हाईकोर्ट
डेपुटेशन अनुभव के आधार पर बराबर पद के दावे को नहीं रोकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि मूल विभाग में मिले अनुभव को उधार लेने वाले संगठन में बराबर पद तय करते समय नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की बेंच ने कहा कि यह बात कि डेपुटेशन पर आया व्यक्ति उधार लेने वाले विभाग में बराबर पद नहीं मांग सकता, गलतफहमी वाली, साफ तौर पर गलत, अनुचित, तर्कहीन और भेदभावपूर्ण है।याचिकाकर्ता प्रतिवादी नंबर 7 का स्थायी कर्मचारी है। वह असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (डिग्री धारक) के रूप में काम कर रहा था। अक्टूबर, 2016 में उसे CVPPL में डेपुटेशन पर भेजा...
अगर आरोपी 'घोषित अपराधी' है, तब भी अग्रिम ज़मानत देने पर कोई पूरी रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 82 के तहत उद्घोषणा जारी करने से उसकी अग्रिम ज़मानत की अर्जी पर विचार करने पर पूरी तरह से रोक नहीं लगती है।सुप्रीम कोर्ट के 2024 के आशा दुबे बनाम मध्य प्रदेश राज्य 2024 LiveLaw (SC) 889 मामले में दिए गए फैसले पर भरोसा करते हुए जस्टिस गौतम चौधरी की बेंच ने पेशे से नर्स मोनिका द्वारा दायर अग्रिम ज़मानत की अर्जी मंजूर कर ली।कोर्ट ने कहा कि अर्जी देने वाली महिला "गर्भवती" थी और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट...
दिल्ली हाईकोर्ट ने इज़राइली कंपनी के साथ पेटेंट विवाद में भारतीय फर्म द्वारा बनाए गए सिंचाई वाल्व के खिलाफ आदेश पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक आदेश पर रोक लगाई, जिसमें एक भारतीय सिंचाई उपकरण निर्माता को अपना "हाइड्रोमैट वाल्व" बेचने से रोका गया, जिसे पहले इज़राइल स्थित कंपनी के पेटेंट का उल्लंघन करने वाला माना गया।जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने 5 जनवरी, 2026 को यह फैसला सुनाया, जबकि ऑटोमैट इरिगेशन द्वारा दायर अपील पर फैसला किया जा रहा था।एक्वेस्टिया लिमिटेड द्वारा दायर अंतरिम याचिका पर 1 अगस्त, 2025 के पिछले आदेश पर रोक लगाते हुए बेंच ने कहा कि इसमें दावा निर्माण और...
गिनती में छोटी-मोटी गड़बड़ियां जाली करेंसी की ज़ब्ती को गलत साबित नहीं कर सकतीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI की अपील मंज़ूर की, बरी करने का फैसला पलटा
दिल्ली हाईकोर्ट ने जाली करेंसी के मामले में आरोपी को बरी करने का फैसला रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जाली करेंसी नोटों की गिनती में छोटी-मोटी गड़बड़ियां अभियोजन पक्ष के मामले को गलत साबित करने के लिए काफी नहीं हैं, जब बरामदगी और कब्ज़ा उचित संदेह से परे साबित हो चुके हों।CBI की अपील को मंज़ूर करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें आरोपी को जाली करेंसी नोट रखने से जुड़े IPC की धारा 489C के तहत दंडनीय अपराध से बरी कर दिया गया।बेंच ने कहा,“जाली भारतीय...
चार्ज फ्रेम होने के बाद CrPC की धारा 173(8) के तहत आगे की जांच का आदेश रूटीन तौर पर नहीं दिया जा सकता, इसके पीछे ठोस कारण होने चाहिए: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 173(8) के तहत आगे की जांच के लिए आवेदन चार्ज फ्रेम होने के बाद भी किया जा सकता है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल मशीनी या रूटीन तरीके से नहीं किया जा सकता, और इसके पीछे मजबूत और सही कारण होने चाहिए, जो जांच में गंभीर कमियों को दिखाते हों। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष जांच का मतलब है जांच करने का पर्याप्त मौका, और कोई भी जांच को तब तक चुनौती नहीं दे सकता, जब तक कि जांच पर शक करने का कोई सही आधार न हो।जस्टिस एस. एम. मोदक आपराधिक आवेदन...
