हाईकोर्ट

अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त स्कूलों में नियुक्ति पर DoE दखल नहीं दे सकता, केवल योग्यता तय कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त स्कूलों में नियुक्ति पर DoE दखल नहीं दे सकता, केवल योग्यता तय कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सहायता प्राप्त (Aided) अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार संस्थान के प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा निदेशालय (DoE) केवल नियुक्ति के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और अनुभव निर्धारित कर सकता है, लेकिन इसके अलावा कोई अन्य शर्त या प्रतिबंध नहीं लगा सकता।जस्टिस जसमीत सिंह ने एक सहायता प्राप्त ईसाई अल्पसंख्यक विद्यालय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अनुच्छेद 30(1) के तहत अल्पसंख्यक...

GST अधिकारी को बदनाम करने और ₹1 करोड़ की उगाही के आरोप में पत्रकार बताने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत से इनकार
GST अधिकारी को बदनाम करने और ₹1 करोड़ की उगाही के आरोप में पत्रकार बताने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत से इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिस पर GST आवेदन खारिज होने के बाद सहायक आयुक्त (GST) को सोशल मीडिया पर बदनाम करने और उनसे ₹1 करोड़ की उगाही करने का आरोप है।जस्टिस रत्नेश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि उसने आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में अपना GST पंजीकरण कराने का दबाव बनाया और मना किए जाने पर सरकारी अधिकारी को सोशल मीडिया पर झूठी और अपमानजनक खबरें प्रकाशित...

2011 की सीधी नियुक्ति को बाद में कार्यकाल आधारित नहीं बनाया जा सकता: पटना हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय का फैसला रद्द किया
2011 की सीधी नियुक्ति को बाद में कार्यकाल आधारित नहीं बनाया जा सकता: पटना हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय का फैसला रद्द किया

पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत वर्ष 2010 में बनाए गए उपबंध, जिन्हें वर्ष 2017 में अधिसूचित किया गया, उन्हें पूर्व प्रभाव से लागू कर वर्ष 2011 में सीधी भर्ती के जरिए हुई स्थायी नियुक्ति को कार्यकाल आधारित नियुक्ति में नहीं बदला जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक किसी कानून में स्पष्ट रूप से या आवश्यक रूप से पूर्व प्रभाव से लागू होने का प्रावधान न हो, तब तक उसे भविष्य के लिए ही प्रभावी माना जाएगा, विशेषकर तब जब उससे कर्मचारियों के अर्जित सेवा...

गलत जानकारी देना ही मिथ्या प्रस्तुतीकरण नहीं: 45 साल पुरानी हाउसिंग सोसायटी का पंजीकरण रद्द करने से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार
गलत जानकारी देना ही मिथ्या प्रस्तुतीकरण नहीं: 45 साल पुरानी हाउसिंग सोसायटी का पंजीकरण रद्द करने से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल गलत या अधूरी जानकारी देना अपने आप में 'मिथ्या प्रस्तुतीकरण' नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी सहकारी समिति का पंजीकरण तभी रद्द किया जा सकता है, जब यह साबित हो कि पंजीकरण जानबूझकर धोखा देकर, तथ्य छिपाकर या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किया गया था। बाद की घटनाओं या पंजीकरण से जुड़े किसी कथित त्रुटिपूर्ण निर्णय के आधार पर पंजीकरण रद्द नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप वी. मारणे ने यह फैसला एलीट डायग्नोस्टिक सेंटर प्राइवेट...

अतिक्रमण नहीं हटाया तो फूटा हाईकोर्ट का गुस्सा, दिया तहसीलदार और पटवारी के निलंबन का आदेश
अतिक्रमण नहीं हटाया तो फूटा हाईकोर्ट का गुस्सा, दिया तहसीलदार और पटवारी के निलंबन का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालत के बार-बार आदेशों के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने और अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने पर करौली जिले के खेड़ली गांव के तहसीलदार और पटवारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। अदालत ने राजस्व सचिव को दोनों अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने और कार्यवाही पूरी होने तक उन्हें निलंबित रखने का आदेश दिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि दोनों अधिकारी...

तमिलनाडु राष्ट्र की मांग राजद्रोह नहीं, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या: मद्रास हाईकोर्ट
तमिलनाडु राष्ट्र की मांग राजद्रोह नहीं, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक पब्लिशिंग हाउस के ख़िलाफ़ दर्ज देशद्रोह का मामला रद्द किया। इस पब्लिशिंग हाउस ने ऐसी किताब छापी थी, जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु को एक अलग देश होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आज के समय में ऐसे बयान को देश या सरकार के प्रति नफ़रत के तौर पर नहीं देखा जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 297]जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि भारत दिल और आत्मा से एकजुट है। ऐसे बयानों से मौजूदा सामाजिक माहौल में ज़्यादा से ज़्यादा झुंझलाहट हो सकती है। ऐसा बयान देने वाले व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य की समस्या...

