हाईकोर्ट

बाद में रोक को कुछ समय के लिए टालने से बोली लगाने वाला व्यक्ति बोली की तय तारीख पर योग्य नहीं हो जाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर टेंडर डॉक्यूमेंट में यह कहा गया कि बोली की तय तारीख पर सरकारी रोक (Debarment) होने पर कोई कंपनी बोली लगाने के लिए अयोग्य होगी, तो बाद में उस रोक को कुछ समय के लिए टालने (Abeyance) का आदेश केवल उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन वह पास किया गया हो; यह आदेश पिछली तारीख से लागू होकर बोली लगाने वाले को तय तारीख पर योग्य नहीं बनाता।'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल' (RFP) के क्लॉज़ 2.1.18 में यह प्रावधान है कि अगर किसी कंपनी को केंद्र या राज्य सरकार, या उनके नियंत्रण वाली किसी...

पत्नी जहां रहती है, वहां क्रूरता के आरोपों के आधार पर तलाक के मुकदमे के लिए अधिकार क्षेत्र तय हो सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी की तलाक की अर्ज़ी में उस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के अंदर क्रूरता की घटनाओं का आरोप लगाया गया तो सिर्फ़ इसलिए अर्ज़ी वापस नहीं की जा सकती कि शादी कहीं और हुई थी या अन्य घटनाएँ कहीं और घटी थीं।कोर्ट ने कहा कि शुरुआती चरण में सवाल यह है कि क्या अर्ज़ी में कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के अंदर 'कॉज़ ऑफ़ एक्शन' (मुकदमे का आधार) का कोई हिस्सा बताया गया, न कि यह कि आरोप अंततः साबित हो सकते हैं या नहीं।कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें सिविल...

बालीग होने के बाद शादी करने से नाबालिग के साथ सेक्स को कानूनी नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि महिला और आरोपी के बीच बालिग होने के बाद हुई शादी, उस सेक्सुअल इंटरकोर्स (यौन संबंध) को कानूनी नहीं बना सकती जो कथित तौर पर तब हुआ था, जब वह नाबालिग थी। कोर्ट ने कहा कि एक लंबे समय तक चलने वाला रिश्ता बाद में कानूनी सहमति नहीं दे सकता।जस्टिस संजीव नरूला ने यह बात एक व्यक्ति के खिलाफ POCSO मामला रद्द करने से इनकार करते हुए कही। उस व्यक्ति की पत्नी ने कार्यवाही खत्म करने की मांग की, क्योंकि उनकी शादी हो चुकी हैं, उनका एक बच्चा हैं और वे खुशी-खुशी साथ रह रहे हैं।जब महिला ने...

Digital Arrest Fraud: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, कही यह बात

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के मामलों में, ठगी के पैसे लेने, उसे आगे भेजने या ठिकाने लगाने वाले लोगों की पहचान करना उतना ही ज़रूरी है, जितना कि पीड़ित से सीधे बातचीत करने वालों की पहचान करना।जस्टिस संजीव नरूला ने यह बात 2.65 करोड़ रुपये के कथित डिजिटल-अरेस्ट फ्रॉड मामले में हिमांशु नाम के व्यक्ति की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।कोर्ट ने कहा कि इस तरह के फ्रॉड आमतौर पर सरकारी अधिकारियों का रूप धरकर, लगातार मानसिक दबाव डालकर और कई अकाउंट्स के ज़रिए तेज़ी से...

ज़िला जज LARRA के अवॉर्ड को डिक्री की तरह लागू कर सकते हैं, लेकिन मेरिट के आधार पर आपत्तियों पर विचार नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'ज़मीन अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के तहत 'ज़मीन अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण' (LARRA) का अवॉर्ड एक 'डीम्ड डिक्री' (मान ली गई डिक्री) होता है, जिसे ज़िला अदालत लागू कर सकती है।जस्टिस जसप्रीत सिंह ने कहा कि इसे लागू करने वाली ज़िला अदालत केवल इसे लागू करने वाली एजेंसी के तौर पर काम करती है और अवॉर्ड के मेरिट पर आपत्तियों पर विचार नहीं कर सकती या उसके पीछे नहीं जा सकती, चाहे वह 'सिविल प्रक्रिया...

प्राइवेट शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले मजिस्ट्रेट को शिकायतकर्ता और गवाहों से पूछताछ करनी होगी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के तहत आरोपी को नोटिस जारी करने और संज्ञान लेने के मामले में उसकी बात सुनने का मौका देने से पहले, मजिस्ट्रेट को सबसे पहले शिकायतकर्ता और मौजूद गवाहों से शपथ पर पूछताछ करनी होगी, जब तक कि कानून में ऐसी पूछताछ से छूट न दी गई हो।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि औपचारिक रूप से संज्ञान लेने से पहले आरोपी की बात सुनना ज़रूरी है, लेकिन प्राइवेट शिकायत पेश होने पर, शिकायतकर्ता और गवाहों...

