हाईकोर्ट

विदेश जाने के लिए LOC हटाने की मांग पहले ट्रायल कोर्ट में करें, हाईकोर्ट ने कहा- यात्रा की शर्तें तय करने में वही सक्षम

लुक आउट सर्कुलर (LOC) के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले व्यक्ति यदि अस्थायी तौर पर विदेश जाना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले उस विशेष अदालत का रुख करना होगा, जहां संबंधित अभियोजन शिकायत पर सुनवाई चल रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि विदेश यात्रा के लिए LOC को अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग पर पहली सुनवाई संबंधित मामले की विशेष अदालत में होनी चाहिए।जस्टिस मधु जैन ने स्पष्ट किया कि इसका LOC जारी किए जाने या उसके जारी रहने को चुनौती देने वाली याचिका के गुण-दोष पर कोई...

वाहन मालिक होने भर से NDPS मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जानकारी साबित करना जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने मादक पदार्थों से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल किसी वाहन का मालिक होने के आधार पर उसके मालिक को NDPS Act के तहत आरोपी नहीं बनाया जा सकता। अभियोजन को यह साबित करना होगा कि वाहन मालिक को इस बात की जानकारी थी या उसने जानबूझकर अपने वाहन का इस्तेमाल मादक पदार्थों को रखने, छिपाने या ले जाने के लिए करने की अनुमति दी थी।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की पीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी को बरी किया गया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज...

नोएडा मजदूर प्रदर्शन: स्टूडेंट एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की रासुका हिरासत रद्द, हाईकोर्ट ने राज्य की कहानी को बताया गढ़ी हुई

नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत बुधवार को रद्द की।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मंजूर करते हुए कहा कि आकृति की हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई एक 'गढ़ी हुई कहानी' पर आधारित थी। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। पीठ ने आकृति की गिरफ्तारी...

अब CBI करेगी दिशा सालियान मौत मामले की जांच, हाईकोर्ट ने कहा- पर्याप्त सबूत के बिना किसी को आरोपी न बनाया जाए

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा आदेश देते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस रंजितसिंहा भोंसले की खंडपीठ ने दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI को मामले की जांच के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया।हालांकि, हाईकोर्ट ने जांच को लेकर महत्वपूर्ण सावधानी भी बरती। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी को किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त...

S.311 CrPC | सबूत बंद होने के बाद भी गवाह को दोबारा बुला सकती है अदालत, धारा 362 की रोक लागू नहीं होगी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आपराधिक अदालतें दोनों पक्षों की गवाही पूरी होने के बाद भी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 311 के तहत किसी महत्वपूर्ण गवाह को दोबारा बुलाकर उसकी गवाही करा सकती हैं।अदालत ने स्पष्ट किया कि इस शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए यह देखना जरूरी नहीं है कि सबूत बंद हो चुके हैं या नहीं, बल्कि मुख्य सवाल यह है कि संबंधित गवाह की गवाही मामले में न्यायपूर्ण फैसला देने के लिए जरूरी है या नहीं।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि CrPC की धारा 362,...

अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन की सजा को चुनौती, हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने मामले में नॉमिनल रोल तलब करते हुए पुलिस से जवाब मांगा।ताहिर हुसैन की ओर से पेश एडवोकेट राजीव मोहन ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को केवल एक मुख्य अपराध के लिए दोषी ठहराया गया, जबकि अन्य सभी अपराधों में...

भारतीय कानून में ज्वाइंट पेरेंटिंग की कोई मान्यता नहीं, बच्चे का हित माता-पिता के अधिकारों से ऊपर: बॉम्बे हाईकोर्ट

बच्चे की अभिरक्षा और संरक्षकता से जुड़े मामलों में अदालत का मुख्य ध्यान माता-पिता के अधिकारों पर नहीं बल्कि बच्चे के हित और कल्याण पर होना चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय कानून में ज्वाइंट पेरेंटिंग की कोई स्वतंत्र कानूनी मान्यता नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए बांद्रा फैमिली कोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें एक दंपती के 14 वर्षीय बच्चे के लिए दोनों माता-पिता के बीच 50-50 प्रतिशत समय के आधार पर साझा अभिरक्षा की व्यवस्था तय की गई थी।जस्टिस गौरी गोडसे ने कहा कि भारत में बच्चे की...

