हाईकोर्ट

गलत तरीके से अनिवार्य रिटायरमेंट पर भेजे गए कर्मचारी को पूरा बकाया वेतन मिलेगा: नो वर्क, नो पे दलील पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त
गलत तरीके से अनिवार्य रिटायरमेंट पर भेजे गए कर्मचारी को पूरा बकाया वेतन मिलेगा: नो वर्क, नो पे दलील पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त

राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उस कर्मचारी को अनिवार्य रिटायरमेंट की अवधि का पूरा वेतन और भत्ते देने का आदेश दिया, जिसे बिना ठोस आधार के सेवा से बाहर कर दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि जब कर्मचारी को काम करने से ही रोका गया हो तो उस पर नो वर्क, नो पे का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकल पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनाया, जिसमें एक सरकारी कर्मचारी ने वेतन न दिए जाने को चुनौती दी थी। कर्मचारी को वर्ष 2006 में अनिवार्य रिटायरमेंट दी गई थी। बाद...

महज हाथ छूना आपराधिक बल नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट ने IIT प्रोफेसर पर दर्ज यौन उत्पीड़न का मामला किया रद्द
महज हाथ छूना आपराधिक बल नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट ने IIT प्रोफेसर पर दर्ज यौन उत्पीड़न का मामला किया रद्द

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल किसी महिला का हाथ छू लेना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत आपराधिक बल या महिला की लज्जा भंग करने का अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने इसी आधार पर एक IIT प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न का आपराधिक मामला रद्द किया।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि IPC की धारा 354 के तहत अपराध तभी बनता है जब आपराधिक बल का प्रयोग हुआ हो और महज हाथ छूना कानून में परिभाषित बल की श्रेणी में नहीं आता।यह मामला उस शिकायत से जुड़ा था, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया कि वह...

कामकाजी मां का बच्ची को अपने माता-पिता के पास छोड़ना अवैध नहीं, हैबियस कॉर्पस से कस्टडी विवाद नहीं सुलझाया जा सकता: गुजरात हाइकोर्ट
कामकाजी मां का बच्ची को अपने माता-पिता के पास छोड़ना अवैध नहीं, हैबियस कॉर्पस से कस्टडी विवाद नहीं सुलझाया जा सकता: गुजरात हाइकोर्ट

गुजरात हाइकोर्ट ने एक अहम और संवेदनशील फैसले में कहा कि किसी कामकाजी मां द्वारा अपनी नाबालिग बेटी की देखभाल के लिए उसे अपने माता-पिता के पास छोड़ना न तो अवैध कस्टडी है और न ही इसे हैबियस कॉर्पस याचिका के जरिए चुनौती दी जा सकती है। कोर्ट ने साफ किया कि जब तक बच्चे की कस्टडी को लेकर कोई आदेश या कार्यवाही लंबित नहीं है, तब तक ऐसे मामलों में हैबियस कॉर्पस का सहारा नहीं लिया जा सकता।जस्टिस एन.एस. संजय गौड़ा और जस्टिस डी.एम. व्यास की खंडपीठ पिता द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी।...

सरकारी कर्मचारी डिसिप्लिनरी जांच को रोकने के लिए इस्तीफ़ा देकर नौकरी नहीं छोड़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी सही ठहराई
सरकारी कर्मचारी डिसिप्लिनरी जांच को रोकने के लिए इस्तीफ़ा देकर नौकरी नहीं छोड़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी सही ठहराई

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक RAS अधिकारी की याचिका खारिज की, जिसमें राज्य द्वारा उसका इस्तीफ़ा खारिज किए जाने और नौकरी से निकालने की सज़ा लगाने के आदेश को चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के व्यवहार को देखते हुए, राज्य के कामों में कोई कानूनी कमी नहीं थी।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इस्तीफ़ा देने से कर्मचारी के पक्ष में कोई निहित या ऑटोमैटिक अधिकार नहीं बन जाता, खासकर तब जब राज्य कर्मचारी के ख़िलाफ़ डिपार्टमेंटल कार्रवाई शुरू करने पर विचार कर रहा हो।कहा गया,“किसी सरकारी...

