हाईकोर्ट

आवेदन की आखिरी तारीख से पहले एक्सपायर हो चुके पिछड़े वर्ग सर्टिफिकेट को अमान्य माना जाएगा: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जिस उम्मीदवार ने टीचिंग पोस्ट के लिए अपने आवेदन के साथ एक्सपायर हो चुका 'बैकवर्ड क्लास-A' (BCA) सर्टिफिकेट लगाया, उसे आवेदन की आखिरी तारीख के बाद मिले नए सर्टिफिकेट के आधार पर योग्य नहीं माना जा सकता।जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ 'लेटर्स पेटेंट अपील' को खारिज किया। सिंगल जज ने BCA कैटेगरी में मेवात कैडर के प्राइमरी टीचर (PRT) पद के लिए अपीलकर्ता की उम्मीदवारी रद्द करने के फैसले को सही ठहराया...

बरी होने के बाद नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को दोबारा नौकरी पर रखे जाने तक का बकाया वेतन पाने का हक: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में बरी होने के बाद नौकरी से निकाला जाता है तो वह नौकरी से निकाले जाने और दोबारा नौकरी पर रखे जाने के बीच की अवधि के लिए बकाया वेतन पाने का हकदार होता है।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही बाद में बरी होने से पहले की सजा के कानूनी नतीजे पीछे की तारीख से खत्म नहीं होते, लेकिन बरी होने के बाद की गई बर्खास्तगी पर यह सिद्धांत लागू नहीं होता।बता दें, अपीलकर्ता को मई 2017 में एक आपराधिक मामले...

जब नियम डिग्री की समानता के बारे में कुछ न कहें तो रिट कोर्ट एकेडमिक एक्सपर्ट की तरह फैसला नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी पद के लिए योग्यता तय करने वाले सर्विस नियमों में समकक्ष (बराबर) डिग्री पर विचार करने का कोई प्रावधान नहीं है तो रिट कोर्ट यह तय नहीं कर सकता कि नियमों में न बताई गई कोई डिग्री, तय की गई डिग्री के बराबर है या नहीं।कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कोर्ट ऐसी समानता तय करने के लिए एकेडमिक एक्सपर्ट की भूमिका नहीं निभा सकता।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा,“यह कोर्ट यह कहने को मजबूर है कि इस मामले को नियंत्रित...

प्राइवेट ट्रस्ट द्वारा टीचर को नौकरी से निकालने के खिलाफ़ रिट याचिका स्वीकार्य नहीं, विवाद कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले (Unaided) शिक्षण संस्थान द्वारा किसी टीचर को नौकरी से निकालने के खिलाफ़ संविधान के आर्टिकल 226 के तहत रिट याचिका स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने माना कि यह विवाद पूरी तरह से नियोक्ता (Employer) और कर्मचारी (Employee) के बीच कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा मामला है।प्राइवेट संस्था के रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) के दायरे में आने और उसके खिलाफ़ किसी खास दावे की स्वीकार्यता के बीच अंतर करते हुए जस्टिस मंजू रानी चौहान ने...

सर्विस बेनिफिट्स के लिए सम्मानजनक बरी होने और अन्य तरह से बरी होने में कोई अंतर नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट का सस्पेंशन पीरियड के लिए पूरी सैलरी देने का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सस्पेंड किए गए कर्मचारी को सर्विस बेनिफिट्स देने के मामले में 'सम्मानजनक बरी होने' (Honourable Acquittal) और 'बरी होने' (acquittal) के बीच कानूनी रूप से कोई अंतर नहीं है।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने LIC (प्रतिवादी) का वह आदेश रद्द किया, जिसके तहत याचिकाकर्ता को सस्पेंशन के समय के सर्विस बेनिफिट्स देने से मना कर दिया गया था। याचिकाकर्ता को एक आपराधिक मामले में फंसाए जाने के कारण सस्पेंड किया गया। बाद में वह बरी हो गया, लेकिन उसे बेनिफिट्स इसलिए नहीं दिए गए क्योंकि उसका...

