फर्जी फैमिली ट्रस्ट विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने प्रिया कपूर की याचिका पर जारी किया नोटिस
Amir Ahmad
11 Feb 2026 1:47 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर की ओर से दायर उस याचिका पर बुधवार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने अपनी सास रानी कपूर द्वारा दायर मुकदमे को खारिज करने की मांग की।
रानी कपूर ने आरोप लगाया कि प्रिया कपूर समेत अन्य लोगों ने एक फर्जी फैमिली ट्रस्ट बनाकर उन्हें उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत से अवैध रूप से वंचित किया।
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने रानी कपूर को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा गया कि यदि कोई प्रत्युत्तर दाखिल किया जाना हो तो वह दो सप्ताह के भीतर दायर किया जाए।
प्रिया कपूर की ओर से यह नई याचिका सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत दाखिल की गई। इसमें कहा गया कि रानी कपूर का मुकदमा अदालत की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है। उन्होंने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर तथा गलत बयान देकर कोर्ट के साथ धोखाधड़ी की।
कोर्ट ने प्रिया कपूर की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 279 सहपठित धारा 227 के तहत दायर एक अन्य आवेदन पर भी नोटिस जारी किया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
प्रिया कपूर की ओर से सीनियर एडवोकेट अखिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखा।
गौरतलब है कि 29 जनवरी को हाइकोर्ट ने इस मामले में प्रिया कपूर और एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ दायर मुकदमे में समन जारी किए।
80 वर्षीय रानी कपूर ने अपने मुकदमे में आरोप लगाया कि आरके फैमिली ट्रस्ट/रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट पूरी तरह से फर्जी, अवैध और शून्य है। उनका दावा है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत को इस ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया गया।
रानी कपूर के अनुसार यह कथित धोखाधड़ी उन्हें अपने बेटे संजय कपूर के निधन के बाद ही पता चली। संजय कपूर का निधन 12 जून, 2025 को हुआ था।
इस मुकदमे में कुल 23 प्रतिवादियों को पक्षकार बनाया गया, जिनमें प्रिया कपूर उनके बेटे अजारियस कपूर करिश्मा कपूर के बच्चे समायरा कपूर और कियान कपूर, रानी कपूर की बेटी मंधीरा कपूर स्मिथ और उनके दो बच्चे शामिल हैं।
मुकदमे के अनुसार रानी कपूर अपने दिवंगत पति डॉ. सुरिंदर कपूर की एकमात्र उत्तराधिकारी और लाभार्थी हैं। डॉ. सुरिंदर कपूर, सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के प्रवर्तक थे। उनका निधन जून, 2015 में हुआ था। उन्होंने 6 फरवरी, 2013 को एक वसीयत बनाई थी, जिसके तहत उनकी पूरी संपत्ति जिसमें सोना ग्रुप की विभिन्न कंपनियों में हिस्सेदारी भी शामिल थी, रानी कपूर को मिली थी।
रानी कपूर ने कहा कि इस वसीयत को जनवरी, 2016 में बॉम्बे हाइकोर्ट से प्रोबेट भी मिल चुका था। उनके तीनों बच्चों ने इसके लिए अनापत्ति दी थी।
इसके बावजूद उनके अनुसार कई वर्षों तक अवैध लेन-देन के जटिल जाल के ज़रिये उनकी संपत्तियों को हटाकर अक्टूबर, 2017 के आसपास कथित रूप से बनाए गए आरके फैमिली ट्रस्ट में डाल दिया गया।
रानी कपूर ने यह भी आरोप लगाया कि संजय कपूर के निधन के तुरंत बाद उनकी बहू प्रिया कपूर ने तेज़ी से सोना ग्रुप की प्रमुख कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की।
उन्होंने बिना जानकारी या परामर्श के अंतिम संस्कार के कुछ ही दिनों के भीतर खुद को निदेशक और प्रबंध निदेशक जैसे पदों पर नियुक्त करवा लिया।
मुकदमे में यह भी कहा गया कि कंपनी से जुड़ी जानकारियों तक रानी कपूर की पहुंच रोक दी गई। इसके लिए यह झूठा दावा किया गया कि उनका ईमेल अकाउंट हैक हो गया, जबकि उनकी जानकारी के बिना एक नया ईमेल आईडी बनाकर ट्रस्ट और कंपनी प्रबंधन से जुड़े अहम बदलाव किए गए।
आरके फैमिली ट्रस्ट को अवैध, फर्जी और अपंजीकृत बताते हुए रानी कपूर ने अदालत से मांग की कि उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत को उसी स्थिति में बहाल किया जाए, जैसी वह इस विवादित ट्रस्ट के गठन से पहले थी।
उल्लेखनीय है कि इसी पारिवारिक विवाद से जुड़े एक अन्य मामले में दिल्ली हाइकोर्ट अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा कपूर और उनके भाई द्वारा अपने दिवंगत पिता की व्यक्तिगत संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर मांगी गई ,अंतरिम राहत पर आदेश सुरक्षित रख चुका है।

