हाईकोर्ट

भरण-पोषण का उद्देश्य भूख और बेघर होने से बचाना, पति पर असहनीय आर्थिक बोझ डालना नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
भरण-पोषण का उद्देश्य भूख और बेघर होने से बचाना, पति पर असहनीय आर्थिक बोझ डालना नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य जरूरतमंद जीवनसाथी को तत्काल सहारा देना और उसे भुखमरी या दर-दर भटकने से बचाना है, न कि पति पर ऐसा भारी आर्थिक बोझ डालना जिसे वह वहन ही न कर सके।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि भरण-पोषण के मामलों के निपटारे में वर्षों की देरी हो जाए और फिर आवेदन की तारीख से ही बड़ी रकम देने का आदेश पारित किया जाए, तो यह वेतनभोगी या सीमित आय वाले व्यक्ति पर अत्यधिक और असहनीय आर्थिक दबाव डाल सकता है।अदालत ने कहा,“न्यायिक व्यवस्था में हुई देरी को किसी एक पक्ष पर...

सामाजिक दबाव में युवती ने बदला बयान, सहमति से बने अंतरधार्मिक संबंध को अपराध नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
सामाजिक दबाव में युवती ने बदला बयान, सहमति से बने अंतरधार्मिक संबंध को अपराध नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2004 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि युवती आरोपी के साथ अपनी इच्छा से गई थी, उसने विशेष विवाह अधिनियम के तहत उससे शादी की थी और बाद में सामाजिक तथा पारिवारिक दबाव के कारण अपना रुख बदल लिया।जस्टिस विमल कुमार यादव ने कहा कि भारतीय समाज आज भी धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर गहरे विभाजन से ग्रस्त है, जहां युवाओं के लिए अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनना बेहद कठिन बना हुआ है।अदालत ने कहा,“यदि समाज द्वारा तय सीमाओं को तोड़ा जाता...

शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना गंभीर आरोप, मां की असहमति बहाना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना गंभीर आरोप, मां की असहमति बहाना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि शादी से इनकार करने के लिए केवल यह कहना कि “मां रिश्ते के लिए तैयार नहीं थीं”, प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है।जस्टिस एम. के. ठक्कर ने जाम्बिया निवासी आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले के आरोप यह संकेत देते हैं कि आरोपी ने विवाह का झूठा आश्वासन देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जबकि उसकी शादी करने की वास्तविक मंशा नहीं थी।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“सिर्फ यह...

बढ़ती बेरोजगारी पर बॉम्बे हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, पढ़ी-लिखी पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता
बढ़ती बेरोजगारी पर बॉम्बे हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, पढ़ी-लिखी पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल शिक्षित होने के आधार पर किसी पत्नी को गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान समय में बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि उच्च डिग्री और विशेषज्ञता रखने वाले लोग भी नौकरी पाने में असफल हो रहे हैं। जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के ने पति की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उसकी पत्नी स्नातकोत्तर तक पढ़ी-लिखी है और खुद अपना पालन-पोषण कर सकती है।अदालत ने अपने आदेश में...

बुद्धिमत्ता से सहानुभूति तक: कानूनी पेशे में भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EQ) की भूमिका की पुनर्कल्पना
बुद्धिमत्ता से सहानुभूति तक: कानूनी पेशे में भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EQ) की भूमिका की पुनर्कल्पना

कानूनी पेशा लंबे समय से बुद्धि, तर्क, मिसाल, वैधानिक व्याख्या और तर्क की प्रधानता में लंगर डाला गया है। कक्षाओं से लेकर अदालतों तक पारंपरिक रूप से इंटेलिजेंस कोओटिएंट (आईक्यू) की प्रासंगिकता पर जोर दिया गया है यानी विश्लेषण करने, बहस करने और निर्णय लेने की क्षमता।हालाँकि, कानूनी पेशे के भीतर जीवित वास्तविकताएँ तेजी से भावनात्मक बुद्धिमत्ता (ईक्यू) की एक मौन लेकिन तत्काल आवश्यकता को प्रकट करती हैं। विशुद्ध रूप से बुद्धि-संचालित प्रणाली से एक आदर्श बदलाव लाने की आवश्यकता है जो सहानुभूति, भावनात्मक...

