हाईकोर्ट
पूर्ण अवमानना: सीनियर सिटीजन की सुरक्षा योजना पर हाइकोर्ट ने यूपी सरकार को फटकारा, अफसरों को दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा अदालत के आदेश के अनुपालन में हलफनामा दाखिल न करने पर कड़ी नाराजगी जताई।अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों के प्रति “पूर्ण अवमानना” करार देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि आदेशों की अवहेलना पर अफसरों को दंडात्मक कार्यवाही यहां तक कि अवमानना का सामना करना पड़ेगा।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा गया कि क्या माता-पिता एवं सीनियर सिटीजन भरण-पोषण एवं...
न्यायिक हत्या: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्वामित्व विवाद में वादी को अवैध लाभ पहुंचाने पर ट्रायल जज के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने संपत्ति स्वामित्व विवाद में ट्रायल कोर्ट जज के आचरण पर गहरा आघात व्यक्त करते हुए उसे “दिनदहाड़े न्यायिक हत्या” करार दिया। अदालत ने पाया कि ट्रायल जज ने एक मृतका के मृत्यु प्रमाणपत्र की छायाप्रति को नजरअंदाज कर वादी को अनुचित और अवैध लाभ पहुंचाया।जस्टिस संदीप जैन ने कहा,“सुशीला मेहरा के मृत्यु प्रमाणपत्र की उपेक्षा करने के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया कारण चौंकाने वाला, विकृत और बाहरी कारणों से प्रेरित प्रतीत होता है। वादी को अवैध लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इसे जानबूझकर...
मात्र पेशे से संबोधित करना SC/ST Act के तहत अपराध नहीं, अपमान की मंशा जरूरी: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को उसके पेशे के आधार पर पुकारना मात्र से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत अपराध नहीं बनता, जब तक यह सिद्ध न हो कि ऐसे शब्द जानबूझकर उस समुदाय से संबंधित व्यक्ति को अपमानित करने की मंशा से कहे गए।जस्टिस अनिल कुमार-एक्स की पीठ ने गौतम बुद्ध नगर में SC/ST Act के विशेष जज द्वारा अगस्त 2024 में पारित समन आदेश को चुनौती देने वाली आपराधिक अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की।अपीलकर्ता को भारतीय...
दिव्यांग कर्मचारी की सुलभ आवास की मांग पर पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने याचिका को जनहित याचिका माना
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार की। याचिकाकर्ता ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुरूप संरचनात्मक रूप से उपयुक्त और आवश्यक सुलभता संशोधनों वाले आवास के आवंटन की मांग की।याचिकाकर्ता स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। उन्हें दाहिने पैर में स्थायी दिव्यांगता है, जिसमें अंग का क्षीण होना और छोटा होना दाहिनी ओर की मांसपेशियों का पक्षाघात तथा कूल्हे और घुटने के जोड़ों में विकृति शामिल है। उन्हें दाहिने पैर...
अगर जजों ने अपनी ड्यूटी ठीक से की होती तो NCERT टेक्स्टबुक का मामला नहीं होता: सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल
सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने हाल ही में कहा कि NCERT का 'ज्यूडिशियरी में करप्शन' वाला चैप्टर इंस्टीट्यूशन के तौर पर ज्यूडिशियरी को चुनकर टारगेट करने का मामला है। उन्होंने आगे कहा कि युवाओं को समाज में करप्शन के बारे में सिखाना ज़रूरी है, लेकिन सिर्फ़ ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन को हाईलाइट करने से उन्हें लगेगा कि न्याय से कॉम्प्रोमाइज़ किया जा रहा है।साथ ही सिब्बल ने कहा कि इस तरह की बातों के लिए जज ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे कॉन्स्टिट्यूशनल मोरैलिटी के हिसाब से अपनी ड्यूटी निभाने में फेल रहे...
मजिस्ट्रेट का न्यायिक काम करना डीएम, एसपी और राजनीतिक मुखिया से ऊपर, उनके आदेशों की अनदेखी करना 'माफ़ करने लायक नहीं': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक न्यायिक अधिकारी अपना न्यायिक काम करते हुए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या डिस्ट्रिक्ट पुलिस चीफ और यहां तक कि किसी राज्य के राजनीतिक मुखिया से भी ऊपर होता है, और उनके आदेश की अनदेखी करना 'माफ़ करने लायक नहीं' है।कोर्ट ने आगे कहा कि न्यायिक अधिकारी द्वारा दिए गए आदेशों की इस तरह अनदेखी न केवल कोर्ट की अवमानना है, बल्कि कानून के अधिकार को सीधी चुनौती है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने ललितपुर में एक चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेशों की...
क्या मौत के मुंह में जा रहे लोगों को इंश्योरेंस पॉलिसी दी जा रही हैं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश दिए, HDFC लाइफ के अधिकारी के खिलाफ वारंट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में बिचौलियों के ज़रिए "मौत के मुंह में जा रहे" लोगों को लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करने के ट्रेंड को गंभीरता से लिया।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कोर्ट के साथ 'लुका-छिपी' खेलने के लिए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM), मुरादाबाद के ज़रिए HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, मुरादाबाद के ऑपरेशन मैनेजर और ब्रांच हेड के खिलाफ बेलेबल वारंट भी जारी किया।बेंच ने यह आदेश नवाब अली उर्फ नवाबुद्दीन नाम के एक व्यक्ति की बेल अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया, जिस पर BNS...
