हाईकोर्ट
कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से मौत को स्वतः 'रोजगार चोट' नहीं माना जा सकता: हाईकोर्ट ने मुआवजा खारिज किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से हुई मृत्यु को स्वतः रोजगार से उत्पन्न चोट नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि मृत्यु और रोजगार के बीच सीधा संबंध (नैक्सस) हो।जस्टिस जे.सी. दोशी ने कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम की धारा 2(8) का हवाला देते हुए कहा कि “रोजगार चोट” वही मानी जाएगी जो दुर्घटना या व्यावसायिक बीमारी के कारण हो और जो रोजगार के दौरान तथा उससे उत्पन्न हुई हो।मामला मैकेनिक की मृत्यु से जुड़ा था, जिसकी कार्य के दौरान हार्ट अटैक से मौत...
दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल व आप नेताओं के खिलाफ शिकायत, कोर्ट कार्यवाही के कथित अनधिकृत प्रसारण पर विवाद
दिल्ली हाईकोर्ट में आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल पार्टी के कई नेताओं और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ शिकायत दायर की गई। आरोप है कि इन्होंने न्यायालय की कार्यवाही का कथित रूप से अनधिकृत रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया।यह शिकायत एडवोकेट वैभव सिंह द्वारा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष दायर की गई। शिकायत में कहा गया कि 13 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान जब केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जस्टिस से खुद को मामले से अलग करने की...
20 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग खारिज: हाईकोर्ट बोला- अब कोई तात्कालिक आर्थिक संकट नहीं
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में पिता की मृत्यु के 20 वर्ष बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग खारिज की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इतने लंबे समय के बाद यह नहीं माना जा सकता कि परिवार किसी अचानक या तात्कालिक आर्थिक संकट से जूझ रहा है।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसकी अनुकंपा नियुक्ति की मांग अस्वीकार की गई।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के पिता दूरसंचार विभाग की एक इकाई...
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से हटने का मामला: केजरीवाल ने दायर किया नया हलफनामा, कहा- जज का बेटा और बेटी केंद्र के पैनल वकील
शराब नीति मामले की सुनवाई से दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने की मांग वाली अपनी याचिका में AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अतिरिक्त हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने कहा है कि जस्टिस शर्मा के बेटे और बेटी, दोनों ही केंद्र सरकार के वकील के तौर पर पैनल में शामिल हैं।केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा के बच्चों को काम सॉलिसिटर जनरल द्वारा सौंपा जाता है, जो जस्टिस शर्मा के सामने CBI की तरफ से पेश हुए। उनके अनुसार, इससे जस्टिस शर्मा की ओर से पक्षपात की एक उचित आशंका पैदा होती...
भविष्य की योजना के लिए ज़मीन सिर्फ़ रिज़र्व रखना, अधिग्रहित ज़मीन का 'उपयोग' नहीं माना जाएगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया ज़मीन वापस करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि ज़मीन का कोई भी असल विकास या उपयोग किए बिना, उसे सिर्फ़ "भविष्य की योजना" के लिए रिज़र्व रखना, यूपी शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 17 के तहत 'उपयोग' नहीं माना जाएगा।यूपी शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 17 के तहत राज्य सरकार को विकास कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत ज़मीन अधिग्रहित करने का अधिकार दिया गया। उप-धारा (1) का परंतुक यह प्रावधान करता है कि यदि ज़मीन मालिक आवेदन करता है तो राज्य सरकार ज़मीन को उसके मूल मालिक को वापस कर...
अनुच्छेद 226 (2) और आपराधिक न्यायशास्त्रः कार्रवाई के कारण की सिविल कानून अवधारणा को नेविगेट करना
भारत का संविधान पूर्ण न्याय प्रदान करना सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट को एक विशेष रिट अधिकार क्षेत्र के साथ निहित करता है। प्रारंभ में, अनुच्छेद 226 का दायरा "उन क्षेत्रों तक ही सीमित था जिनके संबंध में यह अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करता है। हालांकि, इसने संघ के मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र को केवल पंजाब हाईकोर्ट (दिल्ली हाईकोर्ट के गठन से पहले) तक सीमित करके एक गंभीर समस्या पैदा कर दी क्योंकि भारत सरकार की सीट नई दिल्ली में स्थित थी, जिससे पूरे भारत में वादियों के लिए...
