हाईकोर्ट
छात्रा से यौन संबंध की मांग के आरोपी प्रोफेसर को राहत नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रोफेसर की जमानत याचिका खारिज की, जिस पर अपनी ही छात्रा से यौन संबंध बनाने का दबाव डालने और आपत्तिजनक संदेश भेजने के गंभीर आरोप हैं। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों का समर्थन करते हैं।जस्टिस निखिल एस. करियल ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी द्वारा यौन कृपा की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जो अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं।अदालत ने चार्जशीट, पीड़िता के बयान और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने विशेष रूप से उस माफी...
प्रतिकूल आदेश जज पर पक्षपात का आरोप लगाने या केस ट्रांसफर की मांग करने का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ कोई प्रतिकूल आदेश पारित हो जाने भर से अपने आप में किसी जज पर पूर्वाग्रह और पक्षपात का आरोप लगाने और केस ट्रांसफर की मांग करने का कोई आधार नहीं बन जाता।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने एक महिला द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें जज पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए आपराधिक वैवाहिक मामले को 'महिला कोर्ट' से किसी दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।शुरुआत में ही, कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता एक बार फिर उन्हीं मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रही थी, जिन्हें...
स्टूडेंट होने से पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इंजीनियरिंग स्टूडेंट को राहत देने से किया इनकार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करना एक कानूनी कर्तव्य है और वह सिर्फ़ इस आधार पर इस ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता कि वह एक स्टूडेंट है।जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की पीठ ने टिप्पणी की,"(पति) को यह दलील देने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह आर्थिक तंगी के कारण अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, जब तक कि वह कमाने में सक्षम है। न ही उसे इस आधार पर मुक्त किया जा सकता है कि वह एक स्टूडेंट है। शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद, पत्नी का...
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने का मामला: CBI का तर्क- अरविंद केजरीवाल की खुद को सुनवाई से हटाने की अर्जी मानना गलत मिसाल कायम करेगा
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सोमवार (13 अप्रैल) को दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों द्वारा दायर उन अर्जियों को स्वीकार करना, जिनमें शराब नीति मामले की सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग की गई, एक गलत मिसाल कायम करेगा।इससे पहले दिन में केजरीवाल ने खुद बहस करते हुए दावा किया कि उनके मन में यह वाजिब आशंका है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी। वह CBI की उस पुनर्विचार याचिका की सुनवाई से जस्टिस शर्मा को हटाने की मांग कर रहे हैं,...
अगर टेंडर की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती तो वह अपने आप खत्म हो जाता है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सिर्फ़ बार-बार अर्जी देने से देरी की भरपाई नहीं हो सकती या समय-सीमा नहीं बढ़ाई जा सकती> एक बार जब टेंडर की समय सीमा बिना किसी विस्तार के खत्म हो जाती है तो कॉन्ट्रैक्ट अपने आप खत्म हो जाता है, जिससे राज्य को जनहित में एक नया टेंडर जारी करने की अनुमति मिल जाती है।चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की डिवीज़न बेंच राज्य द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस अपील में 18.11.2024 को सिंगल जज द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें...
धोखा देने के इरादे के बिना जन्मतिथि में मामूली अंतर धोखाधड़ी नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूल के टीचर की बर्खास्तगी रद्द की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी सरकारी कर्मचारी के अलग-अलग एजुकेशनल रिकॉर्ड में जन्मतिथि में सिर्फ़ मामूली अंतर होना—जिसमें धोखाधड़ी, गलतबयानी या जानबूझकर कुछ छिपाने का कोई तत्व न हो—उसे 'धोखाधड़ी या जानबूझकर की गई गलतबयानी' नहीं माना जाएगा, जिससे उसकी नियुक्ति रद्द हो जाए।जस्टिस मंजू रानी चौहान की बेंच ने इस तरह जून 2019 में मऊ में एक सरकारी असिस्टेंट टीचर के खिलाफ जारी बर्खास्तगी का आदेश रद्द किया, और राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उसे तुरंत अपनी ड्यूटी फिर से शुरू करने की...
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को केस से हटने की मांग: केजरीवाल ने दिया सत्येंद्र जैन के केस में जज बदलने की ED की अर्ज़ी मंज़ूर का हवाला
शराब नीति केस की सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने की मांग करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2022 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस अर्ज़ी को मंज़ूर किया गया, जिसमें AAP नेता सत्येंद्र जैन के केस में ट्रायल जज को बदलने की मांग की गई।केजरीवाल ने दावा किया कि उनका केस जैन के केस की सुनवाई कर रहे जज को हटाने की ED की अर्ज़ी से ज़्यादा मज़बूत है। वह CBI की उस रिवीज़न पिटीशन की सुनवाई से जस्टिस शर्मा के हटने की मांग कर...