Telegram पर Re-NEET परीक्षा का पेपर लीक करने के आरोपी को मिली ज़मानत, हाईकोर्ट ने कहा - चार्जशीट दाखिल हो चुकी है

गुजरात हाईकोर्ट ने Telegram चैनलों पर Re-NEET परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने का विज्ञापन देने के आरोपी व्यक्ति को ज़मानत दी। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी की हिरासत जारी रखने या उसे लंबा खींचने के लिए कोई ठोस कारण नहीं बता पाया।जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने अपने आदेश में कहा कि आवेदक पर आरोप है कि उसने सह-आरोपियों के साथ मिलकर Re-NEET परीक्षा का पेपर लीक करने की साज़िश रची थी।आरोप है कि आरोपियों ने दो सिम कार्ड खरीदे, अलग-अलग Telegram चैनलों पर विज्ञापन दिए और छात्रों को सफलता का भरोसा दिलाकर...

अगर पति कमाने में सक्षम है तो नौकरी न होना या बिज़नेस खराब चलना पत्नी को गुज़ारा-भत्ता न देने का आधार नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पति कमाने में सक्षम है तो वह यह कहकर अपनी पत्नी का गुज़ारा-भत्ता देने की ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकता कि उसके पास नौकरी नहीं है या उसका बिज़नेस अच्छा नहीं चल रहा है।जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने कहा कि ऐसे तर्क सिर्फ़ "बेबुनियाद बहाने" हैं और "कानून में इनकी कोई मान्यता नहीं है"।कोर्ट ने यह टिप्पणी एक पति द्वारा दायर क्रिमिनल रिविज़न याचिका ख़ारिज करते हुए की। पति ने उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे CrPC की धारा 125 के तहत अपनी पत्नी को हर महीने ₹3,500...

[JEE Mains] IIT में एडमिशन के लिए तय योग्यता शर्तों की जगह सहानुभूति नहीं ले सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में एडमिशन के लिए तय योग्यता शर्तों की जगह सहानुभूति या पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी संभावित मुश्किलों को नहीं रखा जा सकता।जस्टिस जसमीत सिंह ने JEE की उम्मीदवार की याचिका खारिज की। उम्मीदवार ने JEE मेन 2025 परीक्षा के मूल्यांकन में कथित गलतियों के आधार पर IIT दिल्ली में एडमिशन की मांग की थी।कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए हाईकोर्ट सिर्फ़ कथित मुश्किलों के आधार पर परीक्षा और...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी के गुज़ारा-भत्ते में हर साल 10% बढ़ोतरी के फ़ैमिली कोर्ट के आदेश की तारीफ़ की, कहा- नई सोच

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फ़ैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें पत्नी के मासिक अंतरिम गुज़ारा-भत्ते में हर साल 10% बढ़ोतरी का प्रावधान था। कोर्ट ने इस सोच को "नई सोच" (इनोवेटिव थॉट) बताया।जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की बेंच ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह "बहुत हैरानी की बात" है कि हाई कोर्ट को ऐसा नया विचार पहले नहीं आया।बेंच ने तर्क दिया कि महंगाई हर साल लगभग 10% बढ़ रही है। अगर गुज़ारा-भत्ते की रकम तय रहती है, तो आश्रित पत्नी और बच्चों को समय के साथ अपनी बुनियादी...

प्रतिकूल आदेश या प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आधार पर ट्रायल ट्रांसफर करने के लिए न्यायिक पक्षपात साबित नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिकूल न्यायिक आदेश और कथित प्रक्रियात्मक अनियमितताएं, अपने आपमें पक्षपात के आरोप पर आपराधिक ट्रायल को ट्रांसफर करने के लिए कानूनी रूप से मान्य आधार नहीं बन सकते।जस्टिस प्रतीक जालान एक शिकायतकर्ता की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें 2021 में दर्ज रेप केस को मौजूदा एडिशनल सेशन जज की अदालत से किसी दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की गई।शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट आरोपों को तय करने, उसकी गवाही दर्ज करने, न्यायिक निर्देशों का पालन करने और अतिरिक्त...

सिर्फ़ बैंक ट्रांज़ैक्शन को पति की महीने की खर्च-योग्य आय मानकर गुज़ारा-भत्ता तय नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को दिए जाने वाले गुज़ारा-भत्ते (मेंटेनेंस) को तय करते समय पति के बैंक ट्रांज़ैक्शन को अपने-आप उसकी महीने की खर्च-योग्य आय के बराबर नहीं माना जा सकता।जस्टिस मधु जैन ने यह बात एक पत्नी की उस याचिका को खारिज करते हुए कही, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम गुज़ारा-भत्ते की रकम बढ़ाने की मांग की थी।कोर्ट ने साफ़ किया कि कमाने वाले जीवनसाथी की आय का एक निश्चित प्रतिशत तय करके गुज़ारा-भत्ता तय नहीं किया जा सकता और कोर्ट को दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति और...