'बिना शादी के बेटी का प्रेग्नेंट होना आम भारतीय के लिए एक बुरा सपना': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डबल मर्डर केस में माता-पिता की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी
इस बात का 'ज्यूडिशियल नोटिस' लेते हुए कि एक आम भारतीय के लिए शादी के बिना बेटी का प्रेग्नेंट होना एक 'बुरा सपना' है, जिससे माता-पिता 'बेकाबू' रिएक्शन देते हैं, जो ज़्यादातर हिंसक होते हैं, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक कपल की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी, जिन्हें अपनी नाबालिग बेटी और अपने 28 साल के किराएदार की हत्या का दोषी पाया गया।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने पति-पत्नी की क्रिमिनल अपील खारिज की, जिन्होंने अपनी 15 साल की बेटी और अपने किराएदार, जिसके साथ उसका...
नई डीम्ड कन्वेयन्स याचिका मेरिट के आधार पर पहले खारिज होने के बाद सुनवाई योग्य नहीं, क्वासी-ज्यूडिशियल अथॉरिटीज़ रेस जुडिकाटा से बंधी हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि एक बार जब एक क्वासी-ज्यूडिशियल अथॉरिटी ने डीम्ड कन्वेयन्स के लिए किसी एप्लीकेशन पर मेरिट के आधार पर फैसला कर लिया और नई एप्लीकेशन फाइल करने की छूट दिए बिना उसे खारिज किया तो वह बाद में उसी मुद्दे पर सिर्फ इसलिए अलग राय नहीं ले सकती, क्योंकि नई एप्लीकेशन बदले हुए रूप में पेश की गई।कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से फाइनलिटी के सिद्धांत को नुकसान होगा, क्योंकि हर असफल एप्लीकेंट बस मेज़रमेंट बदल सकता है या राहत को फिर से तय कर सकता है और अथॉरिटी को उसी मुद्दे पर फिर से फैसला...
किसी महिला को देखकर 'गली में आज चांद निकला' कहना अश्लील या सेक्शुअली नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम के एक रहने वाले के खिलाफ हाउसिंग सोसाइटी ग्रुप में किए गए WhatsApp कमेंट को लेकर दर्ज FIR रद्द की। कोर्ट ने कहा कि यह कमेंट, हालांकि "अच्छे टेस्ट में नहीं" है, लेकिन इंडियन पैनल कोड (IPC) के तहत अश्लीलता, सेक्शुअल हैरेसमेंट या शर्मिंदगी का अपमान नहीं है।कमेंट किया गया था,"जाने कितने दिनों के बाद सोसाइटी में अब चांद निकला।" जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने कहा,"IPC की धारा 294 के तहत दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल किए गए शब्द ऐसे होने चाहिए, जो उस व्यक्ति के मन...
प्रशिक्षण पूरा किए बिना असम राइफल्स से मुक्त होने पर बहाली का अधिकार नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जिस अभ्यर्थी ने न तो अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया हो और न ही असम राइफल्स अधिनियम, 2006 के तहत औपचारिक रूप से बल का सदस्य बना हो उसे सेवा में पुनर्बहाली का अधिकार प्राप्त नहीं है, विशेषकर तब जब उसने स्वयं लिखित आवेदन और शपथपत्र देकर सेवा से मुक्त होने का अनुरोध किया हो।जस्टिस उन्नी कृष्णन नायर और जस्टिस यारेनजुंगला लोंगकुमेर की खंडपीठ ने एकलपीठ के निर्णय को बरकरार रखते हुए अभ्यर्थी की अपील खारिज की।मामले के अनुसार, कर्मचारी चयन आयोग द्वारा असम...
भूख, थकान और शारीरिक असमर्थता के कारण फैसला सुरक्षित: इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुनवाई पूरी कर रखा निर्णय
इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक ऐसे मामले में, जिसकी शीघ्र सुनवाई का निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया, फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने खुले न्यायालय में स्पष्ट कहा कि वे भूख, थकान और शारीरिक असमर्थता के कारण निर्णय लिखवाने की स्थिति में नहीं हैं।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कार्यभार का उल्लेख करते हुए कहा,“आज 92 नए मामले 101 नियमित मामले 39 नई विविध आवेदन और अतिरिक्त अथवा सूचीबद्ध न किए गए सूची-एक दो और तीन में तीन मामले सूचीबद्ध है। केवल नए मामलों में क्रम संख्या 29 तक...
सह-आरोपियों को बाद में जमानत न मिलना, पहले से मिली जमानत रद्द करने का आधार नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी सह-आरोपी को बाद में जमानत से वंचित किया जाना पहले से जमानत पा चुके आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए अपने आप में उपरांत उत्पन्न परिस्थिति नहीं माना जा सकता, जब तक यह आरोप न हो कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया, या मिली हुई स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह टिप्पणी करते हुए उस याचिका को खारिज किया, जिसमें 6.05 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी और जालसाजी मामले में एक आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की गई। इस मामले...
