हाईकोर्ट
चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़: कर्नाटक क्राउड कंट्रोल बिल 2025 कंसल्टेशन के लिए भेजा गया, हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान वाली PIL बंद की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान वाली PIL बंद की। यह घटना 2025 IPL फाइनल में रॉयल चैलेंजर बैंगलोर (RCB) की जीत का जश्न मनाने के लिए एक इवेंट से पहले हुई। कोर्ट को बताया गया कि क्राउड कंट्रोल की देखरेख करने वाला एक बिल स्टेट असेंबली ने कंसल्टेशन के लिए भेजा है।बता दें, हाईकोर्ट ने पिछले साल इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया और कर्नाटक सरकार से इस हादसे की वजह का पता लगाने और भविष्य में इसे कैसे रोका जाए, यह बताने को कहा था। बता दें, बेंगलुरु...
Breaking | केरल हाईकोर्ट ने 'द केरल स्टोरी 2' मूवी की रिलीज़ पर लगी रोक हटाई, सिंगल बेंच के ऑर्डर पर रोक
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (27 फरवरी) को मूवी 'द केरल स्टोरी 2 - गोज़ बियॉन्ड' की रिलीज़ का रास्ता साफ़ किया।जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन की डिवीज़न बेंच ने सिंगल जज के उस ऑर्डर पर रोक लगाई, जिसमें होने वाली इसकी रिलीज़ पर रोक लगा दी गई और केस दो हफ़्ते बाद पोस्ट किया गया।कोर्ट ने यह ऑर्डर प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह की रिट अपील में दिया, जो सिंगल जज के उस कॉमन ऑर्डर के खिलाफ़ थीं, जिसमें मूवी की रिलीज़ पर 15 दिनों के लिए रोक लगाई गई।सिंगल जज ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़...
कॉर्डेलिया क्रूज़ ड्रग्स मामले में समीर वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्रवाई रद्द करने वाला CAT आदेश दिल्ली हाई कोर्ट ने पलटा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज़ ड्रग बस्ट मामले में IRS अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्यवाही रद्द करने के केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को निरस्त कर दिया।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए 19 जनवरी को पारित ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया। निर्णय सुनाते हुए अदालत ने कहा, “याचिका स्वीकार की जाती है।”CAT ने अपने आदेश में वानखेड़े को जारी आरोपपत्र (चार्ज मेमोरेंडम) को निरस्त...
कम दंड और घटता भय कानून उल्लंघन की वजह: दंडात्मक प्रावधानों का सख्ती से पालन जरूरी- बॉम्बे हाइकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि देश में कानूनों के बार-बार उल्लंघन का एक प्रमुख कारण उनका कम निवारक प्रभाव और कानून का घटता भय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंडात्मक प्रावधानों को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं बल्कि प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।सिंगल बेंच जज जस्टिस जितेंद्र जैन ने 17 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि दंडात्मक प्रावधानों का दोहरा उद्देश्य होता है पहला, दोषी को दंडित करना और दूसरा, दूसरों को कानून तोड़ने से रोकना।अदालत ने कहा,“दंडात्मक प्रावधानों का दोहरा प्रभाव होता है एक, अपराधी या...
EPF Act: बकाया की 25% से कम नहीं हो सकती विलंब दंड राशि- कर्नाटक हाइकोर्ट
कर्नाटक हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि कर्मचारी भविष्य निधि अंशदान के भुगतान में देरी पर लगाया गया दंड बकाया राशि के 25 प्रतिशत से कम नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस सिद्धांत को लागू करते हुए केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण के उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें तीन लाख रुपये से अधिक की दंड राशि को घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया।मामला उस आदेश से संबंधित है जिसमें 5 दिसंबर 2016 को सहायक भविष्य निधि आयुक्त ने कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम (EPF Act) की धारा 14बी के तहत एक...
CrPC की धारा 469 : सीमा अवधि पुलिस अधिकारी की जानकारी की तिथि से शुरू, FIR की तारीख से नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 469 के तहत सीमा अवधि उस दिन से प्रारंभ होती है, जब पुलिस अधिकारी को अपराध की जानकारी प्राप्त होती है, न कि उस बाद की तारीख से जब औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज की जाती है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इसी सिद्धांत को लागू करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर आरोपपत्र को सीमा अवधि से परे मानते हुए निरस्त किया।मामला एक लोकसेवक के विरुद्ध निजी व्यवसाय चलाने के आरोप में CBI द्वारा शुरू किए गए...
आत्महत्या की धमकी देकर साथ चलने को मजबूर करना अपहरण: बॉम्बे हाइकोर्ट की गोवा पीठ ने दोषसिद्धि बरकरार रखी
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी नाबालिग लड़की को यह कहकर साथ चलने के लिए मजबूर करे कि अन्यथा वह आत्महत्या कर लेगा, तो यह प्रलोभन की श्रेणी में आएगा और ऐसे हालात में अपहरण का अपराध बनता है।सिंगल बेंच जज जस्टिस श्रीराम शिरसाट ने 16 फरवरी को दिए गए निर्णय में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 (अपहरण) और धारा 376 (बलात्कार) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।अदालत के समक्ष पीड़िता ने अपने बयान में...
