हाईकोर्ट

साइबर ठगी में फंसे कारोबारी को राहत: बॉम्बे हाईकोर्ट ने HDFC बैंक को ₹38.04 लाख लौटाने का दिया आदेश
साइबर ठगी में फंसे कारोबारी को राहत: बॉम्बे हाईकोर्ट ने HDFC बैंक को ₹38.04 लाख लौटाने का दिया आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए HDFC बैंक को निर्देश दिया कि वह पुणे के कारोबारी को 38.04 लाख रुपये वापस करे। अदालत ने कहा कि ग्राहक की कोई गलती नहीं पाई गई और वह “शून्य देयता” के सिद्धांत का लाभ पाने का हकदार है।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने यह आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी सिम स्वैपिंग/क्लोनिंग के जरिए की गई, जिसमें ग्राहक की कोई भूमिका नहीं थी।मामले के अनुसार, 14 सितंबर 2021 को कारोबारी के खाते में तीन अज्ञात लोगों को...

प्रेम संबंध में विवाह कर संतान होने पर किशोरों को परेशान नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO FIR रद्द की
प्रेम संबंध में विवाह कर संतान होने पर किशोरों को परेशान नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO FIR रद्द की

बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि प्रेम संबंध में जुड़े दो किशोर यदि विवाह कर लेते हैं और उनके संबंध से संतान जन्म लेती है तो ऐसे मामलों में पोक्सो कानून और बाल विवाह निषेध कानून के तहत उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।औरंगाबाद पीठ में जस्टिस संतोष चपलगांवकर ने राहुल सुरुषे के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। यह FIR लड़की के पिता की शिकायत पर दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि युवक ने उनकी नाबालिग बेटी से संबंध बनाकर विवाह किया।अदालत ने पाया कि घटना के...

पीड़िता की गवाही पर भरोसा कायम, मां का बयान न होना घातक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1984 दुष्कर्म मामले में सजा बरकरार रखी
पीड़िता की गवाही पर भरोसा कायम, मां का बयान न होना घातक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1984 दुष्कर्म मामले में सजा बरकरार रखी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 1984 के दुष्कर्म मामले में आरोपी की सजा बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय और अटूट है, तो अन्य गवाहों के बयान न होने से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं होता।जस्टिस मनोज बजाज की पीठ ने आजमगढ़ के एडिशनल सेशन कोर्ट के वर्ष 1986 के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की अपील खारिज की। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत दोषी मानते हुए 7 साल की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।मामले के अनुसार, 7 अक्टूबर 1984 को 15 वर्ष से...

राणा अय्यूब के ट्वीट नहीं हटाने पर X को झटका, सुरक्षित छूट हो सकती है खत्म: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
राणा अय्यूब के ट्वीट नहीं हटाने पर X को झटका, सुरक्षित छूट हो सकती है खत्म: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा

दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने बड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पत्रकार राणा अय्यूब के कथित आपत्तिजनक ट्वीट्स को न हटाने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' अपनी सेफ हार्बर यानी कानूनी संरक्षण खो सकता है। केंद्र ने अदालत को बताया कि न्यायिक आदेश और पुलिस नोटिस के बावजूद सामग्री न हटाना कानून के उल्लंघन के समान है।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव के समक्ष दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा कि जब किसी मंच को अवैध सामग्री की वास्तविक जानकारी मिल जाती है तब उसे तुरंत कार्रवाई करनी होती है। ऐसा न करना नियमों के...

सिर्फ दुर्व्यवहार से नहीं बनता SC-ST Act का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने DU प्रोफेसर के खिलाफ FIR रद्द की
सिर्फ दुर्व्यवहार से नहीं बनता SC-ST Act का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने DU प्रोफेसर के खिलाफ FIR रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि केवल किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार करना अपने आप में SC-ST अत्याचार निवारण कानून के तहत अपराध नहीं बनता। इसके लिए यह साबित होना आवश्यक है कि आरोपी ने जाति के आधार पर अपमान करने की मंशा से कार्य किया हो।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा,“SC-ST कानून की धारा 3 के तहत अपराध तभी बनता है जब यह स्पष्ट हो कि कथित कृत्य पीड़ित को उसकी जाति के कारण अपमानित करने की मंशा से किया गया हो। केवल यह पर्याप्त नहीं है कि शिकायतकर्ता अनुसूचित...

अतिक्रमणकारियों को सार्वजनिक हित के आगे झुकना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण को दी मंजूरी
अतिक्रमणकारियों को सार्वजनिक हित के आगे झुकना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण को दी मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण के लिए महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने वालों के निजी हित, बड़े सार्वजनिक हित के सामने टिक नहीं सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सड़क का विस्तार जरूरी है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने 30 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना को मंजूरी देते हुए कहा कि अस्पताल, स्कूल और आपातकालीन सेवाओं तक सुगम पहुंच के लिए इस परियोजना में देरी नहीं की जा सकती।अदालत...