अमेरिका में तलाक समझौता स्वीकार करने के बाद भारत में 498ए मामला चलाना 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि पत्नी अमेरिका की सक्षम अदालत से पारित तलाक डिक्री और आर्थिक समझौता स्वीकार कर चुकी है, तो वह भारत में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत आपराधिक कार्यवाही जारी नहीं रख सकती।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करते हुए कहा कि पत्नी ने विदेशी अदालत में तलाक की कार्यवाही में स्वेच्छा से भाग लिया और समझौता राशि स्वीकार की। ऐसे में वह उन्हीं वैवाहिक विवादों को भारत में आपराधिक मुकदमे के माध्यम से दोबारा...
महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता में बाधा नहीं बन सकता राज्य: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाइकोर्ट ने कहा कि आज जब अधिक से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए कार्यबल में शामिल हो रही हैं तब उन्हें मातृत्व लाभ से वंचित करना उनके देखभालकर्ता की भूमिका से समझौता करने जैसा होगा। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका को निर्देश दिया कि केईएम अस्पताल में कार्यरत एक डॉक्टर को शीघ्र मातृत्व लाभ प्रदान किया जाए।जस्टिस रियाज छागला और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 का उद्देश्य मातृत्व की गरिमा की रक्षा करना और महिला तथा उसके...
केरल से केरलम: किसी राज्य के नाम बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया को समझना
भारत में राज्य नामों के परिवर्तन के लिए संवैधानिक तंत्रभारत गणराज्य, जैसा कि इसके संविधान के अनुच्छेद 1 में व्यक्त किया गया है, एक "राज्यों का संघ" है। हालांकि, इन घटक राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता अपरिवर्तनीय नहीं है। भारत का संविधान संसद को राज्यों को पुनर्गठित करने की शक्ति प्रदान करता है, जिसमें उनके नाम बदलने का अधिकार भी शामिल है। यह शक्ति भारत की अर्ध-संघीय संरचना की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसे अक्सर "विनाशकारी राज्यों के अविनाशी संघ" के रूप में वर्णित किया जाता है। पुन: बेरुबारी यूनियन...
POCSO केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अंतरिम राहत, हाईकोर्ट ने अग्रिम ज़मानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य को POCSO केस में अंतरिम राहत दी और फिलहाल उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगाई।उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने निर्देश दिया कि आवेदकों को अग्रिम ज़मानत अर्जी के आखिरी निपटारे तक गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा।हालांकि, बेंच ने उनसे जांच में सहयोग करने को कहा।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर हाल ही में हुए माघ मेले के दौरान नाबालिगों के कथित यौन शोषण को लेकर POCSO Act और BNS के तहत गंभीर...
झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए निर्देश जारी किए, कहा- लापरवाही से लागू करने से पब्लिक हेल्थ को खतरा, आर्टिकल 21 का उल्लंघन
झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल-वेस्ट से जुड़ी एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन में कई निर्देश जारी किए, जिसमें राज्य में बायोमेडिकल वेस्ट की हैंडलिंग और डिस्पोजल को कंट्रोल करने वाले कानूनी फ्रेमवर्क को सख्ती से लागू करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइज़ेशन झारखंड ह्यूमन राइट्स कॉन्फ्रेंस की PIL पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बायोमेडिकल वेस्ट को कंट्रोल करने वाले कानूनी सिस्टम को असरदार तरीके से लागू करने की मांग की गई। पिटीशन...
S. 183 BNSS | पीड़िता का बयान दोबारा रिकॉर्ड करने का निर्देश सिर्फ़ 'बहुत खास हालात' में ही दिया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया कि मजिस्ट्रेट के सामने BNSS की धारा 183 के तहत बयान दोबारा रिकॉर्ड करने का निर्देश सिर्फ़ बहुत खास हालात में ही दिया जा सकता है।जस्टिस राजीव गुप्ता और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा,"...यह पावर कोई रूटीन या ऑटोमैटिक पावर नहीं है, बल्कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट इसका इस्तेमाल प्रोसेस के गलत इस्तेमाल को रोकने, न्याय के मकसद को पूरा करने या गंभीर प्रोसेस में गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए करता है, जिससे न्याय में गड़बड़ी हो सकती है।" इस तरह डिवीजन बेंच ने...
शराब पॉलिसी केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया को बरी करने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची CBI
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दूसरों को कथित शराब पॉलिसी घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में बरी करने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।यह कदम ट्रायल कोर्ट के जज के आदेश पास करने के कुछ घंटों बाद उठाया गया।सेंट्रल जांच एजेंसी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में जांच के कई ज़रूरी पहलुओं को नज़रअंदाज़ किया और मटेरियल पर ठीक से विचार नहीं किया गया।27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर...

