बेटे के बिज़नेस के लिए बेदखली का आधार बनने पर मकान-मालिक का खुद उस जगह पर रहना ज़रूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ़ अर्बन प्रेमिसेस टेनेंसी एक्ट, 2021 की धारा 21(2)(m) के पहले हिस्से में "मकान-मालिक को ज़रूरत है" (Required by Landlord) वाक्यांश का मतलब यह नहीं है कि मकान-मालिक का खुद उस जगह पर कब्ज़ा या रहना ज़रूरी है।कोर्ट ने कहा कि अगर मकान-मालिक के बेटे का बिज़नेस शुरू करने या चलाने के लिए मौजूदा हालत में ही उस जगह की ज़रूरत है तो इस दावे को सिर्फ़ इसलिए शुरू में ही खारिज नहीं किया जा सकता कि असल में बेटा उस जगह का इस्तेमाल करेगा, न कि मकान-मालिक।कोर्ट ने यह...

किसी महिला के शारीरिक रूप-रंग पर बॉडी शेमिंग करना IPC की धारा 509 के तहत मर्यादा के अपमान का अपराध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में शिकायतकर्ता के साथ बॉडी शेमिंग और मौखिक दुर्व्यवहार करने के आरोपी दो लोगों के खिलाफ महिला की मर्यादा भंग करने की आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि अकेले बॉडी शेमिंग करना IPC की धारा 509 के तहत महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध नहीं बनता। [2026 LiveLaw (Kar) 399]धारा 509 के अनुसार, जो कोई भी किसी महिला की मर्यादा का अपमान करने के इरादे से कोई शब्द कहता है, कोई आवाज़ या इशारा करता है, या कोई वस्तु दिखाता है - इस इरादे से कि वह शब्द या आवाज़ उस महिला द्वारा...

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक युवा वकील की अच्छी तैयारी के लिए तारीफ़ की, कहा- सीनियर वकीलों को जूनियर्स को बहस करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए

दिल्ली हाईकोर्ट ने केस की फ़ाइल और रिकॉर्ड की अच्छी जानकारी रखने के लिए एक युवा वकील की तारीफ़ की। कोर्ट ने कहा कि जूनियर वकीलों को मामलों पर बहस करने के लिए तैयार रहना चाहिए और सीनियर वकीलों को उन्हें केस पेश करने से नहीं रोकना चाहिए।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस निवेदिता अनिल शर्मा की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वे ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) की एक याचिका खारिज कर रहे थे। AIIMS ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के उस आदेश को चुनौती दी, जो OBC-NCL कैटेगरी के तहत...

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में अधिकारियों की नाकामी से जनता परेशान: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारियों द्वारा आवारा कुत्तों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को सख्ती से लागू न करने के कारण जनता को परेशानी हो रही है।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने यह टिप्पणी आदित्य विक्रम बोहरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। बोहरा ने अपने खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 के तहत दर्ज FIR रद्द करने की मांग की।यह प्रावधान किसी जानवर को मारकर, ज़हर देकर, अपंग बनाकर या बेकार करके नुकसान पहुंचाने के अपराध के लिए सज़ा का प्रावधान करता है।बोहरा के वकील ने कहा कि...

बिना चुनौती वाले सैलरी पेमेंट के आदेश से जाली मंज़ूरी पर आधारित नियुक्ति सही नहीं ठहराई जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सैलरी पेमेंट का प्रशासनिक आदेश सरकारी खजाने से सैलरी पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं देता, भले ही उस आदेश को कभी चुनौती न दी गई हो या रद्द न किया गया हो, अगर वह मंज़ूरी का आदेश जिस पर नियुक्ति आधारित है, बाद में जाली पाया जाता है।कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक आदेश की अंतिम प्रकृति (Finality) उस आधार की वैधता से अलग है जिस पर सरकारी खजाने के खिलाफ़ कोई आर्थिक दावा किया जाता है।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“किसी ऐसे दस्तावेज़ पर आधारित अधिकार को बनाए रखने के लिए अंतिम...

बालिग बेटी को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ साथ रखने के लिए हेबियस कॉर्पस का सहारा नहीं ले सकते माता-पिता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता अपनी बालिग बेटी को उसकी साफ़ ज़ाहिर की गई इच्छा के खिलाफ़ अपने साथ रहने के लिए मजबूर करने के लिए 'हेबियस कॉर्पस' की रिट का इस्तेमाल नहीं कर सकते।हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई बालिग व्यक्ति सोच-समझकर और अपनी मर्ज़ी से यह चुनता है कि उसे कहां रहना है, तो उसकी आज़ादी और फ़ैसला लेने की स्वतंत्रता को उचित सम्मान मिलना चाहिए।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने कलावती देवी द्वारा दायर 'हेबियस कॉर्पस' याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। कलावती देवी ने अपनी बेटी (कुमारी पूजा) को...

