्म पंजीकरण का अधिकार, कानून के तहत मान्यता दी जाएगी: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
अमान्य विवाह से पैदा हुए बच्चों को जन्म पंजीकरण का अधिकार, कानून के तहत मान्यता दी जाएगी: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमान्य विवाह से पैदा हुए बच्चों को जन्म पंजीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता, जिससे उनके माता-पिता की वैवाहिक स्थिति की परवाह किए बिना कानूनी मान्यता के उनके अधिकार की पुष्टि होती है।जस्टिस ज्योत्सना रेवल दुआ ने कानून के तहत बच्चों के निहित अधिकारों को मान्यता दिए जाने पर जोर देते हुए कहा,"यह तथ्य कि वे जीवित प्राणी हैं और मौजूद हैं, कानून में मान्यता दिए जाने की आवश्यकता है।"जस्टिस दुआ ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 16 कानूनी रूप से अमान्य...

Delhi Riots
Delhi Riots: हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास के आरोपों के खिलाफ खालिद सैफी की याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के संस्थापक खालिद सैफी की याचिका खारिज की। उक्त याचिका में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में उनके खिलाफ हत्या के प्रयास के आरोप तय किए जाने को चुनौती दी गई थी।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा,"याचिका खारिज की जाती है।"दिल्ली पुलिस ने जगत पुरी थाने में एफआईआर 44/2020 दर्ज की थी।इस साल की शुरुआत में ट्रायल कोर्ट ने सैफी, पूर्व कांग्रेस पार्षद इशरत जहां और 11 अन्य के खिलाफ दंगा, गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने...

चंडीगढ़ एयरपोर्ट से केवल दो इंटरनेशनल फ्लाइट क्यों? हाईकोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से मांगा जवाब
चंडीगढ़ एयरपोर्ट से केवल दो इंटरनेशनल फ्लाइट क्यों? हाईकोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से मांगा जवाब

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पंजाब सरकार से हलफनामा मांगा कि चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से केवल दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें क्यों हैं।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल ने कहा,"चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अथॉरिटी लिमिटेड की ओर से भी इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं आया कि चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश और दो समृद्ध राज्यों की राजधानी) से प्रतिदिन केवल दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें यानी शारजहां और दुबई क्यों हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमृतसर जैसे जिला मुख्यालय से...

महिला को देखना या उसकी तस्वीरें लेना आईपीसी की धारा 354सी के तहत ताक-झांक नहीं माना जाएगा: केरल हाईकोर्ट
महिला को देखना या उसकी तस्वीरें लेना आईपीसी की धारा 354सी के तहत ताक-झांक नहीं माना जाएगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने माना कि आईपीसी की धारा 354सी के तहत ताक-झांक का अपराध तब नहीं माना जाएगा, जब किसी महिला की तस्वीरें दो पुरुषों द्वारा खींची गई हों, जबकि वह बिना किसी गोपनीयता के अपने घर के सामने खड़ी थी।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने स्पष्ट किया कि यह अपराध केवल तभी माना जाएगा, जब प्रावधान के तहत उल्लिखित 'निजी कार्य' में संलग्न किसी महिला को देखा जाए या उसकी तस्वीरें ली जाएं।धारा 354सी की व्याख्या 'निजी कार्य' को ऐसे स्थान पर किए गए निजी कार्य को देखने के कार्य के रूप में परिभाषित करती है, जहां...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने LLM स्टूडेंट की उत्तर पुस्तिका को AI-जनरेटेड घोषित करने के खिलाफ याचिका पर जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने LLM स्टूडेंट की उत्तर पुस्तिका को 'AI-जनरेटेड' घोषित करने के खिलाफ याचिका पर जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से LLM स्टूडेंट की याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें उसने परीक्षा में उसके द्वारा दिए गए उत्तर को "AI-जनरेटेड" घोषित करने के यूनिवर्सिटी के निर्णय को चुनौती दी।जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने मामले को 14 नवंबर के लिए सूचीबद्ध करते हुए यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया। पेशे से वकील कौस्तुभ शक्करवार ने "अनुचित साधन समिति" के निर्णय को रद्द करने की मांग करते हुए रिट याचिका दायर की, जिसमें उसकी उत्तर पुस्तिका को "AI-जनरेटेड" घोषित किया...

नोटिस की सेवा में दोषों के मामले में डाक लिफाफों में केवल सुधार पर्याप्त नहीं, नया नोटिस जारी किया जाना चाहिए: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
नोटिस की सेवा में दोषों के मामले में डाक लिफाफों में केवल सुधार पर्याप्त नहीं, नया नोटिस जारी किया जाना चाहिए: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि डाक लिफाफों में केवल सुधार नोटिस की सेवा में दोषों को ठीक करने के लिए पर्याप्त नहीं है, इस बात पर जोर देते हुए कि जब गलत पता पाया जाता है तो उचित तरीका मुख्य कार्यवाही में पता सही करना और नए नोटिस जारी करना है।ऐसा करते हुए अदालत ने कहा कि पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं को उचित सेवा के अभाव में सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, क्योंकि नोटिस गलत पते पर दिया गया।यह मामला दो सोसाइटियों - जीयूएम सोसाइटी और टीएपीपी सोसाइटी के...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुबह 11 बजे के बाद दाखिल किए गए उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज करने के फैसले पर सवाल उठाए
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुबह 11 बजे के बाद दाखिल किए गए उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज करने के फैसले पर सवाल उठाए

बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें उसने राज्य भर के उम्मीदवारों के नामांकन पत्र सुबह 11 बजे के बाद दाखिल करने पर उन्हें खारिज किया था। हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) से जानना चाहा कि उसने किस आधार पर महाराष्ट्र भर के विभिन्न उम्मीदवारों के नामांकन खारिज किए, जिन्होंने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए 30 अक्टूबर को सुबह 11 बजे के बाद अपने नामांकन पत्र दाखिल किए।जस्टिस आरिफ डॉक्टर और जस्टिस सोमशेखर सुंदरसन की अवकाश पीठ ने चुनाव आयोग को राज्य भर के उन...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने MBBS कोर्ट में ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग में देरी और बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाने पर नोटिस जारी किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने MBBS कोर्ट में ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग में देरी और बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाने पर नोटिस जारी किया

ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग में देरी और अनिवार्य ग्रामीण बॉन्ड का उल्लंघन करने पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाने को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य, मेडिकल शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य आयुक्त को नोटिस जारी किया।MBBS ग्रेजुएट करने वाले याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ये शर्तें उसके करियर की प्रगति और संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष याचिका को सूचीबद्ध किया गया।यह मामला...

विभागीय कार्यवाही लंबित ना हो, फिर भी की सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी की सेवा समाप्त करना, कानून न्‍यायशास्त्र के लिए नामालूम: पटना हाईकोर्ट
विभागीय कार्यवाही लंबित ना हो, फिर भी की सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी की सेवा समाप्त करना, कानून न्‍यायशास्त्र के लिए नामालूम: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में जल संसाधन विभाग के एक कार्यालय आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका को अनुमति दी, जिसमें याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति के चार वर्ष और आठ महीने बाद पेंशन रोक दी गई थी। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि एक दोषी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुंचने के बाद भी सेवा में तभी माना जाएगा, जब सेवा समाप्ति से पहले उसके खिलाफ कोई वैध विभागीय कार्यवाही शुरू की गई हो।मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस हरीश कुमार ने कहा, "एक बार नियोक्ता और कर्मचारी का संबंध समाप्त हो जाने के बाद, किसी कर्मचारी की...

संवैधानिक न्यायालय उन विशिष्ट विषयों से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं, जिनके लिए विशेष न्यायाधिकरणों की आवश्यकता: केरल हाईकोर्ट
संवैधानिक न्यायालय उन विशिष्ट विषयों से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं, जिनके लिए विशेष न्यायाधिकरणों की आवश्यकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने दूरसंचार शुल्क आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मौलिक अधिकारों को लागू करने का अधिकार केवल संवैधानिक न्यायालयों के पास है, लेकिन दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी) जैसा विशेषज्ञ निकाय उन मौलिक अधिकारों पर न्यायिक रिव्यू कर सकता है। ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने मौलिक अधिकारों को लागू करने और उन अधिकारों के संबंध में न्यायिक रिव्यू करने के बीच अंतर पर जोर दिया। कोर्ट ने आगे कहा कि विशिष्ट विषयों को संबोधित करने वाले विशेष न्यायाधिकरणों की...

मोटर वाहन अधिनियम के तहत अतिरिक्त प्रीमियम स्वीकार किए जाने पर ड्राइवरों और क्लीनरों को भुगतान के लिए बीमा कंपनियां उत्तरदायी: पटना हाईकोर्ट
मोटर वाहन अधिनियम के तहत अतिरिक्त प्रीमियम स्वीकार किए जाने पर ड्राइवरों और क्लीनरों को भुगतान के लिए बीमा कंपनियां उत्तरदायी: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि जब वाहन मालिक अपने कवरेज के लिए अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान करता है तो बीमा कंपनी को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत भुगतान किए गए ड्राइवर और क्लीनर के लिए देयता को कवर करना चाहिए।न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि एक बार जब बीमा कंपनी अतिरिक्त प्रीमियम स्वीकार कर लेती है, तो वह भुगतान किए गए ड्राइवर और क्लीनर से जुड़े जोखिमों को कवर करने के लिए अपनी देयता का विस्तार करती है, जिससे मालिक का जोखिम बीमाकर्ता पर आ जाता है।इस मामले की अध्यक्षता कर रहे...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मानहानि मामला खारिज करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मानहानि मामला खारिज करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और दो अन्य की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने 2021 की कुछ अदालती कार्यवाही के संबंध में सीनियर एडवोकेट और सांसद विवेक तन्खा द्वारा उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि शिकायत पर संज्ञान लेने के मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने कहा कि यह केवल ट्रायल कोर्ट को देखना है कि धारा 499 आईपीसी के तहत अपराध बनता है या नहीं, जो केवल ट्रायल के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।जस्टिस...

महाराष्ट्र के कॉलेजों में पदोन्नति के लिए UGC Ph.D की आवश्यकता को पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
महाराष्ट्र के कॉलेजों में पदोन्नति के लिए UGC Ph.D की आवश्यकता को पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस मंगेश एस. पाटिल और जस्टिस शैलेश पी. ब्रह्मे की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति के लिए 2018 में शुरू की गई यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (UGC) Ph.D की आवश्यकता भविष्य में लागू होगी। इससे उन शिक्षकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जो पहले के नियमों के तहत योग्य हैं। महाराष्ट्र राज्य को 2016 के नियमों के आधार पर याचिकाकर्ताओं के पदोन्नति आवेदनों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।मामले की पृष्ठभूमिमहाराष्ट्र के कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों के समूह को...

S.498-A IPC | वैवाहिक विवाद नैतिक पतन नहीं; इसका इस्तेमाल पति-पत्नी के शिक्षा के अधिकार को बाधित करने के लिए नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
S.498-A IPC | वैवाहिक विवाद नैतिक पतन नहीं; इसका इस्तेमाल पति-पत्नी के शिक्षा के अधिकार को बाधित करने के लिए नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने हाल ही में महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि वैवाहिक विवाद या मामला 'व्यक्तिगत विवाद' है, जिसे 'नैतिक पतन' से संबंधित अपराध नहीं कहा जा सकता, जिससे पति-पत्नी में से किसी के भी अपने जीवन में आगे की शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार पर असर पड़े।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस संतोष चपलगांवकर की खंडपीठ ने एक पति को अखिल भारतीय आयुष स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा (AIAPGET) - 2024 में शामिल होने की अनुमति दी, जिसके लिए उसे इस आधार पर 'अयोग्य' ठहराया गया कि उस पर धारा 498-ए के साथ-साथ...

पार्टनरशिप एक्ट की धारा 69 के तहत लगाया गया प्रतिबंध आर्बिट्रेशन कार्यवाही पर लागू नहीं होता: दिल्ली हाईकोर्ट
पार्टनरशिप एक्ट की धारा 69 के तहत लगाया गया प्रतिबंध आर्बिट्रेशन कार्यवाही पर लागू नहीं होता: दिल्ली हाईकोर्ट

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने माना कि पार्टनरशिप एक्ट (Partnership Act) की धारा 69 का प्रतिबंध धारा 69(3) में प्रयुक्त “अन्य कार्यवाही” के अंतर्गत नहीं आता। इसलिए धारा 69 के तहत लगाया गया प्रतिबंध आर्बिट्रेशन कार्यवाही पर लागू नहीं होता।संक्षिप्त तथ्यमध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत याचिका दावेदार, भागीदार की ओर से दिनांक 28.04.2017 के अवार्ड और दिनांक 01.07.2017 के संशोधित अवार्ड को चुनौती देने की मांग करते हुए दायर की गई है, जिसके अनुसार विद्वान मध्यस्थ...

जिला कोर्ट के इर्द-गिर्द दलालों का संगठित गिरोह फर्जी विवाह प्रमाण-पत्र जारी करते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
जिला कोर्ट के इर्द-गिर्द दलालों का संगठित गिरोह फर्जी विवाह प्रमाण-पत्र जारी करते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दलालों के संगठित गिरोह के उभरने के बारे में चिंता जताई, जो जाली दस्तावेजों के माध्यम से फर्जी विवाह पंजीकृत कराने में शामिल हैं।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने कहा कि धार्मिक ट्रस्टों के नाम पर जिला कोर्ट के इर्द-गिर्द दलालों और एजेंटों का संगठित गिरोह पनपा है, जिसमें पुरोहितों और दलालों के अलावा योग्य कानूनी पेशेवर भी शामिल हैं।न्यायालय ने आगे कहा कि स्थानीय पुलिस भी ऐसे 'बदमाश' तत्वों को बचाती है। वे फर्जी विवाह प्रमाण-पत्रों और बनाए गए अन्य दस्तावेजों के स्रोत का...

महिला के साथी, उसके रिश्तेदारों पर कानूनी विवाह के अभाव में क्रूरता के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: हाईकोर्ट
महिला के साथी, उसके रिश्तेदारों पर कानूनी विवाह के अभाव में क्रूरता के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: हाईकोर्ट

शिकायतकर्ता पत्नी द्वारा धारा 498ए आईपीसी के तहत व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला खारिज करते हुए केरल हाईकोर्ट ने दोहराया कि पक्षकारों के बीच कानूनी विवाह साबित करने वाले रिकॉर्ड के अभाव में महिला के साथी या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ क्रूरता के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।मामले के तथ्यों में याचिकाकर्ता पति और वास्तविक शिकायतकर्ता पत्नी के बीच विवाह को फैमिली कोर्ट द्वारा 2013 में शून्य और अमान्य घोषित किया गया, यह पाते हुए कि शिकायतकर्ता पत्नी की पिछली शादी कायम थी और भंग नहीं हुई। इस...