फंड संभालने वाले कर्मचारियों पर भरोसा टूटे तो बर्खास्तगी जायज: दिल्ली हाईकोर्ट
फंड संभालने वाले कर्मचारियों पर भरोसा टूटे तो बर्खास्तगी जायज: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि “लॉस ऑफ कॉन्फिडेंस” (विश्वास का समाप्त होना) का सिद्धांत उन मामलों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, जहां कर्मचारी को वित्तीय जिम्मेदारियां सौंपी गई हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वित्तीय अनियमितताओं जैसे सिद्ध कदाचार से विश्वास टूट जाता है, तो नियोक्ता को उस कर्मचारी को बनाए रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।जस्टिस शैल जैन ने कहा:“जहां कर्मचारी वित्तीय कार्यों में संलग्न होता है, वहां विश्वास का महत्व अधिक होता है। एक बार यह विश्वास टूट जाए, तो नियोक्ता को...

कांतारा मिमिक्री विवाद: एक्टर रणवीर सिंह माफी हलफनामे में करेंगे संशोधन, कर्नाटक हाइकोर्ट में दिया आश्वासन
कांतारा मिमिक्री विवाद: एक्टर रणवीर सिंह माफी हलफनामे में करेंगे संशोधन, कर्नाटक हाइकोर्ट में दिया आश्वासन

कर्नाटक हाइकोर्ट में चल रहे 'कांतारा' मिमिक्री विवाद मामले में एक्टर रणवीर सिंह ने अदालत को बताया कि वह अपने माफी के हलफनामे की भाषा को संशोधित करेंगे। उन्होंने कहा कि वह शिकायतकर्ता के साथ बैठकर ऐसा मसौदा तैयार करेंगे, जिससे वास्तविक खेद स्पष्ट रूप से व्यक्त हो सके।जस्टिस एम नागप्रसन्ना के समक्ष सुनवाई के दौरान एक्टर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट साजन पूवय्या ने कहा कि माफी का हलफनामा पहले ही दाखिल किया जा चुका है और उसमें मंदिर जाकर प्रार्थना करने का भी उल्लेख है।हालांकि, शिकायतकर्ता के वकील ने...

सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार, 15 दिन में जवाब दें: कलकत्ता हाईकोर्ट का सख्त निर्देश
सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार, 15 दिन में जवाब दें: कलकत्ता हाईकोर्ट का सख्त निर्देश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार (RTI) संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) से उत्पन्न मौलिक अधिकार है और इसमें देरी स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने पश्चिम बंगाल सूचना आयोग के राज्य लोक सूचना अधिकारी को लंबित आरटीआई आवेदन का निपटारा 15 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया।जस्टिस राय चट्टोपाध्याय इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता ने वर्ष 2018 में मांगी गई जानकारी समय पर न मिलने और सूचना आयोग की कार्यवाही को चुनौती दी थी।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“सूचना का...

असम सीएम की पत्नी के पासपोर्ट पर विवाद: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली 1 हफ़्ते की अग्रिम जमानत, संबंधित कोर्ट में जाने की अनुमति
असम सीएम की पत्नी के पासपोर्ट पर विवाद: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली 1 हफ़्ते की अग्रिम जमानत, संबंधित कोर्ट में जाने की अनुमति

तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को एक हफ़्ते की अग्रिम ज़मानत दी। यह ज़मानत असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई FIR के सिलसिले में दी गई, जिसमें उन पर कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए।जस्टिस के. सुजाना ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा,"याचिकाकर्ता को संबंधित कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल करने के लिए एक हफ़्ते का समय दिया जाता है... याचिकाकर्ता को शर्तों के साथ एक हफ़्ते की राहत दी जाती है।" अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी हैदराबाद...

फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन NDPS Act के तहत नहीं: पटना हाईकोर्ट ने तीन दोषियों की सजा रोकी
फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन NDPS Act के तहत नहीं: पटना हाईकोर्ट ने तीन दोषियों की सजा रोकी

पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन जैसे पदार्थ मादक या मनोप्रभावी पदार्थों की श्रेणी में नहीं आते। इनके आधार पर NDPS Act के तहत सजा देना प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता। अदालत ने इसी आधार पर तीन दोषियों की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें अपील लंबित रहने तक जमानत देने का आदेश दिया।यह मामला उन तीन आरोपियों से जुड़ा है, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने NDPS Act की धारा 21(ग) के तहत दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष की सजा और डेढ़ लाख रुपये जुर्माना लगाया। आरोप है कि उनके पास से भारी...