खाप पंचायतों पर सख्त रुख: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को दिया नीति बनाने का निर्देश, कहा- सामाजिक बहिष्कार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
राजस्थान हाईकोर्ट ने खाप पंचायतों द्वारा जारी फरमानों और सामाजिक बहिष्कार की प्रथा पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को व्यापक नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि खाप पंचायतें किसी भी प्रकार की वैधानिक संस्था नहीं हैं। फिर भी वे खुद को समानांतर सत्ता केंद्र के रूप में स्थापित कर चुकी हैं और लोगों के निजी जीवन में दखल देकर गैरकानूनी आदेश जारी करती...
जमीन अधिग्रहण पर बड़ा झटका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ प्रशासनिक सुविधा से तत्कालता प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण मामलों में अहम फैसला देते हुए कहा कि केवल प्रशासनिक सुविधा या आवश्यकता के आधार पर भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 17 (तत्कालता प्रावधान) लागू नहीं की जा सकती।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान का उपयोग तभी किया जा सकता है, जब वास्तविक, ठोस और प्रमाणित आपात स्थिति हो, जिसे अधिसूचना में स्पष्ट कारणों के साथ दर्ज किया जाए।अदालत ने कहा,“सिर्फ प्रशासनिक आवश्यकता या सुविधा, चाहे वह कितनी भी जरूरी क्यों न लगे, कानून...
वकील की गैरहाजिरी में अधूरी क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं चलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गवाह को दोबारा बुलाने की दी अनुमति
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आरोपी को प्रभावी जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता खासकर तब जब उसके वकील की अनुपस्थिति के कारण जिरह ठीक से नहीं हो पाई हो।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने एक हत्या के आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें प्रत्यक्षदर्शी गवाह को दोबारा बुलाने की मांग खारिज की गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को अत्यधिक तकनीकी करार दिया।अदालत ने कहा,“किसी सामान्य व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह एक प्रशिक्षित...
बराबरी वालों में ही हो प्रतिस्पर्धा: राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती पर दिया अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा हमेशा समान स्तर के उम्मीदवारों के बीच ही होनी चाहिए न कि अनुभवी और नए उम्मीदवारों को एक साथ खड़ा किया जाए।जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें होमगार्ड विभाग के स्वयंसेवकों ने अपनी कथित मौखिक सेवामुक्ति को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पहले से होमगार्ड विभाग में स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर चुके हैं और उन्हें नए भर्ती प्रक्रिया में...
किसानों को राहत पर बड़ी टिप्पणी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- देरी के आधार पर दावा खारिज करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसानों के हित में अहम फैसला देते हुए कहा कि केवल देरी के आधार पर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत दावे खारिज करना, बिना कारणों पर विचार किए, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि भले ही योजना में दावा दाखिल करने की अधिकतम समय सीमा 75 दिन निर्धारित हो, लेकिन यदि देरी के पीछे उचित कारण हों तो अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे उन कारणों पर विचार करें।अदालत ने स्पष्ट कहा,“यदि देरी के कारणों पर...
बिना इजाज़त जान-बूझकर गैर-हाज़िरी होने पर ही नौकरी से निकाला जा सकता है, बीमारी की वजह से गैर-हाज़िरी पर सज़ा ज़्यादा मानी जाएगी: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस दीपक रोशन की डिवीज़न बेंच ने फ़ैसला दिया कि ड्यूटी से बिना इजाज़त गैर-हाज़िरी को जान-बूझकर किया गया साबित करना ज़रूरी है, तभी नौकरी से निकाला जा सकता है। अगर गैर-हाज़िरी किसी मज़बूरी वाली वजह से, जैसे कि किसी मेडिकल बीमारी की वजह से हो, तो सज़ा ज़्यादा मानी जाएगी।मामले की पृष्ठभूमिअपील में जवाब देने वाले (कर्मचारी) को असिस्टेंट टीचर के तौर पर नियुक्त किया गया। तीन साल तक सेवा करने के बाद वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। फिर वह ठीक से मेडिकल जांच...
'चौंकाने वाला': राजस्थान हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर नाबालिग रेप पीड़िता के मुआवज़े का दावा खारिज करने पर लगाई कड़ी फटकार
आश्चर्य और हैरानी जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) का आदेश रद्द किया, जिसमें नाबालिग रेप पीड़िता के अंतरिम मुआवज़े का आवेदन खारिज कर दिया गया था, और उससे SHO/मजिस्ट्रेट से ज़रूरी सर्टिफिकेट लाने को कहा गया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने माना कि राजस्थान पीड़ित मुआवज़ा योजना 2011 (योजना) का पालन प्रतिवादी द्वारा उसकी मूल भावना और अक्षरशः नहीं किया गया। कोर्ट ने राय दी कि आवेदन खारिज करने के बजाय DLSA को संबंधित अधिकारी से ज़रूरी सर्टिफिकेट भेजने के लिए कहना...