घर से भागे जोड़ों के लिए सेफ़ हाउस समेत सुरक्षा उपायों पर 2019 के GO को मानना ​​अधिकारियों का फ़र्ज़: इलाहाबाद हाईकोर्ट
घर से भागे जोड़ों के लिए सेफ़ हाउस समेत सुरक्षा उपायों पर 2019 के GO को मानना ​​अधिकारियों का फ़र्ज़: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में परिवार की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी करने वाले जोड़ों की जान और आज़ादी की रक्षा करने की राज्य की ज़िम्मेदारी को दोहराया। कोर्ट ने यूपी सरकार के 2019 के ऑर्डर का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया, जिसमें ऐसे जोड़ों के लिए ज़रूरी बचाव और सुधार के उपाय बताए गए।एक जोड़े की सुरक्षा याचिका का निपटारा करते हुए जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी हर मामले में खतरे का अंदाज़ा लगाने और स्थिति की गंभीरता के आधार पर सुरक्षित रहने की जगह और सुरक्षा सहित ज़रूरी...

जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की सैलरी इनकम मानी जाएगी: दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS में EWS अपॉइंटमेंट कैंसिल करने का फैसला सही ठहराया
जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की सैलरी इनकम मानी जाएगी: दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS में EWS अपॉइंटमेंट कैंसिल करने का फैसला सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि जूनियर रेजिडेंसी के दौरान डॉक्टर को मिली सैलरी, इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (EWS) कैटेगरी के तहत एलिजिबिलिटी तय करने के लिए “इनकम” मानी जाती है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने इस आधार पर याचिकाकर्ता की सीनियर रेजिडेंट अपॉइंटमेंट कैंसिल करने का फैसला सही ठहराया कि तय इनकम लिमिट का उल्लंघन किया गया।इसमें कहा गया,“EWS रिज़र्वेशन के लिए “ग्रॉस एनुअल इनकम” का मतलब टैक्स एक्ट के तहत ध्यान में रखी गई इनकम से है। इसलिए पॉलिसी फ्रेमवर्क में इनकम के किसी...

बिना मदद वाले स्कूल के खिलाफ प्राइवेट सर्विस कॉन्ट्रैक्ट लागू करने के लिए रिट मेंटेनेबल नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
बिना मदद वाले स्कूल के खिलाफ प्राइवेट सर्विस कॉन्ट्रैक्ट लागू करने के लिए रिट मेंटेनेबल नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत रिट याचिका एक टीचर और एक प्राइवेट बिना मदद वाले स्कूल के बीच प्राइवेट कॉन्ट्रैक्ट से पैदा होने वाले सर्विस से जुड़े अधिकारों को लागू करने के लिए मेंटेनेबल नहीं है।जस्टिस संजय धर की बेंच ने दोहराया कि हालांकि प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन कुछ हालात में रिट जूरिस्डिक्शन के लिए योग्य हो सकते हैं, ज्यूडिशियल रिव्यू सिर्फ पब्लिक लॉ एलिमेंट वाले कामों तक ही लिमिटेड होगा।कॉन्ट्रैक्ट वाली सर्विस शर्तों से पैदा होने वाले पूरी तरह से प्राइवेट...

सुसाइड के समय आरोपी का पॉजिटिव एक्शन ज़रूरी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को सुसाइड के लिए उकसाने की आरोपी महिला को जमानत दी
सुसाइड के समय आरोपी का पॉजिटिव एक्शन ज़रूरी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को सुसाइड के लिए उकसाने की आरोपी महिला को जमानत दी

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने पति को सुसाइड के लिए उकसाने की आरोपी एक महिला को यह देखते हुए स्थायी जमानत दी कि आरोपी ने घटना के समय कुछ पॉजिटिव काम किया होगा।जस्टिस मनीषा बत्रा ने समझाया,"किसी मामले को BNS की धारा 108 के प्रोविज़न के तहत लाने के लिए, बेशक, सुसाइड का मामला होना चाहिए और उस जुर्म को करने में, जिस व्यक्ति के बारे में कहा गया कि उसने सुसाइड के लिए उकसाया, उसने उकसाने और सुसाइड को आसान बनाने के लिए कुछ काम करके एक्टिव रोल निभाया होगा। प्रॉसिक्यूशन को आरोपी द्वारा सुसाइड करने में...