मृत्यु से पहले दिया गया बयान मेडिकल प्रमाणन नहीं, दोषसिद्धि असुरक्षित: राजस्थान हाइकोर्ट ने पत्नी को जलाने के आरोप में दोषी ठहराए व्यक्ति को बरी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि मृत्यु मृत्यु से पहले दिया गया बयान मेडिकल प्रमाणन नहीं हो कि कथन देने वाला व्यक्ति होश में सजग और मानसिक रूप से सक्षम था तो केवल ऐसे कथन के आधार पर दोषसिद्धि सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने पत्नी को कथित रूप से आग लगाकर हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया।खंडपीठ के जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा ने यह भी पाया कि कथित मृत्यु पूर्व कथन के समय मृतका की नाड़ी, ब्लड प्रेशर अथवा जलने...
मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम को मुकदमे का हथियार नहीं बनाया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट ने पिता की मानसिक जांच की मांग ठुकराई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की धारा 105 का उपयोग किसी पक्षकार के विरुद्ध मुकदमेबाजी में रणनीतिक हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता। अदालत ने एक याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह प्रावधान मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए है न कि प्रतिद्वंद्वी पक्ष को परेशान करने के लिए।सिंगल जज जस्टिस फरहान दुबाश ने 17 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को उसके विरोधी द्वारा चुनौती दिए जाने मात्र पर...
क्या शुरुआती पढ़ाई के दौरान फीस न देने पर किसी स्टूडेंट को स्कूल से निकाला जा सकता है? बॉम्बे हाईकोर्ट का जवाब
वर्तमान समय में पढ़ाई की अहमियत पर ज़ोर देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक 13 साल की लड़की की मदद की, जिसे फीस न देने पर उसके स्कूल से निकाल दिया गया था।नागपुर सीट पर बैठे जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोडे की डिवीजन बेंच ने बच्चों के फ्री और ज़रूरी शिक्षा के अधिकार एक्ट, 2009 के तहत स्कूल के काम को 'गैर-कानूनी और मनमाना' माना। इसलिए भंडारा ज़िले के फादर एग्नेल स्कूल को क्लास 7वीं में लड़की को फिर से एडमिशन देने का आदेश दिया और स्टूडेंट के माता-पिता को दो हफ़्ते के अंदर 23,900 रुपये...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नवरात्रि-ईद की पूर्व संध्या पर 'मवेशी काटने' के मामले में NSA के तहत आरोपियों की डिटेंशन बरकरार रखी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA), 1980 के तहत 3 लोगों की हिरासत बरकरार रखी, जिन पर मार्च 2025 में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन, जो ईद का दिन भी था, जालौन के कालपी शहर में गैर-कानूनी तरीके से मवेशियों को काटने का आरोप है।जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस देवेंद्र सिंह-I की बेंच ने कहा कि यह कथित काम, जो हमारे जैसे प्राचीन और विविधता वाले देश में बड़े धार्मिक त्योहारों के मौके पर हुआ, सिर्फ "लॉ एंड ऑर्डर" की समस्या नहीं है और यह पूरी तरह से "पब्लिक ऑर्डर" के दायरे में आता...
'हज़ारों अपील 20-30 साल से पेंडिंग': राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- जहां जल्दी सुनवाई की उम्मीद कम, वहां सज़ा सस्पेंड करने पर विचार किया जाना चाहिए
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अपील कोर्ट को सज़ा सस्पेंड करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल उन मामलों में ज़्यादा सावधानी से करना चाहिए, जहां उसे लगता है कि क्रिमिनल अपील पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि अगर अपील आखिरकार सफल हो जाती है तो काटी गई जेल की सज़ा को वापस नहीं किया जा सकता है।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट में हज़ारों क्रिमिनल अपील 20-30 साल से पेंडिंग हैं, जिनमें जल्दी सुनवाई की कोई उम्मीद नहीं है।उन्होंने कहा,"हाईकोर्ट में पिछले 20-30 सालों से हज़ारों क्रिमिनल...
मासिक धर्म स्वास्थ्य को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता
"मासिक धर्म से जुड़े कलंक को खत्म किया जाना चाहिए, न कि उसके कारण एक लड़की की शिक्षा को।" जब सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी, 2026 को ये पंक्तियां कहीं, तो यह सिर्फ भव्य बयानबाजी नहीं थी, इसने भारतीय कानून में भूकंप के क्षण को चिह्नित किया। उस फैसले, डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत संघ, ने केवल नीति को ही नहीं बढ़ाया; इसने नक्शे को पूरी तरह से फिर से बदल दिया। स्पष्ट शब्दों में, न्यायालय ने मासिक धर्म स्वास्थ्य और मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) तक सार्थक पहुंच को शैक्षिक सेटिंग्स के अंदर ही अनुच्छेद 21...