कोर्ट के धारा 73 के तहत कार्रवाई का खुलासा न करने पर हस्तलेखन का सैंपल देने से मना करने पर कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी पक्ष के खिलाफ हस्तलेखन सैंपल देने से मना करने पर कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, अगर कोर्ट ने यह खुलासा न किया हो कि ऐसा नमूना भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 73 के तहत तुलना के लिए मांगा जा रहा है।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने एक फैमिली कोर्ट द्वारा क्रूरता के आधार पर दी गई तलाक की डिक्री रद्द की।अपीलकर्ता-पत्नी ने कथित तौर पर वैवाहिक घर में कागज़/पर्ची फेंक दी थी, जिसमें मनमानी...
क्या बिना एडमिशन/डिनायल एफिडेविट के लिखित बयान 'नॉन-एस्ट' (अमान्य) है? दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी बेंच को सौंपा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट (ओरिजिनल साइड) रूल्स, 2018 के तहत लिखित बयान दाखिल करने से जुड़े एक मुद्दे को एक बड़ी बेंच के पास भेजा।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने इस संदर्भ के लिए निम्नलिखित प्रश्न तैयार किया:“क्या दिल्ली हाईकोर्ट (ओरिजिनल साइड) रूल्स, 2018 के तहत तय कानूनी समय सीमा के भीतर लिखित बयान दाखिल करना—लेकिन साथ में दस्तावेजों के एडमिशन/डिनायल (स्वीकृति/अस्वीकृति) का एफिडेविट न होना—कानून की नज़र में उस फाइलिंग को 'नॉन-एस्ट' (अमान्य) बना देता है? या फिर, क्या ऐसे एफिडेविट का न होना...
गांजे के पत्ते और डंठल 'गांजा' नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS केस में ज़मानत दी, कमर्शियल मात्रा पर संदेह जताया
दिल्ली हाईकोर्ट ने ड्रग्स के एक मामले में आरोपी को ज़मानत दी। कोर्ट ने कहा कि गांजे के पत्तों और डंठलों को कमर्शियल मात्रा (व्यावसायिक मात्रा) तय करने के लिए 'गांजा' नहीं माना जा सकता। इस तरह, कोर्ट ने इस बात पर संदेह जताया कि क्या ज़ब्त की गई चीज़ें NDPS Act की धारा 37 के तहत तय की गई सख्त सीमा के दायरे में आती हैं।कोर्ट ने कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत 'गांजा' की परिभाषा में खास तौर पर सिर्फ गांजे के पौधे के फूल वाले या फल वाले ऊपरी हिस्से ही...
बिना लाइसेंस के या दो सवारी के साथ बाइक चलाने पर तब तक 'सहयोगी लापरवाही' नहीं मानी जाएगी, जब तक उसका सीधा संबंध दुर्घटना से न हो: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना वैध लाइसेंस के और दो सवारी (पिलियन राइडर्स) के साथ मोटरसाइकिल चलाना भले ही मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन हो, लेकिन ये काम अपने आप में दुर्घटना में मृतक की 'सहयोगी लापरवाही' (Contributory Negligence) मानने का आधार नहीं हो सकते, जब तक कि इस बारे में कोई खास निष्कर्ष न हो।जस्टिस संदीप तनेजा ने आगे कहा कि चूंकि मृतक एक नाई था, इसलिए उसकी मासिक आय की गणना 'कुशल श्रमिक' (Skilled Worker) के न्यूनतम वेतन के आधार पर की जानी चाहिए, न कि एक 'अकुशल श्रमिक' (Unskilled...
बालिग होने पर पीड़िता से निकाह करना बलात्कार के अपराध को खत्म नहीं करता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा कि यदि किसी अभियुक्त ने नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार जैसा जघन्य अपराध किया है तो लड़की के बालिग होने के बाद उससे शादी या निकाह कर लेने से अभियुक्त का आपराधिक दायित्व समाप्त नहीं हो जाता।अदालत ने स्पष्ट किया कि बाद में की गई शादी उस समय किए गए अपराध को नहीं मिटा सकती, जब पीड़िता नाबालिग है।भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत दर्ज मामले में जमानत याचिका खारिज करते हुए जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कड़ी टिप्पणी की।उन्होंने...
नाबालिग की अश्लील सामग्री ऑनलाइन डालना गंभीर अपराध, नुकसान सजा से कहीं अधिक: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि नाबालिग की अश्लील तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डालना बेहद गंभीर अपराध है, जिसका प्रभाव केवल कानूनी सजा तक सीमित नहीं रहता बल्कि पीड़िता के जीवन पर गहरा और स्थायी असर डालता है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार किया।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा कि डिजिटल युग में एक बार ऐसी सामग्री इंटरनेट पर अपलोड हो जाए तो वह तेजी से फैल जाती है और उस पर नियंत्रण पाना लगभग असंभव हो जाता है।अदालत ने कहा,“ऐसी हरकतों...