'रोजी-रोटी कमाने का उसका अधिकार कम नहीं किया जा सकता': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी के रेप केस में सरकारी कर्मचारी की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सरकारी कर्मचारी (लेखपाल) की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाई, जिस पर अपनी 16 साल की बेटी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इस मामले में शामिल होने की वजह से उसकी ज़िंदगी जीने के लिए रोजी-रोटी कमाने के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस प्रशांत मिश्रा-I की बेंच ने यह भी कहा कि यह अपील 2024 की है और केसों के भारी बैकलॉग के कारण निकट भविष्य में इसकी सुनवाई की बहुत कम संभावना है।ट्रायल कोर्ट ने पिछले साल मई में पिता-आरोपी...
मेडिकल रिव्यू के कारण हुई देरी BSF उम्मीदवारों की पिछली तारीख से सीनियरिटी को सही नहीं ठहरा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की फुल बेंच ने फैसला सुनाया कि मेडिकल री-एग्जामिनेशन के कारण हुई देरी के बाद बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) में नियुक्त उम्मीदवार उन बैचमेट्स से सीनियरिटी का दावा नहीं कर सकते, जिन्होंने पहले सर्विस जॉइन की थी, भले ही देरी उनकी गलती से न हुई हो।जस्टिस सी. हरि शंकर, जस्टिस ज्योति सिंह और जस्टिस अजय डिगपाल की तीन-जजों की बेंच ने इस तरह उन डायरेक्ट रिक्रूट्स की सीनियरिटी के मुद्दे पर कोर्ट की अलग-अलग डिवीजन बेंचों द्वारा लिए गए विरोधाभासी विचारों को सुलझाया, जिनकी नियुक्तियां मेडिकल...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में समन के लिए ई-मेल और WhatsApp सर्विस की इजाज़त दी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में समन को इलेक्ट्रॉनिक तरीकों, जिसमें ई-मेल और WhatsApp शामिल हैं, के ज़रिए भेजने की इजाज़त दी।5 जनवरी, 2026 को जारी एक सर्कुलर में कोर्ट ने राज्य भर की क्रिमिनल अदालतों को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) के तहत मामलों को संभालते समय इन इलेक्ट्रॉनिक तरीकों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया।ये निर्देश चेक बाउंस मामलों में देरी को कम करने के लिए भारत के सुप्रीम कोर्ट के हालिया दिशानिर्देशों के अनुसार जारी किए गए।सर्कुलर में कहा गया कि ट्रायल...
S. 105 BNSS | पुलिस को तलाशी और ज़ब्ती की वीडियोग्राफी करनी होगी, वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के तहत निर्धारित तलाशी और ज़ब्ती की अनिवार्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करें।40 मोटरसाइकिलों की कथित बरामदगी से जुड़े चोरी के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि BNSS की धारा 105 के अनिवार्य प्रावधान का पालन न करने से पूरी अभियोजन कहानी पर संदेह पैदा होता...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध रूप से बेदखल की गई महिला को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश दिया; सिविल जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महिला और उसके तीन नाबालिग बच्चों को अवैध रूप से घर से बेदखल किए जाने के मामले में बड़ी राहत देते हुए रु. 1 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने संबंधित संपत्ति का कब्ज़ा पुनः बहाल करने का निर्देश भी जारी किया।इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए आदेश की प्रति मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया, ताकि उस सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जा सके, जिसने प्रतिवादी के पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक आदेश...
