हाईकोर्ट

IRCTC घोटाला: दिल्ली हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की चार्ज फ्रेमिंग के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया
IRCTC घोटाला: दिल्ली हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की चार्ज फ्रेमिंग के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें कथित IRCTC घोटाले मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने को चुनौती दी गई।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने CBI से जवाब मांगा और मामले की सुनवाई के लिए 14 जनवरी की तारीख तय की।यादव की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पेश हुए। CBI की तरफ से सीनियर एडवोकेट और SPP डीपी सिंह पेश हुए।13 अक्टूबर, 2025 को पारित आदेश में ट्रायल कोर्ट ने यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे...

आपराधिक शिकायत की वापसी का विरोध करने का तीसरे पक्ष को अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
आपराधिक शिकायत की वापसी का विरोध करने का तीसरे पक्ष को अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक शिकायत की वापसी का विरोध करने का अधिकार किसी ऐसे तीसरे पक्ष को नहीं है, जो न तो पीड़ित हो और न ही स्वयं शिकायतकर्ता।अदालत ने कहा कि ऐसा कोई व्यक्ति आपराधिक कार्यवाही को पुनर्जीवित कराने का दावा नहीं कर सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें एक निजी शिकायत को वापस लेने की अनुमति दी गई थी।अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की याचिकाओं को सहज रूप से स्वीकार किया गया तो कोई भी...

प्रथम दृष्टया भारतीय नागरिकता स्थापित: बांग्लादेशी माता-पिता होने के आरोप के बावजूद गुजरात हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी
प्रथम दृष्टया भारतीय नागरिकता स्थापित: बांग्लादेशी माता-पिता होने के आरोप के बावजूद गुजरात हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी

गुजरात हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को नियमित जमानत प्रदान की, जिस पर बांग्लादेशी माता-पिता होने के बावजूद अवैध रूप से भारतीय पासपोर्ट प्राप्त करने का आरोप लगाया गया था।न्यायालय ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी पासपोर्ट के आधार पर आरोपी ने प्रथम दृष्टया अपनी भारतीय नागरिकता स्थापित की है।जस्टिस निखिल एस. करियल ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध मुख्य आरोप यह है कि वह भारतीय नागरिक नहीं है। हालांकि रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता के पास भारतीय पासपोर्ट है, जिसे जाली नहीं...

NDPS मामले में आरोपी होने पर वाहन के पंजीकृत मालिक को अंतरिम सुपुर्दगी का अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
NDPS मामले में आरोपी होने पर वाहन के पंजीकृत मालिक को अंतरिम सुपुर्दगी का अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी NDPS (मादक पदार्थ) मामले में जब्त किए गए वाहन का पंजीकृत मालिक स्वयं उसी मामले में आरोपी है तो केवल स्वामित्व के आधार पर उसे वाहन की अंतरिम सुपुर्दगी (सुपरदारी) नहीं दी जा सकती।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा वाहन की अंतरिम रिहाई से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई।FIR के अनुसार संबंधित वाहन से लगभग 52 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किया गया। उक्त वाहन का पंजीकृत मालिक याचिकाकर्ता...

सड़क पर पैदल चलने वाले और मवेशी हों तो वाहन की गति धीमी करना अनिवार्य; ऐसा न करना लापरवाही: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
सड़क पर पैदल चलने वाले और मवेशी हों तो वाहन की गति धीमी करना अनिवार्य; ऐसा न करना लापरवाही: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक घातक सड़क दुर्घटना मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा है कि जब सड़क पर पैदल यात्री और मवेशी चल रहे हों, तो चालक का कर्तव्य है कि वह वाहन की गति कम करे और सावधानी से ड्राइव करे। ऐसी स्थिति में गति कम न करना और सावधानी न बरतना लापरवाही (नेग्लिजेंस) माना जाएगा।जस्टिस राकेश कैंथला ने टिप्पणी की कि—“ड्राइवर को वाहन इस तरह चलाना चाहिए कि किसी व्यक्ति या जानवर को चोट न पहुँचे… वर्तमान मामले में आरोपी ने सड़क पर मवेशियों और लोगों की आवाजाही के बावजूद वाहन धीमा नहीं...

युवा लिव-इन जोड़े को संरक्षण, लेकिन कम उम्र में लिए गए जीवन निर्णयों के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर एमपी हाईकोर्ट की चेतावनी
युवा लिव-इन जोड़े को संरक्षण, लेकिन कम उम्र में लिए गए जीवन निर्णयों के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर एमपी हाईकोर्ट की चेतावनी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 20-20 वर्ष के एक लिव-इन जोड़े को पुलिस संरक्षण प्रदान करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत अधिकारों का अस्तित्व होना और हर परिस्थिति में उनका प्रयोग करना दोनों अलग-अलग बातें हैं।जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि यद्यपि वयस्क व्यक्तियों को अपनी इच्छा से रहने का अधिकार है, लेकिन कम उम्र में माता-पिता से अलग स्वतंत्र जीवन चुनने के गंभीर सामाजिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं जिन पर युवाओं को गंभीरता से विचार करना...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित हेरफेर के मामले में JEE स्टूडेंट्स की याचिका खारिज की, एक माह की सामुदायिक सेवा करने का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित हेरफेर के मामले में JEE स्टूडेंट्स की याचिका खारिज की, एक माह की सामुदायिक सेवा करने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने JEE (मेन) 2025 परीक्षा में उत्तर पत्रक में कथित हेरफेर को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के निष्कर्षों को चुनौती देने वाले दो स्टूडेंट्स की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने उन पर लगाए गए 30,000- 30,000 के जुर्माने को हटाते हुए केवल फटकार लगाई और एक माह की सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सिंगल जज के 22 सितंबर, 2025 के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन दंड को सीमित करते हुए स्टूडेंट्स को क्रमशः वृद्धाश्रम और...

