पंजाब मानसिक स्वास्थ्य नियमों को जल्द मंजूरी दे केंद्र सरकार: हाइकोर्ट
Amir Ahmad
7 Feb 2026 1:17 PM IST

पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि पंजाब मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों को यथाशीघ्र मंजूरी दी जाए। कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जानी चाहिए और अधिमानतः छह सप्ताह की अवधि के भीतर इसे अंतिम रूप दिया जाए। हाइकोर्ट ने यह भी अपेक्षा जताई कि पंजाब सरकार इस पूरी प्रक्रिया में केंद्र सरकार को सक्रिय सहयोग प्रदान करे।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ चंडीगढ़ स्थित पुष्पांजलि ट्रस्ट द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में पंजाब और हरियाणा में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के अनिवार्य प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई। याचिका की मुख्य मांग मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए 'ग्रुप होम' की स्थापना से जुड़ी है।
पिछली सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा गया,
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्ष 2017 में अधिनियम लागू होने के 7-8 वर्ष बाद भी पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों द्वारा अब तक नियम अधिसूचित नहीं किए गए। चूंकि यह अधिनियम कल्याणकारी कानून है, इसलिए दोनों राज्यों का दायित्व है कि वे इसके विभिन्न प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए नियम तैयार करें।”
वर्तमान सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि पंजाब सरकार द्वारा तैयार किए गए नियम आपत्तियों को दूर करने के बाद 29 जनवरी, 2026 को केंद्र सरकार को भेज दिए गए। हाइकोर्ट ने कहा कि अब अगला कदम केंद्र सरकार द्वारा इन नियमों की जांच, परीक्षण और आवश्यकतानुसार संशोधन के साथ मंजूरी देना है।
हरियाणा राज्य के संबंध में कोर्ट ने नोट किया कि वहां बनाए गए नियमों को केंद्र सरकार ने 8 जनवरी, 2026 को मंजूरी दी। कोर्ट ने कहा कि अब केवल औपचारिक अधिसूचना जारी कर उन्हें राजपत्र में प्रकाशित किया जाना शेष है। हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि यह प्रक्रिया चार सप्ताह के भीतर पूरी कर ली जाएगी।
हाइकोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि उसकी पिछली सुनवाई में पंजाब और हरियाणा दोनों में एक-एक मॉडल ग्रुप होम स्थापित करने को लेकर उठाए गए प्रश्न का अब तक किसी भी राज्य ने जवाब नहीं दिया।
इसके अलावा कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका की एक प्रति यूटी प्रशासन की ओर से आमतौर पर पीजीआई-चंडीगढ़ के मामलों में पेश होने वाले सीनियर सरकारी वकील अमित झांझी को भी भेजी जाए ताकि पीजीआई-चंडीगढ़ की ओर से समय रहते जवाब दाखिल हो सके।
मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी।

