हाईकोर्ट
ट्रांसजेंडर कानून संशोधन पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने Transgender Persons (Protection of Rights) Amendment Act, 2026 को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि संशोधित कानून 'स्व-पहचान' (self-identification) के आधार पर अपनी लैंगिक पहचान तय करने वाले व्यक्तियों को 'ट्रांसजेंडर' की कानूनी परिभाषा से बाहर कर देता है।मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की एकल पीठ कर रही है। याचिकाकर्ताओं में दो ट्रांसवुमन शामिल हैं, जो लंबे समय से हार्मोन थेरेपी ले रही हैं और आधिकारिक...
'भरोसे लायक दस्तावेज़ दिए बिना ब्लैकलिस्ट करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन': पटना हाईकोर्ट ने ठेकेदार पर लगी 2 साल की रोक हटाई
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी ठेकेदार को उन दस्तावेज़ों को दिए बिना ब्लैकलिस्ट करना, जो आरोपों का आधार हैं, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों द्वारा लगाई गई दो साल की रोक हटाई।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ द्वारा 10.12.2025 को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश के तहत, याचिकाकर्ता को बिहार ठेकेदार पंजीकरण नियम, 2007 के नियम 11 के...
'पेशा कलंकित नहीं हो सकता': गुजरात हाईकोर्ट ने वकील बनकर पेश होने के आरोपी लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार
गुजरात हाईकोर्ट ने महिला लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया। यह महिला अभी LL.B. कोर्स के तीसरे साल में है और उस पर एक मामले में वकील बनकर पेश होने का आरोप है। इस मामले में कई आरोपियों पर 80,00,000 रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान न सिर्फ उसके नाम से जारी गुजरात बार काउंसिल का पहचान पत्र बरामद हुआ, बल्कि एक नेम प्लेट भी मिली जिस पर आरोपी को भारत के सुप्रीम कोर्ट का वकील बताया गया। इसके अलावा, विभिन्न पुलिस स्टेशनों की मुहरें, केस रजिस्टर,...
न्याय पर वीटो: 18,000 CAPF अधिकारी और भारत का आसन्न संवैधानिक संकट
"विधायिका एक फैसले को दरकिनार नहीं कर सकती। यह केवल उस कानून में उस दोष को दूर कर सकती है जिसने उस निर्णय का आधार बनाया था। जिस क्षण यह इससे अधिक प्रयास करता है, यह कानून बनाना बंद कर देती है " - डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, संविधान सभा बहस, 194925 मार्च 2026 को, राज्य परिषद में चार पृष्ठों का विधायी उपाय पेश किया गया था। बाद में इसे विचार-विमर्श और विरोध के बाद दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया था, 9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त करने से पहले और कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी...
अनिश्चितकाल तक रोक नहीं लगा सकते: हाईकोर्ट ने इंग्लैंड निवासी डॉक्टर से मांगा जांच में सहयोग का भरोसा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में यूके में कार्यरत डॉक्टर डॉ. संग्राम पाटिल को राहत देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।जस्टिस अश्विन भोबे ने सुनवाई के दौरान डॉक्टर पाटिल को निर्देश दिया कि वह अदालत में लिखित आश्वासन (अंडरटेकिंग) दाखिल करें जिसमें यह स्पष्ट हो कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर भारत वापस आएंगे।अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी को भी अपनी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी...
स्ट्रीट वेंडरों की समिति न बनाने पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली सरकार को लगाई फटकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्ट्रीट वेंडरों के लिए शिकायत निवारण एवं विवाद समाधान समिति गठित न करने पर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सरकार की कार्यप्रणाली को “धीमी और अक्षम” बताया।जस्टिस सचिन दत्ता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 2024 में स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक समिति का गठन नहीं किया गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।अदालत ने कहा,“उम्मीद है कि दिल्ली सरकार अधिक दक्षता के साथ कार्य करेगी और आवश्यक नियुक्तियां शीघ्र पूरी करेगी।” हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को तीन सप्ताह के भीतर समिति...