झारखंड RTI विवाद: धारा 15(6) का उल्लंघन और विधायी मंशा को कमज़ोर करती नियुक्ति प्रक्रिया
झारखंड RTI विवाद: धारा 15(6) का उल्लंघन और विधायी मंशा को कमज़ोर करती नियुक्ति प्रक्रिया

29 जनवरी 2026 को, झारखंड राज्य ने झारखंड हाईकोर्ट को सूचित किया कि राज्य सूचना आयोग, जो अपने अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न होने के कारण गैर-कार्यशील रहा है, को चार सप्ताह के भीतर कार्यात्मक कर दिया जाएगा। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।प्रक्रिया में देरी हुई, और चयन समिति की अंतिम बैठक 25 मार्च 2026 को आयोजित की गई। धारा 15 (3) आयुक्तों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया प्रदान करती है, राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की...

ईद-उल-अजहा से पहले पशु वध पर पाबंदियों को महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
ईद-उल-अजहा से पहले पशु वध पर पाबंदियों को महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

कलकत्ता हाईकोर्ट में बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें ईद-उल-अजहा से पहले मवेशियों के वध को लेकर नए नियम लागू किए गए। याचिकाकर्ताओं में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा भी शामिल हैं।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने की।तृणमूल कांग्रेस विधायक अखरुज्जमान ने यह याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा भी अदालत में उपस्थित रहीं।राज्य सरकार की अधिसूचना में बैल, बछड़े, गाय और भैंस समेत मवेशियों...

POCSO Act के तहत युवा वयस्कों के बीच यौन संबंधों के लिए वास्तविक सहमति को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
POCSO Act के तहत युवा वयस्कों के बीच यौन संबंधों के लिए 'वास्तविक सहमति' को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि हालांकि POCSO Act के तहत सहमति कानूनी तौर पर मायने नहीं रखती, लेकिन युवा वयस्कों के बीच ऐसे संबंधों को, जिनमें यौन संबंध के लिए "वास्तविक सहमति" शामिल हो, ज़मानत याचिकाओं पर विचार करते समय अलग नज़रिए से देखा जाना चाहिए।जस्टिस प्रतीक जालान ने यह टिप्पणी तब की, जब वे 19 साल के एक स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत दे रहे थे। इस स्टूडेंट पर अपनी 12वीं कक्षा की सहपाठी की आत्महत्या से हुई मौत के मामले में आरोपी होने का आरोप था।कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,"हालांकि POCSO...

POSH Act के तहत संस्थान के निदेशक के खिलाफ भी आंतरिक शिकायत समिति कर सकती है जांच : केरल हाईकोर्ट
POSH Act के तहत संस्थान के निदेशक के खिलाफ भी आंतरिक शिकायत समिति कर सकती है जांच : केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी संस्थान का निदेशक उसके प्रशासन और प्रबंधन पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रखता और वह कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त कर्मचारी की श्रेणी में आता है तो उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति कर सकती है।जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्ण एस. की खंडपीठ उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी गई।मामला इंटीग्रेटेड रूरल टेक्नोलॉजी सेंटर के निदेशक से जुड़ा है। संस्थान की एक महिला...

फर्जी विश्वविद्यालयों पर सख्ती जरूरी, भविष्य में AI संस्थानों का भी खतरा : दिल्ली हाईकोर्ट
फर्जी विश्वविद्यालयों पर सख्ती जरूरी, भविष्य में AI संस्थानों का भी खतरा : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने देशभर में तेजी से बढ़ रहे फर्जी उच्च शिक्षण संस्थानों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से पूछा कि ऐसे संस्थानों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर में फर्जी विश्वविद्यालयों के बढ़ते जाल और नियामक संस्थाओं की कथित विफलता का मुद्दा उठाया गया।अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से कहा कि वह शिक्षा...