धर्म परिवर्तन के कथित प्रचार में उपकरण उपलब्ध कराने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी, FIR रद्द करने से एमपी हाईकोर्ट का इनकार
धर्म परिवर्तन के कथित प्रचार में उपकरण उपलब्ध कराने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी, FIR रद्द करने से एमपी हाईकोर्ट का इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन के कथित प्रलोभन के प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल किए गए उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि जांच के दौरान एकत्र सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपियों की संलिप्तता दर्शाती है, इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में अदालत का काम केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। इस...

सिर्फ कुर्फ़ानामा काफी नहीं, बेदखली रोकने के लिए 1949 के कानून से पहले 12 वर्ष का कब्जा साबित करना होगा: झारखंड हाईकोर्ट
सिर्फ कुर्फ़ानामा काफी नहीं, बेदखली रोकने के लिए 1949 के कानून से पहले 12 वर्ष का कब्जा साबित करना होगा: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति कुर्फ़ानामा के आधार पर जमीन पर अपना अधिकार जताकर बेदखली की कार्रवाई का विरोध करना चाहता है तो उसे यह साबित करना होगा कि संताल परगना काश्तकारी (पूरक उपबंध) अधिनियम, 1949 लागू होने से पहले उसका 12 वर्ष का वैध कब्जा था।अदालत ने यह भी कहा कि तस्दीक नियमावली की शर्तों को पूरा नहीं करने वाले कुर्फ़ानामा के आधार पर बेदखली की कार्रवाई को चुनौती नहीं दी जा सकती। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें संताल परगना...

राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर सेंट्रल जेल में डकैत की मौत का स्वतः संज्ञान लिया, खराब CCTV कैमरों पर रिपोर्ट मांगी
राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर सेंट्रल जेल में डकैत की मौत का स्वतः संज्ञान लिया, 'खराब CCTV कैमरों' पर रिपोर्ट मांगी

राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर सेंट्रल जेल में बंद डकैत जगन गुर्जर की मौत का स्वतः संज्ञान लिया।जेल प्रशासन से जुड़ी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कोर्ट ने हाईकोर्ट की ओर से पेश वकील से भी रिपोर्ट मांगी। इसमें यह बताना होगा कि कैमरे खराब या धुंधले क्यों पाए गए और कैमरों पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी वाले संबंधित अधिकारी ने इसकी सूचना क्यों नहीं दी।PTI की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को जेल में गुर्जर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया।राजस्थान हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस...

CISF कर्मियों से अच्छे व्यवहार की उम्मीद की जाती है; सार्वजनिक जगह पर शराब पीना और हिंसक झगड़ा नौकरी से निकाले जाने का कारण बन सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
CISF कर्मियों से अच्छे व्यवहार की उम्मीद की जाती है; सार्वजनिक जगह पर शराब पीना और हिंसक झगड़ा नौकरी से निकाले जाने का कारण बन सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने CISF कॉन्स्टेबल को नौकरी से निकाले जाने का फैसला सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि एक अनुशासित सशस्त्र बल के कर्मियों से, जिन पर जनता का भरोसा बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, अच्छे व्यवहार और संयम की उम्मीद की जाती है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने कहा कि कॉन्स्टेबल का सार्वजनिक जगह पर शराब पीना, एक हिंसक झगड़े में शामिल होना (जिसमें भारतीय सेना के एक जवान की मौत हो गई) और बल की बदनामी करना गंभीर कदाचार है, जिसके लिए उसे नौकरी से निकाला जा सकता है। भले ही...

सुप्रीम कोर्ट कुछ भी कहे, पुलिस अपनी मनमर्जी करती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सतेंद्र अंतिल फैसले को नज़रअंदाज़ करने पर पुलिसकर्मी को फटकार लगाई
सुप्रीम कोर्ट कुछ भी कहे, पुलिस अपनी मनमर्जी करती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'सतेंद्र अंतिल' फैसले को नज़रअंदाज़ करने पर पुलिसकर्मी को फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ) ने गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का खुलेआम उल्लंघन करने के लिए पुलिस तंत्र की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि पुलिस अधिकारियों का कानून को "पढ़ने और समझने" से कोई लेना-देना नहीं है और वे पूरी तरह से अपनी मनमर्जी से काम करते हैं।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने नाबालिग को अवैध रूप से हिरासत में रखने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान ये मौखिक टिप्पणियां कीं। उस नाबालिग को चोरी के आरोप में जेल भेज दिया गया।इससे पहले,...

माता-पिता के बारे में जानने के बच्चे के अधिकार से ज़्यादा ज़रूरी किसी बड़े की इज़्ज़त नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट ने DNA टेस्ट को मंज़ूरी दी
माता-पिता के बारे में जानने के बच्चे के अधिकार से ज़्यादा ज़रूरी किसी बड़े की इज़्ज़त नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट ने DNA टेस्ट को मंज़ूरी दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी बड़े की इज़्ज़त को नुकसान पहुँचने की चिंता, बच्चे के अपने असली माता-पिता के बारे में जानने के अधिकार से ज़्यादा ज़रूरी नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि "इज़्ज़त सच्चाई के सामने ढाल नहीं बन सकती" और "बच्चे बड़ों के फैसलों का शिकार नहीं बन सकते।"जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों और हितों को बड़ों की सामाजिक बदनामी या इज़्ज़त की चिंता से कमतर नहीं आंका जा सकता, क्योंकि उनके माता-पिता का मामला उनकी पहचान से भी जुड़ा है और उनके कानूनी अधिकारों, जिसमें...

