खतरनाक पेड़ काटने के लिए मालिक को नोटिस जरूरी नहीं: केरल हाइकोर्ट 92 वर्षीय बुजुर्ग को 9 साल बाद राहत
Amir Ahmad
11 Feb 2026 6:02 PM IST

केरल हाइकोर्ट ने एक बेहद मानवीय और सख्त टिप्पणी के साथ यह स्पष्ट किया कि यदि कोई पेड़ लोगों की जान और संपत्ति के लिए खतरा बन चुका है तो नगर निगम का सचिव मालिक को नोटिस दिए बिना भी ऐसे पेड़ों को कटवा सकता है। यह अधिकार केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट 1994 की धारा 412(2) के तहत दिया गया।
जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने यह राहत एक 92 वर्षीय बुजुर्ग को देते हुए दी, जो पिछले 9 वर्षों से अपने पड़ोसी की जमीन पर खड़े खतरनाक पेड़ों को कटवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे।
कोर्ट ने इस पूरे मामले में प्रशासनिक उदासीनता पर गहरी नाराजगी जाहिर की।
जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने बेहद तल्ख शब्दों में कहा,
“यह स्थिति बेहद शर्मनाक है। एक रिहायशी मकान की ओर झुके खतरनाक पेड़ को हटवाने के लिए एक नागरिक को संविधानिक अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। यह नगर निगम अधिकारियों के लिए शर्म की बात है।
याचिकाकर्ता ने यह लड़ाई तब शुरू की थी, जब वे 80 वर्ष के थे। उनकी पहली शिकायत 06.06.2017 को दी गई थी। आज वे 90 वर्ष पार कर चुके हैं और उनकी लड़ाई अब भी जारी है।”
कोर्ट ने आगे कहा,
“इस देश की नौकरशाही को ऐसे बुजुर्गों के सामने अपना सिर झुकाना चाहिए, न कि उन्हें सालों तक परेशान करना चाहिए। यदि नौकरशाही विफल होती है तो संविधानिक अदालतों को हस्तक्षेप करना ही पड़ता है। यह इस कोर्ट का कर्तव्य है कि इस बुजुर्ग की पीड़ा का समाधान हो।”
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनकी जमीन से सटी हुई पड़ोसी संपत्ति में घने पेड़, झाड़ियां और वनस्पतियां हैं जहां सांप, चमगादड़ और अन्य जीव-जंतु पाए जाते हैं। सीमा पर खड़े दो बड़े पेड़ों की जड़ें और शाखाएं उनके घर की नींव बेसमेंट और पानी की टंकी तक पहुंच चुकी हैं। इससे दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, भवन कमजोर हो गया है और पानी व सीवेज पाइपलाइन भी बाधित हो रही है।
2017 में बुजुर्ग ने राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) से शिकायत की, जिसके बाद गांव अधिकारी की जांच के आधार पर निगम सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के हस्तक्षेप से भी शिकायत सही पाई गई लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
2021 में जिला कलेक्टर ने निगम सचिव को तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। कुछ मजदूर भेजे गए जिन्होंने झाड़ियां तो साफ कीं लेकिन खतरनाक पेड़ों को नहीं काटा गया। बार-बार आदेशों के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बुजुर्ग को आखिरकार हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
पड़ोसी संपत्ति की मालिक ने कोर्ट में कहा कि संपत्ति विवाद में फंसी हुई और कुर्क है, इसलिए वे वहां कोई काम नहीं कर सकतीं।
इस पर कोर्ट ने केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट की धारा 412(2) का हवाला देते हुए कहा कि आपात स्थिति में निगम सचिव को बिना नोटिस दिए भी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया,
“जब तत्काल कार्रवाई जरूरी हो, तब निगम सचिव का यह कर्तव्य है कि वह बिना नोटिस दिए खतरनाक पेड़ों को काटे या हटाए। मौजूदा मामले में यह साफ है कि पेड़ बेहद खतरनाक स्थिति में हैं।”
अंततः केरल हाइकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि सभी खतरनाक पेड़ों को एक महीने के भीतर काटकर हटाया जाए। साथ ही जिला कलेक्टर और RDO को निर्देश दिया गया कि वे स्वयं निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि निगम सचिव कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन करे।

