हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मालाबार गोल्ड को 'पाकिस्तान का हमदर्द' बताने वाली पोस्ट हटाने का आदेश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (29 सितंबर) को अंतरिम आदेश में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आभूषण ब्रांड 'मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स' के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट हटाने का निर्देश दिया। मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स को लंदन में अपने ब्रांड के प्रचार के लिए पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की सेवाएं लेने पर इंटरनेट यूजर्स द्वारा पाकिस्तान का हमदर्द करार दिया जा रहा है।गौरतलब है कि वादी मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स लिमिटेड की यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम में शोरूम खोलने की योजना थी। स्थानीय ग्राहकों तक...
दिल्ली हाईकोर्ट ने पड़ोसियों के बीच दर्ज FIR रद्द की, आरोपियों को नवरात्रि और दिवाली के दौरान बच्चों के लिए भंडारा आयोजित करने का निर्देश दिया
पड़ोसियों के बीच झगड़े को लेकर दर्ज FIR रद्द करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी पक्षों को दो मौकों नवरात्रि और दिवाली पर गरीब बच्चों के लिए भंडारा आयोजित करने का निर्देश दिया।जस्टिस अनीश दयाल ने यह आदेश तब पारित किया, जब FIR में आरोपी पति-पत्नी ने इलाके के कम से कम 50 गरीब बच्चों के लिए एक बार नवरात्रि और दूसरी बार दिवाली के दौरान भंडारा आयोजित करने का बीड़ा उठाया था।अदालत ने एक महिला द्वारा अपने पड़ोसियों पति-पत्नी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) की धारा 324, 506 और 34 के...
एमपी हाईकोर्ट ने आयुर्वेदिक डॉक्टर के खिलाफ स्वास्थ्य अधिकारियों के पक्ष में दिया फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आयुर्वेदिक डॉक्टर द्वारा दायर की गई अपील खारिज की। डॉक्टर ने उन स्वास्थ्य अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने की मांग की थी, जिन्होंने उज्जैन में उनके क्लिनिक की तलाशी ली थी। कोर्ट ने कहा कि यह शिकायत अधिकारियों को परेशान करने का एक प्रयास मात्र है।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि लोक सेवकों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करते समय सुरक्षा देना आवश्यक है। इसलिए सिंगल बेंच के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं...
दहेज उत्पीड़न से निपटने और निर्दोषों के अधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने समाज में दहेज उत्पीड़न और क्रूरता से निपटने और अभियुक्तों से दूर के रिश्ते के कारण ऐसे मामलों में फंसे निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने का आह्वान किया।जस्टिस अजय दिगपॉल ने कहा,"दहेज उत्पीड़न और क्रूरता जैसी बुराइयां विवाह के पवित्र स्थान के लिए एक महामारी हैं। निस्संदेह, इनसे अत्यंत गंभीरता से निपटा जाना चाहिए। हालांकि, समाज को इन बुराइयों से मुक्त करने के प्रयास को उन निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों के साथ संतुलित किया जाना चाहिए, जो केवल अभियुक्तों से रक्त...
अनुकंपा नियुक्ति पर 5 साल तक चुप बैठने पर SBI पर 1 लगा लाख जुर्माना
मामला उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता एक दिवंगत कर्मचारी का बेटा ने बैंक से करुणामूलक नियुक्ति की अपनी अर्जी पर जल्द निर्णय लेने की मांग की थी। पिता की मृत्यु 2019 में सेवा के दौरान हुई थी और याचिकाकर्ता ने 2020 में अपनी मां के जरिए आवेदन दिया। इसके बावजूद बैंक ने 2025 तक कोई फैसला नहीं किया जिसके बाद याचिकाकर्ता अदालत पहुंचा।जस्टिस अजय भानोट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि बैंक की यह देरी उसके कर्तव्यों की अनदेखी है। अदालत ने कहा कि करुणामूलक नियुक्ति के मामलों में दो तरह की देरी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम के कार्यान्वयन पर केंद्र से सवाल किए
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act) के प्रवर्तन के बारे में पूछा।यह कानून डिजिटल व्यक्तिगत डेटा को इस तरह से संसाधित करने का मार्ग प्रशस्त करता है, जो व्यक्तियों के निजता के अधिकार और वैध उद्देश्यों के लिए उनके व्यक्तिगत डेटा को संसाधित करने की आवश्यकता, दोनों की रक्षा करता है।हालांकि 11 अगस्त, 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बावजूद अधिनियम को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया।याचिकाकर्ता कार्यरत पेशेवर हैं। उन्होंने हाईकोर्ट के रिट...
