हाईकोर्ट

जयपुर में गिरफ़्तारी या फ़िरोज़ाबाद में? UP Police पर 'फ़र्ज़ी एनकाउंटर' का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ADGP और CP से मांगी रिपोर्ट
पुलिस अधिकारियों द्वारा फ़र्ज़ी एनकाउंटर के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। यह मामला जयपुर (राजस्थान) से चोरी के आरोपी की गिरफ़्तारी और उसके बाद फ़िरोज़ाबाद (UP) में कथित पुलिस एनकाउंटर में उसके घायल होने से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के सामने आने के बाद उठा है।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने आरोपी की पत्नी द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।कोर्ट ने आगरा ज़ोन...

सबूत ज़रूरी हो तो ट्रायल कोर्ट फ़ैसला सुरक्षित रखने के बाद भी गवाह को बुला सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट फ़ैसला सुरक्षित रखने के बाद भी CrPC की धारा 311 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके किसी गवाह को बुला सकती है या दोबारा बुला सकती है, अगर मामले के सही फ़ैसले के लिए सबूत ज़रूरी हों।जस्टिस मधु जैन ने यह बात एक आरोपी - 69 साल के सीनियर सिटिज़न रमन सोनी - की याचिका खारिज करते हुए कही। सोनी ने स्पेशल जज (PC Act) के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें CBI की CrPC की धारा 311 के तहत अर्ज़ी को मंज़ूरी दी गई, जबकि मामला फ़ैसले के लिए सुरक्षित रखा जा चुका था।यह मामला CBI...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरार आरोपी की 1982 की हत्या की कोशिश की अपील गैर-मौजूदगी में मेरिट के आधार पर खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या की कोशिश के मामले में 42 साल पुरानी अपील को मेरिट के आधार पर खारिज किया, जबकि आरोपी-अपीलकर्ता फरार थी। कोर्ट ने कहा कि वह तब तक हमेशा इंतज़ार करने के लिए बाध्य नहीं है जब तक कि उसे ढूंढकर कोर्ट के सामने पेश न किया जाए।जस्टिस वाणी रंजन अग्रवाल की बेंच फरार आरोपी फूलमती द्वारा 1982 में दायर क्रिमिनल अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील ट्रायल कोर्ट के उसी साल के फैसले के खिलाफ थी, जिसमें उसे IPC की धारा 307 के तहत दोषी ठहराया गया और चार साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई।11...

किसी और के नाम से ईमेल ID बनाना पहली नज़र में IT Act की धारा 66-C के तहत 'आइडेंटिटी थेफ्ट' नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने शुरुआती तौर पर माना कि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से सिर्फ़ ईमेल ID बनाना, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2008 (IT Act) की धारा 66-C के तहत अपराध नहीं है। बता दें, उक्त धारा 'आइडेंटिटी थेफ्ट' (पहचान की चोरी) की सज़ा से संबंधित है।IT Act की धारा 66-C में तब सज़ा का प्रावधान है, जब कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या बेईमानी से किसी दूसरे व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर, पासवर्ड या किसी अन्य यूनिक आइडेंटिफिकेशन फ़ीचर (विशिष्ट पहचान विशेषता) का इस्तेमाल करता है।जस्टिस अब्दुल मोइन...

JJ Act | हाईकोर्ट ने बालिग़ बताकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए गए नाबालिग़ को रिहा करने का आदेश दिया, SHO पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक नाबालिग़ लड़के की मदद की, जिसे पुलिस ने कथित तौर पर बालिग़ मानकर रेगुलर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। कोर्ट ने उसे तुरंत न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया और कहा कि रिमांड का आदेश गैर-कानूनी, गलत और अधिकार क्षेत्र से बाहर है।ऐसा करते हुए कोर्ट ने संबंधित पुलिस स्टेशन के SHO पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया।जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 (JJ Act) में कानून के उल्लंघन के मामलों में शामिल बच्चों के साथ निपटने के लिए एक अलग और बच्चों के...

CrPC की धारा 125(3) के तहत एक साल की समय-सीमा DV Act के तहत मेंटेनेंस की वसूली के लिए वेतन की कुर्की को नहीं रोकती: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125(3) के पहले प्रावधान (Proviso) के तहत एक साल की समय-सीमा तभी लागू होती है, जब कोई व्यक्ति उस प्रावधान के तहत बकाया मेंटेनेंस की वसूली के लिए वारंट की मांग करता है।यह मेंटेनेंस के बकाया को खत्म नहीं करता और न ही 'महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005' (DV एक्ट) की धारा 20(6) के तहत सैलरी अटैचमेंट को रोकता है।CrPC की धारा 125(3) का पहला प्रावधान रिकवरी वारंट जारी करने से रोकता है, जब तक कि मेंटेनेंस की रकम बकाया होने के एक साल के भीतर आवेदन न...