पत्नी का भविष्य के भरण-पोषण का अधिकार छोड़ने का समझौता सार्वजनिक नीति के खिलाफ, CrPC की धारा 125 के तहत दावा करने से नहीं रोकता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि कोई भी ऐसा समझौता, जिसमें पत्नी किसी तय रकम के बदले भविष्य में पति से भरण-पोषण का दावा करने का अपना अधिकार छोड़ देती है, वह सार्वजनिक नीति के खिलाफ है। साथ ही यह समझौता उसे CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने से नहीं रोक सकता, क्योंकि यह एक कानूनी अधिकार है।जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की बेंच ने पति द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा,"पत्नी द्वारा भरण-पोषण के अधिकार को छोड़ देने से भरण-पोषण के उसके दावे पर कोई असर...
'स्पष्ट त्रुटि': सेशंस कोर्ट ने पलटा चोरी के आरोपी को 'तर्कसंगत' रूप से बरी करने का फैसला, राजस्थान हाईकोर्ट ने आलोचना की
चोरी के मामले में आरोपी को बरी करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने यह दोहराया कि भले ही आरोप तय करने के चरण में विस्तृत आदेश देना अनिवार्य न हो, फिर भी आदेश में न्यायिक विवेक का सचेत प्रयोग झलकना चाहिए; यह आदेश न तो अस्पष्ट हो सकता है और न ही यांत्रिक।ऐसा करते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सेशंस कोर्ट का वह आदेश, जिसने याचिकाकर्ताओं को बरी करने का फैसला रद्द किया था, स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण था; क्योंकि उसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दर्ज किए गए निष्कर्षों में किसी भी प्रकार की विकृति, अवैधता या कोई बड़ी...
BNSS की धारा 106 के तहत संपत्ति कुर्क करने के लिए पुलिस को पहले से नोटिस देना ज़रूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला दिया कि BNSS की धारा 106 के तहत पुलिस द्वारा संपत्ति कुर्क करने के लिए संबंधित व्यक्ति को पहले से कोई नोटिस देना ज़रूरी नहीं है। कोर्ट ने धारा 106 और धारा 107 के बीच अंतर स्पष्ट किया। धारा 107 में विशेष रूप से यह प्रावधान है कि मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को नोटिस जारी करेगा, जिसकी संपत्ति BNSS की धारा 107 के तहत कुर्क की जानी है।BNSS की धारा 106 पुलिस को ऐसी किसी भी संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार देती है, जिसके बारे में यह आरोप हो या संदेह हो कि वह चोरी की है,...
आवंटित प्लॉट सौंपने में देरी का मामला: हाईकोर्ट ने KDA को लगाई फटकार, मुख्यमंत्री को दिए अधिकारियों की लापरवाही की जांच के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री आदित्य योगीनाथ से KDA अधिकारियों की कथित लापरवाही की जांच करने को कहा है। इन अधिकारियों पर आवंटित ज़मीन का कब्ज़ा, अब 90 साल के हो चुके उसके पट्टेदार को सौंपने में 41 साल की देरी करने का आरोप है।जस्टिस संदीप जैन 90 साल के वादी के मामले की सुनवाई कर रहे थे। यह वादी सबसे ज़्यादा बोली लगाने वाला था और उसे 1984 में 999 साल का पट्टा मिला था, लेकिन कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने कई बार अनुरोध किए जाने के बाद भी उसे ज़मीन का कब्ज़ा नहीं सौंपा।बेंच ने टिप्पणी की, ...
रील्स पर कानून—शो 'चिरैया' महिलाओं के लिए कानूनी तौर पर क्यों मायने रखता है?
वैवाहिक अनुबंधयह विचार कि विवाह एक पूर्ण सहमति प्रदान करता है, लंबे समय से भारतीय कानून को अंतर्निहित करता है। आईपीसी की धारा 375 जो अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 63 (अपवाद 2) है, कहती है कि यदि कोई पत्नी एक निश्चित उम्र से अधिक है, तो पति पर बलात्कार का आरोप नहीं लगाया जा सकता है। जियो हॉटस्टार शो 'चिरैया', जिसमें दिव्या दत्ता हैं, इस विचार के खिलाफ है। कहानी कमलेश का अनुसरण करती है, एक महिला जो शुरू में पारंपरिक नियमों का पालन करती है और उसकी ननद पूजा, जिसे उसके पति द्वारा यौन संबंध बनाने के...
द अनब्रोकन निब
राज्य जब मृत्युदंड देता है तो उसका वजन कौन उठाता है, और मृत्युदंड क्यों समाप्त होना चाहिए?मामला लीगल है सीज़न 2 के अंत के पास एक ऐसा क्षण है जो पूरी तरह से मजाकिया होना बंद कर देता है। एक प्रमुख जिला न्यायाधीश अपने कक्ष में अकेला बैठता है, उसके सामने एक केस फाइल खुली होती है। उसे यह तय करना होगा कि किसी अन्य व्यक्ति को जीना चाहिए या मरना चाहिए। वह आदेश पर हस्ताक्षर करता है। वह मौत की सजा देता है। और फिर, वह निब को नहीं तोड़ता है।निब को तोड़ना कानून नहीं है। यह किसी भी क़ानून में दिखाई नहीं देता...

