भगवा गुंडागिरी टिप्पणी पर ABP के पत्रकारों को तत्काल राहत नहीं: हाईकोर्ट ने कहा- पहले FIR रद्द कराने की याचिका दाखिल करें

जादवपुर यूनिवर्सिटी में हिंसा की खबरों के दौरान भगवा गुंडागिरी शब्द के इस्तेमाल को लेकर दर्ज FIR के मामले में आनंदबाजार पत्रिका (ABP) के पत्रकारों को कलकत्ता हाईकोर्ट से बुधवार को तत्काल राहत नहीं मिली।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष रूप से तारीख तय करने से इनकार किया। सीनियर एडवोकेट एस.एन. मुखर्जी ने पत्रकारों की ओर से अदालत में पेश होकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि अखबार में भगवा गुंडागिरी शब्द के इस्तेमाल के बाद पत्रकारों के खिलाफ कई...

सिर्फ़ इसलिए बेटी को अनुकंपा नौकरी देने से मना नहीं किया जा सकता कि पिता की मौत से पहले उसकी शादी हो गई थी: मद्रास हाई कोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मृतक कर्मचारी की बेटी को सिर्फ़ इसलिए 'अनुकंपा नौकरी' देने से मना नहीं किया जा सकता, क्योंकि पिता की मौत की तारीख से पहले उसकी शादी हो गई थी। [2026 LiveLaw (Mad) 419]जस्टिस सी. कुमारप्पन ने कहा कि अधिकारी 'दया के आधार पर नौकरी' देने से मना नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि बेटी की शादी पिता की मौत से पहले हो गई और वह अलग रह रही थी, उसे मृतक पर पूरी तरह से निर्भर नहीं माना जा सकता, ऐसा कहना गलत है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नज़रिया पूरी तरह से...

जॉइंट याचिका में कोर्ट फ़ीस हर याचिकाकर्ता के हिसाब से देनी होगी, न कि हर याचिका के हिसाब से: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जब कई याचिकाकर्ताओं के अलग-अलग मामले (कॉज़ ऑफ़ एक्शन) एक जॉइंट रिट याचिका के ज़रिए उठाए जाते हैं, तो कोर्ट फ़ीस "हर याचिकाकर्ता" के हिसाब से देनी होती है, न कि "हर याचिका" के हिसाब से। कोर्ट ने देखा कि जहां "एक ही" या "कॉमन" मामला (कॉज़ ऑफ़ एक्शन) उठाया जाता है और उससे पूरे ग्रुप को फ़ायदा होता है, वहां एक बार कोर्ट फ़ीस देना ही काफ़ी होता है।जस्टिस संदीप वी. मार्ने एक अंतरिम अर्ज़ी पर विचार कर रहे थे। इस अर्ज़ी में यह घोषणा करने की मांग की गई कि महाराष्ट्र कोर्ट फ़ीस...

देशव्यापी इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम के लिए एकमात्र एजेंसी के तौर पर C-DOT की नियुक्ति सही: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसके तहत 'सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स' (C-DOT) को देशव्यापी 'सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम' लागू करने के लिए एकमात्र एजेंसी नियुक्त किया गया। इस सिस्टम का मकसद आपदाओं और अन्य सार्वजनिक आपात स्थितियों के दौरान लोगों के मोबाइल फ़ोन पर सीधे इमरजेंसी अलर्ट भेजना है।जस्टिस सचिन दत्ता ने 'उटिमाको टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' की याचिका खारिज की। सेल ब्रॉडकास्ट-आधारित प्रोडक्ट्स और सर्विसेज़ देने वाली इस कंपनी ने अक्टूबर 2024 के उस 'ऑफिस...

8 साल तक टैक्स वसूला, फिर बेदखली की कार्रवाई शुरू की: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ छावनी बोर्ड को फटकार लगाई, आदेश रद्द किए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ छावनी (कैंटोनमेंट) में एक प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा करने वालों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई रद्द की। कोर्ट ने कहा कि छावनी बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), जिनके पास एस्टेट ऑफिसर का भी चार्ज था, को पता था कि याचिकाकर्ता प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा किए हुए हैं। इसके बावजूद, बेदखली की कार्रवाई शुरू होने से पहले वे 8 साल तक चुप रहे।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने यह भी पाया कि संबंधित अधिकारी ने स्थापित नियमों के खिलाफ काम किया। कोर्ट ने कहा कि "अधिकारी एक ही समय में दो...

मैटरनिटी लीव की वजह से महिलाओं की नौकरी या प्रमोशन नहीं जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को सुरक्षा उपाय बनाने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मैटरनिटी लीव के दौरान महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा सिर्फ़ नौकरी या वेतन जारी रहने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनका प्रोफेशनल स्टेटस, ज़िम्मेदारियाँ, मैनेजर के तौर पर अधिकार और करियर में आगे बढ़ने के मौके भी शामिल हैं।जस्टिस सचिन दत्ता ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से जुड़ी रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं। वह 'मैनेजर-अकाउंटिंग' के तौर पर मैटरनिटी लीव पर गई थीं और लौटने पर उन्हें ट्रेज़री डिपार्टमेंट में काम सौंप दिया गया, जबकि उनकी पुरानी भूमिका पर...

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया मध्य प्रदेश सरकार को सीनियर एडवोकेट को ₹78 लाख से ज़्यादा फीस देने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि वह सीनियर एडवोकेट अनूप जॉर्ज चौधरी को सुप्रीम कोर्ट में मामले में पेश होने के लिए ₹78,65,000 और उस पर 9% सालाना ब्याज का भुगतान करे। कोर्ट ने राज्य के इस दावा खारिज किया कि सीनियर वकील असल में सिर्फ़ दो बार पेश हुए।जस्टिस सचिन दत्ता ने 'इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहरलाल और अन्य (2020)' मामले में सुप्रीम कोर्ट की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच (संविधान पीठ) की ऑर्डर शीट का हवाला दिया और सीनियर वकील की मौजूदगी को नोट किया।बेंच ने कहा: "इसलिए कार्यवाही...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सॉफ्ट लॉन्च के लिए एक दिन का परमिट न लेने की अनजाने में हुई गलती पर शराब कंपनी के खिलाफ दर्ज एक्साइज़ FIR रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली एक्साइज़ एक्ट, 2009 की धारा 33 के तहत शराब और बेवरेज कंपनी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। कोर्ट ने पाया कि सॉफ्ट लॉन्च पार्टी के लिए एक दिन का शराब परमिट न लेना अनजाने में हुई गलती थी।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने बताया कि 11-12 सितंबर, 2019 की रात को चाणक्यपुरी के होटल अशोका स्थित सोल क्लब में छापेमारी के दौरान बिना वैध लाइसेंस के शराब परोसी जा रही थी। इसके बाद एक्साइज़ एक्ट की धारा 33 के तहत FIR दर्ज की गई।याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे 11, 13 और 14 सितंबर, 2019 के लिए रोज़ाना शराब...

रजिस्टर्ड सेल डीड से भी आदिवासी जमीन का अवैध हस्तांतरण वैध नहीं हो सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 46(1) का उल्लंघन कर किया गया आदिवासी जमीन का हस्तांतरण केवल इस आधार पर वैध नहीं हो सकता कि उसके लिए रजिस्टर्ड सेल डीड तैयार की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून द्वारा प्रतिबंधित लेनदेन को रजिस्टर्ड सेल डीड वैधता प्रदान नहीं कर सकती।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने यह टिप्पणी हजारीबाग के तत्कालीन उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त की ओर से 10 मई 2013 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की। आयुक्त ने...

अगर सांसद पर अंडे फेंके जा रहे हैं तो दूसरों का क्या होगा? महुआ मोइत्रा की सुरक्षा पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त

कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया है कि वह अगले 30 दिनों तक जब भी सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाएं, उनके साथ दो पुलिसकर्मी तैनात करे। अदालत ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से जाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम होना चाहिए।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने यह निर्देश महुआ मोइत्रा की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि निर्वाचन...

बैंक खाते खुलवाने की याचिका में तथ्य छिपाना पड़ा महंगा, इलाहाबाद HC ने लगाया ₹1 लाख जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिग्री कॉलेज के बैंक खातों के संचालन की अनुमति मांगने वाली याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर ₹1 लाख का exemplary cost लगाया। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने कॉलेज चलाने वाली सोसाइटी के लंबे समय से चले आ रहे प्रबंधन विवाद और उससे जुड़ी पिछली कार्यवाहियों के महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने गंभीर प्रबंधन विवाद को केवल बैंक खाते de-freeze कराने के मामले के रूप में पेश करने की कोशिश की।2020 से फ्रीज थे...

नोएडा प्रदर्शन में पत्थरबाजी भड़काने का वीडियो सबूत दिखाए राज्य सरकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिक प्रदर्शन के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में ली गई दिल्ली विश्वविद्यालय की इतिहास स्नातक आकृति चौधरी की भूमिका को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा। अदालत ने पूछा कि आखिर वह कौन सा साक्ष्य है जिससे यह साबित होता है कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाया था।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ मंगलवार को आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका...