हाईकोर्ट

उधार लेने वाला विभाग, बिना पूरी विभागीय जांच किए अनुपयुक्तता के आधार पर प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारी को वापस भेज सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
उधार लेने वाला विभाग, बिना पूरी विभागीय जांच किए अनुपयुक्तता के आधार पर प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारी को वापस भेज सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की याचिका खारिज करते हुए, जिसमें उसने अपने मूल विभाग में समय से पहले वापस भेजे जाने को चुनौती दी थी, यह टिप्पणी की कि किसी सरकारी कर्मचारी को उसके मूल विभाग में वापस भेजना, केवल सक्षम अधिकारी की संतुष्टि के आधार पर भी वैध है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच इस बात पर विचार कर रही थी कि क्या याचिकाकर्ता के निर्धारित विस्तारित कार्यकाल को समय से पहले खत्म करना एक 'कलंकपूर्ण दंड' (Stigmatic Punishment) माना जाएगा, जिसके लिए एक पूरी तरह से विभागीय जाँच की...

S.133 CrPC | उपद्रव हटाने की कार्यवाही में पेश किया गया साक्ष्य विश्वसनीय होना चाहिए, न कि निर्णायक प्रकृति का: इलाहाबाद हाईकोर्ट
S.133 CrPC | उपद्रव हटाने की कार्यवाही में पेश किया गया साक्ष्य विश्वसनीय होना चाहिए, न कि निर्णायक प्रकृति का: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि CrPC की धारा 133 के तहत परेशानी हटाने की कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है और इसमें कथित परेशानी से जुड़े आवेदन पर फैसला करने के लिए "कोई भी भरोसेमंद सबूत" चाहिए होता है, न कि निर्णायक सबूत।जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II ने फैसला दिया,"CrPC की धारा 133 के तहत कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है। इसका मकसद सार्वजनिक शांति और अमन को होने वाले आसन्न खतरे के मामलों से निपटना होता है। इसका इस्तेमाल—या बल्कि दुरुपयोग—किसी संपत्ति के मालिक के कीमती अधिकार को खत्म...

कोलकाता प्राइड और संवैधानिक चौराहे: विधायी चुप्पी और बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच LGBTQ+ अधिकार
कोलकाता प्राइड और संवैधानिक चौराहे: विधायी चुप्पी और बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच LGBTQ+ अधिकार

कोलकाता रेनबो प्राइड वॉक, जो भारत में अपनी तरह का सबसे पुराना है, दृश्यता के दावे से लगातार एक आवर्ती संवैधानिक क्षण में बदल गया है। इसका समकालीन महत्व केवल प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति में नहीं है, बल्कि जिस तरह से यह भारतीय संविधानवाद के भीतर एलजीबीटीक्यू + अधिकारों की संरचनात्मक अपूर्णता को उजागर करता है। संबंधों की संबंधित विधायी मान्यता के बिना पहचान की न्यायिक मान्यता के मद्देनजर, कोलकाता में गर्व को औपचारिक संवैधानिक गारंटी और उनके अधूरे संस्थागत प्राप्ति के बीच स्थित एक सीमित स्थान पर कब्जा...

ज़मानत पर विचार करते समय अपीलीय अदालत केवल BNSS की धारा 430 की व्याख्या निर्देशात्मक के रूप में नहीं कर सकती: उत्तराखंड हाईकोर्ट
ज़मानत पर विचार करते समय अपीलीय अदालत केवल BNSS की धारा 430 की व्याख्या निर्देशात्मक के रूप में नहीं कर सकती: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि वैधानिक आपराधिक अपील में सज़ा के निलंबन और ज़मानत के आवेदन पर विचार करते समय अपीलीय अदालत को केवल इस बात की व्याख्या करने के बजाय कि BNSS की धारा 430(1) निर्देशात्मक है या अनिवार्य, दोषसिद्धि के गुण-दोष की जांच करना आवश्यक है।अदालत ने टिप्पणी की कि एक बार जब दोषसिद्धि के खिलाफ अपील स्वीकार की जाती है तो अपीलीय अदालत को यह जांच करनी चाहिए थी कि दोषसिद्धि गलत थी या नहीं, और ऐसा न कर पाना न्यायिक विवेक का उपयोग न करने को दर्शाता है।जस्टिस राकेश थपलियाल, रुड़की...

हाईकोर्ट अपनी पुनरीक्षण अधिकारिता में भरण-पोषण की राशि बढ़ा या घटा नहीं सकता, इसका उपाय BNSS की धारा 146 के तहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
हाईकोर्ट अपनी पुनरीक्षण अधिकारिता में भरण-पोषण की राशि बढ़ा या घटा नहीं सकता, इसका उपाय BNSS की धारा 146 के तहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अपनी पुनरीक्षण अधिकारिता के तहत किसी याचिका पर सुनवाई करते समय भरण-पोषण की राशि को सीधे तौर पर बढ़ा या घटा नहीं सकता।जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने टिप्पणी की कि बदली हुई परिस्थितियों के कारण भरण-पोषण भत्ते में संशोधन या बदलाव का उचित उपाय केवल BNSS की धारा 146 (CrPC की धारा 127) के तहत यह उपाय उसी अदालत के समक्ष किया जाना चाहिए जिसने मूल आदेश पारित किया था।अदालत ने टिप्पणी की कि पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते समय वह साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकती या...

अपवित्रीकरण और राज्य: तीन संवैधानिक सवाल, जिनका जवाब पंजाब के अपवित्रीकरण-विरोधी कानून ने नहीं दिया गया
अपवित्रीकरण और राज्य: तीन संवैधानिक सवाल, जिनका जवाब पंजाब के अपवित्रीकरण-विरोधी कानून ने नहीं दिया गया

पृष्ठभूमि"शास्त्र सर्वोच्च सत्ता का निवास है। - गुरु अर्जन देव जी, गुरु ग्रंथ साहिब जी, अंग 122620 अप्रैल 2026 को, पंजाब विधान सभा ने सर्वसम्मति से जगतजोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतकर (संशोधन) अधिनियम, 2026 को पारित किया, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब जी की श्रद्धा, अभिरक्षा और संरक्षण को नियंत्रित करने वाले मूलभूत 2008 क़ानून में संशोधन किया गया। सिखों के लिए, गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल एक शास्त्र नहीं है, यह जीवित, शाश्वत 11 वें गुरु हैं। प्रत्येक भौतिक प्रति, जिसे सरूप (जिसका अर्थ है 'अवस्था') कहा जाता...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या हानिकारक उपचार का संरक्षण? चिलीज निर्णय पर एक आलोचनात्मक दृष्टि
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या हानिकारक उपचार का संरक्षण? चिलीज निर्णय पर एक आलोचनात्मक दृष्टि

अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने 2026 में चिलीज बनाम सालजर मामले में 8-1 के बहुमत से एक ऐसा निर्णय सुनाया जिसने न केवल LGBTQ किशोरों के अधिकारों पर प्रश्नचिह्न लगाया, बल्कि चिकित्सा पेशे पर राज्य के नियामक अधिकार की जड़ों को भी हिला दिया। यह निर्णय कोलोराडो राज्य के उस कानून को असंवैधानिक घोषित करता है जो नाबालिगों पर 'कन्वर्जन थेरेपी' अर्थात मनोवैज्ञानिक वार्तालाप के माध्यम से व्यक्ति के यौन अभिविन्यास या लैंगिक पहचान को परिवर्तित करने के प्रयास पर प्रतिबंध लगाता था। प्रथम दृष्टि में यह मामला...

