दूसरी शादी के दस्तावेज को प्रमाणित करने पर मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने पूर्व नोटरी को लगाई कड़ी फटकार

Amir Ahmad

20 Jan 2026 12:18 PM IST

  • दूसरी शादी के दस्तावेज को प्रमाणित करने पर मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने पूर्व नोटरी को लगाई कड़ी फटकार

    मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने एडवोकेट की याचिका पर कड़ी नाराजगी जताई, जिसमें उसने अपनी नोटरी प्रैक्टिस समाप्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी। यह कार्रवाई उस वकील के खिलाफ इसलिए की गई, क्योंकि उसने एक पक्षकार की दूसरी शादी के संपन्न होने से संबंधित दस्तावेज को प्रमाणित (अटेस्ट) किया, जबकि उसे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था।

    इतना ही नहीं यह प्रमाणन उस समय किया गया था जब संबंधित व्यक्ति की पहली शादी अभी भी कायम थी।

    चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसकी नोटरी प्रैक्टिस समाप्त करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।

    हालांकि सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,

    “हम इस मामले को बार काउंसिल को भेजेंगे ताकि अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके, यहां तक कि अधिवक्ता सूची से नाम हटाने पर भी विचार किया जाए। क्यों नहीं यह भी पेशेवर कदाचार है।”

    हाइकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने 29 अक्टूबर, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी नोटरी के रूप में प्रैक्टिस का प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया। चूंकि याचिका वापस ली जा रही है इसलिए इसे उसी आधार पर समाप्त किया जाता है।

    याचिकाकर्ता का तर्क था कि उसके खिलाफ कोई जांच नहीं हुई, न ही आदेश में कोई ठोस निष्कर्ष दर्ज है और न ही उसे सुनवाई का अवसर दिया गया। उसने यह भी कहा कि आदेश एक गैर-कारणयुक्त आदेश है।

    सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से विशेष रूप से उस शपथपत्र के बारे में सवाल किया, जो दूसरी शादी से संबंधित था और यह भी पूछा कि उसे किस अधिकार के तहत प्रमाणित किया गया। कोर्ट ने नोट किया कि यह शपथपत्र पहली शादी के रहते हुए दूसरी शादी के संपन्न होने से जुड़ा था जो गंभीर पेशेवर और नैतिक प्रश्न खड़े करता है।

    हाइकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में एक अन्य खंडपीठ ने इस शपथपत्र के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ जांच के निर्देश दिए। उसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था, जिसका याचिकाकर्ता ने जवाब भी दिया।

    हालांकि, याचिकाकर्ता ने तथ्यों को स्वीकार किया लेकिन उसने यह दलील दी कि कोई विधिवत जांच नहीं की गई और मामले को दोबारा जांच के लिए भेजा जाना चाहिए। इस पर हाइकोर्ट ने कहा कि नोटरी प्रैक्टिस समाप्त करने का आदेश अपील योग्य है और याचिकाकर्ता वैधानिक अपीलीय उपाय अपना सकता था।

    अंततः याचिकाकर्ता द्वारा याचिका वापस लेने के अनुरोध के चलते मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

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