सबूतों की कड़ी अधूरी, केवल संदेह पर नहीं हो सकती सजा: गुजरात हाईकोर्ट ने मर्डर केस में फांसी की सजा रद्द की
गुजरात हाईकोर्ट ने एक दोहरे हत्या मामले में सुनाई गई फांसी की सजा रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस और निर्णायक सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला “संदेह, अनुमान और कल्पना” पर आधारित था, जो कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ ने पाया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित नहीं की जा सकी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को...
यदि मुकदमा चल रहा हो तो लंबी हिरासत भर से नहीं मिलेगी जमानत: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल लंबे समय तक जेल में रहना जमानत देने का आधार नहीं बन सकता यदि मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी हो और आगे बढ़ रही हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि देरी के आधार पर जमानत देने वाले पुराने फैसले उन मामलों पर लागू होते हैं जहां ट्रायल शुरू ही नहीं हुआ था।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस वाई. जी. खोबरागड़े ने एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज की, जो जुलाई, 2019 से हिरासत में है। आरोपी ने तर्क दिया कि वह छह साल से अधिक समय से जेल में है और अभी तक मुकदमे का...
मंत्रियों को रोज़ जनता से वीडियो के ज़रिए मिलने का आदेश नहीं दे सकता कोर्ट: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश देने से इनकार किया कि सभी केंद्रीय मंत्री रोज़ाना कम-से-कम दो घंटे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनता की शिकायतें सुनें। अदालत ने कहा कि ऐसी नीति बनाना कार्यपालिका का अधिकार क्षेत्र है और इसे अदालत के आदेश से लागू नहीं कराया जा सकता।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की मांग सीधे तौर पर नीति निर्माण से जुड़ी है जो पूरी तरह सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।अदालत ने कहा,“नीतियां बनाना, प्रशासनिक...
अम्बेडकरवाद - सिद्धांत में स्वीकृत, व्यवहार में अस्वीकृत?
वर्तमान आधुनिक भारतीय राजनीतिक प्रक्रिया में सिद्धांत रूप में अम्बेडकरवाद स्वीकार्य है। हालांकि, व्यवहार में यह समस्याग्रस्त है। अब तक, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को जाति के हिंदुओं से लेकर ओबीसी और दलितों तक कई लोगों द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार विनियोजित किया गया है। यह घटना केवल अंबेडकर तक ही सीमित नहीं है। हम इसे इस बात में देखते हैं कि कैसे परम नास्तिक और साम्यवादी क्रांतिकारी, भगत सिंह का उपयोग उनकी विचारधारा के बिल्कुल विपरीत ताकतों द्वारा किया जा रहा है। आज, कोई भी पिछले नेताओं की एक श्रृंखला...
झूठे दावे पर फटकार: हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की खारिज, लगाया 5 हजार का जुर्माना
राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रामक और गलत जानकारी के आधार पर दायर की गई अवमानना याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रवि चिरानिया ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अदालत के पूर्व आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।याचिकाकर्ता का दावा था कि समन्वय पीठ ने राजस्व मंडल के पंजीयक को उसे शिक्षा विभाग से राजस्व विभाग में स्थानांतरित करने का निर्देश...
1/3 सजा पूरी करने वाले अंडरट्रायल को रिहाई दें: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आदेश देते हुए कहा कि जिन अंडरट्रायल कैदियों ने संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा पूरा कर लिया है, उन्हें राहत दी जानी चाहिए।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने यह निर्देश धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए दिया।अदालत ने आदेश की प्रति जिला एवं सेशन जजों, जेल महानिदेशक, दिल्ली हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति और दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए।मामले में आरोपी पर खुद को...
बिना प्रक्रिया बैंक अकाउंट फ्रीज करना गैरकानूनी: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना लगाया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना बैंक अकाउंट अटैच करना संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने इस मामले में संबंधित अधिकारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें राज्य कर विभाग द्वारा 23 जनवरी, 2026 को जारी बैंक अकाउंट की अस्थायी अटैचमेंट आदेश को चुनौती दी गई।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि बिना कोई ठोस आधार बनाए, बिना उचित कारण...
छात्रा से यौन संबंध की मांग के आरोपी प्रोफेसर को राहत नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रोफेसर की जमानत याचिका खारिज की, जिस पर अपनी ही छात्रा से यौन संबंध बनाने का दबाव डालने और आपत्तिजनक संदेश भेजने के गंभीर आरोप हैं। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों का समर्थन करते हैं।जस्टिस निखिल एस. करियल ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी द्वारा यौन कृपा की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जो अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं।अदालत ने चार्जशीट, पीड़िता के बयान और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने विशेष रूप से उस माफी...


