वैवाहिक विवाद से जुड़ी खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग: दिल्ली हाईकोर्ट ने IPS अधिकारी की याचिका पर जारी किया नोटिस
वैवाहिक विवाद से जुड़ी खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग: दिल्ली हाईकोर्ट ने IPS अधिकारी की याचिका पर जारी किया नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यरत भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी की याचिका पर नोटिस जारी किया। अधिकारी ने अपने वैवाहिक विवाद से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट को हटाने और डी-इंडेक्स करने की मांग की है; यह विवाद बाद में आपसी सहमति से सुलझा लिया गया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा Google LLC और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थीं।कोर्ट ने कहा कि उसे इस याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन) है, क्योंकि Google LLC, YouTube LLC के रेजिडेंट शिकायत अधिकारी और...

4,000 से ज़्यादा बिना सरकारी मदद वाले मदरसों की फंडिंग की UP ATS की जांच में दखल देने से हाईकोर्ट का इनकार
4,000 से ज़्यादा बिना सरकारी मदद वाले मदरसों की फंडिंग की UP ATS की जांच में दखल देने से हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य में चल रहे 4,000 से ज़्यादा बिना सरकारी मदद वाले मदरसों की फंडिंग की उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) की जांच में दखल देने से इनकार किया।जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने मदरसा मैनेजमेंट कमेटी और टीचर्स एसोसिएशन, मदरसा अरबिया की याचिका खारिज की।बता दें, याचिकाकर्ताओं ने 9 दिसंबर, 2025 का आदेश रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत राज्य सरकार ने ATS के ज़रिए उनके संस्थानों की फंडिंग की जांच शुरू की थी।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पहले भी...

CrPC की धारा 362 ज़मानत की शर्तों को बदलने में रुकावट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 साल बाद ₹64 लाख जमा करने की कठिन शर्त हटाई
CrPC की धारा 362 ज़मानत की शर्तों को बदलने में रुकावट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 साल बाद ₹64 लाख जमा करने की 'कठिन' शर्त हटाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि CrPC की धारा 362 (कोर्ट द्वारा फैसले में बदलाव न करना) के तहत कानूनी रोक ज़मानत आदेश में लगाई गई शर्तों में बदलाव या ढील देने पर लागू नहीं होती है।कोर्ट ने खास तौर पर कहा,"...ज़मानत देने का आदेश सिर्फ़ एक अंतरिम आदेश (interlocutory order) होता है और यह CrPC की धारा 362 में इस्तेमाल किए गए वाक्यांश 'मामले का निपटारा करने वाला फैसला या अंतिम आदेश' के दायरे में नहीं आता है। इसलिए CrPC की धारा 362 में दी गई रोक किसी आरोपी व्यक्ति को ज़मानत देने के आदेश में लगाई...

सरकारी नीतियों के विरोध पर नागरिक को शहर से बाहर नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
सरकारी नीतियों के विरोध पर नागरिक को शहर से बाहर नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करना या असहमति जताना किसी नागरिक को शहर से बाहर (Extern) करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस माधव जे. जामदार ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के सचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ जारी एक्सटर्नमेंट आदेश और उसके खिलाफ पारित अपीलीय आदेश को रद्द कर दिया। अदालत...

हलाला की आड़ में अपराध को व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले में FIR रद्द करने से किया इनकार
'हलाला' की आड़ में अपराध को व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले में FIR रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 के कथित निकाह हलाला के दौरान नाबालिग से दुष्कर्म और 2025 में कथित 'डबल हलाला' के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि विवाह या व्यक्तिगत कानून की आड़ में कोई अपराध किया जाता है, तो उसे व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि आपराधिक कानून में व्यक्तिगत कानूनों की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती, जब तक कि स्वयं कानून ऐसा अपवाद न...

पत्नी की मौत पर कमाने वाला पति भी मुआवजे का हकदार, पितृसत्तात्मक सोच से नहीं होगा निर्भरता का आकलन: दिल्ली हाईकोर्ट
पत्नी की मौत पर कमाने वाला पति भी मुआवजे का हकदार, पितृसत्तात्मक सोच से नहीं होगा निर्भरता का आकलन: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटना में पत्नी की मौत होने पर कमाने वाला पति भी आश्रितता के आधार पर मुआवजे का दावा कर सकता है। केवल इस आधार पर उसका दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि वह स्वयं भी कमाता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामलों का आकलन पितृसत्तात्मक सोच के नजरिए से नहीं किया जा सकता। जस्टिस अनीश दयाल की एकलपीठ ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा एक व्यक्ति को उसकी पत्नी की सड़क दुर्घटना में मौत के...