ब्लैकलिस्टिंग पर अंतरिम राहत मिलने से टेंडर में पूरी जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं मिलता : दिल्ली हाईकोर्ट
ब्लैकलिस्टिंग पर अंतरिम राहत मिलने से टेंडर में पूरी जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं मिलता : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कंपनी को ब्लैकलिस्टिंग आदेश पर अंतरिम राहत मिल जाने का यह मतलब नहीं है कि वह टेंडर प्रक्रिया में उससे जुड़ी जानकारी छिपा सकती है।अदालत ने स्पष्ट किया कि बोलीदाता पर सभी तथ्यों का स्पष्ट और ईमानदार खुलासा करने की जिम्मेदारी बनी रहती है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एम/एस वेलोसिस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज की।कंपनी ने नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज इंकॉरपोरेटेड द्वारा जारी निविदा में तकनीकी रूप से...

आदेश में सभी दलीलों का उल्लेख न होने से जज को पक्षपाती नहीं कहा जा सकता : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
आदेश में सभी दलीलों का उल्लेख न होने से जज को पक्षपाती नहीं कहा जा सकता : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक पक्षपात की आशंका जताते हुए दायर स्थानांतरण आवेदन खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर किसी जज को पक्षपाती नहीं कहा जा सकता कि अदालत के आदेश में किसी पक्ष की कुछ दलीलों का उल्लेख नहीं किया गया।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने कहा कि अदालत हर उस दलील को आदेश में दर्ज करने के लिए बाध्य नहीं होती, जिसका विवाद के मूल मुद्दों से सीधा संबंध न हो।अदालत ने कहा,“न्यायिक आदेशों में केवल महत्वपूर्ण तथ्यों, लागू कानून और उन तर्कों का उल्लेख आवश्यक होता है, जिनका विवाद के निपटारे...

धुरंधर में सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दिखाने के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और CBFC को फैसला लेने का निर्देश
'धुरंधर' में सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दिखाने के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और CBFC को फैसला लेने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' को लेकर उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को फैसला लेने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित प्राधिकरणों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।याचिका दीपक कुमार ने दायर की थी जो राष्ट्रीय राजधानी में सशस्त्र सीमा बल में हेड कांस्टेबल (संचार) के पद पर तैनात हैं।दीपक कुमार ने अदालत...

कानूनी स्थिति जाने बिना FIR दर्ज कराने की याचिका दायर करना दुर्भाग्यपूर्ण : दिल्ली हाईकोर्ट
कानूनी स्थिति जाने बिना FIR दर्ज कराने की याचिका दायर करना दुर्भाग्यपूर्ण : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील की कड़ी आलोचना की। अदालत ने कहा कि स्थापित कानूनी स्थिति की जांच किए बिना ऐसी याचिका दायर करना दुर्भाग्यपूर्ण है।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने आशानंद सैनी द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में FIR दर्ज करने, जांच को पुलिस उपायुक्त (सतर्कता) की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की मांग की गई।सुनवाई की...

मुस्लिम रीति से शादी करने वाली हिंदू महिला को अंतरिम भरण-पोषण का अधिकार: कलकत्ता हाईकोर्ट
मुस्लिम रीति से शादी करने वाली हिंदू महिला को अंतरिम भरण-पोषण का अधिकार: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि कोई हिंदू महिला इस्लाम धर्म अपनाकर मुस्लिम रीति-रिवाज से विवाह करती है तो केवल विवाह की वैधता पर सवाल उठाकर मुस्लिम पति भरण-पोषण देने से बच नहीं सकता। अदालत ने कहा कि जब तक सक्षम अदालत विवाह को शून्य घोषित नहीं करती, तब तक पत्नी और बच्चे को अंतरिम भरण-पोषण पाने का अधिकार रहेगा।जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने महिला और उसके नाबालिग बेटे के पक्ष में पारित अंतरिम भरण-पोषण आदेश बहाल करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया विवाह और बच्चे के पितृत्व के प्रमाण होने...

अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR पर रोक हटाई गई, हाइकोर्ट का सेशन कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई का निर्देश
अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR पर रोक हटाई गई, हाइकोर्ट का सेशन कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर लगी रोक रद्द की। यह मामला न्यूज़लॉन्ड्री की संपादकीय निदेशक मनीषा पांडे द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अभिजीत अय्यर मित्रा ने सोशल मीडिया पर उनके और अन्य महिला कर्मचारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट को वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद कारण सहित नया आदेश पारित किया...

फडणवीस और शिंदे के खिलाफ बयान दिलाने की साजिश मामले में संजय पांडे को बड़ी राहत, हाइकोर्ट ने रद्द की FIR
फडणवीस और शिंदे के खिलाफ बयान दिलाने की साजिश मामले में संजय पांडे को बड़ी राहत, हाइकोर्ट ने रद्द की FIR

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक और मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे तथा एक एडवोकेट के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। इन दोनों पर आरोप था कि उन्होंने एक कारोबारी पर दबाव बनाकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ बयान दिलाने की कोशिश की थी।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम की विशेष खंडपीठ ने बुधवार को अदालत में यह आदेश सुनाया।खंडपीठ संजय पांडे, एडवोकेट शेखर जगताप और अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।ठाणे और...

गोदनामे से ही वैध नहीं मानी जाएगी गोद लेने की प्रक्रिया, लेने-देने की रस्म जरूरी : राजस्थान हाईकोर्ट
गोदनामे से ही वैध नहीं मानी जाएगी गोद लेने की प्रक्रिया, 'लेने-देने' की रस्म जरूरी : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल गोदनामा तैयार कर लेने भर से किसी गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनन वैध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत बच्चे को गोद देने और लेने की वास्तविक रस्म का होना अनिवार्य है और इसे महज औपचारिकता नहीं माना जा सकता।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निचली अदालत और अपीलीय अदालत द्वारा गोदनामे को अमान्य ठहराने के फैसले को चुनौती दी गई।मामले में महिला पक्ष ने कहा कि...

RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एक RTI आवेदक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) उपलब्ध अभिलेखों की प्रतियां उपलब्ध करा देता है तब आवेदक मूल दस्तावेज देने की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक ने अपने आदेश में कहा कि RTI Act के तहत लोक प्राधिकरण की जिम्मेदारी केवल उन दस्तावेजों और सूचनाओं को उपलब्ध कराने तक सीमित है, जो उसके पास उपलब्ध और सुलभ हैं।अदालत ने कहा,“जो दस्तावेज संबंधित प्राधिकरण के पास उपलब्ध थे, उनकी प्रतियां याचिकाकर्ता को पहले ही दी जा चुकी हैं। मूल...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मरीज़ों को लुभाने के लिए जानबूझकर पैकेज रेट कम करने वाले पैनल में शामिल अस्पतालों पर सख्ती की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मरीज़ों को लुभाने के लिए 'जानबूझकर' पैकेज रेट कम करने वाले पैनल में शामिल अस्पतालों पर सख्ती की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक को आदेश दिया कि वे पैनल में शामिल सभी अस्पतालों के पैकेज रेट की जाँच करें और पॉलिसी के उल्लंघन के मामलों में सख्त कार्रवाई करें, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है।कोर्ट ने अस्पतालों की उस प्रथा के खिलाफ भी चेतावनी दी, जिसमें वे मरीज़ों को लुभाने के लिए जानबूझकर कम पैकेज रेट देते हैं। बाद में ज़रूरी प्रक्रियाओं के लिए अलग से पैसे वसूलते हैं; कोर्ट ने कहा कि ऐसे आचरण की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने...