द्रविड़ कड़गम द्वारा हिंदू धर्म पर स्पष्ट हमला : मद्रास हाइकोर्ट ने अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द की

Amir Ahmad

21 Jan 2026 12:05 PM IST

  • द्रविड़ कड़गम द्वारा हिंदू धर्म पर स्पष्ट हमला : मद्रास हाइकोर्ट ने अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द की

    मद्रास हाइकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करते हुए कहा कि तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री और युवा कल्याण एवं खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन के भाषण पर की गई प्रतिक्रिया के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

    जस्टिस एस. श्रीमथी ने कहा कि अमित मालवीय ने केवल मंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया दी थी, जो पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में था। ऐसे में उनके खिलाफ कार्यवाही जारी रखने से उन्हें अपूरणीय क्षति और नुकसान होगा।

    हाइकोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि यह दुखद है कि कथित घृणा भाषण देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया, जबकि उस भाषण पर प्रतिक्रिया देने वाले के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई।

    अदालत ने कहा,

    “यह अदालत पीड़ा के साथ यह दर्ज करती है कि जो व्यक्ति घृणा भाषण की शुरुआत करते हैं, उन्हें छोड़ दिया जाता है लेकिन जो लोग उस घृणा भाषण पर प्रतिक्रिया देते हैं। उन्हें कानून की मार झेलनी पड़ती है।"

    क्या है मामला?

    यह मामला वर्ष 2023 में आयोजित सनातन उन्मूलन सम्मेलन से जुड़ा है, जहां उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से करते हुए उसके उन्मूलन की बात कही थी। इस बयान के खिलाफ मद्रास हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं।

    अमित मालवीय पर आरोप था कि उन्होंने मंत्री के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर उसे तोड़-मरोड़ कर इस तरह पेश किया, मानो मंत्री ने भारत में सनातन धर्म को मानने वाले 80 प्रतिशत लोगों के जनसंहार का आह्वान किया हो।

    डीएमके की वकील शाखा के जिला आयोजक के.ए.वी. थिनाकरन की शिकायत पर मालवीय के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 153, 153ए और 505(1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद मालवीय ने FIR रद्द करने के लिए हाइकोर्ट का रुख किया।

    मालवीय का पक्ष

    मालवीय ने दलील दी कि उन्होंने मंत्री के उसी भाषण को साझा किया, जो पहले से मीडिया में था और केवल उसका अर्थ समझने की कोशिश करते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंत्री का भाषण गंभीर प्रकृति का था और उससे सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों नागरिकों के खिलाफ घृणा और हिंसा भड़कने की आशंका थी। उन्होंने FIR को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।

    राज्य का तर्क

    राज्य की ओर से कहा गया कि मालवीय ने मंत्री के भाषण को विकृत रूप में पेश कर फर्जी खबर फैलाई और विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य पैदा करने की कोशिश की। यह भी कहा गया कि उनके पोस्ट के बाद अयोध्या के एक संत द्वारा मंत्री के खिलाफ इनाम की घोषणा की गई, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी।

    हाइकोर्ट की टिप्पणी

    हाइकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि मालवीय ने न तो किसी आंदोलन का आह्वान किया और न ही किसी के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया। उन्होंने केवल सवाल उठाए और जवाब मांगे जो लगाए गए आरोपों की धाराओं के दायरे में नहीं आते।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि जिस राजनीतिक दल से मंत्री आते हैं उस दल और उससे जुड़े संगठनों द्वारा अतीत में सनातन धर्म और हिंदू आस्थाओं पर हमलों के कई उदाहरण सामने आए हैं, जैसे राम की मूर्ति को चप्पलों की माला पहनाना या गणेश प्रतिमाओं को तोड़ना। अदालत ने कहा कि इन घटनाओं की शिकायतों पर प्रायः कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    हाइकोर्ट ने कहा,

    “यह स्पष्ट है कि पिछले लगभग 100 वर्षों से द्रविड़ कड़गम और उसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम द्वारा हिंदू धर्म पर लगातार हमला किया गया।”

    अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि उदयनिधि स्टालिन का भाषण 80 प्रतिशत हिंदुओं के खिलाफ था और वह घृणा भाषण की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा कि मालवीय स्वयं सनातनी हैं। ऐसे घृणा भाषण के शिकार होने के नाते उन्होंने केवल सनातन धर्म का बचाव किया।

    हाइकोर्ट ने सनातन उन्मूलन शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि उन्मूलन का अर्थ किसी मौजूदा चीज़ का पूरी तरह समाप्त होना है। यदि इसे सनातन धर्म पर लागू किया जाए तो इसका आशय उन लोगों के अस्तित्व को खत्म करने से भी जोड़ा जा सकता है जो उस धर्म का पालन करते हैं।

    अदालत ने कहा कि ऐसे संदर्भ में यह शब्द जनसंहार या सांस्कृतिक विनाश की ओर संकेत करता है। इसलिए मंत्री के भाषण पर सवाल उठाना घृणा भाषण नहीं कहा जा सकता।

    इन सभी कारणों के आधार पर मद्रास हाइकोर्ट ने अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की और उनकी याचिका स्वीकार कर ली।

    Next Story