सिर्फ़ इसलिए आश्रित माँ को फ़ैमिली पेंशन देने से मना नहीं किया जा सकता कि उनके दूसरे बच्चे भी ज़िंदा हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच ने कहा कि किसी मृतक "अविवाहित" सरकारी कर्मचारी की आश्रित माँ को सिर्फ़ इस आधार पर फ़ैमिली पेंशन देने से मना नहीं किया जा सकता कि उनके दूसरे बच्चे भी ज़िंदा हैं, अगर वे बच्चे उन्हें आर्थिक सहारा देने की स्थिति में नहीं हैं।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव और जस्टिस नंदेश एस. देशपांडे की डिवीज़न बेंच ने मृतक की माँ के फ़ैमिली पेंशन के दावे को मंज़ूरी दी; उनकी तीन शादीशुदा बेटियां भी हैं।महाराष्ट्र सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1982 के नियम 116 के तहत माता-पिता को पेंशन तभी...

अपराध की गंभीरता तेज़ी से सुनवाई के अधिकार को खत्म नहीं कर सकती: दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 साल जेल में रहने के बाद ज़मानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता तेज़ी से सुनवाई की संवैधानिक गारंटी को खत्म नहीं कर सकती। कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी, जो दो नाबालिग बच्चों के अपहरण और हत्या के मामले में सुनवाई के दौरान 13 साल से ज़्यादा समय तक जेल में रहा था।जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि आरोपी द्वारा काटी गई जेल की सज़ा "बहुत ज़्यादा, अनुचित और ज़्यादती भरी" थी। उन्होंने ज़ोर दिया कि आरोपों की गंभीरता आरोपी के तेज़ी से सुनवाई के अधिकार से ऊपर नहीं हो सकती।कोर्ट ने कहा,"अपराध की गंभीरता अपने आप में तेज़ी से...

आगे की जांच का आदेश देते समय बताई गई वजहों को 'पॉइंट-वाइज़' जांच का निर्देश नहीं माना जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि यह सच है कि कोर्ट पुलिस को किसी खास तरीके से जांच करने का निर्देश नहीं दे सकता, लेकिन आगे की जांच का आदेश देते समय कोर्ट द्वारा बताई गई वजहों को खुद 'पॉइंट-वाइज़' (बिंदुवार) जांच का निर्देश नहीं माना जाना चाहिए।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द करने की मांग की गई, जिसमें याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज मामले में आगे की जांच का निर्देश दिया गया।बेंच ने कहा,"इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आगे की जांच की मांग...

UP Panchayat Raj Act | फंड के दुरुपयोग के लिए ग्राम प्रधान के खिलाफ जांच उनका कार्यकाल पूरा होने पर ही खत्म नहीं हो जाती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यू.पी. पंचायत राज एक्ट, 1947 की धारा 95(1)(g) के तहत ग्राम प्रधान के खिलाफ चल रही जांच को सिर्फ इसलिए बेकार नहीं माना जा सकता या रोका नहीं जा सकता कि उनका कार्यकाल खत्म हो गया।कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्यवाही को तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए, क्योंकि एक्ट की धारा 95(2) और धारा 27 के तहत कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कुछ परिणाम बने रहते हैं।यू.पी. पंचायत राज एक्ट, 1947 की धारा 95(2) के तहत धारा 95(1) के संबंधित क्लॉज़ के तहत हटाए गए व्यक्ति को पांच साल तक, या राज्य...

जीवनसाथी को सिर्फ़ 'आपत्तिजनक स्थिति' में देखने का आरोप लगाने से व्यभिचार साबित नहीं होता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने एक पति की अपील खारिज की, जिसमें उसने व्यभिचार और क्रूरता के आधार पर अपनी शादी खत्म करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी को सिर्फ़ "आपत्तिजनक स्थिति" में देखने से यह साबित नहीं होता कि उसने किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाए।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की डिवीजन बेंच ने मधुबनी के फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज का फैसला बरकरार रखा, जिन्होंने पति के तलाक का मामला खारिज कर दिया।अपीलकर्ता ने 2 जुलाई, 2006 को प्रतिवादी से शादी की थी। बाद में 2010 में...

दोस्तों के बीच मारपीट का विवाद सुलझा तो दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द की FIR, आरोपियों को मणिपुर में सामुदायिक सेवा का निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोस्तों के बीच हुए झगड़े और मारपीट से जुड़े आपराधिक मामले में पक्षकारों के बीच समझौता होने के बाद FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द की।हाईकोर्ट ने कहा कि जब पक्षकारों ने अपने मतभेद दूर कर लिए हैं और अब उनके बीच कोई शिकायत नहीं है तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखना किसी सार्थक उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगा बल्कि उनके बीच विवाद और कटुता को बनाए रखेगा।जस्टिस प्रतीक जालान ने हालांकि FIR रद्द करने को दो आरोपियों की सामुदायिक सेवा और दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कॉस्ट अकाउंट में कुल 10...

NDPS Case: जांच अधिकारी की मौखिक आशंका पर ज़ब्त जेवर और नकदी रोकना गलत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल जांच एजेंसी की मौखिक आशंका के आधार पर किसी आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद सामान को उसके इस्तेमाल से वंचित नहीं किया जा सकता। जब्त वस्तुओं को थाने या मालखाने में लंबे समय तक रखने के बजाय कानून के अनुसार उनके वास्तविक स्वामी को सौंपने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी ने वाराणसी की ट्रायल कोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें NDPS मामले में आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद सोने के जेवर और 850 रुपये नकद छोड़ने से इनकार किया गया था।मामला वर्ष 2023...