कानूनी पेशे में सर्वोच्च पद हमेशा मेहनती और धैर्यवान युवा वकीलों के लिए सुरक्षित रहते हैं” — जस्टिस एस.के. साहू ने ओडिशा हाईकोर्ट को दी भावभीनी
ओडिशा हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस हरीश टंडन की अध्यक्षता में सोमवार (05 जनवरी) को जस्टिस संगम कुमार साहू के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया। हाल ही में उन्हें पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है।दोपहर में चीफ जस्टिस के पुराने कोर्ट रूम में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित हुआ, जिसमें जजों के साथ एडवोकेट जनरल पिताम्बर आचार्य, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल (DSGI) पी.के. परही, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (OHCBA) के अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा और बार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। चीफ जस्टिस ने जस्टिस साहू की...
IRCTC Scam: दिल्ली हाईकोर्ट ने तेजस्वी यादव की चार्ज फ्रेमिंग के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को RJD नेता तेजस्वी यादव की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने कथित IRCTC घोटाले मामले में अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती दी।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने CBI से जवाब मांगा और मामले की सुनवाई के लिए 14 जनवरी की तारीख तय की, जब लालू प्रसाद यादव की इसी तरह की एक और याचिका पर भी सुनवाई होनी है।यादव की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पेश हुए। CBI की तरफ से सीनियर एडवोकेट और SPP डीपी सिंह पेश हुए।13 अक्टूबर, 2025 को दिए गए आदेश में ट्रायल कोर्ट ने यादव,...
तलाक के बाद भी प्रॉपर्टी और 'स्त्रीधन' के दावों पर फैसला करने का अधिकार फैमिली कोर्ट के पास रहता है: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का अधिकार क्षेत्र सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जाता कि तलाक का फैसला पहले ही हो चुका है, बल्कि वह स्त्रीधन, तोहफे और दूसरी शादी से जुड़ी प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों पर फैसला कर सकता है।हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 27 के तहत पत्नी का आवेदन फैमिली कोर्ट द्वारा खारिज करने का फैसला रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि मुकदमों की संख्या कम करने के लिए पति-पत्नी के बीच प्रॉपर्टी विवादों का निपटारा फैमिली कोर्ट द्वारा ही किया जाना चाहिए।इसके अलावा, हाईकोर्ट ने...
एमपी हाईकोर्ट ने स्कूल को बच्चे के रिकॉर्ड में पिता का नाम शामिल करने का निर्देश दिया, कहा- वैवाहिक विवाद से पिता के माता-पिता के अधिकारों को कम नहीं किया जा सकता
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर के लिटिल एंजल्स हाई स्कूल को एक बच्चे के स्कूल रिकॉर्ड को अपडेट करके उसमें उसके जैविक पिता का नाम शामिल करने का यह देखते हुए निर्देश दिया कि माता-पिता के बीच वैवाहिक विवाद जैविक पिता के माता-पिता के अधिकारों को कम नहीं कर सकता।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस अनिल वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा;"...स्कूल रिकॉर्ड आखिरकार पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता आदि जैसे अन्य सार्वजनिक दस्तावेजों के रिकॉर्ड का आधार बनेगा और एक जैविक पिता के माता-पिता के अधिकारों को...
'कथित साज़िश के वैचारिक संचालक': सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत क्यों नहीं दी?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 जनवरी) को दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी भूमिकाएं सिर्फ़ छोटी-मोटी नहीं थीं, बल्कि "मुख्य" थीं, जो उन्हें कथित साज़िश की कमान श्रृंखला में सबसे ऊपर रखती हैं।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने उन्हें और अन्य सह-आरोपियों को सौंपी गई भूमिकाओं के बीच अंतर बताया। इसमें कहा गया कि खालिद और इमाम के खिलाफ़ आरोप फरवरी, 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे की कथित बड़ी साज़िश को "सोचने,...