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जेलों में बंद कैदियों की HIV जांच और इलाज के लिए दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को HIV और एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के वैधानिक ढांचे के अनुरूप जेलों में HIV जांच और उपचार के लिए उचित दिशानिर्देश और नियम बनाने और उन्हें लागू करने का निर्देश दिया। साथ ही छह सप्ताह के भीतर अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने दोषी द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसने जेल में प्रवेश के बाद "एचआईवी जाँच कराने से इनकार कर दिया था"।अदालत ने अपने आदेश...
GST दरों में कटौती के बाद समान का दाम कम करना ज़रूरी, सिर्फ़ मात्रा बढ़ाकर वही दाम रखना सही नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब GST परिषद किसी उत्पाद पर लागू GST दरों में कमी करती है तो इसका लाभ ऐसे उत्पादों की कीमतों में कमी के माध्यम से अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचना चाहिए।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने कहा कि निर्माताओं को समान दाम वसूलते हुए उत्पाद की मात्रा बढ़ाने की अनुमति देने से दरों में कटौती का उद्देश्य विफल हो जाएगा।अदालत ने कहा,"उपभोक्ता को मिलने वाले लाभ भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। GST में कमी का उद्देश्य उत्पादों और सेवाओं को उपभोक्ताओं के लिए अधिक लागत...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिल्म में 'जानकी और रघुराम' शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को नोटिस जारी कर छत्तीसगढ़ की फिल्म 'जानकी' के निर्माताओं द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने को कहा। इस फिल्म पर इसके शीर्षक और फिल्म के मुख्य कलाकारों के नामों को लेकर आपत्ति जताई गई।निर्माताओं के अनुसार, CBFC ने फिल्म के शीर्षक 'जानकी' पर आपत्ति जताई, क्योंकि यह देवी सीता का नाम है। केंद्रीय एजेंसी ने फिल्म में मुख्य पुरुष पात्र 'रघुराम' के नाम पर भी आपत्ति जताई। यह फिल्म मुख्य किरदारों रघुराम और जानकी और उनके रिश्ते के इर्द-गिर्द...
राज्य संविधान का उल्लंघन करते हुए कर्मचारियों को वैध लाभ देने से इनकार करने के लिए वचनबद्धता की मांग नहीं कर सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि कर्मचारियों से वचनबद्धता मांगना - जिसमें उन्हें उनके वैध सेवा लाभों से वंचित किया जाता है - न केवल शोषणकारी है, बल्कि असंवैधानिक भी है।यह याचिका राज्य प्राधिकारियों द्वारा एक नगरपालिका कर्मचारी को सेवा लाभ देने से इनकार करने के आदेश को चुनौती देते हुए इस आधार पर दायर की गई कि उसने थकाऊ मुकदमेबाजी के बाद अपनी बहाली के बाद बकाया वेतन के किसी भी दावे को त्यागने के लिए एक वचनबद्धता पर हस्ताक्षर किए।यह देखते हुए कि इस तरह के शोषणकारी वचनबद्धताएं शुरू से ही अमान्य...
उप-किरायेदार उप-किराएदारी के आधार पर बेदखली याचिका में आवश्यक पक्ष नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि यदि उप-किरायेदार मकान मालिक या हित-पूर्ववर्ती के अधीन प्रत्यक्ष किरायेदारी स्थापित करने में विफल रहता है तो किरायेदार के विरुद्ध पारित बेदखली आदेश उस पर भी बाध्यकारी होगा।जस्टिस सत्येन वैद्य ने टिप्पणी की:"उप-किरायेदार उप-किराएदारी के आधार पर बेदखली याचिका में आवश्यक पक्ष नहीं है। हालांकि, चूंकि इस मामले में मकान मालिक ने स्वयं उप-किरायेदार को पक्षकार बनाया है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उप-किरायेदार पीड़ित पक्ष नहीं है।"यह विवाद तब उत्पन्न हुआ, जब मकान मालिक...
DMRC द्वारा भूमि अधिग्रहण पर दुकानदार पुनर्वास की मांग नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली मेट्रो की 'परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के संबंध में पुनर्वास नीति' उन दुकानदारों के पुनर्वास की परिकल्पना नहीं करती, जिनकी दुकानें किसी परियोजना के लिए अधिग्रहित की गईं, जब तक कि वे उक्त दुकान से 'व्यवसाय' न कर रहे हों।जस्टिस अमित शर्मा ने कहा,"उपरोक्त नीति/दिशानिर्देश के तहत वैकल्पिक दुकान दिए जाने का लाभ उठाने के लिए याचिकाकर्ता को यह साबित करना होगा कि वह उक्त दुकान से व्यवसाय कर रहा था। उक्त दुकान का मालिक होने के नाते याचिकाकर्ता को उक्त...
कुशल कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए MGNREGA निधि का उपयोग नियमितीकरण से इनकार को उचित नहीं ठहरा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि MGNREGA केवल अकुशल शारीरिक श्रम के लिए बनाया गया है। इसका उपयोग कंप्यूटर ऑपरेटरों जैसी कुशल भूमिकाओं को नियमितीकरण से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता।अदालत ने पाया कि राज्य ने स्वीकृत पदों के बावजूद कुशल सेवाओं के भुगतान के लिए मनरेगा निधि का गलत उपयोग किया।राज्य के तर्क को खारिज करते हुए जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की:"अकुशल शारीरिक श्रम का अर्थ है कोई भी शारीरिक कार्य, जिसे कोई भी वयस्क व्यक्ति बिना विशेष प्रशिक्षण के कर सकता है। याचिकाकर्ता कुशल कंप्यूटर...
प्रतिबंधित पदार्थ की प्रकृति की जानकारी न होना NDPS Act के तहत बचाव का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित मादक पदार्थ तस्करी सिंडिकेट मामले में दो लोगों को जमानत देने से इनकार किया। न्यायालय ने कहा कि प्रतिबंधित पदार्थ की प्रकृति की जानकारी न होना स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत बचाव का आधार नहीं है।जस्टिस अजय दिगपॉल ने NDPS Act की धारा 8, 21, 23 और 29 के तहत दर्ज मामले में नाइजीरियाई नागरिक एकोह कॉलिन्स चिदुबेम और प्रदीप कुमार झा को जमानत देने से इनकार किया।एनसीबी का कहना था कि दिल्ली स्थित डीएचएल एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय पर छापेमारी के...
ड्रग ओवरडोज़ मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी को दी ज़मानत
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने युवक की कथित तौर पर ड्रग ओवरडोज़ से हुई मौत के मामले में आरोपी व्यक्ति को ज़मानत देते हुए कहा कि शुद्ध दवाएं अक्सर मिलावटी पदार्थों से ज़्यादा घातक हो सकती हैं।याचिकाओं का अध्ययन करते हुए अदालत ने पाया कि मौत का कारण ड्रग ओवरडोज़ था। इस स्तर पर यह पता नहीं लगाया जा सकता कि अभियुक्त-याचिकाकर्ता ने मृतक को ज़बरदस्ती ड्रग का ओवरडोज़ दिया या मृतक ने ख़ुद ही इसे लिया।अदालत ने कहा,"इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि मृतक ने बिना मिलावट वाली या कम मिलावट वाली दवा...