दिल्ली हाईकोर्ट ने मर्डर केस में ज़मानत दी, गुमराह करने वाली स्टेटस रिपोर्ट के लिए पुलिस के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मर्डर केस में ज़मानत दी, गुमराह करने वाली स्टेटस रिपोर्ट के लिए पुलिस के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मर्डर केस के एक आरोपी को ज़मानत दी। साथ ही कोर्ट से ज़रूरी सबूत छिपाकर गुमराह करने वाली स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा,“यह एक चौंकाने वाली स्थिति का मामला है, जहां उस समय के SHO PS बवाना ने 14.07.2025 की तारीख वाली एक अधूरी और गुमराह करने वाली स्टेटस रिपोर्ट फाइल की। ​​उस समय के SHO PS बवाना इंस्पेक्टर रजनीकांत बताए गए। उस स्टेटस रिपोर्ट में, SHO ने प्रॉसिक्यूशन के स्टार गवाह की गवाही का ज़रूरी...

पुलिस प्रमोशन प्रोसेस में भेदभाव के आरोपों के बीच हाईकोर्ट ने हरियाणा DGP को परेड टेस्ट के वीडियो की जांच करने का निर्देश दिया
पुलिस प्रमोशन प्रोसेस में भेदभाव के आरोपों के बीच हाईकोर्ट ने हरियाणा DGP को परेड टेस्ट के वीडियो की जांच करने का निर्देश दिया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) को यह जांचने का निर्देश दिया कि हेड कांस्टेबल के प्रमोशन के लिए हुए परेड टेस्ट की वीडियोग्राफी हुई या नहीं और फुटेज की जांच करके यह पता लगाया जाए कि मूल्यांकन प्रोसेस में कोई गड़बड़ी हुई है या नहीं।यह आरोप लगाया गया कि परेड टेस्ट के समय दो चुने गए कैंडिडेट प्रेग्नेंसी के आखिरी स्टेज में थे और वे 1500 मीटर की दौड़ जैसे इवेंट में हिस्सा नहीं ले सकते थे। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद, उन्हें हिस्सा लेते हुए दिखाया गया और उन्हें...

पति की गर्लफ्रेंड को IPC की धारा 498A के तहत रिश्तेदार नहीं माना जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट ने महिला के खिलाफ केस किया रद्द
पति की गर्लफ्रेंड को IPC की धारा 498A के तहत 'रिश्तेदार' नहीं माना जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट ने महिला के खिलाफ केस किया रद्द

तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में क्रिमिनल कंप्लेंट में आरोपी नंबर 2 के तौर पर खड़ी महिला के खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई रद्द की और दोहराया कि इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 498A के तहत गर्लफ्रेंड को पुरुष का "रिश्तेदार" नहीं माना जा सकता।जस्टिस तिरुमाला देवी ईडा ने हैदराबाद के XIII एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेंडिंग एक कंप्लेंट केस में कार्रवाई रद्द करने की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए आगे पाया कि कंप्लेंट में लगाए गए आरोपों में 498A, 354D, 427 और 506 IPC के तहत...

Right To Travel Abroad | सिर्फ़ FIR या जांच का पेंडिंग होना LOC के लंबे ऑपरेशन को सही नहीं ठहरा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
Right To Travel Abroad | सिर्फ़ FIR या जांच का पेंडिंग होना LOC के लंबे ऑपरेशन को सही नहीं ठहरा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ जांच का पेंडिंग होना या क्रिमिनल केस का रजिस्ट्रेशन होना किसी आरोपी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) के लंबे ऑपरेशन को सही नहीं ठहरा सकता।22.5 करोड़ रुपये के रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट विवाद में महिला आरोपी के खिलाफ जारी LOC रद्द करते हुए जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि सिर्फ़ जांच का पेंडिंग होना संविधान के आर्टिकल 21 के तहत विदेश यात्रा के मौलिक अधिकार में लंबे समय तक कटौती को सही नहीं ठहरा सकता।कोर्ट ने मारिया रमेश नाम की एक महिला की अर्जी मान ली, जिसमें...

एम्प्लॉयर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को ट्वीट करना सर्विस रूल्स के तहत मिसकंडक्ट माना जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
एम्प्लॉयर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को ट्वीट करना सर्विस रूल्स के तहत मिसकंडक्ट माना जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि किसी के एम्प्लॉयर के खिलाफ करप्शन के आरोपों को ट्वीट करना या पब्लिक में फैलाना लागू सर्विस रूल्स के तहत मिसकंडक्ट माना जा सकता है।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा,“याचिकाकर्ता ने ट्वीट्स और री-ट्वीट्स के ज़रिए ऑर्गनाइज़ेशन के खिलाफ आरोपों को पब्लिक में बढ़ाया, इंटरनल फ्रेमवर्क से बाहर रिप्रेजेंटेशन दिए, और पाया गया कि उसने बाहरी दबाव बनाने की कोशिश की। ऐसा कंडक्ट कंडक्ट, डिसिप्लिन और अपील रूल्स, 1976 के तहत डिसिप्लिनरी कार्रवाई का कारण बन सकता है। इसके लिए सीरियस एक्शन की...