जौनपुर कस्टोडियल डेथ 2021: हाईकोर्ट ने खारिज की 4 आरोपी पुलिसकर्मियों की ज़मानत अर्ज़ी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को 2021 के जौनपुर कस्टोडियल डेथ (पुलिस हिरासत में मौत) मामले में आरोपी उत्तर प्रदेश पुलिस के 4 कर्मियों की ज़मानत अर्ज़ियां खारिज कीं।अपने 95 पन्नों के आदेश में जस्टिस समित गोपाल ने CBI की चार्जशीट में लगाए गए आरोपों का ज़िक्र किया। इन आरोपों के मुताबिक, आरोपी पुलिसकर्मियों ने मृतक कृष्ण कुमार यादव उर्फ ​​पुजारी से जुर्म कबूलवाने के लिए उन्हें गंभीर चोटें पहुंचाईं और बाद में ऐसी चोटें देकर उनकी हत्या की, जिनसे मौत हो सकती थी।CBI ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी मौत को...

वकीलों की हड़ताल पर तेलंगाना हाईकोर्ट सख्त, कहा- कोर्ट आने वाले वकील के साथ मारपीट स्वीकार्य नहीं

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि बार (वकीलों) और/या बेंच (जजों) की गरिमा, ईमानदारी या आज़ादी से जुड़े बहुत ही खास मामलों में, कुछ शर्तों के साथ, वकीलों को एक दिन की हड़ताल या कोर्ट के काम से दूर रहने की इजाज़त दी जा सकती है।हालांकि, इस छूट का मतलब यह नहीं है कि जो वकील कोर्ट आना चाहते हैं, उन्हें डराया-धमकाया जाए, रोका जाए या उनके साथ मारपीट की जाए।जस्टिस लक्ष्मी नारायण अलीशेट्टी ने यह बात मेट्रोपॉलिटन क्रिमिनल कोर्ट बार एसोसिएशन, नामपल्ली के पदाधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​का मामला खारिज करते हुए...

ED द्वारा प्रॉपर्टी ज़ब्त करने के फ़ैसले को आर्टिकल 226 के तहत चुनौती दी जा सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने PMLA के तहत प्रॉपर्टी ज़ब्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया, जबकि मुख्य अपराध (Predicate Offence) रद्द कर दिया गया।कोर्ट ने कहा कि चूंकि PMLA एक "पूरा कोड" है, जिसमें अधिकारियों और उपायों की एक व्यवस्था है। हालांकि ज़ब्ती के आदेश के ख़िलाफ़ आर्टिकल 226 के तहत याचिका दायर की जा सकती है, लेकिन उस पर सुनवाई करना कोर्ट की न्यायिक मर्ज़ी पर निर्भर करता है।हाईकोर्ट हैदराबाद कर्नाटक एजुकेशन (HKE) सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भीमशंकर बिलगुंडी...

आवेदन की आखिरी तारीख से पहले एक्सपायर हो चुके पिछड़े वर्ग सर्टिफिकेट को अमान्य माना जाएगा: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जिस उम्मीदवार ने टीचिंग पोस्ट के लिए अपने आवेदन के साथ एक्सपायर हो चुका 'बैकवर्ड क्लास-A' (BCA) सर्टिफिकेट लगाया, उसे आवेदन की आखिरी तारीख के बाद मिले नए सर्टिफिकेट के आधार पर योग्य नहीं माना जा सकता।जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ 'लेटर्स पेटेंट अपील' को खारिज किया। सिंगल जज ने BCA कैटेगरी में मेवात कैडर के प्राइमरी टीचर (PRT) पद के लिए अपीलकर्ता की उम्मीदवारी रद्द करने के फैसले को सही ठहराया...

बरी होने के बाद नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को दोबारा नौकरी पर रखे जाने तक का बकाया वेतन पाने का हक: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में बरी होने के बाद नौकरी से निकाला जाता है तो वह नौकरी से निकाले जाने और दोबारा नौकरी पर रखे जाने के बीच की अवधि के लिए बकाया वेतन पाने का हकदार होता है।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही बाद में बरी होने से पहले की सजा के कानूनी नतीजे पीछे की तारीख से खत्म नहीं होते, लेकिन बरी होने के बाद की गई बर्खास्तगी पर यह सिद्धांत लागू नहीं होता।बता दें, अपीलकर्ता को मई 2017 में एक आपराधिक मामले...