कैडर समाप्ति के आधार पर पात्र कर्मचारी को वर्क-चार्ज लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
कैडर समाप्ति के आधार पर पात्र कर्मचारी को वर्क-चार्ज लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी के पक्ष में वर्क-चार्ज (Work-Charged) दर्जा पाने का अधिकार पहले ही उत्पन्न हो चुका है तो बाद में वर्क-चार्ज कैडर/स्थापना को समाप्त किए जाने के आधार पर राज्य सरकार उसे उक्त लाभ से वंचित नहीं कर सकती।जस्टिस रंजन शर्मा ने अपने फैसले में कहा,“जब याचिकाकर्ता ने 01.01.2003 से आठ वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण कर वर्क-चार्ज दर्जा पाने का अधिकार अर्जित कर लिया था, तब अगस्त 2005 में वर्क-चार्ज स्थापना को समाप्त किए जाने को ऐसा आधार नहीं बनाया जा सकता,...

दुर्भाग्यपूर्ण: दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालतों में अंधाधुंध स्थगन की संस्कृति पर जताई चिंता, भविष्य में बदलाव की जताई उम्मीद
दुर्भाग्यपूर्ण: दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालतों में अंधाधुंध स्थगन की संस्कृति पर जताई चिंता, भविष्य में बदलाव की जताई उम्मीद

दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालतों में बार-बार और बिना ठोस कारण के स्थगन मांगे जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।न्यायालय ने कहा कि समय के साथ एक ऐसी संस्कृति विकसित हो गई है, जिसमें यह गलत अपेक्षा बन गई कि किसी भी मामले में केवल मांग करने पर ही स्थगन मिल जाएगा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें आशा है कि भविष्य में अदालतों में स्थगन मांगने की यह प्रवृत्ति बदलेगी।उन्होंने कहा कि स्थगन इस तरह मांगे जा रहे हैं, जैसे यह एक स्वाभाविक...

पहला प्रमोशन छोड़ देने वाला कर्मचारी एक साल के अंदर उस पर दोबारा विचार करने का दावा नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
पहला प्रमोशन छोड़ देने वाला कर्मचारी एक साल के अंदर उस पर दोबारा विचार करने का दावा नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जूनियर असिस्टेंट इंदु शर्मा की रिट याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने भाषा और संस्कृति विभाग में अपने जूनियर्स को सीनियर असिस्टेंट के पद पर प्लेसमेंट और प्रमोशन को चुनौती दी थी।जस्टिस रंजन शर्मा ने टिप्पणी की:“अगर किसी कर्मचारी को ऊंचे पद पर प्रमोट किया जाता है और वह कर्मचारी अपना प्रमोशन लेने से मना कर देता है या छोड़ देता है तो उस कर्मचारी पर पहले प्रमोशन से मना करने की तारीख से एक साल की अवधि तक या जब तक अगली वैकेंसी नहीं आती, जो भी बाद में हो, तब तक दोबारा...

मद्रास हाईकोर्ट ने DGCA से पूछा — क्या इंडिगो को थकान प्रबंधन मानकों से मिली छूट बढ़ाई जाएगी?
मद्रास हाईकोर्ट ने DGCA से पूछा — क्या इंडिगो को थकान प्रबंधन मानकों से मिली छूट बढ़ाई जाएगी?

मद्रास हाईकोर्ट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) से यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि क्या इंडिगो एयरलाइंस का संचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड को थकान संबंधी (Fatigue) मानकों के पालन से दी गई छूट को आगे भी बढ़ाया जाएगा। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायण ने चेन्नई निवासी द्वारा दायर एक याचिका पर DGCA से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें इस छूट को अवैध, निरस्त करने योग्य और नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (CAR) के अनुरूप नहीं बताया गया है।अदालत ने आदेश में कहा,“श्री ए.आर.एल. सुंदरसन ने यह...

स्टाम्प शुल्क निर्धारण के लिए यूपी जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
स्टाम्प शुल्क निर्धारण के लिए यूपी जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत भूमि के बाजार मूल्य का निर्धारण करने के लिए उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (UPZALR Act) को आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि दोनों कानूनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं। जमींदारी उन्मूलन अधिनियम स्टांप शुल्क निर्धारण को नियंत्रित नहीं करता।जस्टिस सैयद क़मर हसन रिज़वी ने यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि UPZALR Act के तहत धारा 143 की अधिसूचना अधिकतम एक सहायक कारक हो सकती है, लेकिन इसके आधार पर ही...