राज्य ग्रेच्युटी अथॉरिटीज़ के पास उस जगह अधिकार नहीं, जहां कंपनी की कई राज्यों में ब्रांच हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
राज्य ग्रेच्युटी अथॉरिटीज़ के पास उस जगह अधिकार नहीं, जहां कंपनी की कई राज्यों में ब्रांच हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत राज्य द्वारा नियुक्त अथॉरिटीज़ के पास ग्रेच्युटी के दावों पर फैसला करने का अधिकार नहीं है, जहां कंपनी की एक से ज़्यादा राज्यों में ब्रांच हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में केंद्र सरकार एक्ट के तहत “सही सरकार” है।जस्टिस शैल जैन ने कहा,“इस मामले में सही सरकार केंद्र सरकार होगी क्योंकि पिटीशनर-कंपनी की एक से ज़्यादा राज्यों में ब्रांच हैं, न कि राज्य सरकार…”कोर्ट एक एम्प्लॉयर की याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी...

लापता लोगों के मामलों में कथित बढ़ोतरी के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में PIL, पाए जाने के अधिकार को मान्यता देने की मांग
लापता लोगों के मामलों में कथित बढ़ोतरी के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में PIL, 'पाए जाने के अधिकार' को मान्यता देने की मांग

दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में लापता लोगों के "अभूतपूर्व संकट" के पृष्ठभूमि में जीवन के अधिकार के एक अहम हिस्से के तौर पर "पाए जाने के अधिकार" को मान्यता देने और लागू करने की मांग की गई।NGO फ्रीडम रिक्लेम्ड की दायर याचिका में कहा गया कि ऑफिशियल ZIPNET पोर्टल से इकट्ठा किए गए डेटा के अनुसार, 1 जनवरी से 15 जनवरी, 2026 के बीच दिल्ली में 800 से ज़्यादा लोगों के लापता होने की सूचना मिली थी।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने पूछा कि...

अनुकंपा नियुक्ति | पीड़ित की भावना को महसूस करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्टिकल 51A (g) का इस्तेमाल किया, PNB के बिना बोले आदेश रद्द किया
अनुकंपा नियुक्ति | 'पीड़ित की भावना को महसूस करें': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्टिकल 51A (g) का इस्तेमाल किया, PNB के बिना बोले आदेश रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एक लाइन के आदेश को रद्द किया, जिसमें एक मृत कर्मचारी के बेटे के दया के आधार पर नियुक्ति का दावा खारिज कर दिया गया।अभिषेक जायसवाल की याचिका स्वीकार करते हुए जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की बेंच ने कहा कि 'दया' शब्द पर सिर्फ एक शब्द में विचार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सहानुभूति, दया और इंसानी भावना की कोमल भावना को दिखाता है।इस संबंध में बेंच ने भारत के संविधान के आर्टिकल 51-A(g) का हवाला देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि...

इलाहाबाद हाईकोर्ट राज्य में सीनियर सिटिज़न्स की सुरक्षा के लिए गाइडलाइंस पर कर रहा विचार, राज्य सरकार से एक्शन प्लान का स्टेटस मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट राज्य में सीनियर सिटिज़न्स की सुरक्षा के लिए गाइडलाइंस पर कर रहा विचार, राज्य सरकार से 'एक्शन प्लान' का स्टेटस मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिज़न्स एक्ट, 2007 को और असरदार बनाने के लिए कुछ गाइडलाइंस बनाने का इरादा जताया।एक 80 साल की महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने उत्तर प्रदेश के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (होम) को एक पर्सनल एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया, जिसमें यह साफ किया जाए कि क्या राज्य सरकार ने 2007 के कानून के मुताबिक सीनियर सिटिज़न्स की जान और प्रॉपर्टी की सुरक्षा के लिए "कॉम्प्रिहेंसिव...