लिमिटेशन बचाने के लिए ऑब्जेक्शन के तहत याचिका लटकाए रखना 'सही नहीं': दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन फाइल करने में 281 दिन की देरी को माफ करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि कोई लिटिगेंट याचिका को महीनों तक ऑब्जेक्शन के तहत रहने देने और बाद में टेक्निकल ग्राउंड पर उसे वापस लेने के बाद पहले फाइल करने की तारीख का फायदा नहीं उठा सकता।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन पर विचार कर रही थीं, जो ट्रायल कोर्ट के उस ऑर्डर के खिलाफ फाइल की गई, जिसमें जालसाजी के एक केस में आरोपी को समन भेजने को रद्द कर दिया गया।रिकॉर्ड से पता चला कि याचिकाकर्ता ने...
'सुपीरियर कोर्ट्स पर ऑनलाइन गालियां हद पार करती हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेटिज़न्स को सख्त कंटेम्प्ट एक्शन की चेतावनी दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में सोशल मीडिया यूज़र्स को ज्यूडिशियरी पर ऑनलाइन गालियां न देने की चेतावनी दी, जो फेयर कमेंट या किसी फैसले की सोची-समझी आलोचना के बचाव से आगे जाती हैं।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने कहा कि अगर कोर्ट कंटेम्प्ट जूरिस्डिक्शन में ऐसे पोस्ट पर संज्ञान लेता है तो इसके सख्त कानूनी नतीजे होंगे।कोर्ट ने कहा,"हम लोगों को भविष्य में सावधान रहने की याद दिलाना चाहते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर ऐसे शब्द सर्कुलेट होते हैं, जो बहुत साफ तौर पर अपमानजनक...
'विभाजनकारी प्रवृत्ति' : मुसलमानों के खिलाफ कथित हेट स्पीच पर असम सीएम को हाईकोर्ट का नोटिस
गौहाटी हाईकोर्ट ने गुरुवार (26 फरवरी) को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध कथित घृणास्पद भाषण (हेट स्पीच) देने से रोकने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) और दो संबद्ध मामलों पर नोटिस जारी किया।चीफ़ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, असम राज्य, डीजीपी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को नोटिस जारी किया। अदालत ने अंतरिम राहत की मांग पर भी नोटिस दिया और मामले को बिहू अवकाश के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।PIL में क्या...
Honour Killing Double Murder Case | 'अपराध लोगों की सोच पर चोट करता है': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ज़मानत देने से किया इनकार
यह देखते हुए कि "इस तरह के अपराध पब्लिक ऑर्डर और समाज की सोच पर चोट करते हैं," पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 2021 के एक डबल मर्डर केस में आरोपी को स्थायी ज़मानत देने से मना कर दिया, जो कथित तौर पर ऑनर किलिंग से जुड़ा है।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि ऐसे मामलों में ज़मानत देने से न केवल अपराध की गंभीरता कम होगी, बल्कि आरोपी का हौसला भी बढ़ेगा।यह मामला पंजाब के मोगा में IPC की धारा 302, 452, 364, 148 और 149 के तहत दर्ज FIR से जुड़ा है।अभियोजन पक्ष के केस के अनुसार, मृतक रोहताश सिंह ने सुमन के...
नाबालिग की अभिरक्षा को लेकर माता-पिता के बीच विवाद में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका ग्राह्य नहीं: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने एक पिता द्वारा अपनी नाबालिग पुत्री की पेशी और अभिरक्षा की मांग को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि माता-पिता के बीच अभिरक्षा विवाद की स्थिति में उचित उपाय सक्षम अभिभावक न्यायालय के समक्ष ही उपलब्ध है।चीफ जस्टिस जी. एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने कहा कि जब नाबालिग का ठिकाना स्पष्ट रूप से ज्ञात हो, तो उस स्थान पर अधिकार क्षेत्र रखने वाले न्यायालय से ही राहत मांगी जानी चाहिए।याचिकाकर्ता -पिता ने बंदी...
स्कूल परिसर में तंबाकू बेचने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी बरकरार, हाइकोर्ट ने खारिज की याचिका
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल के एक चपरासी की सेवा समाप्ति को सही ठहराते हुए उसकी याचिका खारिज की।कर्मचारी पर स्कूल परिसर के भीतर तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी और गुटखा बेचने का आरोप है।जस्टिस आनंद सिंह बहारावत की पीठ ने कहा,“याचिकाकर्ता की सेवाएं गंभीर आरोपों के कारण समाप्त की गईं। राज्य और केंद्र सरकार ने स्कूल परिसरों के निर्धारित क्षेत्रों में ऐसे पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश और नियम बनाए हैं।”मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने दलील दी कि 28 वर्ष की सेवा के बाद उसे...
एमपी मेडिकल एडमिशन नियम 2018 | PG अभ्यर्थी ने NRI कोटा को स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक बढ़ाने की मांग को लेकर खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
PG मेडिकल कोर्स में NRI कोटा के तहत एडमिशन चाहने वाले एक अभ्यर्थी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एम.पी. मेडिकल एजुकेशन एडमिशन रूल्स, 2018 के नियम 14(2) की वैधता को चुनौती दी।याचिका विशेष रूप से उस प्रावधान के खिलाफ है, जिसके तहत तीसरे काउंसलिंग राउंड के बाद रिक्त NRI सीटों को अन्य श्रेणी में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई।याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसी सीटों को स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक NRI अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की...




















