प्रॉक्सी वकीलों की लापरवाह पेशी पर दिल्ली हाइकोर्ट सख्त, युवा वकीलों से फाइल पढ़कर आने की अपील
Amir Ahmad
11 Feb 2026 5:58 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने अदालत में बिना तैयारी के पेश होने वाले प्रॉक्सी वकीलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए युवा वकीलों से आग्रह किया कि वे मामले की फाइल और ब्रीफ पढ़कर ही पेश हों। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल नाम मात्र की पेशी से न्यायिक प्रक्रिया में कोई सार्थक मदद नहीं मिलती।
जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें पत्नी ने अपने पति के खिलाफ अपील दायर की थी।
कोर्ट के समक्ष कार्यालय रिपोर्ट से यह सामने आया कि अपील पिछले दो वर्षों से लंबित है और पत्नी की ओर से नोटिस की सेवा पूरी कराने के लिए कोई आवश्यक कदम ही नहीं उठाए गए।
सुनवाई के दौरान पत्नी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि वह केवल प्रॉक्सी काउंसिल हैं और उन्हें न तो मामले के तथ्यों की जानकारी है और न ही यह पता है कि नोटिस की सेवा पूरी करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जानी थी।
इस रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए खंडपीठ ने कहा,
“एडवोकेट एक्ट, 1961 की व्यवस्था के अनुसार ऐसा प्रॉक्सी वकील जिसे मामले के तथ्यों की जानकारी ही न हो वह कोर्ट की प्रभावी सहायता नहीं कर सकता। जो भी वकील अदालत में पेश होता है, उससे कम से कम इतना अपेक्षित है कि वह मामले की प्रारंभिक स्थिति और कार्यवाही के चरण से अवगत हो।”
कोर्ट ने आगे कहा,
“इस पेशे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह अदालत उम्मीद करती है कि बार के युवा सदस्य अदालत में पेश होने से पहले फाइल पढ़ने पर उचित ध्यान देंगे और अपने ब्रीफ को उस गंभीरता और तैयारी के साथ लेंगे जिसकी यह जिम्मेदारी मांग करती है।”
अंत में दिल्ली हाइकोर्ट ने पत्नी की ओर से पेश वकील से कहा कि वह मामले की फाइल और संबंधित कानूनी प्रावधानों का अध्ययन करें ताकि आगे की सुनवाई में कोर्ट को प्रभावी सहायता मिल सके।