Motor Accident | मौत के बाद भी पारिवारिक बिज़नेस चलते रहने कारण ur आश्रितों के आर्थिक नुकसान का दावा खारिज नहीं किया जा सकता: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना में कमाने वाले सदस्य की मौत के कारण आश्रितों को हुए आर्थिक नुकसान के दावे को सिर्फ़ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि मृतक जिस पैथोलॉजी सेंटर से जुड़ा था, उसे परिवार के किसी दूसरे सदस्य ने चलाना जारी रखा। [2026 LiveLaw (MP) 401]जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने इस धारणा को भी खारिज किया कि कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद भी आश्रितों को आय मिल रही थी, सिर्फ़ इसलिए कि वह संस्थान (बिज़नेस) चलता रहा।कोर्ट ने कहा,"कमाने वाले सदस्य की मौत से जुड़े दावे...

ध्वनि प्रदूषण एक खतरा बनता जा रहा है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तेज़ आवाज़ वाले DJ के बीच स्कूल की छात्रा की मौत पर स्वतः संज्ञान लिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को शोर प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए नई जनहित याचिका (PIL) दर्ज की। यह कदम बलरामपुर में दूसरी कक्षा की छात्रा की मौत की घटना का संज्ञान लेने के बाद उठाया गया; आरोप है कि जब पास से लाउडस्पीकर और म्यूज़िक सिस्टम के साथ एक जुलूस गुज़र रहा था, तब वह छात्रा अपनी क्लास में गिर पड़ी थी।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने प्रेशर हॉर्न, मॉडिफाइड साइलेंसर और हूटर के गलत इस्तेमाल से जुड़ी लंबित PIL पर सुनवाई करते हुए रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह इस घटना और...

अनुशासनात्मक जांच के दौरान अंतरिम स्तर पर वकीलों को सस्पेंड नहीं कर सकती बार काउंसिल: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पास अनुशासनात्मक जांच लंबित रहने के दौरान अंतरिम स्तर पर वकीलों को सस्पेंड करने का अधिकार नहीं है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 35(3)(c) (दुर्व्यवहार के लिए वकीलों को सज़ा) के तहत सस्पेंशन अंतिम आदेश है, जिसे अनुशासनात्मक कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान पारित नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासनात्मक समिति के...

Motor Accident Claims | मृत्यु के बाद भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न का इस्तेमाल मृतक की आय का आकलन करने के लिए किया जा सकता है: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है कि दुर्घटना के मुआवज़े को तय करने के लिए मृतक की आय की गणना करते समय मृत्यु के बाद भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न पर विचार नहीं किया जा सकता। [2026 LiveLaw (Guj) 269]ऐसा करते हुए कोर्ट ने मृतक के परिवार को दिए जाने वाले दुर्घटना मुआवज़े में ₹6,16,342 की बढ़ोतरी की।कोर्ट मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश के खिलाफ दावेदारों की अपील पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें 9% सालाना ब्याज दर के साथ ₹6,01,400 का मुआवज़ा दिया गया।मृतक अपना स्कूटर चला रहा था...

दिल्ली हाईकोर्ट ने जश्न में फायरिंग से हुई मौत के मामले में बिहार के MLA राजू कुमार सिंह की सज़ा पर रोक लगाने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार के MLA राजू कुमार सिंह की सज़ा पर रोक लगाने से इनकार किया। उन्हें नए साल की पूर्व संध्या पर एक पार्टी में जश्न के दौरान फायरिंग से हुई एक महिला की मौत के मामले में 'गैर-इरादतन हत्या' (Culpable Homicide not Amounting to Murder) के लिए चार साल की जेल की सज़ा सुनाई गई।जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि मामले के "सतही विश्लेषण" से सबूतों को समझने में कोई स्पष्ट गड़बड़ी या बड़ी गलती नहीं दिखी, जिसके आधार पर सज़ा पर रोक लगाई जा सके।कोर्ट ने कहा,"और तो और, उनका पिछला रिकॉर्ड भी साफ़...