बेटी की शादी 'पवित्र दायित्व': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी को दी 7 दिन की अस्थायी जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि बेटी का विवाह हिंदू जीवन पद्धति में एक पवित्र दायित्व है। इसी आधार पर अदालत ने एक दोषी व्यक्ति को अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए 7 दिन की अस्थायी जमानत प्रदान की।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने यह आदेश देश राज नामक व्यक्ति की याचिका पर दिया, जिसने अपनी सजा के खिलाफ अपील लंबित होने के दौरान यह राहत मांगी थी।मामले में याचिकाकर्ता को 2023 में लखनऊ सेशन कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष...
गवाह बुलाने के लिए शिकायतकर्ता भी दे सकता है आवेदन: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी की आपत्ति खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य मामलों में भी शिकायतकर्ता CrPC की धारा 311 (BNSS की धारा 348) के तहत अदालत से गवाह बुलाने या दस्तावेज प्रस्तुत कराने की मांग कर सकता है। इसके लिए लोक अभियोजक द्वारा आवेदन देना अनिवार्य नहीं है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह फैसला देते हुए आरोपी की याचिका खारिज की, जिसमें ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामला लखनऊ सेशन कोर्ट में चल रहे हत्या के मुकदमे से जुड़ा है। यहां शिकायतकर्ता ने अभियोजन साक्ष्य बंद होने और आरोपी का...
कोमा में सैनिक के शुक्राणु सुरक्षित रखने की अनुमति: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व सहमति को माना पर्याप्त
दिल्ली हाईकोर्ट ने संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसले में कोमा में पड़े सैनिक के शुक्राणु निकालकर संरक्षित (क्रायोप्रिजर्वेशन) करने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि IVF प्रक्रिया के लिए पहले दी गई सहमति को ही वैध माना जाएगा।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह आदेश देते हुए कहा कि केवल इस आधार पर पत्नी को अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि पति की वर्तमान लिखित सहमति उपलब्ध नहीं है।मामले में याचिकाकर्ता पत्नी ने अदालत से अनुरोध किया कि उसके पति, जो जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान गंभीर मस्तिष्क चोट के...
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के नाम कैसे दर्ज हों? हाइकोर्ट करेगा अहम फैसला, कई दस्तावेजों पर पड़ेगा प्रभाव
दिल्ली हाईकोर्ट अब यह तय करेगा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के नाम शैक्षणिक और आधिकारिक अभिलेखों में किस प्रकार दर्ज किए जाएं। अदालत ने माना कि यह मुद्दा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि पासपोर्ट आधार जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे कई दस्तावेजों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई।सुनवाई के...
लोक सेवकों पर FIR का आदेश यूं ही नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- पहले कानूनी सुरक्षा प्रावधानों का पालन जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि मजिस्ट्रेट बिना विचार किए या यांत्रिक तरीके से लोक सेवकों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(2) के तहत निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए स्पेशल कोर्ट द्वारा पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश रद्द किया और मामले को पुनः विचार के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया।अदालत ने कहा कि धारा...
अति-दुर्लभ मामला: साथनकुलम हिरासत हत्याओं में नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा
एक फैसले में जो शायद लंबे समय तक कानून की कक्षाओं में विच्छेदित हो जाएगा, मदुरै की एक अदालत ने कल हिरासत में हिंसा के लिए भारत की अब तक की सबसे कठोर सजाओं में से एक को दिया। पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) की क्रूर यातना और हत्या के लिए नौ पुलिस कर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई थी, एक पिता और बेटा, जिसका एकमात्र "अपराध" 2020 कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान समापन समय से कुछ मिनट पहले अपनी मोबाइल फोन की दुकान को खुला रखना था ।सथानकुलम में क्या हुआ?देश भर के अधिकांश लोगों ने पहली बार जून 2020...
किरायेदार बना सह-मालिक तो बेदखली नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि कोई किरायेदार बाद में संपत्ति का सह-मालिक बन जाता है तो उसके खिलाफ बेदखली की कार्यवाही जारी नहीं रखी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वामित्व का अधिकार मिलने के बाद किरायेदार की स्थिति बदल जाती है।जस्टिस राजेश एस. पाटिल इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। मामला एक बेदखली वाद से जुड़ा था, जिसमें अवैध निर्माण, उप-किरायेदारी, उपयोग में बदलाव, वास्तविक आवश्यकता और किराया बकाया जैसे आधारों पर कार्रवाई की गई।सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कार्यवाही...
