रिटायरमेंट आयु के बाद धारा 17(बी) के तहत वेतन का हक नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट

Amir Ahmad

11 Feb 2026 5:54 PM IST

  • रिटायरमेंट आयु के बाद धारा 17(बी) के तहत वेतन का हक नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट

    दिल्ली हाइकोर्ट ने इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 की धारा 17(बी) को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी कामगार रिटायरमेंट की आयु प्राप्त करने के बाद इस धारा के तहत वेतन पाने का हकदार नहीं होता।

    कोर्ट ने कहा कि धारा 17(बी) केवल उसी अवधि तक लागू होती है जब तक नियोक्ता और कर्मचारी के बीच सेवा संबंध बना रहता है।

    जस्टिस रेनू भटनागर ने कहा कि धारा 17(बी) का उद्देश्य पुनःस्थापन (रीइंस्टेटमेंट) के आदेश को चुनौती दिए जाने की स्थिति में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान कामगार को अंतिम आहरित वेतन देने का एक अंतरिम प्रावधान है। यह मानकर चला जाता है कि संबंधित कामगार अन्यथा सेवा में बने रहने का अधिकारी है।

    कोर्ट ने कामगार की उस दलील को स्वीकार करने से इनकार किया, जिसमें कहा गया कि आर्थिक तंगी और बेरोजगारी को देखते हुए रिटायरमेंट के बाद भी उसे धारा 17(बी) के तहत वेतन दिया जाना चाहिए।

    इस पर जस्टिस भटनागर ने साफ शब्दों में कहा,

    “कोर्ट कामगार द्वारा बताई गई कठिनाइयों से अनभिज्ञ नहीं है लेकिन धारा 17(बी) के तहत मिलने वाला अधिकार पूरी तरह वैधानिक है और इसे बाध्यकारी न्यायिक मिसालों के दायरे में ही लागू किया जा सकता है। चाहे कठिनाइयां कितनी भी गंभीर क्यों न हों वे कानून द्वारा तय सीमा से आगे इस धारा के दायरे को नहीं बढ़ा सकतीं।”

    यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा दायर एक अर्जी से जुड़ा था, जिसमें निगम ने उस आदेश में संशोधन की मांग की थी, जिसके तहत उसे एक टाइपिस्ट को, उसकी पुनःस्थापन संबंधी अवॉर्ड के खिलाफ दायर रिट याचिका के निपटारे तक अंतिम आहरित वेतन या न्यूनतम वेतन देने का निर्देश दिया गया।

    LIC की ओर से दलील दी गई कि चूंकि संबंधित कर्मचारी अब रिटायरमेंट की आयु पूरी कर चुका है। इसलिए धारा 17(बी) के तहत भुगतान जारी नहीं रखा जा सकता।

    इस तर्क के समर्थन में दिल्ली परिवहन निगम बनाम रमेश चंदर (2012) के फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा था कि धारा 17(बी) का लाभ केवल रिटायरमेंट की आयु तक ही उपलब्ध है, उसके बाद नहीं।

    इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाइकोर्ट ने माना कि भले ही पुनःस्थापन का अवॉर्ड लंबित कार्यवाही के दौरान कामगार को सेवा में माना जाने का कानूनी प्रभाव देता है लेकिन यह काल्पनिक निरंतरता उस अवधि से आगे नहीं बढ़ सकती जिस अवधि तक वह कामगार अपने सेवा नियमों के अनुसार वास्तव में सेवा में बने रहने का अधिकारी होता।

    यह फैसला श्रम कानूनों की व्याख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे ऐसे मामलों में स्पष्टता आएगी, जहां सेवानिवृत्ति के बाद भी धारा 17(बी) के तहत वेतन की मांग की जाती है।

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