लापरवाही नेकनीयती नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कम कोर्ट फीस जमा करने के लिए समय बढ़ाने की याचिका खारिज की
लापरवाही नेकनीयती नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कम कोर्ट फीस जमा करने के लिए समय बढ़ाने की याचिका खारिज की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सतीश कुमार की याचिका खारिज की और ट्रायल कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार किया, जिसमें स्पेसिफिक परफॉर्मेंस के डिक्री में कम कोर्ट फीस जमा करने के लिए समय बढ़ाने से मना कर दिया गया।कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता नेकनीयती के कारण या लापरवाही न होने की बात साबित करने में नाकाम रहा। इसलिए वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत विवेकाधीन राहत का हकदार नहीं है।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की,“आवेदन के साथ कोई भी दस्तावेज़ नहीं लगाया गया या यह दिखाने के लिए कोई...

सर्विस रिकॉर्ड के बिना खराब प्रतिष्ठा के आधार पर लगाए गए आरोपों से समय से पहले रिटायरमेंट का आदेश कायम नहीं रह सकता: जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट
सर्विस रिकॉर्ड के बिना खराब प्रतिष्ठा के आधार पर लगाए गए आरोपों से समय से पहले रिटायरमेंट का आदेश कायम नहीं रह सकता: जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी को सिर्फ़ उसकी खराब प्रतिष्ठा के बारे में अस्पष्ट और बिना सबूत के आरोपों के आधार पर समय से पहले रिटायर नहीं किया जा सकता, खासकर जब ऐसे ऑब्ज़र्वेशन सर्विस रिकॉर्ड के किसी ठोस सबूत से समर्थित न हों।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने समय से पहले रिटायरमेंट का आदेश रद्द करने वाले रिट कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।कोर्ट ने अपने सामने रखे गए रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि स्क्रीनिंग कमेटी और सक्षम अथॉरिटी ने कर्मचारी के FIR में...

प्रतीक्षा सूची में नाम होने से नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं बनता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रतीक्षा सूची में नाम होने से नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं बनता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल अभ्यर्थी को नियुक्ति का कोई पूर्ण या अटल अधिकार प्राप्त नहीं होता और न ही किसी चयन प्रक्रिया की प्रतीक्षा सूची को अनिश्चित काल तक जीवित रखा जा सकता है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने यह टिप्पणी सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) भर्ती से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि प्रतीक्षा सूची केवल सीमित अवधि और सीमित उद्देश्य के लिए होती है और इससे नियुक्ति का स्वतः अधिकार उत्पन्न...

विदेशी आय को सीधे भारतीय मुद्रा में बदलकर भरण–पोषण तय नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
विदेशी आय को सीधे भारतीय मुद्रा में बदलकर भरण–पोषण तय नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हालिया फैसले में स्पष्ट किया कि पति की विदेशी आय को यांत्रिक तरीके से भारतीय मुद्रा में परिवर्तित कर पत्नी के भरण–पोषण की राशि तय नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पति विदेश में कमाता है, उसकी आय को सीधे रुपये में बदलकर भारतीय अदालतों द्वारा विकसित फार्मूलों को लागू करना उचित नहीं होगा जब तक कि मामले की परिस्थितियों पर समुचित रूप से विचार न किया जाए।जस्टिस अमित महाजन ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें पति और पत्नी दोनों ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती...

दिल्ली हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए जॉन डो ऑर्डर पास किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए जॉन डो ऑर्डर पास किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री पवन कल्याण के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए एक जॉन डो अंतरिम आदेश पारित किया।जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि प्रतिवादी कल्याण के नाम, शक्ल, आवाज़ और इमेज का इस्तेमाल उनकी सहमति के बिना, सीधे या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिए, कमर्शियल फायदे के लिए सामान बेचने के लिए कर रहे थे।कोर्ट ने कहा कि उल्लंघन करने वाले प्रतिवादियों द्वारा उनकी विशेषताओं का ऐसा अनधिकृत इस्तेमाल, पहली नज़र में, कल्याण के पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन है।इसमें...

पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिले अनुभव को हेडमास्टर पद के लिए एलिजिबिलिटी में नहीं गिना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिले अनुभव को हेडमास्टर पद के लिए एलिजिबिलिटी में नहीं गिना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिला अनुभव रेगुलर टीचर के अनुभव के बराबर नहीं है। ऐसी पार्ट-टाइम सर्विस उम्मीदवार को हेडमास्टर के पद पर नियुक्ति के लिए तब तक एलिजिबल नहीं बनाएगी, जब तक कि कानून में खास तौर पर इसका प्रावधान न हो।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“अगर भर्ती के नियमों में खास तौर पर रेगुलर सर्विस में असिस्टेंट टीचर के तौर पर टीचिंग अनुभव की ज़रूरत है तो सिर्फ़ पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर हासिल किया गया अनुभव, जिसमें परमानेंट होने, प्रशासनिक...