भरण-पोषण मामले में पत्नी की नौकरी का रिकॉर्ड मंगा सकता है पति: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पति भरण-पोषण के दावे का विरोध करने के लिए पत्नी के रोजगार और आय से जुड़े दस्तावेज अदालत के माध्यम से मंगा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेज निष्पक्ष सुनवाई के लिए जरूरी होते हैं।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पति की ओर से दायर आवेदन खारिज कर दिया गया था।मामले में पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की थी। सुनवाई के दौरान पति को जानकारी मिली कि पत्नी प्राइवेट हॉस्पिटल में नर्स के रूप...
बिना सभी प्रयास किए किसी को 'फरार' घोषित नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की जल्दबाजी पर जताई आपत्ति
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी को फरार घोषित करने से पहले उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। बिना ऐसा किए सीधे कठोर कार्रवाई करना कानून के अनुरूप नहीं है।जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने यह फैसला एक चेक बाउंस मामले में दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को अनियमित रूप से पेश होने और जमानत की शर्तों का पालन न करने के कारण ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उसे फरार घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी।हाईकोर्ट...
1993 बम धमाका मामला: अबू सलेम को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1993 मुंबई बम धमाका मामले के दोषी अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज की। सलेम ने दावा किया था कि वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है और भारत-पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के अनुसार उसे रिहा किया जाना चाहिए।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ ने ओपन कोर्ट में आदेश सुनाते हुए कहा कि इस समय रिहाई पर कोई अंतिम टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।अदालत ने कहा,“सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार रिहाई और रिमिशन की गणना रिहाई से एक माह पहले की जानी है, इसलिए इस स्तर पर...
कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से मौत को स्वतः 'रोजगार चोट' नहीं माना जा सकता: हाईकोर्ट ने मुआवजा खारिज किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से हुई मृत्यु को स्वतः रोजगार से उत्पन्न चोट नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि मृत्यु और रोजगार के बीच सीधा संबंध (नैक्सस) हो।जस्टिस जे.सी. दोशी ने कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम की धारा 2(8) का हवाला देते हुए कहा कि “रोजगार चोट” वही मानी जाएगी जो दुर्घटना या व्यावसायिक बीमारी के कारण हो और जो रोजगार के दौरान तथा उससे उत्पन्न हुई हो।मामला मैकेनिक की मृत्यु से जुड़ा था, जिसकी कार्य के दौरान हार्ट अटैक से मौत...
दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल व आप नेताओं के खिलाफ शिकायत, कोर्ट कार्यवाही के कथित अनधिकृत प्रसारण पर विवाद
दिल्ली हाईकोर्ट में आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल पार्टी के कई नेताओं और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ शिकायत दायर की गई। आरोप है कि इन्होंने न्यायालय की कार्यवाही का कथित रूप से अनधिकृत रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया।यह शिकायत एडवोकेट वैभव सिंह द्वारा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष दायर की गई। शिकायत में कहा गया कि 13 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान जब केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जस्टिस से खुद को मामले से अलग करने की...
20 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग खारिज: हाईकोर्ट बोला- अब कोई तात्कालिक आर्थिक संकट नहीं
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में पिता की मृत्यु के 20 वर्ष बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग खारिज की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इतने लंबे समय के बाद यह नहीं माना जा सकता कि परिवार किसी अचानक या तात्कालिक आर्थिक संकट से जूझ रहा है।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसकी अनुकंपा नियुक्ति की मांग अस्वीकार की गई।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के पिता दूरसंचार विभाग की एक इकाई...
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से हटने का मामला: केजरीवाल ने दायर किया नया हलफनामा, कहा- जज का बेटा और बेटी केंद्र के पैनल वकील
शराब नीति मामले की सुनवाई से दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने की मांग वाली अपनी याचिका में AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अतिरिक्त हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने कहा है कि जस्टिस शर्मा के बेटे और बेटी, दोनों ही केंद्र सरकार के वकील के तौर पर पैनल में शामिल हैं।केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा के बच्चों को काम सॉलिसिटर जनरल द्वारा सौंपा जाता है, जो जस्टिस शर्मा के सामने CBI की तरफ से पेश हुए। उनके अनुसार, इससे जस्टिस शर्मा की ओर से पक्षपात की एक उचित आशंका पैदा होती...


