राजस्व अभिलेख रद्द नहीं हुआ तो केवल जालसाजी के आरोप से उसे फर्जी नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सक्षम राजस्व प्राधिकारी या अदालत द्वारा रद्द, संशोधित या निरस्त नहीं की गई राजस्व प्रविष्टि को केवल दूसरे पक्ष के जालसाजी के आरोप के आधार पर फर्जी नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रविष्टि अपने आप में स्वामित्व का अधिकार पैदा नहीं करती लेकिन जब तक वह कायम है उसके साक्ष्यात्मक महत्व को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार-X ने स्थायी निषेधाज्ञा से जुड़े मामले में यह टिप्पणी करते हुए अपील खारिज की। अदालत ने कहा कि किसी राजस्व...

राज्य सरकार के कहने भर से नियुक्तियां रद्द नहीं कर सकता नियुक्ति प्राधिकारी, खुद करना होगा विचार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्राधिकारी केवल राज्य सरकार के निर्देश के आधार पर किसी कर्मचारी की नियुक्ति रद्द नहीं कर सकता। नियुक्ति रद्द करने से पहले संबंधित प्राधिकारी को मामले पर स्वतंत्र रूप से विचार करना होगा और अपने विवेक का इस्तेमाल करना होगा।जस्टिस राजीव सिंह ने उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक के सहायक प्रबंधकों की वर्ष 2019 में की गई सेवा समाप्ति रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इन कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश मुख्य सचिव, सहकारिता के निर्देश पर जारी किए...

बिना वारंट रात में NDPS की तलाशी वैध, आपात स्थिति में धारा 42 की कार्रवाई बाद में हो सकती है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ मामले में जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि पुलिस को गश्त के दौरान ऐसी सूचना मिलती है, जिस पर तत्काल कार्रवाई जरूरी हो तो रात में बिना वारंट तलाशी लेने की स्थिति में NDPS Act की धारा 42 के तहत आवश्यक कार्रवाई को उचित समय तक टाला जा सकता है। हालांकि प्रावधानों का पूरी तरह पालन न करना स्वीकार्य नहीं है।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने कहा कि आपात स्थिति में धारा 42 के तहत अनुपालन को उचित अवधि के लिए स्थगित किया जा सकता है लेकिन प्राप्त सूचना और बिना वारंट तलाशी...

कोविड में बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए मायके गई पत्नी वापस नहीं लौटी थी: कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज किया भरण-पोषण का दावा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भरण-पोषण की मांग करने वाली पत्नी की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा कि वैवाहिक घर छोड़ने का उचित और वाजिब कारण साबित नहीं होने पर पत्नी पति से भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती। अदालत ने पाया कि पत्नी कोविड के दौरान बीमार माता-पिता और बहन की देखभाल के लिए मायके गई थी और बाद में पति के वापस लौटने के आग्रह के बावजूद वैवाहिक घर नहीं लौटी।जस्टिस डॉ. चिलकुर सुमलता ने मैसूरु फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि भरण-पोषण का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता।...

हत्या की सजा रद्द करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जज की कार्यक्षमता पर उठाए सवाल, मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष भेजा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषसिद्धि रद्द करते हुए विशेष जज के फैसले में गंभीर त्रुटियां पाईं। अदालत ने साक्ष्यों के मूल्यांकन के तरीके पर चिंता जताते हुए विशेष जज, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) दमोह की संवेदनशील मामलों की सुनवाई के लिए उपयुक्तता पर गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने मामले को उचित निर्णय के लिए कार्यवाहक चीफ जस्टिस के समक्ष रखने का निर्देश दिया।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने FSL...

वकील ने मुवक्किल के लिए अंतरिम राहत मांगी तो CAT ने माना दुर्व्यवहार, राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT ) जयपुर के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें मुवक्किल की ओर से अंतरिम राहत मांगने वाली वकील के खिलाफ दुर्व्यवहार की टिप्पणी करते हुए उन पर 7,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने नवोदय विद्यालय समिति के खिलाफ दायर वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और चुनौती दिए गए आदेश के संचालन पर रोक लगाई।मामला एक ऐसे कर्मचारी के स्थानांतरण से जुड़ा है, जो नवोदय विद्यालय समिति में...

शून्य बकाया कह देने से नहीं खत्म होगी राज्य की देनदारी, विभाग की पुरानी स्वीकारोक्ति भी देखेगा कोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ठेकेदार के बकाये को लेकर राज्य सरकार बाद की जांच के आधार पर भले ही कुछ भी बकाया नहीं होने का दावा करे लेकिन अदालत उस दावे को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं कर सकती। अदालत को विभाग की अपनी पिछली स्वीकारोक्ति और बाद में जारी की गई रकम का मिलान कर वास्तविक बकाया देखना होगा।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभ्देश कुमार चौधरी की पीठ ने कहा कि विभाग के एकतरफा और अपने हित में किए गए शून्य देनदारी का दावा स्वीकार करने के बजाय उसके पुराने आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी...
