हाईकोर्ट

'भगवा गुंडागर्दी' टिप्पणी मामले में आनंदबाजार पत्रिका के पत्रकारों पर फिलहाल नहीं होगी सख्त कार्रवाई: हाईकोर्ट में राज्य का आश्वासन
आनंदबाजार पत्रिका (ABP) में 'भगवा गुंडागर्दी' टिप्पणी को लेकर FIR का सामना कर रहे पत्रकारों को फिलहाल राहत मिली। कलकत्ता हाईकोर्ट में गुरुवार को राज्य सरकार ने भरोसा दिया कि याचिका पर सुनवाई होने तक पत्रकारों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि यह राहत उन्हें जांच एजेंसियों की ओर से जारी नोटिस का पालन करने की शर्त पर मिलेगी।मामले की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट एस. एन. मुखर्जी ने पत्रकारों के खिलाफ दर्ज FIR का मुद्दा कोर्ट के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसा मामला दर्ज किया गया,...

अवैध खनन में जब्त वाहन की रिहाई के लिए देनी होगी तय राशि, लंबित आपराधिक मुकदमे का नहीं पड़ेगा असर: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने अवैध खनन और अवैध रूप से खनिजों के परिवहन में इस्तेमाल वाहनों की जब्ती को लेकर अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्थान लघु खनिज रियायत नियम 2017 के तहत जब्ती की कार्यवाही और आपराधिक मुकदमा अलग-अलग और स्वतंत्र रूप से चलते हैं। आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर जब्त वाहन की रिहाई की कार्यवाही को रोका नहीं जा सकता।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने कहा कि जब जब्ती की कार्यवाही शुरू हो चुकी हो और वाहन से संबंधित वैधानिक देयता निर्धारित कर दी गई हो तो वाहन को केवल...

“पुलिस ने मार दिया या खुद छिपा है?” 30 केस वाले शख्स के गायब होने पर इलाहाबाद HC सख्त, CBI करेगी जांच
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर के एक हिस्ट्रीशीटर के लापता होने के मामले में CBI जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्थानीय पुलिस की जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस की कार्रवाई में न तो गंभीरता दिखाई दे रही है और न ही लापता व्यक्ति का पता लगाने की वास्तविक कोशिश नजर आ रही है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामला मुत्तलिव पुत्र शराफत के लापता होने से जुड़ा है, जो 4 मई 2026 से गायब...

Hanuman Chalisa Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवनीत राणा और उनके पति के खिलाफ FIR पर राज्य से मांगा स्पष्टीकरण
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (2 सितंबर) को महाराष्ट्र सरकार को हलफ़नामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें यह साफ़ करना होगा कि पूर्व सांसद और अब बीजेपी नेता नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा के ख़िलाफ़ FIR कब दर्ज की गई। यह मामला 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने के उनके आह्वान से जुड़ा है।सिंगल-जज जस्टिस शिवकुमार डिगे ने राज्य को हलफ़नामे पर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया कि राणा दंपत्ति के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा...

'सर्टिओरारी अधिकार क्षेत्र की सीमाएं': दिल्ली हाईकोर्ट ने परीक्षा टॉपर से कड़ी पूछताछ करने वाली पिछली बेंच के तरीके पर सवाल उठाए
दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछली बेंच के उस तरीके पर सवाल उठाए, जिसमें उसने इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) में असिस्टेंट के पद पर भर्ती के लिए परीक्षा का परिणाम रोके जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से कड़ी पूछताछ की थी।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि उसके सर्टिओरारी अधिकार क्षेत्र की सीमाएं ऐसी "पूछताछ वाली प्रक्रिया" की इजाज़त नहीं देती हैं।कोर्ट ने गौर किया कि पिछली बेंच ने दिसंबर 2021 में उम्मीदवार से कुछ सवाल पूछे थे, जैसे कि अमेरिका...

रेप साबित करने के लिए बच्चे को 'पेनिट्रेशन' शब्द कहने की ज़रूरत नहीं, गवाही को उम्र और ट्रॉमा के संदर्भ में समझा जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चे की गवाही को तकनीकी, कानूनी या मेडिकल शब्दों पर बहुत ज़्यादा ज़ोर देकर नहीं आंका जा सकता।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में मायने यह रखता है कि नाबालिग की गवाही का मुख्य सार क्या है, आस-पास की परिस्थितियाँ क्या थीं और कम उम्र का बच्चा किसी दर्दनाक घटना को किस स्वाभाविक तरीके से बताता है।कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब उसने साढ़े चार साल की बच्ची के साथ रेप के आरोपी व्यक्ति को बरी किए जाने के खिलाफ दिल्ली...

