राजनीतिक दल से जुड़ने और सक्रिय राजनीति करने का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित: दिल्ली हाइकोर्ट

Amir Ahmad

11 Feb 2026 1:54 PM IST

  • राजनीतिक दल से जुड़ने और सक्रिय राजनीति करने का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित: दिल्ली हाइकोर्ट

    दिल्ली हाइकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक का राजनीतिक दल से जुड़ने और सक्रिय रूप से राजनीति में भाग लेने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस अधिकार में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या दबाव व्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा की जड़ पर प्रहार करता है।

    जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह टिप्पणी वकील को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश के दौरान की। वकील ने आरोप लगाया कि उन्हें उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

    “भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 सभी व्यक्तियों को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है, जिसके अंतर्गत व्यक्तिगत निर्णय लेने की स्वायत्तता भी शामिल है। इसमें किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ने और नागरिक द्वारा उपयुक्त समझे गए तरीके से सक्रिय राजनीति में भाग लेने का अधिकार भी निहित है। इस अधिकार में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या दबाव व्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा के मूल पर आघात करता है।”

    मामले के अनुसार वकील को पहली बार वर्ष 2016 में धमकियां दी गईं, जिसके बाद हर्ष विहार थाना में मामला दर्ज किया गया। उस समय आरोपियों की ओर से आश्वासन दिए जाने पर मामला शांत हो गया। हालांकि वकील का आरोप है कि वर्ष 2022 में एक आरोपी के जेल से रिहा होने के बाद धमकियां फिर से शुरू हो गईं।

    याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्हें व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकी दी गई कि यदि उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी तो उनकी हत्या कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रतिद्वंद्वी दल के सदस्य लगातार उन्हें डराने की कोशिश कर रहे थे और सोशल मीडिया पर हथियारों से फायरिंग करते हुए अपनी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट कर रहे थे।

    वकील ने दिसंबर, 2025 में देर रात कुछ संदिग्ध लोगों द्वारा उनके घर की रेकी किए जाने की आशंका भी जताई, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई।

    इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 केवल जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें व्यक्ति की पसंद और निर्णय लेने की आज़ादी भी शामिल है।

    कोर्ट ने कहा,

    “इस मामले में याचिकाकर्ता भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षण पाने का पूर्ण अधिकार रखता है।”

    हाइकोर्ट ने हर्ष विहार थाना के एसएचओ और बीट कांस्टेबल को निर्देश दिया कि वे आवश्यकता पड़ने पर अधिवक्ता को हरसंभव सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराएं वह भी कानून के अनुसार।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वकील किसी अन्य थाना क्षेत्र में निवास स्थान बदलते हैं तो उन्हें संबंधित एसएचओ को इसकी जानकारी देनी होगी, जिसके बाद वह अधिकारी भी इसी तरह की सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाध्य होगा।

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