यूपी किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा करने वाले किरायेदार को कानून की प्रयोज्यता साबित करनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपी किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा करने वाले किरायेदार को कानून की प्रयोज्यता साबित करनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी किरायेदार को उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किरायेदारी, किराया और बेदखली का विनियमन) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत सुरक्षा पाने के लिए, उसे इस कानून की प्रयोज्यता (लागू होने) को साबित करना होगा।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने फैसला सुनाया,“जहां कोई किरायेदार यूपी अधिनियम संख्या 13, 1972 के प्रावधानों के तहत सुरक्षा चाहता है तो यह साबित करने का बोझ उस पक्ष पर होता है, जो अधिनियम की प्रयोज्यता का दावा कर रहा है। उसे उन बुनियादी तथ्यों को स्थापित करना...

0% उपस्थिति वाले स्टूडेंट अगले सेमेस्टर में एडमिशन नहीं मांग सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
0% उपस्थिति वाले स्टूडेंट अगले सेमेस्टर में एडमिशन नहीं मांग सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट को सीधे चौथे सेमेस्टर में प्रवेश देने से इनकार करने का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि जिस स्टूडेंट ने तीसरे सेमेस्टर में एक भी कक्षा में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई और परीक्षा भी नहीं दी, वह अगले सेमेस्टर में पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि 0 प्रतिशत उपस्थिति वाले स्टूडेंट्स की तुलना केवल कम उपस्थिति वाले छात्रों से नहीं की जा सकती।अदालत ने LLB स्टूडेंट अमन बंसल की अपील...

पूर्व और वर्तमान विधायकों को पेंशन-भत्ते देने वाला कानून वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती
पूर्व और वर्तमान विधायकों को पेंशन-भत्ते देने वाला कानून वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल (सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1980 की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि वर्तमान और पूर्व विधायकों तथा विधान परिषद सदस्यों को पेंशन, भत्ते और अन्य सुविधाएं देने पर संविधान में कोई रोक नहीं है।जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी नीतिगत बातें विधायिका के विवेक और निर्णय के दायरे में आती हैं और अदालत को केवल स्पष्ट...

जवाई में तेंदुओं के संरक्षण के लिए हाईकोर्ट सख्त, निर्माण और खनन पर रोक; अभयारण्य घोषित करने पर विचार के निर्देश
जवाई में तेंदुओं के संरक्षण के लिए हाईकोर्ट सख्त, निर्माण और खनन पर रोक; अभयारण्य घोषित करने पर विचार के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को लेकर बड़ा आदेश देते हुए इलाके में नए निर्माण और खनन गतिविधियों पर रोक लगाई। अदालत ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि पूरे क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जाए।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन, अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय संतुलन...

FIR दर्ज होने से पहले गिरफ्तारी मेमो पर केस नंबर होना गंभीर संदेह पैदा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने NDPS मामले में दी जमानत
FIR दर्ज होने से पहले गिरफ्तारी मेमो पर केस नंबर होना गंभीर संदेह पैदा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने NDPS मामले में दी जमानत

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि गिरफ्तारी मेमो और जब्ती सूची पर FIR दर्ज होने से पहले ही FIR नंबर अंकित हो तो इससे पूरी कार्रवाई संदिग्ध हो जाती है और गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया अवैध मानी जा सकती है।जस्टिस आशीष नैथानी ने NDPS Act की धाराओं 8, 21 और 60 के तहत दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।अभियोजन के अनुसार पुलिस टीम नियमित जांच और अपराध नियंत्रण ड्यूटी के दौरान मोटरसाइकिल...

सहन करना सहमति नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- आर्थिक और सामाजिक मजबूरियों में साथ रहना क्रूरता को खत्म नहीं करता
सहन करना सहमति नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- आर्थिक और सामाजिक मजबूरियों में साथ रहना क्रूरता को खत्म नहीं करता

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कई महिलाएं आर्थिक निर्भरता, सामाजिक दबाव, बच्चों की जिम्मेदारी, रहने की जगह की कमी और बदनामी के डर के कारण प्रताड़नापूर्ण वैवाहिक संबंधों में रहने को मजबूर होती हैं। ऐसे में केवल यह तथ्य कि पति-पत्नी कुछ वर्षों तक एक ही घर में रहे इससे क्रूरता के आरोप स्वतः खत्म नहीं हो जाते।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा,“एक ही घर में रहना हमेशा सौहार्दपूर्ण वैवाहिक जीवन का प्रमाण नहीं होता। कई बार यह प्रतिकूल परिस्थितियों में...

आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल समेत अन्य आरोपियों को मिली राहत के खिलाफ CBI की याचिका पर कल सुनवाई
आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल समेत अन्य आरोपियों को मिली राहत के खिलाफ CBI की याचिका पर कल सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज जैन मंगलवार को कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में CBI की उस याचिका पर सुनवाई करेंगे, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई राहत को चुनौती दी गई।यह मामला पहले जस्टिस स्वराना कांत शर्मा के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन रोस्टर के अनुसार इसे अब दूसरी पीठ को सौंप दिया गया। यह बदलाव उस समय हुआ जब जस्टिस शर्मा ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा, दुर्गेश पाठक और...

फाल्टा पुनर्मतदान से पहले तृणमूल प्रत्याशी जहांगीर खान पहुंचे हाईकोर्ट, दर्ज मामलों की जानकारी और संरक्षण की मांग
फाल्टा पुनर्मतदान से पहले तृणमूल प्रत्याशी जहांगीर खान पहुंचे हाईकोर्ट, दर्ज मामलों की जानकारी और संरक्षण की मांग

पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज सभी FIR की जानकारी देने और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी कठोर कार्रवाई से संरक्षण देने की मांग की।पूर्व एडवोकेट जनरल और सीनियर एडवोकेट किशोर दत्ता ने अदालत में मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान उनके मुवक्किल को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और हर दिन उनके खिलाफ नए आपराधिक मामले दर्ज...

आटा-साटा शादियां नैतिक और कानूनी रूप से दिवालिया हैं, बच्ची को सौदेबाजी का ज़रिया बनाया जाता है: राजस्थान हाईकोर्ट
'आटा-साटा' शादियां नैतिक और कानूनी रूप से दिवालिया हैं, बच्ची को सौदेबाजी का ज़रिया बनाया जाता है: राजस्थान हाईकोर्ट

तलाक की खारिज अर्जी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने "आटा-साटा" शादी की प्रचलित प्रथा के बारे में कुछ टिप्पणियां करते हुए राय दीं कि एक संवैधानिक लोकतंत्र में ऐसी प्रथाएं स्पष्ट सामाजिक और कानूनी अस्वीकृति की हकदार हैं।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की डिवीज़न बेंच ने माना कि नाबालिग से जुड़ा आटा-साटा कोई हानिरहित सांस्कृतिक प्रथा नहीं है, बल्कि यह बच्चों को वस्तु बना देती है, उनकी सहमति को दबा देती है, पितृसत्ता को मज़बूत करती है और भविष्य के टकरावों का...

वाराणसी इफ्तार विवाद | गंगा में मांसाहारी भोजन के अवशेष फेंकने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
वाराणसी इफ्तार विवाद | 'गंगा में मांसाहारी भोजन के अवशेष फेंकने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते 8 मुस्लिम पुरुषों की ज़मानत अर्ज़ियां मंज़ूर कीं। इन पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, गंगा नदी (वाराणसी में) में नाव पर मांसाहारी भोजन करने और बचा हुआ कचरा नदी में फेंकने का आरोप है।उसी दिन (15 मई) जारी अलग-अलग आदेशों में जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने 5 आरोपियों को ज़मानत दी, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने 3 आरोपियों को ज़मानत दी। इसके साथ ही इस मामले में कुल 14 आरोपियों में से 8 को अब ज़मानत मिल चुकी है।उल्लेखनीय है कि इस मामले में 14 आरोपियों में से 8 को अब...