गलत कानून के तहत की गई नियुक्तियां रद्द, प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन बर्खास्तगी में दखल देने का आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
गलत कानून के तहत की गई नियुक्तियां रद्द, प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन बर्खास्तगी में दखल देने का आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी ऐसे कानून के तहत की गई नियुक्तियां, जो उस संस्थान पर लागू नहीं होता—वे रद्द मानी जाएंगी। ऐसे कर्मचारियों की बर्खास्तगी के आदेशों को केवल इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता कि आदेश में बर्खास्तगी के कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।यह देखते हुए कि नियुक्तियाँ संस्थान पर लागू होने वाले कानूनी प्रावधानों के तहत नहीं की गईं, जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा:“ऐसी परिस्थितियों में भले ही अधिकार क्षेत्र की कमी और विवादित आदेश के कारणों का स्पष्ट उल्लेख न होने...

डीएम ने बंद किए अमर उजाला को सरकारी विज्ञापन, हाईकोर्ट ने कहा- तानाशाही आदेश चौथे स्तंभ की स्वायत्तता पर चोट करते हैं
डीएम ने बंद किए 'अमर उजाला' को सरकारी विज्ञापन, हाईकोर्ट ने कहा- 'तानाशाही आदेश चौथे स्तंभ की स्वायत्तता पर चोट करते हैं'

'अमर उजाला' अखबार को राहत देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में संभल के ज़िलाधिकारी (DM) को निर्देश दिया कि वह इस मामले में 'व्यावहारिक' दृष्टिकोण अपनाएं, जिसमें अखबार ने आरोप लगाया था कि उन्हें सरकारी विज्ञापन नहीं दिए जा रहे हैं।'अमर उजाला' का पक्ष यह था कि संबंधित डीएम ने एक गुरुद्वारा विवाद से जुड़ी खबर के आधार पर आदेश पारित किया था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने बाद में स्पष्टीकरण (Corrigendum) प्रकाशित करके अपना पक्ष साफ कर दिया था, फिर भी आदेश पारित कर दिया गया, जिसके बाद उन्हें सरकारी...

NEET-PG: राजस्थान हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव पर मौजूद डॉक्टर को अंतरिम राहत दी, जॉइनिंग की डेडलाइन को लेकर होने वाली कार्रवाई पर लगाई रोक
NEET-PG: राजस्थान हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव पर मौजूद डॉक्टर को अंतरिम राहत दी, जॉइनिंग की डेडलाइन को लेकर होने वाली कार्रवाई पर लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने डॉक्टर को अंतरिम राहत दी। इस डॉक्टर को NEET PG पास करने के बाद कॉलेज अलॉट किया गया था, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद पोस्ट-पार्टम (प्रसव के बाद की स्थिति) में होने के कारण कॉलेज में जॉइन करने की तारीख बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को दिया गया उनका आवेदन खारिज कर दिया गया।राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ़्ते का समय देते हुए जस्टिस अनूरूप सिंघी की बेंच ने याचिकाकर्ता को उनकी आधिकारिक तौर पर अलॉट की गई मैटरनिटी लीव जारी रखने की अनुमति दी, और राज्य सरकार को उनके खिलाफ कोई भी...

एसिड हमले एक अलग ही श्रेणी के होते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से इनकार किया, रिपोर्ट में देरी पर पुलिस को फटकारा
'एसिड हमले एक अलग ही श्रेणी के होते हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से इनकार किया, रिपोर्ट में देरी पर पुलिस को फटकारा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जिन मामलों में एसिड का इस्तेमाल हमले के हथियार के तौर पर किया जाता है, वे अपराध में इस्तेमाल हथियार की प्रकृति के कारण 'एक अलग ही श्रेणी' के होते हैं।गहन जांच की ज़रूरत को देखते हुए जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने रिट याचिका खारिज की। इस याचिका में संपत्ति विवाद को लेकर किए गए सुनियोजित एसिड हमले से जुड़ी FIR को रद्द करने की मांग की गई।मामले के खास तथ्यों से परे हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस विभाग के प्रति अपनी "गहरी नाराज़गी" भी ज़ाहिर...

अदालतें असली और मनगढ़ंत मामलों में फ़र्क करें, जहां लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा हो: बॉम्बे हाईकोर्ट ने MCOCA आरोपी को ज़मानत देने से किया इनकार
अदालतें 'असली' और 'मनगढ़ंत' मामलों में फ़र्क करें, जहां लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा हो: बॉम्बे हाईकोर्ट ने MCOCA आरोपी को ज़मानत देने से किया इनकार

महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) 1999 के तहत आरोपी द्वारा किए गए 'सोची-समझी' कोशिश को देखते हुए, ताकि मुक़दमा शुरू ही न हो, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात पर ज़ोर दिया कि अदालतों को 'लंबे समय तक जेल में रहने' के 'असली' मामलों और 'मनगढ़ंत' मामलों के बीच फ़र्क करना चाहिए; ऐसे मामलों में मुक़दमे में देरी का कारण आरोपी ही होता है।सिंगल जज जस्टिस रवींद्र जोशी ने रंगदारी के मामले में आरोपी द्वारा दायर ज़मानत याचिका पर फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि उनके सामने पेश आवेदक विक्रम भुतेकर ने...