झूठे मामलों से प्रतिष्ठा खराब होती है: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेना अधिकारी के खिलाफ बलात्कार का मामला खारिज किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 70 वर्षीय सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी के खिलाफ दर्ज बलात्कार और यौन उत्पीड़न का मामला खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप “स्वभाव से ही बेतुके” हैं।जस्टिस अमित महाजन ने कहा— “आरोप इतने बेतुके हैं और उनके समर्थन में कोई विश्वसनीय सबूत भी नहीं है। ऐसे में कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।” कोर्ट ने माना कि इस उम्रदराज व्यक्ति को मुकदमे की कठिनाइयों से गुजरने के लिए मजबूर करना न्याय का मखौल होगा और न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है। ...
नाबालिग के खिलाफ भरण-पोषण का दावा मान्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 और 128 के तहत नाबालिग के खिलाफ भरण-पोषण का दावा किया जा सकता है।जस्टिस मदन पाल सिंह ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया, जिसमें बाल विवाह और नाबालिग पति से भरण-पोषण की मांग शामिल थी। कोर्ट ने कहा- “धारा 125 और 128 CrPC के तहत नाबालिग के खिलाफ दाखिल आवेदन पर सुनवाई करने में कोई रोक नहीं है।” मामले में, पुनरीक्षणकर्ता-पति की ओर से कहा गया कि उसकी शादी मात्र 13 साल की उम्र में विपक्षी संख्या-2 से हुई थी और दो साल बाद...
हैबियस कॉर्पस केवल विदेशी अदालत के आदेश को लागू करने के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हैबियस कॉर्पस की असाधारण शक्ति केवल उन मामलों में प्रयोग की जा सकती है, जहां किसी बच्चे को माता-पिता या अन्य व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से कस्टडी में रखा गया हो। हालांकि, यह शक्ति केवल विदेशी अदालत के आदेश को लागू कराने के लिए नहीं इस्तेमाल की जा सकती।मामले में पिता ने कोर्ट का रुख किया और आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ने उनकी बेटी को उसके हिरासत से अवैध रूप से हटा लिया। पिता ने बच्चे को कनाडा वापस लाने की मांग की, जहां उसका पूरा पालन-पोषण हुआ है और जिसके लिए...
शर्मनाक: झूठी अफवाह फैलाकर आधी रात अपील दायर करने पर हाईकोर्ट ने वकील को फटकारा, 1 लाख का जुर्माना लगाया
गुजरात हाईकोर्ट ने एक सीनियर वकील के आचरण की कड़ी निंदा की, जिन्होंने दावा किया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा रोक आदेश न दिए जाने के कारण अधिकारी रातों-रात उनके मुवक्किलों के फ्लैट ध्वस्त कर देंगे। कोर्ट ने कहा कि वकील ने सही तथ्यों की पुष्टि किए बिना आधी रात को अपील दायर करके कोर्ट की मशीनरी का दुरुपयोग किया।जस्टिस मौलिक जे. शेलाट की पीठ ने वकील के आचरण को निंदनीय और शर्मनाक बताते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि एक सीनियर वकील...
चुनाव याचिकाओं में पांच साल तब लगते हैं, जब सत्तारूढ़ दल इसमें शामिल हो: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तब कड़ी मौखिक फटकार लगाई, जब राज्य के एक मंत्री से संबंधित चुनाव याचिका की जानकारी निर्वाचन आयोग (ECI) को भेजने में हो रही देरी को सही ठहराने के लिए सरकारी वकील ने दलील दी कि चुनाव याचिकाओं का निपटारा होने में आमतौर पर पांच साल लग जाते हैं।कोर्ट ने मौखिक रूप से तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव याचिकाओं में पांच साल तब लगते हैं, जब सत्तारूढ़ दल शामिल हो और जब ऐसा न हो तो वे केवल पांच महीने में निपटा दी जाती हैं।पूरा मामलाराजकुमार सिंह नामक याचिकाकर्ता ने...



