ससुर ने पति के अफेयर में दखल देने से मना किया, पत्नी को घरेलू हिंसा 'बर्दाश्त' करने की सलाह देना IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि एक महिला के ससुर का उसके पति के 'शादी के बाहर के अफेयर' की शिकायत सुनने से मना करना और उसके देवर (पति का भाई) का उसे पति की पिटाई 'बर्दाश्त' करने के लिए कहना, इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं माना जाएगा।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस श्याम चंदक की डिवीजन बेंच ने यह फैसला एक आदमी और उसके छोटे बेटे के खिलाफ उसकी बहू की शिकायत पर पुणे पुलिस में दर्ज FIR रद्द करते हुए सुनाया।9 दिसंबर, 2025 के अपने फैसले में जजों ने कहा कि शिकायतकर्ता...
2006-2014 के बीच कंप्यूटर ट्रेनिंग लेने वाले कोर्ट स्टेनोग्राफर, रीडर्स एडवांस इंक्रीमेंट के हकदार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (5 जनवरी) को कहा कि सभी क्लास III न्यायिक कर्मचारियों को एडवांस इंक्रीमेंट का फायदा मिलना चाहिए, जिन्होंने 6 फरवरी, 2006 से 29 सितंबर, 2014 के बीच कंप्यूटर नॉलेज ट्रेनिंग ली थी, क्योंकि यह उनका अधिकार बन गया।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा,"जिन लोगों को उस समय नियुक्त किया गया, जब कंप्यूटर नॉलेज के लिए कोई योग्यता तय नहीं थी, उन्हें कंप्यूटर का काम करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ट्रेनिंग लेने की ज़रूरत थी। ट्रेनिंग सफलतापूर्वक...
POCSO Act के तहत यौन इरादे से नाबालिग के प्राइवेट पार्ट को छूना गंभीर यौन हमला: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यौन इरादे से किसी नाबालिग बच्चे के प्राइवेट पार्ट को छूना POCSO Act की धारा 10 के तहत गंभीर यौन हमला माना जाएगा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 3 साल 11 महीने की नाबालिग लड़की पर गंभीर यौन हमला करने के लिए एक आदमी की सज़ा और सात साल की जेल की सज़ा बरकरार रखी।हालांकि, कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 354 (गरिमा को ठेस पहुंचाना), 354A (यौन उत्पीड़न) और 354B (किसी महिला पर हमला करना या आपराधिक बल का इस्तेमाल करना) के तहत उसके अपराधों की सज़ा को रद्द कर...
भगवद्गीता राज्य को लोककल्याण के कर्तव्य की याद दिलाती है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण का आदेश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय संवैधानिक व्यवस्था राजधर्म की सभ्यतागत अवधारणा पर आधारित है, जहां शासन का मार्गदर्शन न्याय, निष्पक्षता और करुणा से होना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी कल्याणकारी राज्य कर्मचारियों से वर्षों तक निरंतर सेवा लेकर उन्हें स्थायी असुरक्षा में नहीं रख सकता।जस्टिस संदीप मौदगिल ने भगवद्गीता के लोकसंग्रह के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक शक्ति का प्रयोग केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिरता और सामूहिक कल्याण के लिए होना...
विस्तृत आदेश से पहली जमानत याचिका खारिज होने के बाद केवल लंबी हिरासत आधार नहीं बन सकती — पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आदर्श ग्रुप ऑफ कंपनियों से जुड़े एसएफआईओ (SFIO) जांच मामले में आरोपी द्वारा दायर दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि क्रमिक/दूसरी जमानत याचिका स्वतः ही अवैध नहीं होती, लेकिन केवल लम्बी अवधि की हिरासत को आधार बनाकर जमानत नहीं दी जा सकती, जब तक कि परिस्थितियों में कोई ठोस और महत्वपूर्ण बदलाव न दिखाया जाए।जस्टिस मनिषा बत्रा ने कहा —“यद्यपि दूसरी या क्रमिक नियमित जमानत याचिका केवल अनुरक्षण (maintainability) के आधार पर खारिज नहीं की जा सकती,...




