गैर-कानूनी हिरासत और ड्यूटी से हटकर मारपीट के मामले में पुलिस कॉन्स्टेबल पर केस चलाने के लिए मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और रिविज़नल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि अपील करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए CrPC की धारा 197 के तहत मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं थी। उस अधिकारी पर आरोप था कि उसने प्रतिवादी (Respondent) को तब बुरी तरह पीटा था जब वह कथित तौर पर गैर-कानूनी हिरासत में था।जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने माना कि याचिकाकर्ता का काम उसकी आधिकारिक ड्यूटी का हिस्सा नहीं कहा जा सकता, बल्कि उसने अपनी ड्यूटी की सीमा से बाहर जाकर काम किया।बता दें, प्रतिवादी एक...

'मुस्लिम' शब्द आगे या पीछे लगाने से जाति प्रमाण पत्र रद्द नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि 'मुस्लिम' एक धर्म है, न कि कोई जाति। इसलिए सिर्फ़ इसलिए जाति प्रमाण पत्र को अमान्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि जाति के नाम के आगे या पीछे 'मुस्लिम' शब्द लिखा है। कोर्ट ने जाति जांच समिति के उस फ़ैसले को रद्द किया, जिसमें 12वीं कक्षा के एक छात्र का प्रमाण पत्र इस आधार पर अमान्य कर दिया गया था कि जिन दस्तावेज़ों पर उसने भरोसा किया - जिनमें उसके पूर्वजों के संविधान-पूर्व (आज़ादी से पहले के) दस्तावेज़ भी शामिल थे - उनमें उनकी जाति 'मुसलमान लोहार', 'लोहार मुस्लिम' आदि लिखी...

राजस्थान हाईकोर्ट ने UGC को सस्पेंडेड डिग्री वाले छात्रों के लिए नई परीक्षा के निर्देश लागू न करने पर अवमानना की चेतावनी दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने UGC अधिकारियों को अवमानना की चेतावनी जारी की। यह चेतावनी उन छात्रों के लिए नई परीक्षा आयोजित करने के निर्देशों का पालन न करने पर दी गई, जिनके डिप्लोमा/डिग्री/योग्यताएं (जो डीम्ड यूनिवर्सिटी के विभिन्न डिस्टेंस एजुकेशन सेंटरों से प्राप्त की गईं) कोर्ट के 1 जनवरी, 2024 के आदेश से रद्द कर दी गईं।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की डिवीजन बेंच कई स्पेशल अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। इनमें से एक अपीलकर्ता असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए भर्ती प्रक्रिया से गुजर...

शादी से इनकार करने पर 7 साल के आपसी सहमति वाले रिश्ते को रेप नहीं माना जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दो बालिगों के बीच सात साल से ज़्यादा समय तक शारीरिक संबंध रहे हों, और इस बात का कोई ठोस आरोप न हो कि शादी का वादा करते समय पुरुष का इरादा शादी करने का नहीं था, तो ऐसे आरोपों से ज़्यादा से ज़्यादा आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध का ही पता चलता है; इसे शादी के झूठे वादे पर रेप नहीं माना जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(n) के तहत रेप के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही (जिसमें FIR और...

एक साल के बाद बर्थ रजिस्ट्रेशन में देरी होने पर सिर्फ़ जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ही आदेश दे सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जिस जन्म का रजिस्ट्रेशन होने के एक साल के भीतर नहीं हुआ, उसका रजिस्ट्रेशन 'जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1969' की धारा 13(3) के तहत केवल जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के आदेश पर ही किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या मामलातदार एक साल से ज़्यादा की देरी वाले रजिस्ट्रेशन के मामले में अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकते, और मध्य प्रदेश के नियमों के उस नियम 9 को रद्द किया, जिसमें ऐसा प्रावधान था।जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस एक रिट याचिका पर विचार कर...

नितिन गडकरी E20 डीपफेक: बॉम्बे हाईकोर्ट ने X से कंटेंट हटाने के आदेश का पालन करने को कहा
बुधवार (2 सितंबर) को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उन डीपफेक और AI वीडियो को हटाने का अपना आदेश दोहराया, जिनमें वरिष्ठ BJP नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को इथेनॉल-मिश्रित ईंधन की विवादास्पद नीति से जोड़ा गया।हाईकोर्ट ने प्लेटफॉर्म्स को और भी आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का आदेश दिया, जिसे हाल ही में गडकरी ने उजागर किया।सिंगल-जज जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने कहा कि 5 अगस्त को स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद, कुछ आपत्तिजनक कंटेंट, खासकर X (पहले ट्विटर) पर, अभी तक नहीं हटाया गया। इसलिए...

दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज़ नहीं: राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप वाली याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते उस रिट याचिका को वापस लेने की अनुमति दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं।इस याचिका में रायबरेली से लोकसभा सदस्य का पद संभालने के गांधी के अधिकार पर भी सवाल उठाया गया। याचिकाकर्ताओं द्वारा याचिका में लगाए गए आरोपों और दावों के समर्थन में एक भी दस्तावेज़ पेश न कर पाने के बाद इसे वापस लेने की अनुमति देते हुए खारिज कर दिया गया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की बेंच वकील अशोक पांडे और एक अन्य...

दिल्ली लक्ष्मी योजना में सांसद-विधायक की सिफारिश अनिवार्य करने को हाईकोर्ट में चुनौती, 2500 रुपये मासिक सहायता का मामला
दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता पाने के लिए सांसद या विधायक से अनुशंसा पत्र लेना अनिवार्य किए जाने को दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिये चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि किसी कल्याणकारी योजना का लाभ लेने के लिए राजनीतिक सिफारिश को अनिवार्य शर्त बनाना पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने इस याचिका को इसी मुद्दे से जुड़ी एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया। उस मामले...

दिल्ली हाईकोर्ट में 2 हजार सीवर कर्मचारियों को नियमित करने की मांग, मौत पर परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा
दिल्ली जल बोर्ड में ठेके पर काम कर रहे करीब 2 हजार सीवर कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें पिछली अवधि का वेतन व सभी वैधानिक लाभ देने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने बुधवार को दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड से जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।याचिका दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच की ओर से दायर की गई। इसमें सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जान गंवाने वाले...

जाति के आधार पर SC व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश से रोकना छुआछूत, दोषियों पर चल सकता है मुकदमा: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि जाति के आधार पर अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश से रोकना छुआछूत की प्रथा के समान है और यह संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत मिले मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की प्रथा अपनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार मुकदमा चलाया जा सकता है। जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को जातिगत आधार पर मंदिर में प्रवेश करने से रोका जाता है, खासकर तब जब वह अनुसूचित जाति से संबंधित हो तो ऐसा कृत्य छुआछूत की श्रेणी में आएगा। ऐसे...

ईसाई कब्रिस्तानों के लिए जमीन की ई-नीलामी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने DDA से पूछा- क्या यह कोई व्यावसायिक गतिविधि है?
दिल्ली में ईसाई समुदाय के लिए कब्रिस्तान या दफन स्थलों की व्यवस्था के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने मामले में संबंधित प्राधिकरणों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। सुनवाई के दौरान अदालत ने MCD को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अपने अधिकार क्षेत्र में मौजूद ईसाई कब्रिस्तानों या दफन स्थलों की संख्या और वहां...

मंदिर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाले वीडियो को हटाने का ब्लैंकेट आदेश नहीं दे सकता हाईकोर्ट: जांच एजेंसी पहले करे वीडियो की सत्यता और संदर्भ की पड़ताल
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्य सचिव ए.वी. सिंह की बहू को लेकर वायरल हुए उस वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने के लिए व्यापक आदेश देने से इनकार किया, जिसमें भोपाल की एक आवासीय सोसायटी के निवासियों के साथ विवाद के दौरान मंदिर को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप है।जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि वीडियो की वास्तविकता, उसकी पूर्णता और पूरे घटनाक्रम के संदर्भ की जांच सक्षम जांच एजेंसी द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के तहत की जानी चाहिए।अदालत ने कहा कि इस स्तर पर यह...

S.413 BNSS| बरी होने या कम गंभीर अपराध में दोषसिद्धि के खिलाफ पीड़ित को अपील के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी अपराध का पीड़ित व्यक्ति आरोपी के बरी होने या कम गंभीर अपराध में दोषसिद्ध किए जाने के आदेश के खिलाफ अपील दायर कर सकता है और इसके लिए उसे अपील की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ित को मिला यह अपील का अधिकार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 413 के प्रावधान के तहत स्वतंत्र अधिकार है। राज्य या ऐसे शिकायतकर्ता के लिए स्थिति अलग है जो स्वयं पीड़ित नहीं है और बरी किए जाने के आदेश को चुनौती देना चाहता है। ...

क्या हमारी संवैधानिक अदालतें नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा कर रही हैं?
हाल ही में जंतर-मंतर पर युवा भारतीयों के विरोध-प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस की गैर-ज़रूरी और अन्यायपूर्ण कार्रवाई, जिसके कारण सच का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा, ने देश में सभी का ध्यान खींचा है। इस पर गंभीर और गहरी बहस की ज़रूरत है।भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इसके मौलिक लक्ष्य न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व हैं। इसका संविधान, जिसे संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1946 से 25 नवंबर 1949 तक विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया (संविधान के मसौदे पर 114 दिनों से ज़्यादा समय...
